Deedar Shayari - Unspoken longing and joy of seeing someone special

Deedar shayari beautifully captures the emotion of seeing someone you deeply long for. It reflects the excitement, peace, and silent joy that comes with a single glance or meeting. Whether it’s a fleeting jhalak or a heartfelt mulaqat, these lines express the magic of presence and connection.

deedar shayari
कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा
Ibn E Insha
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didaar shayari
एक चेहरा है जो आँखों में बसा रहता है
इक तसव्वुर है जो तन्हा नहीं होने देता
Javed Naseemi
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mulaqat shayari
सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर
मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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nigaah shayari
जैसे मेरी निगाह ने देखा न हो कभी
महसूस ये हुआ तुझे हर बार देख कर
Shad Azimabadi
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nazrein shayari
तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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ru-ba-ru shayari
तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है
Kaif Bhopali
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हमें जिन की हिमायत चाहिए थी
वही नज़रें चुरा कर जा रहे हैं
Shadab Javed
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अच्छे हो कर लौट गए सब घर लेकिन
मौत का चेहरा याद रहा बीमारों को
Shariq Kaifi
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भुला के दूल्हा जिसे बैठता है मंडप में
वो चेहरा आख़िरी फेरे में याद आता है
Shanawar Kiratpuri
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कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर मगर अच्छा नहीं लगता
Munawwar Rana
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नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही
Faiz Ahmad Faiz
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इक गुल के मुरझाने पर क्या गुलशन में कोहराम मचा
इक चेहरा कुम्हला जाने से कितने दिल नाशाद हुए
Faiz Ahmad Faiz
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रोना हो आसान हमारा
इतना कर नुक़्सान हमारा

बात नहीं करनी तो मत कर
चेहरा तो पहचान हमारा
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Shariq Kaifi
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उम्र गुज़री उस का चेहरा देखते
और जी लेते तो दुनिया देखते
Vipul Kumar
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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त
मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त

हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम
पगला गए हैं आप के चू
में हुए दरख़्त
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Varun Anand
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वो मेरी पीठ में ख़ंजर ज़रूर उतारेगा
मगर निगाह मिलेगी तो कैसे मारेगा
Waseem Barelvi
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रुकें तो धूप से नज़रें बचाते रहते हैं
चलें तो कितने दरख़्त आते जाते रहते हैं
Charagh Sharma
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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
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Subhan Asad
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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
Shakeel Jamali
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लाई न ऐसों-वैसों को ख़ातिर में आज तक
ऊँची है किस क़दर तिरी नीची निगाह भी
Firaq Gorakhpuri
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उसे यूँँ चेहरा-चेहरा ढूँढ़ता हूँ
वो जैसे रात-दिन सड़कों पे होगा
Shariq Kaifi
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क्यूँँ इक तरफ़ निगाह जमाए हुए हो तुम
क्या राज़ है जो मुझ से छुपाए हुए हो तुम
Shakeel Badayuni
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मुद्दत के बा'द उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह
जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े
Kaifi Azmi
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हम भी ख़ुद को तबाह कर लेते
तुम इधर भी निगाह कर लेते
Behzad Lakhnavi
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तू उस निगाह से पी वक़्त-ए-मय-कशी 'ताबाँ'
की जिस निगाह पे क़ुर्बान पारसाई हो
Anwar Taban
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हुस्न को भी कहाँ नसीब 'जिगर'
वो जो इक शय मिरी निगाह में है
Jigar Moradabadi
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मैं तो 'मुनीर' आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ
ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में
Muneer Niyazi
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इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया
Asad Bhopali
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तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है
सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है

तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है
तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है
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Kaif Bhopali
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तेरा लिक्खा जो पढ़ूँ तो तेरी आवाज़ सुनूँ
तेरी आवाज़ सुनूँ तो तेरा चेहरा देखूँ
Bhaskar Shukla
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उतर गया है चेहरा तेरे जाने से
लॉक नहीं खुलता है अब मोबाइल का
Tanoj Dadhich
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चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें
दिल पे आँखें रक्खें तेरी साँसें देखें
Tehzeeb Hafi
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जिस तरफ़ तू है उधर होंगी सभी की नज़रें
ईद के चाँद का दीदार बहाना ही सही
Amjad Islam Amjad
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कुछ ने आँखें कुछ ने चेहरा देखा है
सब ने तुझ को थोड़ा थोड़ा देखा है
Tousief Tabish
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ज़ख़्म की इज़्ज़त करते हैं
देर से पट्टी खोलेंगे

चेहरा पढ़ने वाले चोर
गठरी थोड़ी खोलेंगे
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Khurram Afaq
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डर है घर में कैसे बोला जाएगा
छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा

मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा
मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
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Vishal Singh Tabish
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हमारे सीने पे उँगलियों से तुम अपना चेहरा बना रहे थे
तुम्हें कुछ उस की ख़बर नहीं थी हमारे दिल में जो चल रहा था
Nadim Nadeem
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घूमता रहता है हर वक़्त मेरी आँखों में
एक चेहरा जो कई साल से देखा भी नहीं
Riyaz Tariq
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इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही
लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं
Nadir Ariz
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वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
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दर्द चेहरा पहन के आया था
तेरा चेहरा था सो क़ुबूल किया
Aslam Rashid
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बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहजा निगाह
जी में कहते हैं कि मुफ़्त आए तो माल अच्छा है
Mirza Ghalib
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आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से
इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही
Jaleel Manikpuri
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हम ऐसों को बना कर के ख़ुदा उकता गया था फिर
तेरी आँखें बना डाली तेरा चेहरा बना डाला
Ankit Maurya
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तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन
इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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बस इक ज़रा निगाह उचटती सी डाल कर
वो कह रहे हैं इतने में खर्चा निकालिए
Sarfraz Nawaz
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तुम्हारी इक झलक से रंग उल्फत के उड़ाए हैं
नज़ारों की नज़ाकत को ज़रा देखो मेरी जानाँ
Aniket sagar
बरसों बा'द दिखा चहरा तो समझे हम
कैसे इक तस्वीर पुरानी होती है
Shriyansh Qaabiz
ठहर जाती हैं क्यूँ नज़रें वहाँ पर
जहाँ बैठी थी तुम जुल्फ़ें सुखाकर
Umesh Maurya
हसीं ख़्वाबों को अपने साथ में ढोती हुई आंँखे
बहुत प्यारी लगी हम को तेरी सोती हुई आंँखे

मोहब्बत में ये दो क़िस्से सुना है रोज़ होते हैं
कभी हँसता हुआ चेहरा कभी रोती हुई आंँखे
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Naimish trivedi
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नज़रें हो गड़ीं जिन की वसीयत पे दिनो-रात
माँ-बाप कि 'उम्रों कि दुआ ख़ाक करेंगे
Asad Akbarabadi
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खड़े होकर कहा ये आइने के रु-बा-रु मैं ने
शजर तुम को कहीं मिल जाए मुझ को इत्तिला करना
Shajar Abbas
मुझ पर निगाह-ए-नाज़ का जब जादू चल गया
मैं रफ़्ता रफ़्ता क़ैस की सोहबत में ढल गया

ज़ुल्फें उन्होंने खोल के बिखराई थी शजर
फिर देखते ही देखते मौसम बदल गया
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Shajar Abbas
वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे
एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे

उस की आँखें उस की बातें उस के लब वो चेहरा उस का
हम उस की हर एक अदास अपना हिस्सा माँग रहे थे
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Shikha Pachouly
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चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे
बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे

इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे
ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
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Vikram Gaur Vairagi
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देखने के लिए सारा आलम भी कम
चाहने के लिए एक चेहरा बहुत
Asad Badayuni
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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही
Faiz Ahmad Faiz
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निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ
किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले
Aks samastipuri
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इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता
कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ
Moghisuddin Fareedi
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तब्दीलियों का नश्शा मुझ पर चढ़ा हुआ है
कपड़े बदल रहा हूँ चेहरा बदल रहा हूँ
Alam Khursheed
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किसी को ढूँडते हैं हम किसी के पैकर में
किसी का चेहरा किसी से मिलाते रहते हैं
Alam Khursheed
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मुझे दिखता नहीं आईने में अपना चेहरा
इक तुझे ढूँढ़ने में ख़ुद को भी खोया है बहुत
Amaan Pathan
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पाँव साकित हो गए 'सरवत' किसी को देख कर
इक कशिश महताब जैसी चेहरा-ए-दिलबर में थी
Sarvat Husain
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तुम्हें भी दिखेगा कभी शाह का असली चेहरा
तुम्हारी भी आँखों से पट्टी हटेगी किसी दिन
Haresh Vanza
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न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब-ओ-हुनर
पड़ी अपनी बुराइयों पर जो नज़र तो निगाह में कोई बुरा न रहा
Bahadur Shah Zafar
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कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी
कुछ मुझे भी ख़राब होना था
Asrar Ul Haq Majaz
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अपना पता मिले न ख़बर यार की मिले
दुश्मन को भी न ऐसी सज़ा प्यार की मिले

उन को ख़ुदा मिले, है ख़ुदा की जिन्हें तलाश
मुझ को बस इक झलक मेरे दिलदार की मिले
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Kaifi Azmi
उस की निगाह-ए-नाज़ से आगे निकल गए
या'नी फ़रेब-साज़ से आगे निकल गए

हम से भी रोक लेने की ज़हमत नहीं हुई
तुम भी हर इक लिहाज़ से आगे निकल गए
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Vikas Sahaj
दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में
इक आईना था टूट गया देख-भाल में
Seemab Akbarabadi
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तू अकेला है बंद है कमरा
अब तो चेहरा उतार कर रख दे
Sheen Kaaf Nizam
सब के शानों पे एक चेहरा था
जिन पे सूरत बनी हुई थी मेरी
Anjum Saleemi
इस तरह के लब कौन तराशेगा दोबारा
इस तरह का चेहरा तो किसी का नहीं बनना
Aamir Sohail
ये झाँक लेती है दिल से जो दूसरे दिल में
मेरी निगाह में सारा कमाल दर्द का है
Farhat Abbas Shah
तुम्हारी एक झलक के लिए दिल बे-क़रार रहेगा
कभी पटना आओ मुझे तुम्हारा इंतिज़ार रहेगा

अगर कभी थक जाओ मोहब्बत से तो बता देना
हमारी मोहब्बत में भी छुट्टी वाला इतवार रहेगा
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MANOBAL GIRI
एक ख़त्म नहीं होता कि रग-ए-जां दबाने को
कोई नया मसअला तैयार रहता है

जाने तू कैसी अदालत का मुंसिफ़ है
तेरी निगाह में हर शख़्स गुनहगार रहता है
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Sushrut Tiwari
अभी तक मैं अगर उस के दिल से उतरा नहीं
फिर मेरे लिए तो इस सेे ज़्यादा कुछ बुरा नहीं

एक जैसे सात चेहरे तो मुमकिन है लेकिन
मिरे ख़याल से तुम जैसा कोई दूसरा नहीं

वो रूठके अगर चाहती है ,, मैं मनाऊं उसे
तो फिर ये प्यार है उस का ,, नख़रा नहीं

महोब्बत करना चाहते हो करो शौक़ से करो
मियाँ मैं कहता हूँ इस
में कुछ भी बुरा नहीं

मिरे दोस्त ये किस की तस्वीर उठा लाए हो
ये सूट तो उसी का है, मगर चेहरा नहीं

मैं इश्क़ के मोहल्ले में गया था तन्हाई बहुत थी
ये तो अच्छा हुआ मैं ज़्यादा दिन ठहरा नहीं

"करन" तुम मोहब्बत में पूरे पागल हो जाओगे
ये सारी दुनिया का शिकवा है सिर्फ़ मेरा नहीं
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karan singh rajput
टूट जाया करते हैं सितारे भी जिन्हें देख कर
बता किस हौसले से उन सेे नज़रें मिलाएं हम
Animesh Choubey
उलझी जो उन सेे नज़रें, उलझती ही चली गई
थमी जो दिल की धड़कन थमती ही चली गई

होंठों से बरसती रही तबस्सुम बनकर चांदनी
जो खुलती गई ज़ुल्फ़ें, रात गहराती चली गई
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Animesh Choubey
मैं मुसव्विर की कला को एकटक तकता रहा
रंग कुछ था और चेहरा कुछ बयाँ करता रहा
Achyut Amogh
कुछ तू ही मेरे दर्द का मज़मून समझ ले
हँसता हुआ चेहरा तो ज़माने के लिए है
Sultan
देखने को फिर मिलेगा तेरा चेहरा
सोच कर ये फिर गली से तेरी गुजरे
Prashant Sitapuri
रात तुम्हारी याद में गुज़रे दिन दफ़्तर खा जाता है
एक तुम्हारा चेहरा ज़ेहन में अक्सर आता जाता है

तुम को तुम हो मुझ को मैं हूँ हम की कोई जगह नहीं
एक बेचारा दिल है मेरा ख़्वाहिश में मर जाता है
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Aryan Goswami
उस घूँघट में इक चेहरा है उस चेहरे पे इक तिल भी है
उस तिल पे हमारी जान फिदा कुरबान उसी पर दिल भी है

वो सत्रह आशिक़ क़त्ल हुए इन तेरी फ़रेबी नज़रों से
इक हद तक तो मासूम तू है पर इक हद तक क़ातिल भी है
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Shubham Seth
चाँद चेहरा मुझे क़बूल नहीं
अब समझने में कोई भूल नहीं

आँख बस आँख ही है झील नहीं
होंठ बस होंठ ही हैं फूल नहीं
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Sandeep Thakur
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जब से तेरी निगाह में सजने लगे है हम
ख़ुद को बड़ा हसीन समझने लगे है हम
Ali Mohammed Shaikh
जाने क्यूँँ कुछ और दिखता ही नहीं
सामने जब चेहरा तेरा होता है
karan singh rajput
परेशाँ हो के उस के दर पे जब इंसान जाता था
ख़ुदा तब और था शायद जो सबकी मान जाता था

तू पहला शख़्स है जिस सेे कि धोखा खा गया वरना
मैं चेहरा देख कर इंसान को पहचान जाता था
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Rituraj kumar
ये कैसा जादू तू ने कर दिया है मुझ पे मेरी जाँ?
किसी को भी मैं देखूँ चेहरा तेरा याद आता है
karan singh rajput
एक चेहरा मिरा दर्द-ए-दिल बन गया
ठीक था आदमी मुज़्महिल बन गया

इत्तिफ़ाक़न मैं गुज़रा था इक कूचे से
फिर गुज़रना ही वो मुस्तक़िल बन गया
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Nakul kumar
तुम्हारा चेहरा नज़र से नहीं उतरता है
नज़र उतारते हो या नज़र लगाते हो
Ramnath Shodharthi
ख़ुद-ब-ख़ुद ही खिल उठा चेहरा मेरा
प्यार से बहनों ने बाँधी राखी जब
karan singh rajput
घूमता है वो आईना ले कर
पास जिस के न ख़ुद का चेहरा है
Saarthi Baidyanath
एक चेहरा यूँँ ज़ेहन में छप गया है
जैसे की ड्राइंग पे कोई टूटा सा घर
karan singh rajput
बंद करता हूँ जब भी आँखों को
तेरा चेहरा दिखाई देता है
''Akbar Rizvi"
ये आफ़ताब-ओ-क़मर कहकशाँ ख़ुदा की क़सम
तुम्हारे चेहरा-ए-अनवर से नूर लेते हैं
Shajar Abbas
मुद्दत बा'द भी अनसुलझा है मस'ला पहली वाली का
ख़्वाब में अक्सर दिख जाता है चेहरा पहली वाली का

वो जो शर्ट दिया था उस ने कल जब पहना दोबारा
जेब के अंदर रखा मिला है झुमका पहली वाली का
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Ashraf Ali
आँख से टपका था रेज़ा दर्द का
हाथ में मेरे था तारा दर्द का

ख़ुशनसीबी समझो या फिर हादसा
मैं ने कल देखा था चेहरा दर्द का
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Ritika reet
धुँधली निगाह, बूढ़ा बदन और झुर्रियाँ
यूँँ लग रहा है जैसे के मरने लगे हैं हम
Mohammad Aquib Khan
कुछ याद नहीं आता फिर भी रोना आता है
दो चार दिनों की एक मुलाक़ात रुलाती है

तेरा चेहरा हँस हँस के मुझ को पागल कर दे
तेरी मीठी-मीठी-सी हर बात रुलाती है
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Govind kumar
उस की बातें याद नहीं , चेहरा भी हम भूल चुके हैं
अब उस लड़की की तस्वीर हटा सकते हो कमरे से
Surya Tiwari
कई अर्से महीने बीतने के बा'द आया है
तेरा चेहरा मुझे कैसे न जाने याद आया है
Aniket sagar
कही है बात मैं ने भी सभी प्यारी मगर फिर भी
जिसे देखो तेरी आँखें, तेरा चेहरा ही पढ़ता है
Alankrat Srivastava
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हैरत करूँँ मैं क्यूँ तेरी रविश पे
हर शय में है झलक नाज़-ओ-अदा की

उजड़े जो मय-कदा, मयकश मरेंगे
मयकश को फ़िक्र 'हैदर' मय-कदा की
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Umrez Ali Haider
सोचता हूँ के सब फ़ना कर दूँ
खेंच के अपना दिल जुदा कर दूँ

अब मोहब्बत से नज़रें फेर लीं हैं
तू मिले भी तो अब मना कर दूँ
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Faiz Ahmad
जिस को देखे वो जब भी उस का वो हो जाता है
शीशा कुछ नहीं जब भी चेहरा वो हो जाता है

प्यारी सी ग़ज़ल है वो, शे'र उस की आँखें हैं
जब ग़ज़ल से गुज़रे तो मिसरा वो हो जाता है
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Yogamber Agri
मेरी निगाह में अक्सर जो तुम सेे बनता है
बहुत हसीं है वो मंज़र जो तुम सेे बनता है
Ananya Rai Parashar
कोई मिरी सादा-दिली से ख़ुश नहीं
कोई मिरी नग़्मा-गरी से ख़ुश नहीं

हर चेहरा कुछ बोलता है इस लिए
कोई मिरी दानिश-वरी से ख़ुश नहीं
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Dileep Kumar