Dariya Shayari - Gehrayi, lehron aur dil ke jazbaat ki shayari

Dariya shayari reflects the depth, flow, and mystery of emotions, much like a vast ocean. It beautifully captures feelings of love, life, silence, and inner storms through powerful metaphors of waves, saahil, and endless gehrayi. Whether you seek calmness or intensity, these lines mirror the soul like a quiet river or a roaring sea.

dariya shayari
मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
Ameer Qazalbash
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samundar shayari
साहिल के सुकूँ से किसे इनकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
Aale Ahmad Suroor
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lehrein shayari
कतराते हैं बल खाते हैं घबराते हैं क्यूँँ लोग
सर्दी है तो पानी में उतर क्यूँँ नहीं जाते
Mahboob Khizan
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उलटे सीधे सपने पाले बैठे हैं
सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं
Shakeel Jamali
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पानी आँख में भरकर लाया जा सकता है
अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है
Abbas Tabish
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे?
तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है

इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का
तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
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Kumar Vishwas
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गिले शिकवे ज़रूरी हैं अगर सच्ची मुहब्बत है
जहाँ पानी बहुत गहरा हो थोड़ी काई रहती है
Munawwar Rana
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तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हो जाएँ
समुंदरों से अकेले में बात करनी है
Tehzeeb Hafi
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पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे
मैं जंगल में पानी लाया करता था
Tehzeeb Hafi
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पुरानी कश्ती को पार ले कर फ़क़त हमारा हुनर गया है
नए खेवइये कहीं न समझें नदी का पानी उतर गया है
Uday Pratap Singh
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आँख में पानी रखो, होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो
Rahat Indori
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मिट्टी और पानी भी हमें नाप कर मिलते हैं
तुम गमले में पालने को आसान समझते हो
Vishal Bagh
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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
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Subhan Asad
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भूके बच्चों की तसल्ली के लिए
माँ ने फिर पानी पकाया देर तक
Nawaz Deobandi
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हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा
Nida Fazli
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ख़मोश झील के पानी में वो उदासी थी
कि दिल भी डूब गया रात माहताब के साथ
Rehman Faris
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ज़ब्त कीजे तो दिल है अँगारा
और अगर रोइए तो पानी है
Firaq Gorakhpuri
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तिरी सदा का है सदियों से इंतिज़ार मुझे
मिरे लहू के समुंदर ज़रा पुकार मुझे
Khalilur Rahman Azmi
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दूर साहिल से कोई शोख़ इशारा भी नहीं
डूबने वाले को तिनके का सहारा भी नहीं
Junaid Hazin Lari
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शदीद प्यास थी फिर भी छुआ न पानी को
मैं देखता रहा दरिया तिरी रवानी को
Shahryar
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पा के तूफ़ां का इशारा दरिया
तोड़ देता है किनारा दरिया
Abdul Mannan Tarzi
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ग़म बयाँ करने का कोई और ढंग ईजाद कर
तेरी आँखों का ये पानी तो पुराना हो गया
Waseem Barelvi
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कोई कहता था समुंदर हूँ मैं
और मिरी जेब में क़तरा भी नहीं
Kaifi Azmi
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कब लौटा है बहता पानी बिछड़ा साजन रूठा दोस्त
हम ने उस को अपना जाना जब तक हाथ में दामाँ था
Ibn E Insha
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पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है
ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
Bashir Badr
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दरिया के किनारे पे मिरी लाश पड़ी थी
और पानी की तह में वो मुझे ढूँड रहा था
Adil Mansuri
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आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है
मुमकिन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाए
Behzad Lakhnavi
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तेरे वादों को फिर से पढ़ रहा हूँ
तेरे ख़त पानी पानी हो रहे हैं
Harman Dinesh
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किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी
झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी
Arzoo Lakhnavi
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मल्लाहों को इल्ज़ाम न दो तुम साहिल वाले क्या जानो
ये तूफ़ाँ कौन उठाता है ये कश्ती कौन डुबोता है
Hafeez Jalandhari
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जाने किस किस का ख़याल आया है
इस समुंदर में उबाल आया है

एक बच्चा था हवा का झोंका
साफ़ पानी को खँगाल आया है
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Dushyant Kumar
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हैरत से जो यूँँ मेरी तरफ़ देख रहे हो
लगता है कभी तुम ने समुंदर नहीं देखा
Aanis Moin
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वो जो प्यासा लगता था सैलाब-ज़दा था
पानी पानी कहते कहते डूब गया है
Aanis Moin
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उस से कहना की धुआँ देखने लाएक़ होगा
आग पहने हुए मैं जाऊँगा पानी की तरफ़
Abhishek shukla
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वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा
Unknown
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सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का
कि खेल ख़त्म हुआ कश्तियाँ डुबोने का
Shahryar
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चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है
Farhat Ehsaas
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इक प्यासे की मौत हुई है
अब पानी को दुख होगा
Shadab Javed
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लब-ए-दरिया पे देख आ कर तमाशा आज होली का
भँवर काले के दफ़ बाजे है मौज ऐ यार पानी में
Shah Naseer
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बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना
जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता
Bashir Badr
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कोई समुन्दर, कोई नदी होती, कोई दरिया होता
हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता?
Tehzeeb Hafi
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सब को बस पानी पीने से मतलब है
बस माँ को चिंता है मटका भरने की
Tanoj Dadhich
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तू अपने सारे दुख जा कर बताता है जिन्हें, इक दिन
बढ़ाएँगे वही ग़म-ख़्वार तेरी आँख का पानी
Siddharth Saaz
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रोते बच्चे पूछ रहे हैं मम्मी से
कितना पानी और मिलाया जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया
उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है
Tehzeeb Hafi
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रोते बच्चे पूछ रहे हैं मम्मी से
कितना पानी और मिलाया जाएगा
Divy Kamaldhwaj
रंग की अपनी बात है वर्ना
आख़िरश ख़ून भी तो पानी है
Jaun Elia
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पहले पानी को और हवा को बचाओ
ये बचा लो तो फिर ख़ुदा को बचाओ
Swapnil Tiwari
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उस ने फेंका मुझ पे पत्थर और मैं पानी की तरह
और ऊँचा और ऊँचा और ऊँचा हो गया
Kunwar Bechain
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ज़िन्दगी पर लिख दिया था नाम मैं ने राम का
और फिर दुख के समुंदर पार सारे हो गए
Tanoj Dadhich
तुम सेे बिछड़े फिर भी साँसे चलती हैं
मछली पानी के बाहर भी ज़िंदा है
Tanoj Dadhich
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तुम भी लिखना तुम ने उस शब कितनी बार पिया पानी
तुम ने भी तो छज्जे ऊपर देखा होगा पूरा चाँद
Nida Fazli
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नहीं तो बर्फ़ सा पानी तुम्हें जला देगा
गिलास लेते हुए उँगलियाँ न छू लेना
Irfan Siddiqi
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ऐसा बदला हूँ तिरे शहर का पानी पी कर
झूट बोलूँ तो नदामत नहीं होती मुझ को
Shahid Zaki
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बढ़ के तूफ़ान को आग़ोश में ले ले अपनी
डूबने वाले तिरे हाथ से साहिल तो गया
Abdul Hamid Adam
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मुझ सेे मिलने ही आती है नुक्कड़ पर
पानी पूरी केवल एक बहाना है
Divy Kamaldhwaj
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अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना
हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है
Bashir Badr
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ये पानी ख़ामुशी से बह रहा है
इसे देखें कि इस में डूब जाएँ
Ahmad Mushtaq
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वो थे जवाब के साहिल पे मुंतज़िर लेकिन
समय की नाव में मेरा सवाल डूब गया
Bekal Utsahi
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तेरे चुप रहने से हर पौधा सूख गया है
तुझ को मालूम नहीं पौधों का पानी है तू
Kabir Altamash
उस को था शौक बीच समुंदर में मरने का
साहिल को खींच खींच के लाना पड़ा मुझे
Muntazir Firozabadi
हुआ करती थी मेरी ईद जिस के दीद से साहिल
उतर आया है देखो चाँद वो ग़ैरों के आँगन में
A R Sahil "Aleeg"
सेहरा है या पानी है
आँखों में हैरानी है

हम पर शक़ है लोगों को
दिल की कारिस्तानी है
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Madhyam Saxena
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हम ने अच्छी धाँक जमा रक्खी थी अपनी
फिर उस ने छोड़ा और सब पानी कर डाला
Prashant Sharma Daraz
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हमारे लोग अगर रास्ता न पाएँगे
शिलाएँ जोड़ के पानी पे पुल बनाएँगे

फिर एक बार मनेगी अवध में दीवाली
फिर एक बार सभी रौशनी में आएँगे
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Amit Jha Rahi
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शिकस्ता नाव समझ कर डुबोने वाले लोग
न पा सके मुझे साहिल पे खोने वाले लोग

ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
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Kashif Sayyed
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तुम्हें लहू से तो ख़त लिख नहीं सके लेकिन
लिखी है आँख के पानी से शा'इरी तुम पर
Manmauji
ज़हीफ़ी इस लिए मुझ को सुहानी लग रही है
इसे कमाने में पूरी जवानी लग रही है

नतीजा ये है कि बरसों तलाश-ए-ज़ात के बा'द
वहाँ खड़ा हूँ जहाँ रेत पानी लग रही है
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Khalid Sajjad
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किस तरह ये आप की आँखों में पानी आ गया
याद जस्सर आप को भी कोई या'नी आ गया
Avtar Singh Jasser
पिघलती बर्फ़ की ये दास्ताँ हम को बताती है
जुदा होना ही पड़ता है यहाँ पानी को पानी से
Raj Tiwari
आस-पास देखा था मैं ने फूट के रोने से पहले
जैसे कोई जेबें देखे कपड़े धोने से पहले

हम तकिए के नीचे रखते हैं यूँँ तेरी तस्वीरें
जैसे सिरहाने रखते हैं पानी सोने से पहले
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Tanoj Dadhich
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एक रेगिस्तान दुनिया ऊॅंट के मानिंद हम
दूर तक पानी न कोई पेड़ सायादार है
Hameed Sarwar Bahraichi
किसी के होठ समुंदर में भी तरसते रहे
किसी की प्यास को सहरा में मिल गया पानी
Ajeetendra Aazi Tamaam
कभी चल कर रुके होंगे, कभी रुक कर चले होंगे
अदा-ए-ख़ुश-ख़िरामी में वो जाने कब ढले होंगे

सियाही बे-सबब आँखों के साहिल पर नहीं आती
यक़ीनन चश्मे-आतिश में कई आशिक़ जले होंगे
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Wajid Husain Sahil
मुहब्बत में बहाएा ख़ून औ पानी कहा हम ने
तेरी हर ख़ामियों को हँस के नादानी कहा हम ने
Alankrat Srivastava
मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में
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Anis shah anis
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हमीं को क़ातिल कहेगी दुनिया हमारा ही क़त्ल-ए-आम होगा
हमीं कुएँ खोदते फिरेंगे हमीं पे पानी हराम होगा

अगर यही ज़ेहनियत रही तो मुझे ये डर है कि इस सदी में
न कोई अब्दुल हमीद होगा न कोई अब्दुल कलाम होगा
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Meraj Faizabadi
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लगा आग पानी को दौड़े है तू
ये गर्मी तेरी इस शरारत के बा'द
Meer Taqi Meer
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मुझ को ऐसे देख रहा हैरानी में
जैसे सूरज देख लिया पेशानी में

मैं भी उस को देख रहा हूँ कुछ ऐसे
जैसे सूरज डूब रहा हो पानी में
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DEVANSH TIWARI
आज आख़िरी दफ़ा था पानी से पेट भरना
बच्चों ने आज जाके घर में अनाज देखा
Amaan Pathan
हम समुंदर है हम को न रस्ते बता
हम मुसाफ़िर नहीं जो भटक जाएँगे

दुश्मनी यार किस किस से लेंगे भला
तेरे पहलू से हम ही सरक जाएँगे
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Nadeem Shaad
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मैं वो सहरा जिसे पानी की हवस ले डूबी
तू वो बादल जो कभी टूट के बरसा ही नहीं
Sultan Akhtar
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इक ख़्वाब ने आँखें खोली हैं क्या मोड़ आया है कहानी में
वो भीग रही है बारिश में और आग लगी है पानी में
Gulzar
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कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत
जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है
Natiq Lakhnavi
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शायद कि वो वाक़िफ़ नहीं आदाब-ए-सफ़र से
पानी में जो क़दमों के निशाँ ढूँड रहा था
Sahar Ansari
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सूरमा जिस के किनारों से पलट आते हैं
मैं ने कश्ती को उतारा है उसी पानी में
Sarvat Husain
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मिट्टी पे नुमूदार हैं पानी के ज़ख़ीरे
इन में कोई औरत से ज़ियादा नहीं गहरा
Sarvat Husain
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कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से
कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से
Waseem Barelvi
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उन्हें ठहरे समुंदर ने डुबोया
जिन्हें तूफ़ाँ का अंदाज़ा बहुत था
Malikzada Manzoor Ahmad
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साहिल पे क़ैद लाखों सफ़ीनों के वास्ते
मेरी शिकस्ता नाव है तूफ़ाँ लिए हुए
Salik Lakhnavi
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मुझ में सात समुंदर शोर मचाते हैं
एक ख़याल ने दहशत फैला रक्खी है
Saqi Faruqi
वतन की रेत ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
Muzaffar Warsi
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मैं ने ये सोच के बोए नहीं ख़्वाबों के दरख़्त
कौन जंगल में उगे पेड़ को पानी देगा
Aziz Bano Darab Wafa
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साहिल के तलबगार ये पहले से समझ लें
दरिया-ए-मोहब्बत के किनारे नहीं होते
Afsar Azri
दौर-ए-तूफ़ाँ में भी जी लेते हैं जीने वाले
दूर साहिल से किसी मौज-ए-गुरेज़ाँ की तरह
Ghulam Rabbani Taban
अब और दुआएँ हमें जीने की न दीजे
मुरझाए हुए पेड़ को पानी नहीं देते
Haresh Vanza
उस ने रक्खा था हाथ साहिल पर
तब से दरिया में भी शरारे हैं
Amaan Pathan
मेरे पैरों में छाले हैं मेरी आँखों में पानी है
मुझे फिर भी मोहब्बत है मोहब्बत है न जाने क्यूँँ
Amaan Pathan
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साहिल से सुना करते हैं लहरों की कहानी
ये ठहरे हुए लोग बग़ावत नहीं करते
Khursheed Akbar
ऐसा दरिया जो किसी और समुंदर में गिरे
इस से बेहतर है कि मुझ को मेरा सहरा ला दे
Noshi Gilani
दोस्त अहबाब से लेने न सहारे जाना
दिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना
Abdul Ahad Saaz
वो चाँद है तो अक्स भी पानी में आएगा
किरदार ख़ुद उभर के कहानी में आएगा
Iqbal Sajid
तुम से हासिल हुआ इक गहरे समुंदर का सुकूत
और हर मौज से लड़ना भी तुम्हीं से सीखा
Zehra Nigaah
आँखों से अब वो ख़्वाब को निस्बत नहीं रही
इक उम्र हो गई ये समुंदर ख़राब है
Jamal Ehsani
समुंदर में वो गहराई नहीं है
मैं जितना डूब जाना चाहता हूँ
Gourav Kumar
आसाँ तो नहीं अपनी हस्ती से गुज़र जाना
उतरा जो समुंदर में दरिया तो बहुत रोया
Khursheed Rizvi
गुनाह कर के गुनहगार की मैं शफ में तो खड़ा हूँ
अब इस सेे ज़्यादा आँख का पानी क्या दिखाऊँ
Aryan Goswami
पानी से पत्थर को कटते देखा है
हम ने उस को रोज़ संवरते देखा है
Aryan Goswami