Political Shayari - Power, system, and society expressed through bold poetic words

Political shayari reflects the realities of power, leadership, and society. It captures emotions around politics, corruption, justice, and public voice, often with sharp satire or deep thought. Whether it’s about siyasat, democracy, or social truth, these lines give words to what many feel but rarely say.

हम ने ग़ज़लों में हुक़ूमत को लिखी है 'लानत
धमकियाँ आती हैं, इन'आम तो आने से रहा
Harman Dinesh
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ज़्यादा मीठा हो तो चींटा लग जाता है
सच्चे इश्क़ को अक्सर बट्टा लग जाता है

हम ने अपनी जान गंवाई तब जाना
भाव मिले तो कुछ भी सट्टा लग जाता है
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Ritesh Rajwada
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अँधेरों की हुक़ूमत ख़ुद ब ख़ुद ही ख़त्म होनी है
क़लम को हाथ में शमशीर के मानिंद समझो तो
Sameer Goyal
पैसा कमाने आते हैं सब राजनीति में
आता नहीं है कोई भी खोने के वास्ते

छम्मो का मुजरा सुनते हैं नेता जो रात भर
संसद भवन में आते हैं सोने के वास्ते
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Paplu Lucknawi
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इक मिसाली शे'र भी मैं कह न पाया आज तक
इस लिए जाना है मुझ को फ़िक्र की मे'राज तक
Moid Rahbar
परिंदों सरहदों पे ध्यान देना
हमारे मुल्क में ही जान देना

हमें नेता से क्यूँँ नफरत है सुन लो
उन्हें आता है केवल ज्ञान देना
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Kush Pandey ' Saarang '
उसे मैं भूल जाऊँ ये मगर आसान थोड़ी है
मोहब्बत है किसी नेता का ये ईमान थोड़ी है
ATUL SINGH
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सफारी में नेता चलेंगे समझिए
हैं जनता-जनार्दन तो पीछे ही चलिए
Kush Pandey ' Saarang '
ये भी कैसी मजबूरी है
दोनों के बीच में दूरी है

तय है उस का नेता बनना
जिस के हाथ में छूरी है
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Kush Pandey ' Saarang '
सियासी जो परचम उठाए हुए हो
मियाँ ख़ुद को क्या तुम बनाए हुए हो

वही तो नहीं सुन रहा बात तेरी
जिसे वोट देकर जिताए हुए हो
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Kush Pandey ' Saarang '
न सरकारी हो बन्दा तो कोई लड़की नहीं देता
बचीं थी नौकरी जो भी वो सारी खा गऐ नेता

पता होता के अच्छे दिन मिलेंगे इस तरीके से
बिना नखरे दिखाए मैं तो कब का ब्याह कर लेता
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Naveen mahor
दिल में नफ़रत का राज है ही नहीं
मेरा ऐसा मिज़ाज है ही नहीं

या'नी करिए यक़ीन सिर्फ़ यक़ीन
शक का कोई इलाज है ही नहीं
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Tarique Jamal
परों को खोल कर मस्ती में जब उड़ते हैं दीवाने
उड़ानों से मुकम्मल आसमाँ पर राज करते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
अब की बार नहीं आएगी झाँसे में आवाम मियाँ
तुम पहुँचा दो सत्ता के गलियारों तक संदेश मिरा
Sandeep dabral 'sendy'
नेता कब ही जान सका है लोगों की परेशानी को
भाषण देना शोर मचाना चिल्लाना सब नाटक है
Sanskar Shrivastav
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अच्छे ख़ासे सत्ता के गलियारों में दागी हो जाते हैं
कुर्सी की ख़ातिर अपनों के ही तेवर बाग़ी हो जाते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
कि सियायत की दुनिया में आते ही आ जाती है तब्दीली
कल के सारिक़ इमरोज़ यहाँ सत्ता के भागी हो जाते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
राज करना चाहता हूँ मैं मगर
सब को नौकर चाहिए राजा नहीं
Vijay Potter Singhadiya
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हमेशा शे'र के ही हाथ में होता है सब जंगल
ये सत्ता भी हमेशा कातिलों के हाथ होती है

छुड़ाया हाथ पत्ते ने मगर इल्जाम पेड़ों पर
ये दुनिया भी हमेशा जुल्मियों के साथ होती है
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Shoonya Shrey
जन सेवा के मार्ग हज़ारों हैं लेकिन
नेता जी को मोक्ष मिलेगा संसद में
Sandeep kushwaha
लोग लगाते होंगे अंदाज़े 'राज'
तब दरवाज़े की ईजाद से पहले
Raj
तुम्हीं तो चले थे ज़माने से हट कर
यक़ीं था तुम इक दिन हुक़ूमत करोगे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
कितना ग़लत करोगे हुक़ूमत के नाम पर
धंधा बना लिया है इमारत के नाम पर

हर शय में तीस जोड़ के पंद्रह घटा दिए
ये दे रहे हो हम को रियायत के नाम पर
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
मेरे ज़ख़्म चीख़ के बताते हाल हैं उन्हें
अपने कान से नहीं जो अपने दिल से बहरे हैं

खोल देता हूँ मैं उन के आगे अपने सारे राज
पर उन्हें तो लगता हैं ये सारे मेरे चेहरे हैं
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Deep kamal panecha
ख़ुशबू फूलों से ख़फ़ा बैठी है राज
वो गया है बाग़ से कुछ इस तरह
Raj Tiwari
ये ग़ुरूर-ए-दौलत टिकता नहीं ज़ियादा दिन
लोग चाहते हैं अब राज हो मुहब्बत का
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
नेता भी डाल देते हैं ऐसे फ़साद में
हिंदू कभी तो वो कभी मुस्लिम विवाद में
Danish Balliavi
इश्क़ ज़ाहिर करने के लाखों तरीक़े होते हैं 'राज'
सब को छोड़ो तुम ये देखो पास की शय कौन सी है
Raj
कर्बला थी हुसैन की मे'राज
क़त्ल बस वस्ल का बहाना था
Shadan Ahsan Marehrvi
सब राज करना चाहते जिस क़ल्ब पर
उस पर सियासत तो हमारी ही रही
Hemant Sakunde
सेठ अनपढ़ नेता अनपढ़ ये कहानी है बताई
देश में ऐसी पढ़ाई की दशा किस ने बनाई
"Dharam" Barot
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लगाई है सियासत ने वतन में आग नफ़रत की
चला दे तू ख़ुदाया जो हवाएँ हैं मुहब्बत की

दिखाते हैं हुक़ूमत की हमें ताक़त यहाँ अपनी
दिखा वो तू ज़रा ताक़त ख़ुदा अपनी हुक़ूमत की
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Azhan 'Aajiz'
बज़्म में नेता जी भी बतिया रहे थे चमचे से
फ़ाइदा हद से बहुत ज़्यादा है बे-ईमानी में
Sandeep dabral 'sendy'
दहशत-गर्दी फैल रही है अब मज़हब के नारों से
लोगों को मारा जाता है गोली से हथियारों से

कौन है रहबर कौन है रहज़न सब को ख़बर है 'दानिश' अब
क़ातिल को ताक़त मिलती है सत्ता के गलियारों से
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Danish Balliavi
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इतना भी जोश दिखाने की ज़रूरत क्या है
और हो हल्ला मचाने की ज़रूरत क्या है

राज-मंदिर में ही इक दूजे को अपशब्द कहो
इस क़दर तैश में आने की ज़रूरत क्या है
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Nityanand Vajpayee
सत्ता मद में साँप छछुन्दर बिच्छू पाले हैं
क्यूँ कहते हो अच्छे दिन अब आने वाले हैं
Umesh Maurya
लिखना होगा मुझ को जब भी दंगों पर
मैं लिक्खूँगा सत्ता के भिखमंगों पर

हो सरहद पर जब भी रिपु से जंग यहाँ
मैं भेजूँ नेताओं को भी जंगों पर
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Sandeep dabral 'sendy'
प्यादे मरेंगे जंग में हर बार
राजा बनें हैं राज करने को
Manoj Devdutt
आज के नेता अपने मुँह में पान घुलाए बैठे हैं
देश के कोने कोने में ये आग लगाए बैठे हैं
Krishnavat Ritesh
मिरे इस दिल पे अब उस की हुक़ूमत है
मिरी धड़कन है वो मेरी मोहब्बत है

मोहब्बत करना तो आसान है यारो
मगर इज़हार करना इक मुसीबत है
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ABhishek Parashar
कितने नेता हैं जिन्होंने रैली कर कर नारे बेचे
कुछ नहीं सूझा उन्हें जब तो उन्होंने वादे बेचे

ये हमारा देश है जो क्या यहाँ बिकता नहीं है
एक ने तो क़स
में खा खा झूट बेचे जुमले बेचे
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Mohit Subran
ऐ ख़ुदा तेरा निज़ाम लगता है सही नहीं
कोई राज भोग खाए कोई रोटी भी नहीं
Jagat Singh
तो आज से सब शे'र चिड़िया घर गए
जंगल पे अब बस गीदड़ों का राज है
Jagat Singh
वोट दे आते हो तुम सब जात, फ़िरक़ा देख कर
ऐ वतन के वासियों इस
में है ख़तरा, देख कर

फिर नहीं तुम बा'द में सब चीखते रह जाओगे
इस सियासी दौड़ में शामिल है बहरा, देख कर
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Updesh 'Vidyarthi'
मकाँ मालिक किराएदार बन जाते
किराएदार जब सरकार बन जाते

ये जनता राज में ही ख़ासियत है बस
कि अपराधी यहाँ सरदार बन जाते
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Jagveer Singh
जब वोट के दिन थे तब वे रोज़ ही दिखते थे
इक साल हुआ तो अब इक बार नहीं दिखते
Sahil Verma
ई डी का शोर है चुप-चाप रहो
सत्ता पुर-ज़ोर है चुप-चाप रहो

भागकर मुझ सेे तू जाएगा कहाँ
रेड हर ओर है चुप-चाप रहो
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Shubham Rai 'shubh'
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रन राज सिंहासन शिवा का यूँँ सजा
मरती ख़ुशी से थी सभी उस पे प्रजा
Vinod Ganeshpure
शाद-ओ-आबाद रहे सफ़्हा हर इक दिल का 'राज'
इन किताबों से गुलाबों की महक आती है
Raj Tiwari
इक ख़्वाहिश कर राज करेंगे
सबके दिल पर राज करेंगे
Manohar Shimpi
सलाम अपना अमीरों पे आम करता है
मगर गरीबों से कब वो कलाम करता है

लिहाफ़ ठंड में बाँटे गिलास गर्मी में
वो वोट पाने के सब इंतिज़ाम करता है
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Meem Alif Shaz
चुनाव में हारे हुए लोगों से पूछो
सत्ता किसी के बाप की जागीर नहीं है
shivendra Mishra
तुम नए नेता बने हो या गली तुम भूल आए हो
फेंकने को कौन सा जुमला नया इस बार लाए हो
Shubham Rai 'shubh'
कैसे बदलेगी दशा एवं दिशा इस देश की
चुन रहे नेता युवा जब क़ाफ़िलों को देख कर
Sani Singh
अफ़सोस था और होंठों पे मुस्कान खिली थी
ये इश्क़ की मे'राज थी या ज़िंदा-दिली थी

अंगुश्तरी तोहफ़े में उसे इस लिए दी है
वो याद करेगी किसी सय्यद से मिली थी
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Shajar Abbas
राज इस फ़ैसले पर ज़रा ग़ौर कर
ज़िंदगी का सफ़र तन्हा कटता नहीं
Raj Tiwari
आश्ना देखिए दरिया की रवानी में है
ये ख़ज़ाना उसी बहते हुए पानी में है

पर्दे के गिरते ही सब घर की तरफ़ चल दिए 'राज'
पर अभी तक मिरा किरदार कहानी में है
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Raj Tiwari
ये बात भूलें न नेता कि आम लोगों ने
जभी है चाही जो सरकार वो गिरा डाली
Mohit Subran
हम निभाते चुनाव को सारे
देश में वोट इक हमारा है
Vinod Ganeshpure
राज कितने छुपाए हुए हैं
ख़ून से भी नहाए हुए हैं

दिल की बस्ती कहीं इक बसी थी
हम उसी के सताए हुए हैं
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Zohair Ahmad Sahil
अजब गंदी सियासत चल रही है
हर इक रिश्ते पे तोहमत चल रही है

बुज़ुर्ग इस कुंबे के कैसे रहें चुप
बुज़ुर्गों पर तो आफ़त चल रही है
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Nityanand Vajpayee
राज दुनिया पे चले मेरा ये कहने वाला
आदमी रहता है दुनिया के किसी कोने में
Dipanshu Shams
ख़ामुशी जिन को समझदार बनाती है 'राज'
अपनी आवाज़ को वो लोग तरस जाते हैं
Raj Tiwari
कुछ करना है अब इश्क़ की मे'राज के ख़ातिर
मैं सोच रहा हूँ मियाँ संजीदा है वो भी
Syed Neer Muqeet
निकाला था जिस को कभी दिल से तू ने
वो करता है अब राज सब के दिलों पर
Viru Panwar
मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है
मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़
Faiz Ahmad Faiz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा
वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा

मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ
मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
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Tehzeeb Hafi
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मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
Sahir Ludhianvi
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रोक सकता हमें ज़िंदान-ए-बला क्या 'मजरूह'
हम तो आवाज़ हैं दीवार से छन जाते हैं
Majrooh Sultanpuri
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सर पर हवा-ए-ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ
अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ
Majrooh Sultanpuri
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इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं
होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं
Javed Akhtar
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ये भी ए'जाज़ मुझे इश्क़ ने बख़्शा था कभी
उस की आवाज़ से मैं दीप जला सकता था
Ahmad Khayal
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ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है बढ़ता है तो मिट जाता है
ख़ून फिर ख़ून है टपकेगा तो जम जाएगा
Sahir Ludhianvi
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मिरी ख़ामोशियों की झील में फिर
किसी आवाज़ का पत्थर गिरा है
Aadil Raza Mansoori
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मुझे रोना नहीं आवाज़ भी भारी नहीं करनी
मोहब्बत की कहानी में अदाकारी नहीं करनी
Afzal Khan
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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है
Afzal Khan
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अपना हर तिनका समेटे किस जगह पर जा छुपे
हम तिरी आवाज़ की चिड़ियों से घबराते हुए
Swapnil Tiwari
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आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए
वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है
Muneer Niyazi
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ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी
Kaleem Aajiz
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तेरा लिक्खा जो पढ़ूँ तो तेरी आवाज़ सुनूँ
तेरी आवाज़ सुनूँ तो तेरा चेहरा देखूँ
Bhaskar Shukla
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शब भर इक आवाज़ बनाई सुब्ह हुई तो चीख़ पड़े
रोज़ का इक मामूल है अब तो ख़्वाब-ज़दा हम लोगों का
Abhishek shukla
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टक गोर-ए-ग़रीबाँ की कर सैर कि दुनिया में
उन ज़ुल्म-रसीदों पर क्या क्या न हुआ होगा
Meer Taqi Meer
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मोहब्बत कर मोहब्बत कर यही बस कह रहा है दिल
सुन अपने दिल की तू ये ग़ैर की आवाज़ थोड़ी है
Krishnakant Kabk
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तेरी आवाज़ को इस शहर की लहरें तरसती हैं
ग़लत नंबर मिलाता हूँ तो पहरों बात होती है
Ghulam Mohammad Qasir
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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है
Afzal Khan
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लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे
जी चाहता है मैं तिरी आवाज़ चूम लूँ
Bashir Badr
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बाज़ार जा के ख़ुद का कभी दाम पूछना
तुम जैसे हर दुकान में सामान हैं बहुत

आवाज़ बर्तनों की घर में दबी रहे
बाहर जो सुनने वाले हैं, शैतान हैं बहुत
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Aalok Shrivastav
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यूँँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उन की रस्म नई है, न अपनी रीत नई

यूँँ ही हमेशा खिलाए हैं हम ने आग में फूल
न उन की हार नई है, न अपनी जीत नई
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Faiz Ahmad Faiz
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इस गए साल बड़े ज़ुल्म हुए हैं मुझ पर
ऐ नए साल मसीहा की तरह मिल मुझ से
Sarfraz Nawaz
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ख़ामोशी में आवाज़ का किरदार कोई है
जो बोलता रहता है लगातार, कोई है
Shakeel Gwaliari
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अब उस के दर से भी आवाज़ आती है कि नहीं
बता रे ज़िन्दगी तू बाज़ आती है कि नहीं

बहकने लगता है जब जब किसी के प्यार में दिल
तो तेरी याद यूँंँ आके डराती है कि नहीं
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Faiz Ahmad
ज़माना ज़ुल्म करता है ख़ुशी से
कभी तुझ को कभी मुझ को सताए
Meem Alif Shaz
डाली है ख़ुद पे ज़ुल्म की यूँँ इक मिसाल और
उस के बग़ैर काट दिया एक साल और
Subhan Asad
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एक आवाज़ पे आ जाती है दौड़ी दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान नहीं देखती है

दोस्ती दोस्ती होती है तुम्हें इल्म नहीं
दोस्ती फ़ाइदा नुक़सान नहीं देखती है
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Aadil Rasheed
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जब उस ने पलट कर नहीं देखा तो ये जाना
आवाज़ लगाने में भी नुक़सान बहुत है
Imtiyaz Khan
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तबक़ों में रंग-ओ-नस्ल के उलझा के रख दिया
ये ज़ुल्म आदमी ने किया आदमी के साथ
Bakhtiyar Ziya
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रगों में ज़हर-ए-ख़ामोशी उतरने से ज़रा पहले
बहुत तड़पी कोई आवाज़ मरने से ज़रा पहले
Khushbir Singh Shaad
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रंग दरकार थे हम को तिरी ख़ामोशी के
एक आवाज़ की तस्वीर बनानी थी हमें
Nazir Wahid
बहुत था ख़ौफ़ जिस का फिर वही क़िस्सा निकल आया
मिरे दुख से किसी आवाज़ का रिश्ता निकल आया
Bashar Nawaz
काठ की हाँडी अब न चढ़ेगी ज़ुल्म के चूल्हे पर यारो
वक़्त का पहिया घूमेगा मुंसिफ़ भी जेल में जाएगा
Amaan Pathan
ये ख़ामुशी का ज़हर नसों में उतर न जाए
आवाज़ की शिकस्त गवारा न कर अभी
Saqi Faruqi
कुछ न कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुख़न
ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है
Muzaffar Warsi
आवाज़ दे के छुप गई हर बार ज़िंदगी
हम ऐसे सादा-दिल थे कि हर बार आ गए
Ahmad Faraz
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सब्र पर दिल को तो आमादा किया है लेकिन
होश उड़ जाते हैं अब भी तेरी आवाज़ के साथ
Aasi Uldani
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ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है
ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है
Munawwar Rana
छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर
अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है
Asrar Ul Haq Majaz
जब कभी नींद हमें वक़्त पे आने लगे है
तो डर के तेरी याद को आवाज़ लगा देते हैं
Parwez Akhtar