Musafir Shayari - Safar, raaste aur tanha musafir ke ehsaas

Musafir shayari captures the essence of life as a journey, where every raahi walks through changing paths, emotions, and destinations. It reflects solitude, discovery, and the bittersweet beauty of safar. Whether you feel lost, hopeful, or reflective, these verses connect deeply with the heart of every traveler.

musafir shayari
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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safar shayari
मैं सोचता हूँ बहुत ज़िंदगी के बारे में
ये ज़िंदगी भी मुझे सोच कर न रह जाए
Abhishek shukla
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raahi shayari
आते आते मिरा नाम सा रह गया
उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया
Waseem Barelvi
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rahguzar shayari
अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा
Mahshar Badayuni
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musafiri shayari
अपने मरकज़ से अगर दूर निकल जाओगे
ख़्वाब हो जाओगे अफ़्सानों में ढल जाओगे

हम-सफ़र ढूँडो न रहबर का सहारा चाहो
ठोकरें खाओगे तो ख़ुद ही सँभल जाओगे
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Iqbal Azeem
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मैं तेरे साथ सितारों से गुज़र सकता हूँ
कितना आसान मोहब्बत का सफ़र लगता है
Bashir Badr
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मकाँ तो है नहीं जो खींच दें दीवार इस दिल में
कोई दूजा नहीं रह पाएगा अब यार इस दिल में

जहाँ भर में लुटाते फिर रहे है कम नहीं होता
तुम्हारे वास्ते इतना रखा था प्यार इस दिल में
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Bhaskar Shukla
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रह भी सकता है कहीं नाम तेरा लिक्खा हुआ
सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते
Nadir Ariz
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मेरे होंठों के सब्र से पूछो
उस के हाथों से गाल तक का सफ़र
Mehshar Afridi
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मैं सो रहा हूँ तेरे ख़्वाब देखने के लिए
ये आरज़ू है कि आँखों में रात रह जाए
Shakeel Azmi
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ख़्वाब के आस पास रह रह कर
थक गया हूँ उदास रह रह कर
Shahbaz Rizvi
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न हो क़मीज़ तो घुटनों से पेट ढक लेंगे
ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए
Dushyant Kumar
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सफ़र हालाँकि तेरे साथ अच्छा चल रहा है
बराबर से मगर एक और रास्ता चल रहा है
Shariq Kaifi
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धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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जीना मुश्किल है के आसान, ज़रा देख तो लो
लोग लगते हैं परेशान, ज़रा देख तो लो

इन चराग़ों के तले ऐसे अँधेरे क्यूँँ हैं?
तुम भी रह जाओगे हैरान, ज़रा देख तो लो
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Javed Akhtar
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मंज़िल मिली तो उस की कमी हम को खा गई
सामान रास्ते में जो खोना पड़ा हमें
Abbas Qamar
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नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही
Faiz Ahmad Faiz
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'फ़ैज़' थी राह सर-ब-सर मंज़िल
हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए
Faiz Ahmad Faiz
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कटते भी चलो, बढ़ते भी चलो, बाज़ू भी बहुत हैं, सर भी बहुत
चलते भी चलो कि अब डेरे मंज़िल ही पे डाले जाएँगे
Faiz Ahmad Faiz
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अब अपना इख़्तियार है चाहे जहाँ चलें
रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम
Faiz Ahmad Faiz
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न मंज़िलों को न हम रहगुज़र को देखते हैं
अजब सफ़र है कि बस हम-सफ़र को देखते हैं
Ahmad Faraz
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हम-सफ़र चाहिए हुजूम नहीं
इक मुसाफ़िर भी क़ाफ़िला है मुझे
Ahmad Faraz
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न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा
Rahat Indori
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बा-हुनर हो के कुछ न कर पाना
रेज़ा-रेज़ा बिखर के ढह जाना

मुझ को बेहद उदास करता है
ख़ास लोगों का आम रह जाना
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Vishal Bagh
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मैं अपने आप में गहरा उतर गया शायद
मिरे सफ़र से अलग हो गई रवानी मिरी
Abbas Tabish
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सफ़र के बा'द भी ज़ौक़-ए-सफ़र न रह जाए
ख़याल ओ ख़्वाब में अब के भी घर न रह जाए
Abhishek shukla
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चलते हुए मुझ में कहीं ठहरा हुआ तू है
रस्ता नहीं मंज़िल नहीं अच्छा हुआ तू है
Abhishek shukla
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सारे दुख सो जाएँगे लेकिन इक ऐसा ग़म भी है
जो मिरे बिस्तर पे सदियों का सफ़र रख जाएगा
Azm Shakri
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निगाहें करती रह जाती हैं हिज्जे
वो जब चेहरे से इमला बोलता है
Fahmi Badayuni
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सफ़र से लौट जाना चाहता है
परिंदा आशियाना चाहता है
Shakeel Jamali
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अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं
Nida Fazli
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सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
Nida Fazli
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सफ़र में मुश्किलें आएँ तो जुरअत और बढ़ती है
कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है
Nawaz Deobandi
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ज़िंदगी यूँँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा
Gulzar
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दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
Bashir Badr
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मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया
Majrooh Sultanpuri
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शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
Firaq Gorakhpuri
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दिल की तमन्ना थी मस्ती में मंज़िल से भी दूर निकलते
अपना भी कोई साथी होता हम भी बहकते चलते चलते
Majrooh Sultanpuri
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'मजरूह' क़ाफ़िले की मिरे दास्ताँ ये है
रहबर ने मिल के लूट लिया राहज़न के साथ
Majrooh Sultanpuri
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क्या बताऊँ कैसा ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने किया
उम्र भर किस किस के हिस्से का सफ़र मैं ने किया

तू तो नफ़रत भी न कर पाएगा इस शिद्दत के साथ
जिस बला का प्यार तुझ सेे बे-ख़बर मैं ने किया
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Waseem Barelvi
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झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए
और मैं था कि सच बोलता रह गया
Waseem Barelvi
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हमीं तक रह गया क़िस्सा हमारा
किसी ने ख़त नहीं खोला हमारा

मुआ'फ़ी और इतनी सी ख़ता पर
सज़ा से काम चल जाता हमारा
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Shariq Kaifi
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जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता
Javed Akhtar
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डर हम को भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से
लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा
Javed Akhtar
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आप की सादा-दिली से तंग आ जाता हूँ मैं
मेरे दिल में रह चुके हैं इस क़दर हुश्यार लोग
Nomaan Shauque
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मैं था सदियों के सफ़र में 'अहमद'
और सदियों का सफ़र था मुझ में
Ahmad Khayal
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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बाजी बदी थी उस ने मेरे चश्म-ए-तर के साथ
आख़िर को हार हार के बरसात रह गई
Khwaja Meer Dard
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वो राही हूँ पलभर के लिए, जो ज़ुल्फ़ के साए में ठहरा,
अब ले के चल दूर कहीं, ऐ इश्क़ मेरे बेदाग मुझे ।
Raja Mehdi Ali Khan
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बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँँ
कार-ए-जहाँ दराज़ है अब मिरा इंतिज़ार कर
Allama Iqbal
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सफ़र में आख़िरी पत्थर के बा'द आएगा
मज़ा तो यार दिसंबर के बा'द आएगा
Rahat Indori
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यही तो एक तमन्ना है इस मुसाफ़िर की
जो तुम नहीं तो सफ़र में तुम्हारा प्यार चले
Aalok Shrivastav
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दामन झटक के वादी-ए-ग़म से गुज़र गया
उठ उठ के देखती रही गर्द-ए-सफ़र मुझे
Ali Sardar Jafri
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ऐ जज़्बा-ए-दिल गर मैं चाहूँ हर चीज़ मुक़ाबिल आ जाए
मंज़िल के लिए दो गाम चलूँ और सामने मंज़िल आ जाए
Behzad Lakhnavi
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हमारा दिल ज़रा उकता गया था घर में रह रह कर
यूँँही बाज़ार आए हैं ख़रीदारी नहीं करनी
Afzal Khan
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सफ़र में जब निकल आए हो तो इतनी शिकायत क्यूँ
सड़क थोड़ी बहुत तो बीच में तिरछी निकलती है
Pratap Somvanshi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया
न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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चले चलिए कि चलना ही दलील-ए-कामरानी है
जो थक कर बैठ जाते हैं वो मंज़िल पा नहीं सकते
Hafeez Banarasi
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आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए
वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है
Muneer Niyazi
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ज़िंदगी फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता को पा सकती नहीं
मौत ही आती है ये मंज़िल दिखाने के लिए
Hafeez Jalandhari
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ये आँसू ढूँडता है तेरा दामन
मुसाफ़िर अपनी मंज़िल जानता है
Asad Bhopali
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मुसाफ़िरों से कहो अपनी प्यास बाँध रखें
सफ़र की रूह में सहरा कोई उतर चुका है
Aziz Nabeel
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उन्हीं रास्तों ने जिन पर कभी तुम थे साथ मेरे
मुझे रोक रोक पूछा तिरा हम-सफ़र कहाँ है
Bashir Badr
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'फ़ैज़' थी राह सर-ब-सर मंज़िल
हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए
Faiz Ahmad Faiz
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खुलते-खुलते रह गई मेरी ज़बाँ
इक तमाशा होते-होते रह गया
Rajesh Reddy
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दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ
याद रह जाएगी ये रात क़रीब आ जाओ
Sahir Ludhianvi
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बहुत चल बसे यार ऐ ज़िंदगी
कोई दिन की मेहमान तू रह गई
Dagh Dehlvi
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बेनतीजा रह गईं दिल्ली में सारी बैठकें
अन्नदाता खेत की मेड़ों पे भूखे मर गए
Siraj Faisal Khan
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जब भी कोई मंज़िल हासिल करता हूँ
याद बहुत आती हैं तेरी ता'रीफ़ें
Tanoj Dadhich
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नहीं ये फ़िक्र कोई रहबर-ए-कामिल नहीं मिलता
कोई दुनिया में मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल नहीं मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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फ़िक्र-ए-ता'मीर' में न रह मुनइम
ज़िंदगानी की कुछ भी है बुनियाद
Meer Taqi Meer
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मंज़िलों का कौन जाने रहगुज़र अच्छी नहीं
उस की आँखें ख़ूब-सूरत है नज़र अच्छी नहीं
Abrar Kashif
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सब तेरे ही इश्क़ के बीमार थे चारों तरफ़
कुछ तेरे छूने से अच्छे हो गए, कुछ रह गए
Siddharth Saaz
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कहने देती नहीं कुछ मुँह से मोहब्बत मेरी
लब पे रह जाती है आ आ के शिकायत मेरी
Dagh Dehlvi
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कोई तुम्हारा सफ़र पर गया तो पूछेंगे
रेल देख के हम हाथ क्यूँ हिलाते हैं
Tehzeeb Hafi
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दिल आबाद कहाँ रह पाए उस की याद भुला देने से
कमरा वीराँ हो जाता है इक तस्वीर हटा देने से
Jaleel 'Aali'
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सफ़र के ब'अद भी मुझ को सफ़र में रहना है
नज़र से गिरना भी गोया ख़बर में रहना है
Aadil Raza Mansoori
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एक मुद्दत से हैं सफ़र में हम
घर में रह कर भी जैसे बेघर से
Azhar Iqbal
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सफ़र से लौट जाना चाहता है
परिंदा आशियाना चाहता है

कोई स्कूल की घंटी बजा दे
ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है
Read Full
Shakeel Jamali
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अपनी मंज़िल पे पहुँचना भी खड़े रहना भी
कितना मुश्किल है बड़े हो के बड़े रहना भी
Shakeel Azmi
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मिरे सीने पे सर रक्खा है तो ख़ामोश मत रह
मुझे बतला तुझे जो भी सुनाई दे रहा है
Vikram Gaur Vairagi
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मुसाफ़िरों के दिमाग़ों में डर ज़ियादा है
न जाने वक़्त है कम या सफ़र ज़ियादा है
Hashim Raza Jalalpuri
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रहबर भी ये हमदम भी ये ग़म-ख़्वार हमारे
उस्ताद ये क़ौमों के हैं में'मार हमारे
Unknown
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ख़ुद-कुशी करने में भी नाकाम रह जाते हैं हम
कौन अमृत घोल देता है हमारे ज़हर में
Anjum Ludhianvi
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कोई काँटा कोई पत्थर नहीं है
तो फिर तू सीधे रस्ते पर नहीं है

मैं इस दुनिया के अंदर रह रहा हूँ
मगर दुनिया मेरे अंदर नहीं है
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Zubair Ali Tabish
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई दे
लहजे को सच्चाई दे

दुनिया है जंगल का सफ़र
लछमन जैसा भाई दे
Read Full
Tariq Shaheen
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मुझे मालूम है माँ की दुआएँ साथ चलती हैं
सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैं ने देखा है
Aalok Shrivastav
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अच्छे शे'र सुनाने वाले लड़के सुन
अच्छे शाइ'र तन्हा ही रह जाते हैं
Ritesh Rajwada
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साल गुज़र जाता है सारा
और कैलन्डर रह जाता है
Sarfraz Zahid
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अभी से पाँव के छाले न देखो
अभी यारो सफ़र की इब्तिदा है
Ejaz Rahmani
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मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूँ मगर
सफ़र सफ़र है मिरा इंतिज़ार मत करना
Sahil Sahri Nainitali
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वो वक़्त का जहाज़ था करता लिहाज़ क्या
मैं दोस्तों से हाथ मिलाने में रह गया
Hafeez Merathi
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सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरा
मैं बूढ़ा होता जाता हूँ जवाँ होने की ख़ातिर
Zafar Iqbal
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत
कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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सामान तू ने रख लिया जाते हुए तमाम
लेकिन तेरा ध्यान मेरे पास रह गया
Fakhira batool
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हमेशा साथ सबके तो ख़ुदा भी रह नहीं सकता
बना कर औरतें उस ने ज़मीं को यूँँ किया जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
यही इक बात रह-रहकर मिरे दिल को सताती है
कि आख़िर क्यूँ वो रोया था बिछड़ने से ज़रा पहले
Muhammad Fuzail Khan
बनाने को अमाँ मैं भी बना देता हज़ारों, पर
बहानों से कहीं ज़्यादा मुझे मंज़िल थी ये प्यारी
Sandeep dabral 'sendy'
अच्छा था जो भी फ़िल्म में यूँ ही गुज़र गया
वो सीन जो ख़राब था आँखों में रह गया
Ankit Maurya
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तुझे छू कर अभी तक होश में हूँ
कमी कोई कहीं तो रह गई है
Abhay Mishra
जिसे मंज़िल बताया जा रहा था
वो रस्ते के सिवा कुछ भी नहीं है
Atul K Rai
सिवा इस के कुछ अच्छा ही नहीं लगता है शामों में
सफ़र कैसा भी हो घर को परिंदे लौट जाते हैं
Aarush Sarkaar
नहीं मैं रह नहीं सकता यहीं मैं कह नहीं सकता
किनारा है तभी हूँ मैं नहीं तो बह नहीं सकता

पुरानी एक इमारत हूँ कि क्या देखा नहीं मैं ने
किसी के छोड़ जाने से तो मैं यूँँ ढह नहीं सकता
Read Full
Praveen Bhardwaj
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सिर्फ़ तस्वीर रह गई बाक़ी
जिस में हम एक साथ बैठे हैं
Bilal Ameer Ahmad
जब चली ठंडी हवा बच्चा ठिठुर कर रह गया
माँ ने अपने ला'ल की तख़्ती जला दी रात को
Sibt Ali Saba
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सुब्ह-ओ-शाम अब हम को बस उदास रहना है
ग़मज़दों की मंज़िल का रास्ता उदासी है
Rohit tewatia 'Ishq'
सिर्फ़ तस्वीर रह गई बाक़ी
जिस में हम एक साथ बैठे हैं
Ataul Hasan
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लिक्खा गया न कुछ कभी मुझ सेे जवाब में
रक्खा ही रह गया है तेरा ख़त किताब में
Ankit Maurya
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