Faasla Shayari - Dil ke faasle, dooriyan aur adhoori mohabbat ki lines

Faasla shayari expresses the silent distance between hearts, where emotions remain but connections fade. It beautifully captures feelings of separation, longing, and unspoken pain in relationships. Whether it's physical doori or emotional gap, these lines reflect the depth of love lost in distance.

faasla shayari
मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है
हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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doori shayari
आओ गले मिल कर ये देखें
अब हम में कितनी दूरी है
Shariq Kaifi
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judai shayari
ख़्याल-ए-हिज्र से डर जाते हैं हम अक्सर
और घबरा के तेरे लब को चूम लेते हैं
Parwez Akhtar
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मैं न सोया रात सारी तुम कहो
बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो

हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी
ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो
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Prakhar Kanha
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जो देखने में बहुत ही क़रीब लगता है
उसी के बारे में सोचो तो फ़ासला निकले
Waseem Barelvi
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मुमकिना फ़ैसलों में एक हिज्र का फ़ैसला भी था
हम ने तो एक बात की उस ने कमाल कर दिया
Parveen Shakir
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इक तेरा हिज्र दाइमी है मुझे
वर्ना हर चीज़ आरज़ी है मुझे
Tehzeeb Hafi
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कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ
फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते
Ahmad Faraz
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आई होगी किसी को हिज्र में मौत
मुझ को तो नींद भी नहीं आती
Akbar Allahabadi
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लंबा हिज्र गुज़ारा तब ये मिलने के पल चार मिले
जैसे एक बड़े हफ़्ते में छोटा सा इतवार मिले

माना थोड़ा मुश्किल है पर रोज़ दुआ में माँगा है
जो मुझ सेे भी ज़्यादा चाहे तुझ को ऐसा यार मिले
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Bhaskar Shukla
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हिज्र में तुम ने केवल बाल बिगाड़े हैं
हम ने जाने कितने साल बिगाड़े हैं
Anand Raj Singh
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मोहब्बत दो-क़दम पर थक गई थी
मगर ये हिज्र कितना चल रहा है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो
मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो
Jaun Elia
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उस हिज्र पे तोहमत कि जिसे वस्ल की ज़िद हो
उस दर्द पे ला'नत की जो अश'आर में आ जाए
Vipul Kumar
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कभी न लौट के आया वो शख़्स, कहता था
ज़रा सा हिज्र है बस सरसरी बिछड़ना है
Subhan Asad
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ये सानिहा भी शब-ए-हिज्र आ पड़ा हम पर
तेरा ख़याल तो आया तेरी तलब न हुई
Subhan Asad
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फ़ासला रख कर भी क्या हासिल हुआ
आज भी उस का ही कहलाता हूँ मैं
Shariq Kaifi
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सुब्ह तक हिज्र में क्या जानिए क्या होता है
शाम ही से मिरे क़ाबू में नहीं दिल मेरा
Jigar Moradabadi
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मिरी ज़िंदगी तो गुज़री तिरे हिज्र के सहारे
मिरी मौत को भी प्यारे कोई चाहिए बहाना
Jigar Moradabadi
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सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक ही कमरा कम है
Javed Akhtar
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दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो
इस बात से हम को क्या मतलब ये कैसे हो ये क्यूँँकर हो
Ibn E Insha
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हम कहाँ और तुम कहाँ जानाँ
हैं कई हिज्र दरमियाँ जानाँ
Jaun Elia
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तू परिंदा है किसी शाख़ को घर कर लेगा
जो तेरे हिज्र का मारा है किधर जाएगा
Shadab Javed
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नज़दीकी अक्सर दूरी का कारन भी बन जाती है
सोच-समझ कर घुलना-मिलना अपने रिश्ते-दारों में
Aalok Shrivastav
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
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Ismail Raaz
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तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया
रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया

मजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर को
या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया
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Ismail Raaz
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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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तेरे जाने में और आने में
हम ने सदियों का फ़ासला देखा
Sudarshan Fakir
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बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना
जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता
Bashir Badr
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'मुनीर' अच्छा नहीं लगता ये तेरा
किसी के हिज्र में बीमार होना
Muneer Niyazi
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ख़ौफ़ आता है अपने साए से
हिज्र के किस मक़ाम पर हूँ मैं
Siraj Faisal Khan
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कोई समुंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता
हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता

ता'ने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था
गले लगा के तुम ने हिजरत का दुख बाट लिया होता
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Tehzeeb Hafi
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अब तो मैं बाल बढ़ा सकता हूँ
हिज्र में कितनी सहूलत है मुझे
Nasir khan 'Nasir'
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सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो
अब और कुछ करो न करो फ़ासला रखो

ख़तरा तो मुफ़्त में भी नहीं लेना चाहिए
घर से निकल के मोल न लो फ़ासला रखो
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Jawwad Sheikh
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तड़पना हिज्र तक सीमित नहीं है
उसे दुल्हन भी बनते देखना है
Anand Verma
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रेल की सीटी में कैसे हिज्र की तम्हीद थी
उस को रुख़्सत कर के घर लौटे तो अंदाज़ा हुआ
Parveen Shakir
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भले ही प्यार हो या हिज्र हो या फिर सियासत हो
कुछ ऐसे दोस्त थे हर बात पर अश'आर कहते थे
Siddharth Saaz
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जहाँ जो था वहीं रहना था उस को
मगर ये लोग हिजरत कर रहे हैं
Liaqat Jafri
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दूरी हुई तो उन सेे क़रीब और हम हुए
ये कैसे फ़ासले थे जो बढ़ने से कम हुए
Waseem Barelvi
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मैं अपनी हिजरत का हाल लगभग बता चुका था सभी को और बस
तिरे मोहल्ले के सारे लड़के हवा बनाने में लग गए थे
Vikram Gaur Vairagi
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मैं न कहता था हिज्र कुछ भी नहीं
ख़ुद को हलकान कर रही थी तुम

कितने आराम से हैं हम दोनों
देखा बेकार डर रही थी तुम
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Mehshar Afridi
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हिज्र की रातें इतनी भारी होती हैं
जैसे छाती पर ऐरावत बैठा हो
Tanoj Dadhich
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कैसी बिपता पाल रखी है क़ुर्बत की और दूरी की
ख़ुशबू मार रही है मुझ को अपनी ही कस्तूरी की
Naeem Sarmad
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ख़ुदा करे कि तिरी उम्र में गिने जाएँ
वो दिन जो हम ने तिरे हिज्र में गुज़ारे थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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काट पाऊँगा मैं कैसे ज़िंदगी तेरे बग़ैर
तीन दिन का हिज्र मुझ को लग रहा है तीन साल
Afzal Ali Afzal
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इस से पहले कि ज़मीं-ज़ाद शरारत कर जाएँ
हम सितारों ने ये सोचा है कि हिजरत कर जाएँ

दौलत-ए-ख़्वाब हमारे जो किसी काम न आई
अब किसी को नहीं मिलने की वसिय्यत कर जाएँ
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Idris Babar
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या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ
गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ

वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है
वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ
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Kushal Dauneria
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जनम-दिन हिज्र का कुछ यूँँ मनाया
किया अनब्लॉक तुम को आज हम ने
Tanoj Dadhich
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हिज्र में ख़ुद को तसल्ली दी कहा कुछ भी नहीं
दिल मगर हँसने लगा आया बड़ा कुछ भी नहीं
Afkar Alvi
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अमीर इमाम के अश'आर अपनी पलकों पर
तमाम हिज्र के मारे उठाए फिरते हैं
Ameer Imam
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ये जो हिजरत के मारे हुए हैं यहाँ
अगले मिसरे पे रो के कहेंगे कि हाँ
Ali Zaryoun
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शाम थी हिज्र की हाल मत पूछना
आँख थकने लगे तो जिगर रो पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
हिज्र में इश्क़ यूँँ रखा आबाद
हिचकियांँ तन्हा तन्हा लेते रहे
Siraj Tonki
हिज्र में इश्क़ यूँँ रखा आबाद
हिचकियाँ तन्हा तन्हा लेते रहे
Siraj Tonki
कितना भी दर्द पिला दे ख़ुदा पी सकता हूँ
ज़िन्दगी हिज्र से भर दे मिरी जी सकता हूँ

हर दफ़ा दिल पे ही खा के हुई है आदत ये
बंद आँखों से भी हर ज़ख़्म को सी सकता हूँ
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Faiz Ahmad
तुम्हारा हिज्र पूरा हो गया है
मैं अब से शे'र कहना छोड़ दूँगा
Faiz Ahmad
किसी से दूरी बनाई किसी के पास रहे
हज़ार कोशिशें कर लीं मगर, उदास रहे
Sawan Shukla
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हिज्र में अब वो रात हुई है जिस
में मुझ को ख़्वाबों में
रेल की पटरी, चाकू, रस्सी, बहती नदियाँ दिखती हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
पहले लगा था हिज्र में जाएँगे जान से
पर जी रहे हैं और भी हम इत्मीनान से
Ankit Maurya
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सुकून देती थी तब मुझ को वस्ल की सिगरेट
अब उस के हिज्र के फ़िल्टर से होंठ जलते हैं
Upendra Bajpai
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महीनों तक रहा करते थे सब मेहमान आँखों में,
मगर अब ख़्वाब भी आते नहीं वीरान आँखों में

ज़मान ए हिज्र कहने को रिवाज़ ए इश्क़ ही तो है,
मगर क्या क्या नहीं होता है इस दौरान आँखों में
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Darpan
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मर्म हँसने का समझ पाए ज़रा हम देर से
वस्ल जिस को कह रहे थे हिज्र की बुनियाद थी
Atul K Rai
उभर कर हिज्र के ग़म से चुनी है ज़िंदगी हम ने
वगरना हम जहाँ पर थे वहाँ पर ख़ुद-कुशी भी थी
Naved sahil
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अभी तो जान कहता फिर रहा है तू
तुझे हम हिज्र वाले साल पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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तुम्हारा बैग भी तय्यार कर के रक्खा है
अकेली हिज्र के आज़ार क्यूँ उठाऊँ मैं
Zahraa Qarar
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दर्द-ए-मुहब्बत दर्द-ए-जुदाई दोनों को इक साथ मिला
तू भी तन्हा मैं भी तन्हा आ इस बात पे हाथ मिला
Abrar Kashif
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
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Tehzeeb Hafi
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नाप रहा था एक उदासी की गहराई
हाथ पकड़कर वापस लाई है तन्हाई

वस्ल दिनों को काफ़ी छोटा कर देता है
हिज्र बढ़ा देता है रातों की लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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सब दे रहे हैं दिल मुझे अपना निकाल के
दरअस्ल मैं ने शे'र कहे हैं कमाल के

अब आप सोच लीजिए मजबूरियाँ मेरी
हिज्र-ओ-विसाल तय करूँँ सिक्का उछाल के
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Tanoj Dadhich
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दोस्तों के साथ चलने में भी ख़तरे हैं हज़ार
भूल जाता हूँ हमेशा मैं सँभल जाने के बा'द

अब ज़रा सा फ़ासला रख कर जलाता हूँ चराग़
तजरबा ये हाथ आया हाथ जल जाने के बा'द
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Alam Khursheed
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क्यूँँ बुरा भला कहें किसी को भी अगरचे हम
बन गए हैं हिज्र में जो साहिब-ए-किताब अब
Amaan Pathan
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बस इतनी सी दूरी ये मैं हूँ ये मंज़िल
कहाँ आ के फूटे हैं पाँव के छाले
Qamar Jalalvi
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क्यूँँ हिज्र के सभी को क़िस्से सुना रहे हो
ग़म बेचते हो सब को ग़म की दुकान हो तुम
Amaan Pathan
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कहाँ के इश्क़-ओ-मोहब्बत किधर के हिज्र-ओ- विसाल
अभी तो लोग तरसते हैं ज़िन्दगी के लिए
Zehra Nigaah
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हम तुम में कल दूरी भी हो सकती है
वज्ह कोई मजबूरी भी हो सकती है
Bedil Haidri
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रास्ता है कि कटता जाता है
फ़ासला है कि कम नहीं होता
Qabil Ajmeri
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मुझे लिटा तो दो क़ब्र में तुम पर आँख मेरी खुली ही रखना
ज़रा सी दूरी पे हम सफ़र है मुझे पता है मुझे ख़बर है
Amaan Pathan
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क्यूँँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँँ दर्द के रोने रोता है
अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है
Hafeez Jalandhari
बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम
जो तेरे हिज्र में गुज़री वो रात रात हुई
Firaq Gorakhpuri
सब कुछ पहले जैसा लगने लगता है
हम में जैसे इक मैसेज की दूरी है
Anfal Rafique
हिज्र का बोझ है अल्फ़ाज़ से उठने का नहीं
रोने वालों को तसल्ली नहीं शाने दीजे
Ashfaq Nasir
हिज्र कटता है मेरा जून की गर्मी की तरह
एक लम्हा जहाँ सदियों की तरह होता है
Shakir Dehlvi
वो हसीं रात जो थी सोके गुजार दी मैं ने
अब इस हिज्र में न जाने कब नींद आए
karan singh rajput
मैं हिज्र का मारा हुआ हूँ इस लिए
मुझ को दुआएँ दे दवाई रहने दे
Nilesh Barai
चाँद हो तुम चकोर हैं आँखें
हिज्र ये इत्मीनान वाला है
Saarthi Baidyanath
भारी मन से निकले उस के दिल से हम
हिजरत करना किस को अच्छा लगता है
Pawan
किसी ने हिज्र अता कर के ज़िन्दगी छीनी
किसी ने ज़ख़्म दिए जो भरे नहीं अब तक

सखी सभी को मुयस्सर हैं क़ुर्बतें तेरी
बस एक हम हैं जो तुझ से मिले नहीं अब तक
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Md Akhter Ansari
तू भी ख़ुश है मैं भी ख़ुश हूँ
ये कैसा हिज्र हुआ जानाँ
Pawan
बनाए जा रही है फासला वो
कभी जो राबते में थी हमारे
Kush Pandey ' Saarang '
हिज्र दर-अस्ल आशिक़ों के लिए
एक तमग़े की तरह होता है
Saarthi Baidyanath
इक क़दम की थी दूरी वहाँ की जहाँ
आने में जाने कितने ज़माने लगे?
Alankrat Srivastava
तन्हाई हो, हिज्र हो, बातें करने को तरसे ये दिल,
इश्क़ हुआ वो जिस
में ये हालात मुसलसल रहते हों
Read Full
Hasan Raqim
मोहब्बत, वस्ल, हिज्र और बे-वफ़ाई
तज़ुरबे ज़िंदगी के हो चुके सब
Guru Gunour
न बहें तो क्या करें फिर आप ही कहिए ज़रा
आप सागर से नदी का फासला तो देखिए
Abhishek Shukla
मुझ सेे बिछड़ना तेरी मजबूरी सही
कुछ भी नहीं तो मीलों की दूरी सही
karan singh rajput
कब तलक तेरे हिज्र में बहती
आँख थी कोई आबशार न था
Zeeshan Ajnabee
सबका जो इन दिनों है मसीहा बना हुआ
उस सेे ये पूछना कि मोहब्बत का क्या हुआ?

हँसता हूँ मैं जो हिज्र में तो पूछते हैं सब
पतझड़ के दिन में पेड़ ये कैसे हरा हुआ?
Read Full
Rituraj kumar
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तुम्हारा हिज्र बड़े ही सुकून से गुज़रा
भटकते रहना था और बस मलाल करना था
Monis faraz
क्या होगा फिक्र ये करें क्यूँ हम ही ख़ामख़ाह
इस हिज्र में जलाएँ न अब हम जी ख़ामख़ाह

तुम सेे बिछड़ के दिल मिरा रोया है उम्र भर
ऐसा लगा कि ज़िंदगी हमनें जी ख़ामख़ाह
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Das Kanpuri
ख़िज़्र की उम्र भी अता कर दी
फिर तेरा हिज्र भी दिया साहब
Ashutosh Kumar "Baagi"
शब पिघलेगी लम्हा-लम्हा, गहराएगी और सियाही
रौशन रखना यादें सारी, वस्ल बुझे तो हिज्र जलाना
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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सच बताऊँ तो हम दोनों में फ़ासला
एक झूठी ख़बर से बनाया गया
Akhil Saxena
जन्म दिन हिज्र का आने को है
बरसी-ए-इश्क़ है कुछ रोज़ में अब
Santy sharma
जान-ए-जाना तुम्हारे हिज्र के बा'द
मय-कदा बन गया ठिकाना मेरा
Shajar Abbas
दुनिया मेरे नसीब में कुछ कम लिखी गई
वरना ये तेरा हिज्र कभी काटता ना मैं
Khalid Azad
बता रहे हैं ये हालात-ए-ज़िन्दगी मुझ को
तुम्हारा हिज्र मेरी जान ले के दम लेगा
Shajar Abbas
कोई तो मुझ को बता दे ये हिज्र का मारा
अज़ाब-ए-गफ़लत-ए-क़ातिल बयान कैसे करूँँ
Shajar Abbas
हर रिश्ते का अंजाम दूरी है
फिर भी इश्क़ कितना ज़रूरी है
Gaurav saaz