Zulm Shayari - Dard, injustice aur sitam ke ehsaas ko bayan karti shayari

Zulm shayari captures the pain of injustice, oppression, and emotional suffering. These lines reflect the harsh realities of life where sitam and beinsaafi leave deep marks on the heart. Whether it is personal betrayal or societal injustice, zulm poetry gives a powerful voice to silent pain.

छोड़ कर जाने का मंज़र याद है
हर सितम तेरा सितमगर याद है

अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर
अब भी तेरा रोल नंबर याद है
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Salman Zafar
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ख़याल में भी उसे बे-रिदा नहीं किया है
ये ज़ुल्म मुझ सेे नहीं हो सका नहीं किया है
Ali Zaryoun
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मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
Sahir Ludhianvi
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क्या सितम है कि अब तिरी सूरत
ग़ौर करने पे याद आती है
Jaun Elia
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सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
Jaun Elia
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हर एक सितम पे दाद दी हर ज़ख़्म पे दुआ
हम ने भी दुश्मनों को सताया बहुत दिनों
Nawaz Deobandi
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सुतून-ए-दार पे रखते चलो सरों के चराग़
जहाँ तलक ये सितम की सियाह रात चले
Majrooh Sultanpuri
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सर पर हवा-ए-ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ
अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ
Majrooh Sultanpuri
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रोने को तो ज़िंदगी पड़ी है
कुछ तेरे सितम पे मुस्कुरा लें
Firaq Gorakhpuri
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ख़ून से सींची है मैं ने जो ज़मीं मर मर के
वो ज़मीं एक सितम-गर ने कहा उस की है
Javed Akhtar
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ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है बढ़ता है तो मिट जाता है
ख़ून फिर ख़ून है टपकेगा तो जम जाएगा
Sahir Ludhianvi
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दिल बना दोस्त तो क्या क्या न सितम उस ने किए
हम भी नादां थे निभाते रहे नादान के साथ
Shakeel Badayuni
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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है
Afzal Khan
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सितम भी मुझ पे वो करता रहा करम की तरह
वो मेहरबाँ तो न था मेहरबान जैसा था
Anwar Taban
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ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी
Kaleem Aajiz
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टक गोर-ए-ग़रीबाँ की कर सैर कि दुनिया में
उन ज़ुल्म-रसीदों पर क्या क्या न हुआ होगा
Meer Taqi Meer
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पूरी काइ‌नात में एक क़ातिल बीमारी की हवा हो गई
वक़्त ने कैसा सितम ढाया कि दूरियाँ ही दवा हो गईं
Unknown
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ये तो बढ़ती ही चली जाती है मीआद-ए-सितम
ज़ुज़ हरीफ़ान-ए-सितम किस को पुकारा जाए

वक़्त ने एक ही नुक्ता तो किया है ता'लीम
हाकिम-ए-वक़त को मसनद से उतारा जाए
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Jaun Elia
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उम्र के आख़िरी मक़ाम में हम
मिल भी जाए तो क्या ख़ुशी होगी

क्या सितम तुम को देखने के लिए
हम को दुनिया भी देखनी होगी
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Vikram Sharma
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क्या सितम है, लोग मेरे दुख में भी बस
फाइलातुन वाइलातुन देखते है
Saad Ahmad
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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है
Afzal Khan
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यूँँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उन की रस्म नई है, न अपनी रीत नई

यूँँ ही हमेशा खिलाए हैं हम ने आग में फूल
न उन की हार नई है, न अपनी जीत नई
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Faiz Ahmad Faiz
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इस गए साल बड़े ज़ुल्म हुए हैं मुझ पर
ऐ नए साल मसीहा की तरह मिल मुझ से
Sarfraz Nawaz
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ज़माना ज़ुल्म करता है ख़ुशी से
कभी तुझ को कभी मुझ को सताए
Meem Alif Shaz
है ये कैसा सितम मौला ये हैं दुश्वारियाँ कैसी
जहाँ पर रोना था हम को वहीं पर मुस्कुराना है
Aqib khan
क्या सितम करते हैं मिट्टी के खिलौने वाले
राम को रक्खे हुए बैठे हैं रावण के क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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जो अंजान थे वो मेरे यार निकले
मगर जो भी अपने थे बेकार निकले

ज़मीं खा गई उन वफ़ाओं को आख़िर
सितम ये हुआ हम गुनहगार निकले
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Hameed Sarwar Bahraichi
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डाली है ख़ुद पे ज़ुल्म की यूँँ इक मिसाल और
उस के बग़ैर काट दिया एक साल और
Subhan Asad
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तबक़ों में रंग-ओ-नस्ल के उलझा के रख दिया
ये ज़ुल्म आदमी ने किया आदमी के साथ
Bakhtiyar Ziya
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सुख़न का जोश कम होता नहीं है
वगरना क्या सितम होता नहीं है

भले तुम काट दो बाज़ू हमारे
क़लम का सर क़लम होता नहीं है
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Baghi Vikas
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वो कहते हैं हर चोट पर मुस्कुराओ
वफ़ा याद रक्खो सितम भूल जाओ
Kaleem Aajiz
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सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना
क़ुबूल हम ने किए जिस के ग़म ख़ुशी की तरह

कभी न सोचा था हम ने 'क़तील' उस के लिए
करेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह
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Qateel Shifai
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मिली जिन से जफ़ाएँ उन को भी आदाब करना था
हर इक पत्थर हुए दिल को पुनः मेहताब करना था

सितम क्या है कि ख़ुद बेज़ार बैठा है वो लड़का आज
जिसे कल ग़ैर की बस्ती को भी शादाब करना था
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Rehaan
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तू याद आया तेरे जौर-ओ-सितम लेकिन न याद आए
मोहब्बत में ये मा'सूमी बड़ी मुश्किल से आती है
Firaq Gorakhpuri
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काठ की हाँडी अब न चढ़ेगी ज़ुल्म के चूल्हे पर यारो
वक़्त का पहिया घूमेगा मुंसिफ़ भी जेल में जाएगा
Amaan Pathan
हमें भी वक़्त ने पत्थर सिफ़त बना डाला
हमीं थे मोम की सूरत पिघलने वाले लोग

सितम तो ये कि हमारी सफ़ों में शामिल हैं
चराग़ बुझते ही ख़ेमा बदलने वाले लोग
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Iqbal Ashhar
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कुछ न कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुख़न
ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है
Muzaffar Warsi
ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है
ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है
Munawwar Rana
मेरी जाँ कोई ज़ुल्म न कर ख़ुदा के लिए
यहाँ कोई ग़ुरूर नहीं रहता सदा के लिए
Praveen Bhardwaj
सितम कि वो कभी आया नहीं मिरी जानिब
अना कि मैं भी कभी ढूँढ़ने न निकला उसे
Dharmesh Solanki
हमारी वफ़ा का वो इंसाफ़ होगा
तिरी आँख से जब ये काजल छटेंगे
Aarush Sarkaar
क्या भला हम को पता हो किसी मौसम के सितम
बाप साया किए हम पर जो खड़ा रहता है
Haider Khan
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क्या बतायेँ क्या सितम है ज़िन्दगी में
ये समझिये जी रहे हैं हर घड़ी में
Prashant Sitapuri
वक़्त का ये हसीं सितम तो नहीं
ज़िन्दगी का ग़लत कदम तो नहीं

बीतता जा रहा जो तुम्हारे बिना
क्या पता आठवाँ जनम तो नहीं
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Rishabh Katariya
सितम ये था मुझे समझा नहीं वो
ख़ुशी ये है मुझे पढ़ते हो तुम सब
Kush Pandey ' Saarang '
यूँँ ज़ोर से ना दे दुहाई, ज़ुल्म सहता शख़्स तू
रूठे ख़ुदा ना और भी, तेरा ख़ुदा है सो रहा
Zain Aalamgir
सब याद रहता है मुझे
ये ज़ुल्म भी तारी यहाँ
Zain Aalamgir
ख़रीदी थी जो इक पाजेब उस के वास्ते मैं ने
सितम ये की मैं उस को आज तक वो दे नहीं पाया
karan singh rajput
इस दर्द को भी अपना बनाया जा सकता है
हँस के भी हर सितम को उठाया जा सकता है
karan singh rajput
कोई उठता नहीं मज़लूम का हामी बनकर
कब तलक ज़ुल्म पा ख़ामोश रहेगी दुनिया
''Akbar Rizvi"
ओ सितमगर ज़रा कम सितम कर
खा तरस मुझ पे, थोड़ा रहम कर
Prit
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माया-ओ-भरम के सिवा कुछ न था
इश्क़, सितम के सिवा कुछ न था
Vikas Sangam
सितमगर के जब से सितम रुक गए हैं
ग़ज़ल थम गई है क़लम रुक गए हैं

मेरे शहर में आ के वो ग़ैर के घर
चलो शुक्र है कम से कम रुक गए हैं
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Sultan shaafi
ज़िन्दगी अपने सितम को ज़रा देख
क्या तुझे भी ख़ुदा का ख़ौफ़ नहीं
Shivam Shaw
देर तक कोई भी एहल-ए-ज़ुल्म यूँँ टिकता नहीं
चार सू फैली हुई है कर्बला की रौशनी
''Akbar Rizvi"
कोई ग़म है न सितम है न ही तन्हाई है
हम को फ़ुर्सत है कि हम याद तुम्हें करते हैं
Akash Rajpoot
हमारे क़त्ल की साजिश में अकरबा थे सभी
था कौन-कौन ये शामिल बयान कैसे करूँँ

फ़रेब-ओ-रंज तेरे बे-वफ़ाई और सितम
ये पूछता है मेरा दिल बयान कैसे करूँँ
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Shajar Abbas
जो घर, गली, शहर, देश खोया ज़रूर लेंगे
नए रखो नाम हम पुराना ज़रूर लेंगे

सुनो कि तुम जितना सह सको उतना ज़ुल्म करना
ये याद रखना, के हम भी बदला ज़रूर लेंगे
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Abuzar kamaal
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एक सितम ये कि मुझे मंज़िल का अंदाज़ा नहीं
एक सितम ये कि मेरा वो हम-सफ़र आया नहीं
Hasan Raqim
ख़ुदा से रू-बा-रू होना हैं रोज़-ए-महशर में
ये बात सोच लो तुम मुझ पा ज़ुल्म ढाते हुए
Shajar Abbas
ख़ुदा तेरे वजूद से इनकार नहीं है मुझ को
मगर सवाल तो तेरे इंसाफ-परस्त का है
A R Sahil "Aleeg"
ख़ुशी है कि मेरे दिल में ही रह रहे हो तुम
सितम है कि तुम को ढूँढ़ते फिर रहे हैं हम
Intzar Akhtar
ये सूरत को देखा जो करते हो इतनी
कभी दिल भी देखा करो तुम सितम-गर
Umrez Ali Haider
ग़ज़ब हिम्मत सुब्ह माँ से विदा बेटी हुई होगी
बिछुड़ना माँ अभी उस सेे महज़ सपना समझती है

सितम गर ये मुझे झूठा कहा तुम ने कयामत है
क़सम खाकर कहूँ तो माँ अभी सच्चा समझती है
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Rudransh Trigunayat
रहम, इंसाफ़ से ख़ाली जब हो ये दिल
फिर वो कुछ और ही है पर इंसाँ नहीं है
A R Sahil "Aleeg"
आँखें मूँदे रहे लब को सीते गए
पेट ख़ाली रहे ग़म को पीते गए

शर्म करते हैं अब ख़ुद की हस्ती पे हम
ज़ुल्म सहते रहे और जीते गए
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Amaan Javed
शब-ए-फ़िराक़ पूरी रात सोना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम तिरे ख़याल बो रहे हैं हम

शब-ए-विसाल पूरी रात जगना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम सुकूँ की नींद सो रहे हैं हम
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Deep kamal panecha
शिकायत तो बहुत है और
सितम ये, कर नहीं सकता
A R Sahil "Aleeg"
ज़मीन रोती है ये आसमान रोता है
हमारे हाल पे सारा जहान रोता है

किया है वार तब्बसुम से ऐसे कमसिन ने
सितम के साथ में तीर-ओ-कमान रोता है
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Shajar Abbas
एक गुल ने भी चुभोया है बहुत ख़ार मुझे
क्या सितम है, उसी से हो गया है प्यार मुझे
Paheli
पहला सितम शफ़ा की दवा एक शख़्स था
दूजा सितम है ये कि दवा कुछ न कर सकी
Prashant Sitapuri
अगर जहाँ में मोहब्बत पे ज़ुल्म होता है
लहद में क़ैस की मय्यत बहुत तड़पती है
Shajar Abbas
करेंगे ज़ुल्म उन पर और उन्हें हम भूल जाएँगे
हमें ये बात भी उन को इशारों में बतानी है
Faizan Faizi
मेरा जो भी है सबब-ए-ग़म तू ही है
और उस पे ये सितम मरहम तू ही है

हो मेरी कितनों से भी बातें हुआ क्या
एक ही है पर मेरा हमदम तू ही है
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Harsh Raj
वफ़ा याद कर जान मेरी
बता फिर सितम यार मेरा
MOHSIN JAHANGIR
इक ही ग़म काफ़ी है इंसाँ को यहाँ बर्बाद करने को
और सितम ये, ज़िन्दगी से ज़िन्दगी भर लड़ते रहना है
A R Sahil "Aleeg"
सितम की आँधियाँ मुझ को नहीं बुझा सकतीं
हवा के दोश पे जलता हुआ चराग़ हूँ मैं
Shajar Abbas
बदल कर सितम-गर तरक़्क़ी हुई और
बहुत कुछ हुआ पाँच सालों के अंदर

दफ़्न कर दिए है सभी राज़ ख़ुद के
किताबों में मेरी सवालों के अंदर
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Aashish kargeti 'Kash'
सितम जो मुझ पे हुआ है शजर मोहब्बत में
अगर ये क़ैस पे होता वो मर गया होता
Shajar Abbas
सितम हुए हैं ऐसे भी
दुखी हैं मेरे जैसे भी

दुआ समझ या ज़िद ख़ुदा
वो शख़्स दे दे कैसे भी
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Adnan Raza
सितम का सितमगर सितम की उदासी
कहाँ जा रही है सनम की उदासी

ख़ुशी है ख़ुशी है ख़ुशी है सुनो तुम
सभी है यहाँ पर भरम की उदासी
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Anurag Pandey
हवस की आग में जलकर जो लड़की डूब जाती है
ख़ुदा देता सितम तो जल्दी शादी ही नहीं होती
Nirbhay Nishchhal
अपनी हिम्मत का अब चराग़ जलाना होगा
जु़ल्म की आँख में अब आँख दिखाना होगा

जिस तरफ़ देखो है पामाल हुआ हक़ सबका
उठो अब ख़ुद का ही हक़ छीन के पाना होगा
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Ishq Allahabadi
मोहब्बत के सितम का हर कोई हक़दार है निर्भय
भटक जाते हैं वो भी जो मोहब्बत भी नहीं करते
Nirbhay Nishchhal
माहिर है वो छिपाने में हर वारदात को
ढा के सितम कभी वो सितमगर नहीं हुआ
shaan manral
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क्या सितम है तुम पे ग़ज़लें लिख रहें हैं
हम को ये दुख तो कभी लिखना नहीं था
Dileep Kumar
जला यहाँ चराग़ तो दिखा ये कौन लोग हैं
ख़मोश ज़ुल्म पर हैं सब यहाँ ये मौन लोग हैं
Kajiimran
है हम पर भी ग़म की सलाख़ों की नेमत
जो लब पे सितम हैं ज़बानों में आँसू
Rohit tewatia 'Ishq'
अदालत का ये चेहरा तो नहीं था
यहाँ पे ज़ुल्म गहरा तो नहीं था

सभी को थी मोहब्बत मज़हबों से
किसी मज़हब को ढाया तो नहीं था
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Meem Alif Shaz
करना जो था कर गया हूँ
आख़िरी हद पर गया हूँ

जब्र होता मुझ पर इतना
ज़ुल्म जितना कर गया हूँ
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Sayeed Khan
पहली सफ़ में जो खड़े हैं क़त्ल का इंसाफ लेने
गर जो मुर्दा बोलता होता तो फिर सफ़ साफ होती
Aqib khan
ग़लत आदत है आँखों की बड़ा ये ज़ुल्म करती हैं
जिन्हें मैं पा नहीं सकता उन्हें फिर देखना ही क्यूँ
Ankesh Arjun
उम्मत ने ज़ुल्म ढाया ये आल-ए-रसूल पर
साया तलक ना छोड़ा मज़ार-ए-बतूल पर

चारों तरफ़ है फैली मदीने में रौशनी
पर तीरगी है आज भी क़ब्र-ए-बतूल पर
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Shajar Abbas
दिल के इतने टुकड़े हैं बीने भी नहीं जाते
बे वफ़ा सितमगर ये क्या सितम किया तू ने
Shajar Abbas
सितम को कर दिया रुस्वा तबस्सुम-ए-लब से
अली के शे'र तेरा फन बड़ा निराला है
Shajar Abbas
थोड़ा सा मग़रूर ही था तो अच्छा था
सोचता हूँ मैं दूर ही था तो अच्छा था

क्या क्या सितम किए हैं इस नज़दीकी ने
अब लगता है दूर ही था तो अच्छा था
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Ambar
सितम तो ये है कि यारों हमारे होते हुए
हमारा चाँद कोई और देखता होगा
Akash Rajpoot
सितम दुनिया ने हम पर इतने ढाए
कि गिनते हम रहे पर गिन न पाए

न जाने क्या हुआ ये रोते रोते
किसी को याद कर के मुस्कुराए
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Rachit Agarwal
सुकूँ आराम और नींदें उड़ा कर बैठ जाएँगे
तेरी ख़ातिर यहाँ सब कुछ लुटा कर बैठ जाएँगे

सितम कितने ही कर ले यार तू हम हैं तेरे आशिक़
झगड़ कर भी तेरे पहलू में आ कर बैठ जाएँगे
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Ravi 'VEER'
वो अब हम सेे दूरी बनाने लगे हैं
रक़ीबों की महफ़िल सजाने लगे हैं

ये शिकवे शिकायत करें भी तो किस से
सितम मेहरबाँ हम पे ढाने लगे हैं
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shampa andaliib
झुकी थी झुकी है झुकी रहने दो अब
उठाओ न पलकें सितम ढाने वाले
'June' Sahab Barelvi
करती थी रोज़ रोज़ सितम हमपे ज़िंदगी
मारा है मौत ने ही फ़क़त एक बार में
Rohit tewatia 'Ishq'
तोड़ कर दिल मिरा दिखाया है
प्यार में तू ने ज़ुल्म ढ़ाया है
Danish Balliavi
वालिद तिरा है ज़ुल्म हम पर कर रहा
यूँँ भेजकर बाज़ार बुर्के में तुझे
Kuldeep Tripathi KD
देख कर ज़ुल्म-ओ-सितम मज़लूम पर
आज फिर इंसानियत शर्मा गई
Shajar Abbas
वफ़ा होती, सितम होते, मगर लम्हें हसीं होते
कहीं मैं हूँ, कहीं तुम हो, अगर हम भी कहीं होते
Hameed Sarwar Bahraichi
इन लबों के तो गुनाहों की सज़ा मुझ को दे दी है
उन सितम का क्या जो हम पे तेरी नज़रों ने किए हैं
Kabiir