Democracy Shayari Collection - Voices of awaam, justice, and power in poetic expression

Democracy shayari reflects the voice of the people—awaam ki awaaz—blending emotions with thoughts on justice, rights, and governance. It captures hope, protest, truth, and the power of collective expression in poetic form.

मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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ज़्यादा मीठा हो तो चींटा लग जाता है
सच्चे इश्क़ को अक्सर बट्टा लग जाता है

हम ने अपनी जान गंवाई तब जाना
भाव मिले तो कुछ भी सट्टा लग जाता है
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Ritesh Rajwada
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हमारी वफ़ा का वो इंसाफ़ होगा
तिरी आँख से जब ये काजल छटेंगे
Aarush Sarkaar
सियासी जो परचम उठाए हुए हो
मियाँ ख़ुद को क्या तुम बनाए हुए हो

वही तो नहीं सुन रहा बात तेरी
जिसे वोट देकर जिताए हुए हो
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Kush Pandey ' Saarang '
ख़िलाफ़ साज़िशों से हम जो डर गए होते
दिल-ए-अवाम से कब के उतर गए होते
Ajeetendra Aazi Tamaam
ख़ुदा तेरे वजूद से इनकार नहीं है मुझ को
मगर सवाल तो तेरे इंसाफ-परस्त का है
A R Sahil "Aleeg"
रहम, इंसाफ़ से ख़ाली जब हो ये दिल
फिर वो कुछ और ही है पर इंसाँ नहीं है
A R Sahil "Aleeg"
अब की बार नहीं आएगी झाँसे में आवाम मियाँ
तुम पहुँचा दो सत्ता के गलियारों तक संदेश मिरा
Sandeep dabral 'sendy'
अच्छे ख़ासे सत्ता के गलियारों में दागी हो जाते हैं
कुर्सी की ख़ातिर अपनों के ही तेवर बाग़ी हो जाते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
कि सियायत की दुनिया में आते ही आ जाती है तब्दीली
कल के सारिक़ इमरोज़ यहाँ सत्ता के भागी हो जाते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
हमेशा शे'र के ही हाथ में होता है सब जंगल
ये सत्ता भी हमेशा कातिलों के हाथ होती है

छुड़ाया हाथ पत्ते ने मगर इल्जाम पेड़ों पर
ये दुनिया भी हमेशा जुल्मियों के साथ होती है
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Shoonya Shrey
पहली सफ़ में जो खड़े हैं क़त्ल का इंसाफ लेने
गर जो मुर्दा बोलता होता तो फिर सफ़ साफ होती
Aqib khan
लानत हो हुकूमत पे सदा हाकिम-ए-क़लमी
इंसाफ़ से महरूम हैं मज़लूम वतन के
Shajar Abbas
ज़रूरत ही नहीं अब हम को मुंसिफ की
कि अब क़ातिल ही ख़ुद इंसाफ़ करता है
Meem Alif Shaz
दहशत-गर्दी फैल रही है अब मज़हब के नारों से
लोगों को मारा जाता है गोली से हथियारों से

कौन है रहबर कौन है रहज़न सब को ख़बर है 'दानिश' अब
क़ातिल को ताक़त मिलती है सत्ता के गलियारों से
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Danish Balliavi
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सत्ता मद में साँप छछुन्दर बिच्छू पाले हैं
क्यूँ कहते हो अच्छे दिन अब आने वाले हैं
Umesh Maurya
लिखना होगा मुझ को जब भी दंगों पर
मैं लिक्खूँगा सत्ता के भिखमंगों पर

हो सरहद पर जब भी रिपु से जंग यहाँ
मैं भेजूँ नेताओं को भी जंगों पर
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Sandeep dabral 'sendy'
मंज़िलों के लिए रास्ता चाहिए
रास्ता हो तो फिर हौसला चाहिए

जंग इंसाफ़ की जीतने के लिए
सब्र का इक बड़ा क़ाफ़िला चाहिए
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Meem Alif Shaz
सारी दुनिया है आप की हमदर्द
इश्क़ में देगा कौन अब इंसाफ़
A R Sahil "Aleeg"
ख़ुद ब ख़ुद बुझ जाएँगे ज़ुल्म-ओ-सितम के सब दिए
सब जलाएँ गर जो इंसाफ़- ओ- अदल का इक दिया
A R Sahil "Aleeg"
वोट दे आते हो तुम सब जात, फ़िरक़ा देख कर
ऐ वतन के वासियों इस
में है ख़तरा, देख कर

फिर नहीं तुम बा'द में सब चीखते रह जाओगे
इस सियासी दौड़ में शामिल है बहरा, देख कर
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Updesh 'Vidyarthi'
जब वोट के दिन थे तब वे रोज़ ही दिखते थे
इक साल हुआ तो अब इक बार नहीं दिखते
Sahil Verma
ई डी का शोर है चुप-चाप रहो
सत्ता पुर-ज़ोर है चुप-चाप रहो

भागकर मुझ सेे तू जाएगा कहाँ
रेड हर ओर है चुप-चाप रहो
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Shubham Rai 'shubh'
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सलाम अपना अमीरों पे आम करता है
मगर गरीबों से कब वो कलाम करता है

लिहाफ़ ठंड में बाँटे गिलास गर्मी में
वो वोट पाने के सब इंतिज़ाम करता है
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Meem Alif Shaz
चुनाव में हारे हुए लोगों से पूछो
सत्ता किसी के बाप की जागीर नहीं है
shivendra Mishra
कहने को तो है हुस्न भी इन्साफ़ का क़ाइल
ये सच है तो फिर चाहने वालों को कभी चाह
Dharmesh bashar
ये जो अवाम है इस को तू ना-तवाँ न समझ
इसी अवाम ने इक सल्तनत ढहा डाली
Mohit Subran
करने लगा है कोई हिफा़ज़त जनाब की
ऊँची बनी है जबसे इमारत जनाब की

इंसाफ़ कैसे होगा भला आप सोचिये
जज भी जनाब के हैं अदालत जनाब की
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Junaid Shaad
मोहब्बत को इबादत मानता हूँ मैं
ख़ुदा इंसाफ़ कर मेरी परस्तिश का
Lekhak Suyash
हम निभाते चुनाव को सारे
देश में वोट इक हमारा है
Vinod Ganeshpure
ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को
जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
Abhishek shukla
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हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग
रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही
Dushyant Kumar
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धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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ये सच है नफ़रतों की आग ने सब कुछ जला डाला
मगर उम्मीद की ठण्डी हवाएँ रोज़ आती हैं
Munawwar Rana
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मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है
मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़
Faiz Ahmad Faiz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा
वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा

मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ
मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
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Tehzeeb Hafi
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है
दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है

सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ
मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
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Tehzeeb Hafi
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चले जाओ भी अब जी लेंगे पर
सच कहो मजबूरी है क्या

मुझे ये कहानी कुछ और लिखनी थी
तुम्हारे हिसाब से पूरी है क्या
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Zubair Ali Tabish
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कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने
बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की
Parveen Shakir
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मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी
वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा
Parveen Shakir
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इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे
रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा
Nida Fazli
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सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे
पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे
Nawaz Deobandi
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रोक सकता हमें ज़िंदान-ए-बला क्या 'मजरूह'
हम तो आवाज़ हैं दीवार से छन जाते हैं
Majrooh Sultanpuri
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झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए
और मैं था कि सच बोलता रह गया
Waseem Barelvi
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इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं
होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं
Javed Akhtar
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ये भी ए'जाज़ मुझे इश्क़ ने बख़्शा था कभी
उस की आवाज़ से मैं दीप जला सकता था
Ahmad Khayal
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अगर सच इतना ज़ालिम है तो हम से झूट ही बोलो
हमें आता है पतझड़ के दिनों गुल-बार हो जाना
Ada Jafarey
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ये सच है कि पाँवों ने बहुत कष्ट उठाए
पर पाँव किसी तरह राहों पे तो आए
Dushyant Kumar
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मिरी ख़ामोशियों की झील में फिर
किसी आवाज़ का पत्थर गिरा है
Aadil Raza Mansoori
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मुझे रोना नहीं आवाज़ भी भारी नहीं करनी
मोहब्बत की कहानी में अदाकारी नहीं करनी
Afzal Khan
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अपना हर तिनका समेटे किस जगह पर जा छुपे
हम तिरी आवाज़ की चिड़ियों से घबराते हुए
Swapnil Tiwari
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सच घटे या बढ़े तो सच न रहे
झूट की कोई इंतिहा ही नहीं
Krishna Bihari Noor
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खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें
न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें
Qateel Shifai
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा

हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में
अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
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Santosh S Singh
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आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए
वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है
Muneer Niyazi
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तेरा लिक्खा जो पढ़ूँ तो तेरी आवाज़ सुनूँ
तेरी आवाज़ सुनूँ तो तेरा चेहरा देखूँ
Bhaskar Shukla
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झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो
सरकारी एलान हुआ है सच बोलो

घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है
दरवाज़े पर लिखा हुआ है सच बोलो
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Rahat Indori
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शब भर इक आवाज़ बनाई सुब्ह हुई तो चीख़ पड़े
रोज़ का इक मामूल है अब तो ख़्वाब-ज़दा हम लोगों का
Abhishek shukla
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सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया
हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है
Asrar Ul Haq Majaz
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मोहब्बत कर मोहब्बत कर यही बस कह रहा है दिल
सुन अपने दिल की तू ये ग़ैर की आवाज़ थोड़ी है
Krishnakant Kabk
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होंठ जो कहते है सब कुछ झूठ है
आँख सच कहती है उस की बात सुन
Siddharth Saaz
ये नहीं है कि वो एहसान बहुत करता है
अपने एहसान का एलान बहुत करता है

आप इस बात को सच ही न समझ लीजिएगा
वो मेरी जान मेरी जान बहुत करता है
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Jawwad Sheikh
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बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत'
तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से
Farhat Abbas Shah
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जब राह झूठ की चुनी तो लिफ़्ट भी मिली
और सच की राह में मिले पैरों के बस निशाँ
Tanoj Dadhich
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तेरी आवाज़ को इस शहर की लहरें तरसती हैं
ग़लत नंबर मिलाता हूँ तो पहरों बात होती है
Ghulam Mohammad Qasir
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हमारी ज़िंदगी में क्या नया है
वही होता है जो, वो हो रहा है

ज़रा दुनिया का अपनी हाल देखो
ज़रा सोचो कोई सच-मुच ख़ुदा है?
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Shaad Imran
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तुम मिरी ज़िंदगी हो ये सच है
ज़िंदगी का मगर भरोसा क्या
Bashir Badr
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लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे
जी चाहता है मैं तिरी आवाज़ चूम लूँ
Bashir Badr
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बाज़ार जा के ख़ुद का कभी दाम पूछना
तुम जैसे हर दुकान में सामान हैं बहुत

आवाज़ बर्तनों की घर में दबी रहे
बाहर जो सुनने वाले हैं, शैतान हैं बहुत
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Aalok Shrivastav
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सच बताओ कि सच यही है क्या
साँस लेना ही ज़िंदगी है क्या

कुछ नया काम कर नई लड़की
इश्क़ करना है बावली है क्या
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Vikram Gaur Vairagi
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किसी के झूठ से पर्दा हटाकर
हमारा सच बहुत रोया था उस दिन
Shadab Asghar
वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी
ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है
Aasi Ghazipuri
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अज़ीज़-तर मुझे रखता है वो रग-ए-जाँ से
ये बात सच है मेरा बाप कम नहीं माँ से
Tahir Shaheer
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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
Tehzeeb Hafi
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ख़ामोशी में आवाज़ का किरदार कोई है
जो बोलता रहता है लगातार, कोई है
Shakeel Gwaliari
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मुझे उस सेे मुहब्बत सच बड़ी महँगी पड़ेगी
अकेलेपन से उस ने इश्क़ ऐसा कर लिया है
Anukriti 'Tabassum'
किसी उम्मीद का ये इस्तिआरा जान पड़ता है
कि तन्हा ही सही सच झूट से अब रोज़ लड़ता है
Tarun Pandey
सच कहें तो वो कहानी बीच में दम तोड़ देगी
जिस कहानी को सभी किरदार छोड़े जा रहे हैं
Anurag Pandey
अब उस के दर से भी आवाज़ आती है कि नहीं
बता रे ज़िन्दगी तू बाज़ आती है कि नहीं

बहकने लगता है जब जब किसी के प्यार में दिल
तो तेरी याद यूँंँ आके डराती है कि नहीं
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Faiz Ahmad
ज़माने ने ग़लत को सच कहा है
ज़माने की ख़राबी है हमीं से
Meem Alif Shaz
इतने अफ़सुर्दा नहीं हैं हम कि कर लें ख़ुद-कुशी
और न इतने ख़ुश कि सच में मरने की ख़्वाहिश न हो
Charagh Sharma
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बस एक मैं था जिस सेे सच मुच में दिलबरी की
वरना हर आदमी से उस ने दो नंबरी की

जिस बात में भी हम ने ख़ुद को अकेला रक्खा
बाग़ात में भी हम ने जोड़ों की मुख़बरी की
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Muzdum Khan
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बे-वफ़ा शख़्स तेरे होंठों पे ये लफ़्ज़-ए-वफ़ा
सच बताऊँ मुझे बिल्कुल नहीं अच्छा लगता
Shajar Abbas
नहीं थकते मुझे इल्ज़ाम देते
भला कब तक ये बेरहमी करोगे

अगर सच बोलने मैं लग गया तो
ग़लत फ़हमी ग़लत फ़हमी करोगे
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Gopesh "Tanha"
सज़ा सच बोलने की ये मिली है
सभी ने कर लिया हम से किनारा
Meem Alif Shaz
तुम मिरे साथ हो ये सच तो नहीं है लेकिन
मैं अगर झूट न बोलूँ तो अकेला हो जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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तू तो सच में ही झूठा निकला यारा
तू तो कहता था हम मिलते रहेंगे
Vicky Kumar Rajak
या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है
मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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मुझे चाह थी किसी और की, प मुझे मिला कोई और है
मेरी ज़िन्दगी का है और सच, मेरे ख़्वाब सा कोई और है

तू क़रीब था मेरे जिस्म के, बड़ा दूर था मेरी रूह से
तू मेरे लिए मेरे हमनशीं कोई और था कोई और है
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Avtar Singh Jasser
ख़ुशरंग नज़र आता है जाज़िब नहीं लगता
माहौल मेरे दिल से मुख़ातिब नहीं लगता

मैं भी नहीं हर शे'र में मौजूद ये सच है
ग़ालिब भी हर इक शे'र में ग़ालिब नहीं लगता
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Obaid Azam Azmi
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पैसा कमाने आते हैं सब राजनीति में
आता नहीं है कोई भी खोने के वास्ते

छम्मो का मुजरा सुनते हैं नेता जो रात भर
संसद भवन में आते हैं सोने के वास्ते
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Paplu Lucknawi
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं
इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
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Tehzeeb Hafi
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर
तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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एक आवाज़ पे आ जाती है दौड़ी दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान नहीं देखती है

दोस्ती दोस्ती होती है तुम्हें इल्म नहीं
दोस्ती फ़ाइदा नुक़सान नहीं देखती है
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Aadil Rasheed
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जब उस ने पलट कर नहीं देखा तो ये जाना
आवाज़ लगाने में भी नुक़सान बहुत है
Imtiyaz Khan
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पूछती है सच बताएँ, गर किसी से इश्क़ है
सच तो ये है, हाँ मुझे अब हर किसी से इश्क़ है

फिर रहा है बेटी के रिश्ते के ख़ातिर क्यूँ वो बाप
पूछ लेता काश, ऐ दुख़्तर, किसी से इश्क़ है
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Adnan Ali SHAGAF
भले ही जान-लेवा हो सियासत को ग़लत कहना
मगर फिर भी ये सच ईमान वाले लोग कहते हैं
Amaan Pathan
सच की डगर पे जब भी रक्खे क़दम किसी ने
पहले तो देखी ग़ुर्बत फिर तख़्त-ओ-ताज देखा
Amaan Pathan
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झूटी ता'रीफ़ों के पीछे भागते रहते हो दिन भर
अभी अगर मैं सच कह दूँगा वो तुम को चुभ जाएगा
Amaan Pathan
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ख़ैर सच तो है सच मगर ऐ झूठ
मैं ने तेरा भी ए'तिबार किया
Firaq Gorakhpuri
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चाँद ला सका नहीं कभी सनम है सच मगर
ला रहा हूँ मैं तुम्हारी ख़ातिर आफ़ताब अब
Amaan Pathan
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जो दिया सच की आग से रौशन
वो तो दरिया से भी बुझा ही नहीं
Amaan Pathan
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रगों में ज़हर-ए-ख़ामोशी उतरने से ज़रा पहले
बहुत तड़पी कोई आवाज़ मरने से ज़रा पहले
Khushbir Singh Shaad
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रंग दरकार थे हम को तिरी ख़ामोशी के
एक आवाज़ की तस्वीर बनानी थी हमें
Nazir Wahid
अदाकारी बहुत दुख दे रही है
मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
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बहुत था ख़ौफ़ जिस का फिर वही क़िस्सा निकल आया
मिरे दुख से किसी आवाज़ का रिश्ता निकल आया
Bashar Nawaz
आसमानों से फ़रिश्ते जो उतारे जाएँ
वो भी इस दौर में सच बोलें तो मारे जाएँ
Ummeed Fazli
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अपने अंदर हँसता हूँ मैं और बहुत शरमाता हूँ
ख़ून भी थूका सच-मुच थूका और ये सब चालाकी थी
Jaun Elia
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