Mulaqat Shayari - Dil se dil tak hone wali khaas mulaqaat ki shayari

Mulaqat shayari beautifully captures the emotions of meeting someone special after longing or distance. Whether it’s the joy of a first meeting or the warmth of a long-awaited reunion, these verses express those priceless lamhe that stay in the heart forever.

mulaqat shayari
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
Mirza Ghalib
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mulakat shayari
चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे
बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग
Azhar Iqbal
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नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही
Faiz Ahmad Faiz
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ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम
विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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पकड़ में आती नहीं है कभी वो शाख़-ए-विसाल
हम एक बोसा-ए-गुल के लिए तरसते हैं
Subhan Asad
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ज़रा विसाल के बा'द आइना तो देख ऐ दोस्त
तिरे जमाल की दोशीज़गी निखर आई
Firaq Gorakhpuri
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शब-ए-विसाल बहुत कम है आसमाँ से कहो
कि जोड़ दे कोई टुकड़ा शब-ए-जुदाई का
Ameer Minai
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नज़दीकी अक्सर दूरी का कारन भी बन जाती है
सोच-समझ कर घुलना-मिलना अपने रिश्ते-दारों में
Aalok Shrivastav
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पूरा करेंगे होली में क्या वादा-ए-विसाल
जिन को अभी बसंत की ऐ दिल ख़बर नहीं
Kalb-E-Hussain Nadir
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वो फ़िराक़ और वो विसाल कहाँ
वो शब-ओ-रोज़-ओ-माह-ओ-साल कहाँ
Mirza Ghalib
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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही
Faiz Ahmad Faiz
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सब दे रहे हैं दिल मुझे अपना निकाल के
दरअस्ल मैं ने शे'र कहे हैं कमाल के

अब आप सोच लीजिए मजबूरियाँ मेरी
हिज्र-ओ-विसाल तय करूँँ सिक्का उछाल के
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Tanoj Dadhich
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कहाँ के इश्क़-ओ-मोहब्बत किधर के हिज्र-ओ- विसाल
अभी तो लोग तरसते हैं ज़िन्दगी के लिए
Zehra Nigaah
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कहीं अबीर की ख़ुश्बू कहीं गुलाल का रंग
कहीं पे शर्म से सिमटे हुए जमाल का रंग

चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे
बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग
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Azhar Iqbal
जो क़ैस का था कहीं मेरा भी वो हाल न हो
इलाज-ए-हिज्र से बेहतर तो है विसाल न हो
Akhil Saxena
विसाल-ए-यार में जीना कोई कमाल नहीं
फिराक़-ए-यार में जीना कमाल होता है
Shajar Abbas
शब-ए-फ़िराक़ पूरी रात सोना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम तिरे ख़याल बो रहे हैं हम

शब-ए-विसाल पूरी रात जगना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम सुकूँ की नींद सो रहे हैं हम
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Deep kamal panecha
काटी है हिज्र की शब तुझ सेे विसाल होगा
क्या दिन वो ख़ूब-सूरत और बा-कमाल होगा
Mahesh Natakwala
लिबास-ए-अश्क़ जो ओढ़े हुए हैं आँखें मेरी
है डर ये लूट न लें यार ख़ुशियाँ आ के इसे

चराग़-ए-हिज्र से रौशन हैं दिल की बस्ती शजर
कहीं विसाल की आँधी नहीं बुझा दे इसे
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Shajar Abbas
सुकून-ए-दिल नहीं मिलता विसाल-ए-यार में हर बार
मियाँ इक रोज़ वो हम सेे मिली थी फिर न मिलने हेतु
Sandeep dabral 'sendy'
जब से तुम ने मिलना-जुलना छोड़ा है
हम ने भी फिर सांसें भरना छोड़ दिया

तुम क्या जानो मेरे दिल पर क्या गुज़री
तुम ने तो बस बातें करना छोड़ दिया
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Muhammad Fuzail Khan
उम्मीद ए विसाल ए जांँ मिसमार हुई नहीं
ये दामन-ए-शब अभी दुश्वार हुई नहीं

उस ने भी शब-ए-गुज़श्ता क़ैद रखी हवस
हम सेे भी बदन की सरहद पार हुई नहीं
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Sabir Hussain
इश्क़ मोहब्बत प्यार वफ़ा ये वस्ल विसाल
सब धोका है धोका मतलब धोका है
Shajar Abbas
हिज्र करते विसाल करते पर
यूँँ नहीं बीच में फँसाना था
Sohit Singla
फिर वही लौट के आने का बहाना कर के
वो दे के मुझ को कोई आस चला जाता है

उस के आने में यही दुख है कि वो शाम-ए-विसाल
जब भी आता है मेरे पास चला जाता है
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RIZWAN ALI RIZWAN
वो न मुझ से विसाल करते हैं
बस मेरा इस्तिमाल करते हैं
Danish Balliavi
लोग लिखते हैं अक्सर दूरी दरमियाँ सबके
दरमियाँ धरा नभ के हम विसाल लिक्खेंगे
Sandeep dabral 'sendy'
ग़म-ए-हिज्र से मैं हूँ आशना मुझे आरज़ू-ए-विसाल है
ये इलाज और ये मुआलिजा मेरे दर्द कि तो दवा नहीं
Saqlain Mushtaque
बा'द-ए-शब-ए-विसाल से आगे की चीज़ है
ये ज़िंदगी मलाल से आगे की चीज़ है

क्या ही कहूँ ए दोस्त मैं उस के मिजाज़ का
वो शख़्स तो कमाल से आगे की चीज़ है

है प्यार मुझ को आप से कह तो सका नहीं
ये तो मेरी मजाल से आगे की चीज़ है

उस के रुमाल के सिवा तो कुछ है ही नहीं
लेकिन वो भी रुमाल से आगे की चीज़ है
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Aditya Kumar 'Chaudhary'
हुए हैं जाँ ब-लब शादाब आ पहुँचा दम-ए-आख़िर
लो अब तकमील को पहुँची विसाल-ए-यार की ख़्वाहिश
Shadab Shabbiri
कोई हिजरत कोई विसाल नहीं
ख़्वाब में भी तेरा ख़याल नहीं

सी लिए होंठ रब की मर्ज़ी पे
मेरे लब पर कोई सवाल नहीं
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Almas Rizvi
हाल भी है कमाल का जानाँ
वक़्त भी है विसाल का जानाँ

इस तरह का जवाब मत दो तुम
उस तरह के सवाल का जानाँ
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SAAGAR SINGH RAJPUT
यही सबब है कि हम हिज्र से हैं अफ़्सुर्दा
हर एक हिज्र से पैदा विसाल होता नहीं
Sumit Panchal
हम सेे सीखो कमाल में रहना
हिज्र में भी विसाल में रहना

होश में सबके साथ रह कर भी
उस के ख़्वाब-ओ-ख़याल में रहना
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Prit
गाहे गुज़र न जाए ये दिन विसाल का
मुद्दत में होता है कोई दिन कमाल का
Akash Choudhary
मेरे हबीब दहर में तेरा मिरा विसाल
ख़ालिक़ का इंतिख़ाब है या इत्तिफ़ाक़ है
Shajar Abbas
किसी से झुक के मिलना उन की आदत में नहीं था
कमी एडजस्ट करना शान-ओ-शौक़त में नहीं था

किसी मतलब से आए होगें वर्ना इस क़दर तो
अदब से बात करना उन की फ़ितरत में नहीं था
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Nityanand Vajpayee
बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें
गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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मैं न सोया रात सारी तुम कहो
बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो

हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी
ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो
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Prakhar Kanha
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बूढ़ी बोझल सूखी आँखें देख रही हैं हैरत से
कच्ची उम्र के लड़कों ने कुछ ऐसी बातें लिक्खी हैं
Shadab Javed
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मेरी बातें न काट पाए तो
वो मेरे होंठ काट खाती है
Swapnil Tiwari
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नया इक रिश्ता पैदा क्यूँँ करें हम ?
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँँ करें हम?
Jaun Elia
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मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी
मुझे अफ़सोस है ये मुझ को कहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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सब कर लेना लम्हे ज़ाया' मत करना
ग़लत जगह पर जज़्बे ज़ाया' मत करना
Ali Zaryoun
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ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है
नींद हमेशा मुझ सेे धोखा करती है

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
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Tehzeeb Hafi
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छोटी छोटी बातें कर के, बड़े कहाँ हो जाओगे
पतली गलियों से निकलो तो खुली सड़क पर आओगे
Waseem Barelvi
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अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
कुछ नहीं आसमान में रक्खा
Jaun Elia
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न उस ने हाथ लगाया न उस ने बातें कीं
पड़े पड़े यूँँ ही ख़ुद में ख़राब हो गए हम
Abhishek shukla
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जो बच गए हैं चराग़ उन को बचाए रक्खो
मैं चाहता हूँ हवा से रिश्ता बनाए रक्खो
Azm Shakri
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बदन का ज़िक्र बातिल है तो आओ
बिना सर पैर की बातें करेंगे
Fahmi Badayuni
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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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शे'र तो रोज़ ही कहते हैं ग़ज़ल के लेकिन
आ! कभी बैठ के तुझ सेे करें बातें तेरी
Nawaz Deobandi
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हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते
Gulzar
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याद तो होंगी वो बातें तुझे अब भी लेकिन
शेल्फ़ में रक्खी हुई बंद किताबों की तरह
Parveen Shakir
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नाला हूँ मैं बेदारी-ए-एहसास के हाथों
दुनिया मिरे अफ़्कार की दुनिया नहीं होती
Sahir Ludhianvi
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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लम्हे उदास उदास फ़ज़ाएं घुटी घुटी
दुनिया अगर यही है तो दुनिया से बच के चल
Shakeel Badayuni
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हमारा ख़ून का रिश्ता है सरहदों का नहीं
हमारे ख़ून में गँगा भी चनाब भी है
Kanval Ziai
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वो रातें चाँद के साथ गईं वो बातें चाँद के साथ गईं
अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो
Ibn E Insha
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तअल्लुक़ जो भी रक्खो सोच लेना
कि हम रिश्ता निभाना जानते हैं
Ambreen Haseeb Ambar
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जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर
वो तस्वीर बातें बनाने लगी
Adil Mansuri
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इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद
अभी हमारी मोहब्बत नई नई है ना
Afzal Khan
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लो आज हम ने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
Sahir Ludhianvi
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तुम्हारे पास आते हैं तो साँसें भीग जाती हैं
मोहब्बत इतनी मिलती है कि आँखें भीग जाती हैं

तबस्सुम इत्र जैसा है हँसी बरसात जैसी है
वो जब भी बात करती है तो बातें भीग जाती हैं
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Aalok Shrivastav
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मानी हैं मैं ने सैकड़ों बातें तमाम उम्र
आज आप एक बात मेरी मान जाइए
Ameer Minai
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ये फ़ोकस, पढ़ाई, फ्यूचर, लगन और कैरियर की बातें
मियाँ, मसअला ये है तुम ने अभी उस को देखा नहीं है
Ahmad Farhad
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सगी बहनों का जो रिश्ता रिश्ता है उर्दू और हिन्दी में
कहीं दुनिया की दो ज़िंदा ज़बानों में नहीं मिलता
Munawwar Rana
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रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं
Hafeez Jalandhari
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मुझे कहता है झूठी हैं तेरी बेकार सी बातें फ़राज़
मगर लगता है वो मेरी उन्हीं बातों पे मरता है
Ahmad Faraz
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अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त
तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फिजूलखर्ची नहीं करेंगे

हमारे चंद अच्छे दोस्तों ने ये वा'दा ख़ुद से किया हुआ है
कि शक्ल अल्लाह ने अच्छी दी है सो बातें अच्छी नहीं करेंगे
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Rehman Faris
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ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई न दे
Bashir Badr
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अब तो मिलिए बस लड़ाई हो चुकी
अब तो चलिए प्यार की बातें करें
Akhtar Shirani
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तिरे एहसास में डूबा हुआ मैं
कभी सहरा कभी दरिया हुआ मैं
Siraj Faisal Khan
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इक लड़की है जो इकदम घर जैसी है
वो बिल्कुल माँ जैसी बातें करती है
Siddharth Saaz
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हमेशा ठंडी हो जाती थी चाय बातों बातों में
वो बातें जो इन आँखों से किया करते थे हम दोनों
Hasan Abbasi
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बात करते हुए बे-ख़याली में ज़ुल्फ़ें खुली छोड़ दी
हम निहत्थों पे उस ने ये कैसी बलाएँ खुली छोड़ दी

साथ जब तक रहे एक लम्हे को भी रब्त टूटा नहीं
उस ने आँखें अगर बंद कर ली तो बाँहें खुले छोड़ दी
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Khurram Afaq
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उस ने हम सेे बातें करना छोड़ दिया
माँ की जिस सेे बात कराने वाले थे
Tanoj Dadhich
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अगर लगता है वो क़ाबिल नहीं है
तो रिश्ता तोड़ना मुश्किल नहीं है

रक़ीब आया है मेरे शे'र सुनने
तो अब ये जंग है महफ़िल नहीं है
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Tanoj Dadhich
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बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत'
तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से
Farhat Abbas Shah
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प्यार मुहब्बत बा'द की बातें जान कभी ये सोचा है
किस ने तेरा साथ दिया था कौन नशे में ख़त्म हुआ
Vikram Gaur Vairagi
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ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं
हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं

जिस लड़की की बातें करते हैं सब सेे
उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं
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Gyan Prakash Akul
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ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी
तुझ सेे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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उस ने हँसते हुए तोड़ा था हमारा रिश्ता
हम सभी को ये बताते हुए रो देते हैं
Zubair Alam
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ख़ुद को बिखरते देखते हैं कुछ कर नहीं पाते हैं
फिर भी लोग ख़ुदाओं जैसी बातें करते हैं
Iftikhar Arif
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बारिश हो जाने के बा'द भी मिट्टी गीली रहती है
मैं तेरे जाने के बा'द भी तुझ सेे बातें करता हूँ
Siddharth Saaz
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तन्हा होना, गुम-सुम दिखना, कुछ ना कहना... ठीक नहीं
अपने ग़म को इतना सहना, इतना सहना... ठीक नहीं

आओ दिल की मिट्टी में कुछ दिल की बातें बो दें हम
बारिश के मौसम में गमले ख़ाली रहना... ठीक नहीं
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Dev Niranjan
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उस सेे ज़ियादा बातें करते थे हम तुम
जितनी बातें माँ और मौसी करती हैं
Tanoj Dadhich
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जब चाहें सो जाते थे हम, तुम सेे बातें कर के तब
उल्टी गिनती गिनने से भी नींद नहीं आती है अब

इश्क़ मुहब्बत पर ग़ालिब के शे'र सुनाए उस को जब
पहले थोड़ा शरमाई वो फिर बोली इस का मतलब?
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Tanoj Dadhich
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ख़ुशबू से किस ज़बान में बातें करेंगे लोग
महफ़िल में ये सवाल तुझे देख कर हुआ
Mansoor Usmani
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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले
ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
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अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोए
शजर गिरा तो परिंदे तमाम शब रोए
Tariq Naeem
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कभी कभी वो बातें करता है मुझ सेे
गाँव में बिजली हर दिन थोड़े आती है
Tanoj Dadhich
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दिलों की बातें दिलों के अंदर ज़रा सी ज़िद से दबी हुई हैं
वो सुनना चाहें, ज़बाँ से सब कुछ मैं करना चाहूँ नज़र से बतियां

ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है
सुलगती सांसें, तरसती आँखें, मचलती रूहें, धड़कती छतियां
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Aalok Shrivastav
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अब मज़ीद उस सेे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता
जिस सेे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता

पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते
घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता
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Tehzeeb Hafi
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मैं शाइ'र उस को चूड़ी ही दे सकता था बस
रिश्ता सोने के कंगन देने पर होता है
Neeraj Neer
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क्या जाने किस ख़ता की सज़ा दी गई हमें
रिश्ता हमारा दार पे लटका दिया गया

शादी में सब पसंद का लाया गया मगर
अपनी पसंद का उसे दूल्हा नहीं मिला
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Afzal Ali Afzal
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आधी आधी रात तक सड़कों के चक्कर काटिए
शा'इरी भी इक सज़ा है ज़िंदगी भर काटिए

कोई तो हो जिस से उस ज़ालिम की बातें कीजिए
चौदहवीं का चाँद हो तो रात छत पर काटिए
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Nisar Nasik
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इतना धीरे-धीरे रिश्ता ख़त्म हुआ
बहुत दिनों तक लगा नहीं हम बिछड़े हैं
Ajmal Siddiqui
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मिरी तरफ़ से तो टूटा नहीं कोई रिश्ता
किसी ने तोड़ दिया ए'तिबार टूट गया
Akhtar Nazmi
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तेरे एहसास को ख़ुशबू बनाते
जो बस चलता तुझे उर्दू बनाते

यक़ीनन इस से तो बेहतर ही होती
वो इक दुनिया जो मैं और तू बनाते
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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हमें हर वक़्त ये एहसास दामन-गीर रहता है
पड़े हैं ढेर सारे काम और मोहलत ज़रा सी है
Khurshid Talab
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रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए
इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है
Ahmad Mushtaq
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जीत भी लूँ गर लड़ाई तुम से मैं तो क्या मिलेगा
हाथ में दोनों के बस इक टूटा सा रिश्ता मिलेगा

कर के लाखों कोशिशें गर जो बचा भी लूँ मैं रिश्ता
तो नहीं फिर मन हमारा पहले के जैसा मिलेगा
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Ankit Maurya
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उदासी चल कहीं चलते हैं दोनों
पिएँगे चाय और बातें करेंगे
Gaurav Singh
अभी वो लौट कर आया नहीं काबे कि ज़ानिब से
मिला था गांँव के हद पर करी बातें कवाकिब से
Afzal Sultanpuri
जिन से नक़द मोहब्बत होती है "जस्सर"
उन सेे बातें किस्तों में क्यूँ होती हैं
Avtar Singh Jasser
प्यार का रिश्ता ऐसा रिश्ता शबनम भी चिंगारी भी
या'नी उन सेे रोज़ ही झगड़ा और उन्हीं से यारी भी
Ateeq Allahabadi
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उस के झुमके की बात क्या कीजे
उस की बातें भी यार गहना हैं
Gaurav Singh