Corruption Shayari - Power, greed aur system ki sachai par teekhi shayari

Corruption shayari reflects the harsh realities of power, greed, and broken systems. Through sharp words and honest emotions, these verses expose rishwat, injustice, and the pain of common people. It is poetry that questions authority and speaks truth without fear.

bhrashtachar shayari
मैं डर रहा हूँ तुम्हारी नशीली आँखों से
कि लूट लें न किसी रोज़ कुछ पिला के मुझे
Jaleel Manikpuri
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सँभलता हूँ तो ये लगता है जैसे
तुम्हारे साथ धोखा कर रहा हूँ
Shariq Kaifi
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धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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उस की टीस नहीं जाती है सारी उम्र
पहला धोखा पहला धोखा होता है
Shariq Kaifi
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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
Sahir Ludhianvi
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ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है
नींद हमेशा मुझ सेे धोखा करती है

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
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Tehzeeb Hafi
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सर पर हवा-ए-ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ
अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ
Majrooh Sultanpuri
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'मजरूह' क़ाफ़िले की मिरे दास्ताँ ये है
रहबर ने मिल के लूट लिया राहज़न के साथ
Majrooh Sultanpuri
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ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है बढ़ता है तो मिट जाता है
ख़ून फिर ख़ून है टपकेगा तो जम जाएगा
Sahir Ludhianvi
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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है
Afzal Khan
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हरीम-ए-नाज़ के पर्दे में जो निहाँ था कभी
उसी ने शोख़ अदाएँ दिखा के लूट लिया
Anwar Taban
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ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा
मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा
Dushyant Kumar
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कभी ख़िरद कभी दीवानगी ने लूट लिया
तरह तरह से हमें ज़िंदगी ने लूट लिया
Hafeez Banarasi
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ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी
Kaleem Aajiz
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टक गोर-ए-ग़रीबाँ की कर सैर कि दुनिया में
उन ज़ुल्म-रसीदों पर क्या क्या न हुआ होगा
Meer Taqi Meer
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हम ने जिस मासूम परी को अपने दिल की जाँ बोला था
उस ने हम को धोखा देकर और किसी को हाँ बोला था

सारे वादे भूल गई तुम कोई बात नहीं जानेमन
लेकिन ये कैसे भूली तुम मेरी माँ को माँ बोला था
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Tanoj Dadhich
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यक़ीन उस ने दोबारा बना लिया लेकिन
वो मेरे ज़ेहन से धोखा नहीं निकाल सका
Vikram Gaur Vairagi
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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है
Afzal Khan
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ग़नीमत है नगर वालों लुटेरों से लुटे हो तुम
हमें तो गांव में अक्सर, दरोगा लूट जाता है
Aalok Shrivastav
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यूँँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उन की रस्म नई है, न अपनी रीत नई

यूँँ ही हमेशा खिलाए हैं हम ने आग में फूल
न उन की हार नई है, न अपनी जीत नई
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Faiz Ahmad Faiz
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इस गए साल बड़े ज़ुल्म हुए हैं मुझ पर
ऐ नए साल मसीहा की तरह मिल मुझ से
Sarfraz Nawaz
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इश्क़ में धोखा खाने वाले बिल्कुल भी मायूस न हो
इस रस्ते में थोड़ा आगे मयख़ाना भी आता है
Darpan
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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
Tehzeeb Hafi
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हम भी तुम को धोखा दें ये ठीक नहीं
आँख के बदले आँख कहाँ तक जायज़ है
Gaurav Singh
ज़माना ज़ुल्म करता है ख़ुशी से
कभी तुझ को कभी मुझ को सताए
Meem Alif Shaz
डाली है ख़ुद पे ज़ुल्म की यूँँ इक मिसाल और
उस के बग़ैर काट दिया एक साल और
Subhan Asad
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दिल की बातें दूसरों से मत कहो लुट जाओगे
आज कल इज़हार के धंधे में है घाटा बहुत
Shuja Khawar
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किया तबाह तो दिल्ली ने भी बहुत 'बिस्मिल'
मगर ख़ुदा की क़सम लखनऊ ने लूट लिया
Bismil Saeedi
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तबक़ों में रंग-ओ-नस्ल के उलझा के रख दिया
ये ज़ुल्म आदमी ने किया आदमी के साथ
Bakhtiyar Ziya
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काठ की हाँडी अब न चढ़ेगी ज़ुल्म के चूल्हे पर यारो
वक़्त का पहिया घूमेगा मुंसिफ़ भी जेल में जाएगा
Amaan Pathan
कुछ न कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुख़न
ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है
Muzaffar Warsi
ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है
ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है
Munawwar Rana
ऐसे इश्क़ करोगे तो लूट जाओगे ओ ज़ेहनी दिल
सब से पहले अपने दिल को थोड़ा नादान करो
Parwez Akhtar
मेरी जाँ कोई ज़ुल्म न कर ख़ुदा के लिए
यहाँ कोई ग़ुरूर नहीं रहता सदा के लिए
Praveen Bhardwaj
उस की लुगत में सब्र का मतलब क्या होगा
मेरी लुगत में सब्र का मतलब धोखा है
Shivam chaubey
यूँँ कब तक साथ निभाओगी
अब तो धोखा दे दो मुझ को
Pawan
ये धोखेबाज़ी यार नहीं करनी मुझ को
गैर से शादी उस सेे धोखा हो जाएगा
Prashant Sitapuri
इश्क़ में कितना ग़म मिलता है
तुम समझे थे कम मिलता है

इश्क़ का रस्ता है ही ऐसा
धोखा कदम कदम मिलता है
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Vikash sharma
कहानी के बड़े किरदार हैं हम
ज़बाँ से जान लो मुख़्तार हैं हम

फ़क़त यारी में धोखा खा रहें हैं
सभी कहते रहे होश्यार हैं हम
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Kush Pandey ' Saarang '
यूँँ ज़ोर से ना दे दुहाई, ज़ुल्म सहता शख़्स तू
रूठे ख़ुदा ना और भी, तेरा ख़ुदा है सो रहा
Zain Aalamgir
सब याद रहता है मुझे
ये ज़ुल्म भी तारी यहाँ
Zain Aalamgir
परेशाँ हो के उस के दर पे जब इंसान जाता था
ख़ुदा तब और था शायद जो सबकी मान जाता था

तू पहला शख़्स है जिस सेे कि धोखा खा गया वरना
मैं चेहरा देख कर इंसान को पहचान जाता था
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Rituraj kumar
कंगन दिए काजल दिए फिर और दे झुमका दिया
आँसू दिए सद
में दिए फिर दे हमें धोखा दिया
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Rudransh Trigunayat
कोई उठता नहीं मज़लूम का हामी बनकर
कब तलक ज़ुल्म पा ख़ामोश रहेगी दुनिया
''Akbar Rizvi"
बताते हैं तुम्हें हम क्या मिलेगा
अगर सच्चे हो तो धोखा मिलेगा

जन्मदिन है हमारा आज लेकिन
बताओ क्या कोई तोहफ़ा मिलेगा?
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Shahzan Khan Shahzan'
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दुश्मनों को भी हम धोखा नहीं देने वाले
अगर करेंगे क़त्ल तो भी बता कर करेंगे
Praveen Bhardwaj
तुम्हें जाते हुए देखा करेंगे
हम अपनी जान का सौदा करेंगे

वो कहते हैं हमें धोखा न देंगे
सलीक़े से हमें तन्हा करेंगे
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Akash Rajpoot
मेरे हाथों से तेरा हाथ इक पल छूट जाता है
मुझे अक्सर डरा कर के ये सपना टूट जाता है

यहाँ माँझा लिपटने में लगे रहते सभी अपना
कोई चुपके से आ कर के पतंगे लूट जाता है
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Krishnakant Kabk
देर तक कोई भी एहल-ए-ज़ुल्म यूँँ टिकता नहीं
चार सू फैली हुई है कर्बला की रौशनी
''Akbar Rizvi"
जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ
उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ

मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं
फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
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Aman G Mishra
जो घर, गली, शहर, देश खोया ज़रूर लेंगे
नए रखो नाम हम पुराना ज़रूर लेंगे

सुनो कि तुम जितना सह सको उतना ज़ुल्म करना
ये याद रखना, के हम भी बदला ज़रूर लेंगे
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Abuzar kamaal
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कायनात-ए-इश्क़ मेरी लुट गई ग़म कीजिए
आइए! बर्बादी ओं का मेरी मातम कीजिए
Shajar Abbas
ख़ुदा से रू-बा-रू होना हैं रोज़-ए-महशर में
ये बात सोच लो तुम मुझ पा ज़ुल्म ढाते हुए
Shajar Abbas
मैं अपने एक दोस्त को ये कहते थक गया
ऐ दोस्त हिज्र ठीक है धोखा सही नहीं
Prashant Sitapuri
किसी के इश्क़ का सौदा हुआ है
किसी के साथ फिर धोखा हुआ है

कोई अब तक अकेले जी रहा है
किसी को दूसरा लड़का हुआ है
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Ashraf Ali
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आँखें मूँदे रहे लब को सीते गए
पेट ख़ाली रहे ग़म को पीते गए

शर्म करते हैं अब ख़ुद की हस्ती पे हम
ज़ुल्म सहते रहे और जीते गए
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Amaan Javed
वो लड़की मेरे दिल में अब भी आती है
जिस के आ जाने से जान चली जाती है

इक बात बताओ ऐ धोखा देने वाली
तेरी याद मुझे अब तक क्यूँँ तड़पाती है
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Kabir Altamash
अभी तुम ख़ूब उस को गालियाँ दोगी
अभी तो ये तुम्हारा पहला धोखा है
Sayeed Khan
लिबास-ए-मुफ़लिसी जो ज़िन्दगी ने ओढ़ रक्खा है
ख़ुदा-रा बादशाह-ए-सल्तनत तू लूट ले इस को
Shajar Abbas
कि जिस सेे चाहिए बोसा मुझे
उसी से मिल रहा धोखा मुझे

उसे मैं ने कभी समझा नहीं
दिया उस ने बहुत मौका मुझे
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Kaviraj " Madhukar"
क्या बताऊँ साथ मेरे इश्क़ में कैसा हुआ है
सुनने पर लगता नहीं है, हाँ मगर धोखा हुआ है
Saahir
मोहब्बत के इस सफ़र में ज़माने से इक यही सिलसिला चलता आ रहा है
यहाँ कोई लूट जाता है, कोई लुट तो कोई लौट जाता है बीच रस्ते
A R Sahil "Aleeg"
कितनी ख़ुशी की बात हैं
उस को भी धोखा मिल गया
"Nadeem khan' Kaavish"
ता'उम्र जिन के वास्ते उलफ़त बनायी है
वो लोग मेरे हिस्से में धोखा बना रहे
Prashant Sitapuri
अगर जहाँ में मोहब्बत पे ज़ुल्म होता है
लहद में क़ैस की मय्यत बहुत तड़पती है
Shajar Abbas
करेंगे ज़ुल्म उन पर और उन्हें हम भूल जाएँगे
हमें ये बात भी उन को इशारों में बतानी है
Faizan Faizi
लिबास-ए-अश्क़ जो ओढ़े हुए हैं आँखें मेरी
है डर ये लूट न लें यार ख़ुशियाँ आ के इसे

चराग़-ए-हिज्र से रौशन हैं दिल की बस्ती शजर
कहीं विसाल की आँधी नहीं बुझा दे इसे
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Shajar Abbas
देखा उसे मैं ने झुकाकर नैन को
कोई गया है लूट मेरे चैन को
Akash Kumar
कभी तू यक़ीं कर किसी ग़ैर पर दोस्त
ये धोखा तुझे भी बराबर मिलेगा
shaan manral
मेरे लबों के तबस्सुम को लूटने वाले
तेरे लबों का तबस्सुम भी लूट ले कोई
Shajar Abbas
वफ़ा चाहा मगर धोखा हुआ
चलो जो भी हुआ अच्छा हुआ
Irshad Siddique "Shibu"
सब सेे अच्छा रह कर मैं ने ये जाना
अपना ही अपनों से धोखा करता है

फूल तो ख़ंजर कुछ पल में हो जाते हैं
ख़ंजर लेकिन फूल नहीं बन सकता है
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Ravi 'VEER'
किसी निर्दोष लड़के से करे लड़की कोई धोखा
वो जीवन में पति पाए तो जूता-लात भी पाए
Nirbhay Nishchhal
हमारी जान की दीदी ज़रा सी बात ये सुन लें
मैं उस सेे प्यार करता हूँ उसे धोखा नहीं दूँगा
Nirbhay Nishchhal
अपनी हिम्मत का अब चराग़ जलाना होगा
जु़ल्म की आँख में अब आँख दिखाना होगा

जिस तरफ़ देखो है पामाल हुआ हक़ सबका
उठो अब ख़ुद का ही हक़ छीन के पाना होगा
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Ishq Allahabadi
जला यहाँ चराग़ तो दिखा ये कौन लोग हैं
ख़मोश ज़ुल्म पर हैं सब यहाँ ये मौन लोग हैं
Kajiimran
अदालत का ये चेहरा तो नहीं था
यहाँ पे ज़ुल्म गहरा तो नहीं था

सभी को थी मोहब्बत मज़हबों से
किसी मज़हब को ढाया तो नहीं था
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Meem Alif Shaz
करना जो था कर गया हूँ
आख़िरी हद पर गया हूँ

जब्र होता मुझ पर इतना
ज़ुल्म जितना कर गया हूँ
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Sayeed Khan
इश्क़ में धोखा खाने वाले
हम है दर्द छुपाने वाले

छोड़ के मुझ को जाने वाले
लौट के कब हैं आने वाले
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Navneet krishna
मुझ को भी ख़ुश होने का इक मौका दे
ऐसा हो कोई उस को भी धोखा दे
Kinshu Sinha
जो धोखा मिल गया हो तो मोहब्बत तीर लगती है
मिली जो नइंँ वफ़ा हम को तो ये तक़दीर लगती है

कि रानी है किसी की वो कहानी थी किसी की वो
मैं रांझा बन नहीं पाया मगर वो हीर लगती है
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Shivam Mishra
इश्क़ में धोखा खाने वाले
हम है दर्द छुपाने वाले

छोड़ के मुझ को जाने वाले
लौट के कब हैं आने वाले
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Navneet krishna
ग़लत आदत है आँखों की बड़ा ये ज़ुल्म करती हैं
जिन्हें मैं पा नहीं सकता उन्हें फिर देखना ही क्यूँ
Ankesh Arjun
सब कहते कि मुहब्बत में धोखा देती है लड़की
उन से पूछो मेरा वाला अब किस का किस का है
Bhoomi Srivastava
उम्मत ने ज़ुल्म ढाया ये आल-ए-रसूल पर
साया तलक ना छोड़ा मज़ार-ए-बतूल पर

चारों तरफ़ है फैली मदीने में रौशनी
पर तीरगी है आज भी क़ब्र-ए-बतूल पर
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Shajar Abbas
आज उस ने हमें ऐसा तोहफ़ा दिया
आँख भर आई जब उस ने धोखा दिया
Rachit Sonkar
इश्क़ में है आने वाला और क्या
रोज़ धोखा खाने वाला और क्या

किस का चेहरा था हमारे ख़्वाब में
होगा कोई आने वाला और क्या
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Navneet krishna
इश्क़ में धोखा खाने वाले
हम है दर्द छुपाने वाले

तुम को इक दिन आना होगा
रूठ के मुझ सेे जाने वाले
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Navneet krishna
उम्मीद भी नाराज़गी बन जाती है
अपना किसी को मानना धोखा है क्या?
"Dharam" Barot
लूट ली मुस्कान उस की मुफ़लिसी ने सस्ते में
अब किताबों की जगह कुछ बोलते हैं बस्ते में
Sandeep dabral 'sendy'
सभी को याद करते हैं, वो जिस-जिस ने दिया धोखा
मगर उन के दिलों से भी शिकायत ही न हो पाई
"Nadeem khan' Kaavish"
वफ़ा सबने निभाई थी मुहब्बत से
मुहब्बत ने मगर धोखा दिया सब को
MOHSIN JAHANGIR
लूट ली मुस्कान उस की मुफ़लिसी ने सस्ते में
अब किताबों की जगह कुछ बोलते हैं बस्ते में

रोज़ चल कर रस्सी पर करतब दिखाने पड़ते हैं
जब से शामिल है हुआ वो मुफ़लिसी के दस्ते में
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Sandeep dabral 'sendy'
लूट कर ले गया चैन दिल का सभी
चीख दिल में दबी रह गई थी तभी
Heartlesssid321
किस को अपना कहते हो
कौन तुम्हारा अपना है

ये सब माया है प्यारे
सब धोखा है सपना है
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Kumar Aryan
प्यार में पहले मुझ को हँसाया गया
फिर मुझे धोखा देकर रुलाया गया
Danish Balliavi
अब वो चेहरा भी नहीं है वो झरोखा भी नहीं
कितने सालों से हुआ आँखों का धोखा भी नहीं
Mohit Dixit
तोड़ कर दिल मिरा दिखाया है
प्यार में तू ने ज़ुल्म ढ़ाया है
Danish Balliavi
अगर पहली मुहब्बत से मिले धोखा
कई दिल तोड़ता बे-दिल नहीं थकता
Tiwari Jitendra
वालिद तिरा है ज़ुल्म हम पर कर रहा
यूँँ भेजकर बाज़ार बुर्के में तुझे
Kuldeep Tripathi KD
देख कर ज़ुल्म-ओ-सितम मज़लूम पर
आज फिर इंसानियत शर्मा गई
Shajar Abbas
बर्बाद होना तो मुकद्दर में नहीं
धोखा मिला भी तज्रबा के वास्ते
Shubham Rai 'shubh'
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लूट कर हम को दिया इस शा'इरी का जो हुनर
लिख ग़ज़ल कितने दिलों में नाम ये करवा गई
Raunak Karn
हज़रत-ए-दिल पे इतने ज़ुल्म-ओ-सितम
हुस्न-दाँ मत करो ख़ुदा के लिए
Shajar Abbas
कहानी बेबफाओं की ,तिरा किरदार लगती हैं,
प्रणय राहें भी अब हम को, व्यथा आधार लगती हैं

कभी उस ने दिया धोखा, हमें तो प्यार में जैसा,
हमें तो प्यार की बातें ,सभी बेकार लगती हैं
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Kavi Naman bharat
जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ
उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ

मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं
फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
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Aman G Mishra
क्या फ़क़ीरी बस एक धोखा है
ये भी रूहों को घर नहीं देती
Ajeetendra Aazi Tamaam
ये बाबू ये शोना कहा जा रहा है
मुहब्बत को धोखा दिया जा रहा है
jaani Aggarwal taak