Dushmani Shayari - Zakhm, gussa aur tootey bharose ki teekhi shayari

Dushmani shayari captures the raw emotions of hatred, betrayal, and revenge. It reflects the pain of broken trust and the intensity of gussa that turns relationships into rivalry. Whether it's silent resentment or open conflict, these verses express the dark side of human emotions with powerful words.

dushmani shayari
अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे
दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
Munawwar Rana
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dushman shayari
दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ
मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो

मेरे में'यार का तक़ाज़ा है
मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
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Akhtar Shumar
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nafrat shayari
इज़हार-ए-इश्क़ उस से न करना था 'शेफ़्ता'
ये क्या किया कि दोस्त को दुश्मन बना दिया
Mustafa Khan Shefta
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उस ने इस तरह से बदला है रवय्या अपना
पूछना पड़ता है हर वक़्त, तुम्हीं हो ना दोस्त?
Inaam Azmi
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अगर तू ख़ुश है मेरी हार से तो
मेरी हर जीत से नफ़रत है मुझ को
Shadab Javed
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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
Ahmad Faraz
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उम्र भर कौन निभाता है तअल्लुक़ इतना
ऐ मेरी जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे
Ahmad Faraz
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इस आ
समाँ को मुझ सेे है क्या दुश्मनी "अली"?
भेजूँ अगर दुआ भी तो सर पर लगे मुझे
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Ali Rumi
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा
वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा
Nida Fazli
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दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
Bashir Badr
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क्या बताऊँ कैसा ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने किया
उम्र भर किस किस के हिस्से का सफ़र मैं ने किया

तू तो नफ़रत भी न कर पाएगा इस शिद्दत के साथ
जिस बला का प्यार तुझ सेे बे-ख़बर मैं ने किया
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Waseem Barelvi
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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे
Javed Akhtar
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मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता
Javed Akhtar
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मौत ही इंसान की दुश्मन नहीं
ज़िंदगी भी जान ले कर जाएगी
Arsh Malsiyani
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मेरी ही जान के दुश्मन हैं नसीहत वाले
मुझ को समझाते हैं उन को नहीं समझाते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
Bashir Badr
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उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं
मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया
Hafeez Banarasi
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रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं
Hafeez Jalandhari
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कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो
मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का
Waseem Barelvi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब न हो
ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब न हो
Nazeer Akbarabadi
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तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से
न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से
Dagh Dehlvi
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तेरे वादे से प्यार है लेकिन
अपनी उम्मीद से नफ़रत है

पहली ग़लती तो इश्क़ करना थी
शा'इरी दूसरी हिमाक़त है
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Mehshar Afridi
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तुम सेे जो मिला हूँ तो मेरा हाल है बदला
पतझड़ में भी जैसे के कोई फूल खिला हो
Haider Khan
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इश्क़ तू ने बड़ा नुक़सान किया है मेरा
मैं तो उस शख़्स से नफ़रत भी नहीं कर सकता
Liaqat Jafri
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ऐसे तेवर दुश्मन ही के होते हैं
पता करो ये लड़की किस की बेटी है
Zia Mazkoor
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जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुलह की दुआ
दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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तेरी तारीफ़ करने लग गए हैं
तेरे दुश्मन हमारे शे'र सुनके
Tanoj Dadhich
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मुझ में थोड़ी सी जगह भी नहीं नफ़रत के लिए
मैं तो हर वक़्त मोहब्बत से भरा रहता हूँ
Mirza Athar Zia
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ऐसा बदला हूँ तिरे शहर का पानी पी कर
झूट बोलूँ तो नदामत नहीं होती मुझ को
Shahid Zaki
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किसी ने कहा था टूटी हुई नाव में चलो
दरिया के साथ आप की रंजिश फ़ुज़ूल है
Shahid Zaki
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नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें
चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें
Unknown
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कुछ ख़ास तो बदला नहीं जाने से तुम्हारे
बस राब्ता कम हो गया फूलों की दुकाँ से
Ashu Mishra
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नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं
Akbar Allahabadi
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भुला दो रंग नफ़रत के , तिरंगा हाथ में ले कर
दिखा दो तीन रंगों का सभी को प्यार होली में
Vijay Anand Mahir
ख़ास तो कुछ भी नहीं बदला तुम्हारे बा'द में
पहले गुम रहता था तुम में, अब तुम्हारी याद में

मोल हासिल हो गया है मुझ को इक-इक शे'र का
सब दिलासे दे रहे हैं मुझ को "जस्सर" दाद में
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Avtar Singh Jasser
चार दिन झूठी बाहों के आराम से
मेरी बिखरी हुई ज़िंदगी ठीक है

दोस्ती चाहे जितनी बुरी हो मगर
प्यार के नाम पर दुश्मनी ठीक है
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SHIV SAFAR
मैं चाहता यही था सब चाह ख़त्म हो अब
फिर चाहकर तुम्हें बदला ये ख़याल मेरा
Abhay Aadiv
इस लिए लड़ता है मुझ सेे मेरा दुश्मन
उस का भी मेरे सिवा कोई नहीं है
Aves Sayyad
इन दिनों दोस्त मेरे सारे ही रूठे हुए हैं
मेरे दुश्मन यही मौक़ा है हरा दे मुझ को
Afzal Ali Afzal
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कच्चा सा घर और उस पर जोरों की बरसात है
ये तो कोई ख़ानदानी दुश्मनी की बात है
Saahir
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शिकस्ता नाव समझ कर डुबोने वाले लोग
न पा सके मुझे साहिल पे खोने वाले लोग

ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
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Kashif Sayyed
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याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन
मेरे दुश्मन की बहन ने मुझ को राखी बाँध दी
Ehsan Saqib
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ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
Kashif Sayyed
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मुनाफ़िक़ दोस्तों से लाख बेहतर हैं ख़ुदा दुश्मन
कि ग़द्दारी नवाबों से हुकूमत छीन लेती है
Unknown
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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो
अपने हाथों से खिलाया था तुझे

तेरी गाली से मुझे याद आया
कितने तानों से बचाया था तुझे
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Ali Zaryoun
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मुझ से नफ़रत है अगर उस को तो इज़हार करे
कब मैं कहता हूँ मुझे प्यार ही करता जाए
Iftikhar Naseem
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सारी दुनिया ने तो नफ़रत से पुकारा मुझ को
माँ समझती है मगर आँख का तारा मुझ को
Muneer shehryaar
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आप बच्चों का दिल नहीं तोड़ें
भाई ये दुश्मनी हमारी है
Vishnu virat
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ये रंग-ओ-नस्ल और तशद्दुद के सिलसिले
दुश्मन की राहतों के सिवा और कुछ नहीं
Fatima wasiya jaayasi
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दश्त छोड़े हुए अब तो अर्सा हुआ
मैं हूँ मजनूँ मगर नाम बदला हुआ

मुझ को औरत के दुख भी पता हैं कि मैं
एक लड़का हूँ बेवा का पाला हुआ
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Rishabh Sharma
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ये भी इक तरकीब है दुश्मन से लड़ने की
गले लगा लो जिस पर वार नहीं कर सकते
Shariq Kaifi
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हम समुंदर है हम को न रस्ते बता
हम मुसाफ़िर नहीं जो भटक जाएँगे

दुश्मनी यार किस किस से लेंगे भला
तेरे पहलू से हम ही सरक जाएँगे
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Nadeem Shaad
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कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला
और डूबने वालों का जज़्बा भी नहीं बदला
Ghulam Mohammad Qasir
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दुश्मन-ए-जाँ ही सही साथ तो इक उम्र का है
दिल से अब दर्द की रुख़्सत नहीं देखी जाती
Akhtar Saeed Khan
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ज़माना दोस्त है किस किस को याद रक्खोगे
ख़ुदा करे कि तुम्हें मुझ से दुश्मनी हो जाए
Qabil Ajmeri
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दिल में नफ़रत हो तो चेहरे पे भी ले आता हूँ
बस इसी बात से दुश्मन मुझे पहचान गए
Shuja Khawar
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नफ़रत धोका बुग़्ज़ तअ'स्सुब झूट दिखावा ख़ुद-ग़रज़ी
कैसे कैसे ज़हर भरे हैं इंसाँ की शिरयानों में
Hina Rizvi
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अपना पता मिले न ख़बर यार की मिले
दुश्मन को भी न ऐसी सज़ा प्यार की मिले

उन को ख़ुदा मिले, है ख़ुदा की जिन्हें तलाश
मुझ को बस इक झलक मेरे दिलदार की मिले
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Kaifi Azmi
राज़ी हैं हम कि दोस्त से हो दुश्मनी मगर
दुश्मन को हम से दोस्त बनाया न जाएगा
Altaf Hussain Hali
जब तुझे रिश्ते निभाने का हुनर आ जाएगा
तेरा दुश्मन ख़ुद ही चल कर तेरे घर आ जाएगा
Meraj Faizabadi
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दोस्तों का क्या है वो तो यूँँ भी मिल जाते हैं मुफ़्त
रोज़ इक सच बोल कर दुश्मन कमाने चाहिएँ
Rajesh Reddy
उस लड़की के जाने से बस ये बदला
प्यारी-प्यारी ग़ज़लें होना छूट गई
Shaad Imran
अब मुझे कोई गिला नहीं है तुम भी मेरे हो वो भी मेरा
सभी से अपना वास्ता है सभी से अपनी दुश्मनी है
Parwez Akhtar
मैं इतना आशिक़ मिज़ाज हो गया हूँ
की नफ़रत से मोहब्बत हो गई है
Parwez Akhtar
ये मान लिया मैं ने बदला हूँ बहुत लेकिन
ये ठीक है क्या पहले जैसी ही रही हो तुम
Prashant Sitapuri
दुश्मनी थी फ़क़त यही उन सेे
की नहीं दोस्ती ता-उम्र उन सेे
Vivek Chaturvedi
अभी तुम ने मुहब्बत देखी है, नफ़रत कहाँ देखी
अभी सिक्के का तुम ने सिर्फ़ इक ही पहलू देखा है
Prit
के बिछड़ कर उस सेे मेरा प्यार बदला तो नहीं
आज भी तस्वीर उस की चूम के सोता हूँ मैं
karan singh rajput
झूठों से तो आप को काफ़ी नफ़रत है
फिर क्यूँ जी सरकार की बातें करते हो
Alankrat Srivastava
जिस तरह देखा है मैं ने आप को
दुश्मनी से भी बुरी है दोस्ती
Prashant Sitapuri
बीज-ए-नफ़रत दिलों में बो रहे हैं
हम तभी इक दूसरे को खो रहे हैं
Prit
मेरे दुश्मन मैं कोई आख़िरी काफ़िर नहीं हूँ
तुम्हें तो गिनतियाँ भी ठीक से आती नहीं हैं
Saarthi Baidyanath
मेरे सोने के इंतिज़ार में ही
मेरा दुश्मन हमेशा जागता है
Saarthi Baidyanath
उस लड़की के जाने से बस ये बदला
प्यारी-प्यारी ग़ज़लें होना छूट गई
Shaad Imran
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तेरे हाथों की मेहन्दी से रंजिश मुझे
देख उस
में है चेहरा किसी और का
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Santy sharma
रोते रोते शिकायत और बस नफ़रत
ऐसे मिलते नहीं हैं हम किसी से भी
Meem Alif Shaz
कल तलक जो पेड़ नफ़रत के उगाता फिरता था
तुझ को देखा, इश्क़ के पौधे उगाने लग गया
karan singh rajput
पर्दादारी ठीक है लेकिन झूठ पे पर्दे मत डालो
दोस्त बना लो दुनिया को पर दुश्मन ज़्यादा मत पालो
Kush Pandey ' Saarang '
हर किसी का घर हो रौशन इस दिवाली
कोई सूना हो न आँगन इस दिवाली

इस दिवाली कोई भूखा भी न सोए
सब की थाली में हो भोजन इस दिवाली

हर दिया रौशन करे सरहद को जगमग
घुस न पाए कोई दुश्मन इस दिवाली

घर सजाकर करना स्वागत लक्ष्मी का
लक्ष्मी आएगी छन छन इस दिवाली

मन लगाकर करना पूजा तुम "शफ़क़" जी
फिर पटाख़े होंगे दन दन इस दिवाली
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
कहीं वो कॉल कर ले और नंबर बंद हो मेरा
इसी डर से कभी भी मैं ने ये नंबर नहीं बदला
Chandan Sharma
मेरे दुश्मन भी मेरे जनाज़े पे आए
आ कर वो झूठे आँसू बहा कर जाएँगे
Jeet
किसी भँवरे के हैं सताये हुए फूल
किसी तितली से है बदला हमारा
Praveen Bhardwaj
मोहब्बत मार देती है सभी को
मुझे नफ़रत से मरना है अभी तो
Tiwari Jitendra
दुश्मनी मैं सभी से कर लेता
प्यार खैरात में नहीं रखता
Tiwari Jitendra
इक मुद्दत से इस दिल में एक बे-दर्दी का आलम है
जाने कैसी रंजिश है ये जाने ये कैसा ग़म है
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
न ला लफ्ज़-ए-मोहब्बत तू लबों पर
मोहब्बत लफ्ज़ से नफ़रत है मुझ को
Shajar Abbas
गुमान हम को नहीं अपनी शख़्सियत पे मगर
जो हम सेे दुश्मनी करते तो सर गए होते
Ajeetendra Aazi Tamaam
कितना प्यार था मुझे तुम सेे
कितनी नफ़रत है अब ख़ुद से
Manish Aarwash
हवाओं में भी आ कर के कोई बादल नहीं बदला
समय बदला सदी बदली मगर आँचल नहीं बदला

बदलने को बदल जाओ हमें कुछ ग़म नहीं लेकिन
हमारी आँख से गिरता ये निर्मल जल नहीं बदला
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Naimish trivedi
ऐसा बदला हूँ तिरे शहर आ कर
अपने घर का तो पता भूल बैठा
Akash Panwar
मोहब्बत हो या हो दुश्मन ग़ुलामी हम नहीं करते
झुकाने की जहाँ ज़िद हो सलामी हम नहीं करते
Aditya
इक पल करता मोहब्बत, फिर अगले ही पल नफ़रत तुझ सेे
रब मुझ को तू बना काफ़िर या कामिल ईमाँ दे मुझ को
A R Sahil "Aleeg"
सीरत से है नफ़रत उस की
प्यारी सी है हँसी मगर
Vinay Khandelwal
जान ए जिगर भी हम सेे ऐसे बात करता है
जैसे कोई दुश्मन से दो-दो हाथ करता है
Manish Nauhwar
मुआ'फ़ी मत दो, मगर उस सेे कोई बदला न लो तुम
किसी से बदला न लेना ही, बदला सब सेे बड़ा है
A R Sahil "Aleeg"
वही मैं हूँ, वही ग़म है, वही दुनिया,
कलेंडर बदला है बस कुछ नहीं बदला,
Aves Sayyad
अना और इश्क़ की है दुश्मनी सिन से
कभी इक साथ रह सकते नहीं साहब
A R Sahil "Aleeg"
रहा है इस साल भी रब ख़फ़ा मुझ सेे, मैं भी रब से
न बदला अपनी दुआ मैं, न रब ने अपना इरादा
A R Sahil "Aleeg"
दिल-ए-नादाँ को अक़्ल दे रहा हूँ
मय को मरहम की शक़्ल दे रहा हूँ

जो मोहब्बत पनप रही मुझ में
उसे नफ़रत की शक़्ल दे रहा हूँ
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Faiz Ahmad
किसी को क्यूँ दिखाते हो अभी अंदाज़ नफ़रत के
यहाँ पर गुल खिले है जब मिरे जानाँ मोहब्बत के

अगर ढूँढो तो मिल जाए ख़ुदा भी अब किताबों में
किताबों में नहीं मिलते यहाँ बस राज़ उल्फ़त के
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Sandeep Rajput
इस महीने में ग़म-ए-हिज्राँ मिला है
इस लिए नफ़रत है माह-ए-फ़रवरी से
Shajar Abbas
इश्क़ करने की मनाही है यहाँ पर
दुश्मनी करते है सीना तान कर के
Umesh Maurya
तुम्हारी आँख में देखे थे आँसू
मुझे बारिश से नफ़रत हो गई थी
Ayush Sharma
क़ैस को उल्फ़त है हर्फ़-ए-लाम से
और हमें नफ़रत है हर्फ़-ए-लाम से
Shajar Abbas
ख़्वाहिशों का जनाज़ा उठा रक्खा है
तेरा ग़म अब भी दिल से लगा रक्खा है

ख़ुद से भी ख़ुद को ठुकराया है प्यार में
ख़ुद को भी ख़ुद का दुश्मन बना रक्खा है
Read Full
Faiz Ahmad