Sooraj Shayari - Umeed, roshni aur nayi subah ke jazbaat

Sooraj shayari beautifully captures the essence of light, hope, and new beginnings. From the warmth of dhoop to the calm of sunrise, these lines reflect life’s positivity and inner strength. Explore heartfelt verses that celebrate roshni and inspire a brighter outlook.

sooraj shayari
सूरज सितारे चाँद मेरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे
Rahat Indori
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suraj shayari
धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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dhoop shayari
रिश्तों को जब धूप दिखाई जाती है
सिगरेट से सिगरेट सुलगाई जाती है
Ankit Gautam
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roshni shayari
झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
Shariq Kaifi
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ujala shayari
सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का
यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का
Shahryar
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prakash shayari
तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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sunrise shayari
तेज़ धूप में आई ऐसी लहर सर्दी की
मोम का हर इक पुतला बच गया पिघलने से
Qateel Shifai
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sunset shayari
'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का
सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं
Mohammad Alvi
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sooraj shayari
सर्दी है कि इस जिस्म से फिर भी नहीं जाती
सूरज है कि मुद्दत से मिरे सर पर खड़ा है
Fakhr Zaman
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suraj shayari
सूरज लिहाफ़ ओढ़ के सोया तमाम रात
सर्दी से इक परिंदा दरीचे में मर गया
Athar nasik
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पहले ये काम बड़े प्यार से माँ करती थी
अब हमें धूप जगाती है तो दुख होता है
Munawwar Rana
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उस वक़्त भी अक्सर तुझे हम ढूँढ़ने निकले
जिस धूप में मज़दूर भी छत पर नहीं जाते
Munawwar Rana
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तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चराग़
लोग क्या सादा हैं सूरज को दिखाते हैं चराग़
Ahmad Faraz
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धूप पड़े उस पर तो तुम बादल बन जाना
अब वो मिलने आए तो उस को घर ठहराना।

तुम को दूर से देखते देखते गुज़र रही है
मर जाना पर किसी गरीब के काम न आना।
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Tehzeeb Hafi
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तुम सेे इक दिन कहीं मिलेंगे हम
ख़र्च ख़ुद को तभी करेंगे हम

धूप निकली है तेरी बातों की
आज छत पर पड़े रहेंगे हम
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Swapnil Tiwari
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रिश्तों की ये नाज़ुक डोरें तोड़ी थोड़ी जाती हैं,
अपनी आँखें दुखती हों तो फोड़ी थोड़ी जाती हैं

ये काँटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है
राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं
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Subhan Asad
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अगर साए से जल जाने का इतना ख़ौफ़ था तो फिर
सहर होते ही सूरज की निगहबानी में आ जाते
Azm Shakri
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रुकें तो धूप से नज़रें बचाते रहते हैं
चलें तो कितने दरख़्त आते जाते रहते हैं
Charagh Sharma
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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
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Subhan Asad
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सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
Nida Fazli
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वो जिस पर उस की रहमत हो वो दौलत माँगता है क्या
मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत माँगते है क्या

तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन के आ जाना
कभी उगता हुआ सूरज इजाज़त माँगता है क्या
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Ankita Singh
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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
Shakeel Jamali
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धूप के एक ही मौसम ने जिन्हें तोड़ दिया
इतने नाज़ुक भी ये रिश्ते न बनाए होते
Waseem Barelvi
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ऊँची इमारतों से मकाँ मेरा घिर गया
कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए
Javed Akhtar
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मुमकिन है कि सदियों भी नज़र आए न सूरज
इस बार अँधेरा मिरे अंदर से उठा है
Aanis Moin
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हम ख़ुश हैं हमें धूप विरासत में मिली है
अज्दाद कहीं पेड़ भी कुछ बो गए होते
Shahryar
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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द
Kaifi Azmi
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हाल पूछा न करे हाथ मिलाया न करे
मैं इसी धूप में ख़ुश हूँ कोई साया न करे
Kashif Husain Ghair
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वो रातें चाँद के साथ गईं वो बातें चाँद के साथ गईं
अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो
Ibn E Insha
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तेरी यादों की धूप आने लगी है
अभी खुल जाएगा मौसम हमारा
Subhan Asad
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पुराने साल की ठिठुरी हुई परछाइयाँ सिमटीं
नए दिन का नया सूरज उफ़ुक़ पर उठता आता है
Ali Sardar Jafri
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सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवक़ूफ़
सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए
Rahat Indori
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धूप को साया ज़मीं को आसमाँ करती है माँ
हाथ रख कर मेरे सर पर सायबाँ करती है माँ

मेरी ख़्वाहिश और मेरी ज़िद उस के क़दमों पर निसार
हाँ की गुंज़ाइश न हो तो फिर भी हाँ करती है माँ
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Nawaz Deobandi
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मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर
बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है
Shahryar
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ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई माँगे
जो हो परदेस में वो किस सेे रज़ाई माँगे
Rahat Indori
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तुम सोच रहे हो बस, बादल की उड़ानों तक
मेरी तो निगाहें हैं सूरज के ठिकानों तक
Aalok Shrivastav
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धूप ये अठखेलियाँ हर रोज़ करती है
एक छाया सीढ़ियाँ चढ़ती उतरती है

ये दिया चौरास्ते का ओट में ले लो
आज आँधी गाँव से हो कर गुज़रती है
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Dushyant Kumar
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मैं अपनी दुनिया का ऐसा सूरज हूँ
जिस सूरज का गहना मुश्किल होता है
Aalok Shrivastav
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गहरी सोचें लम्बे दिन और छोटी रातें
वक़्त से पहले धूप सरों पे आ पहुँची
Aanis Moin
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ये काँटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है
राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं
Subhan Asad
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आज की रात न जाने कितनी लंबी होगी
आज का सूरज शाम से पहले डूब गया है
Aanis Moin
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हम अपनी धूप में बैठे हैं 'मुश्ताक़'
हमारे साथ है साया हमारा
Ahmad Mushtaq
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धूप भी आराम करती थी जहाँ
अपना ऐसी छाँव से नाता रहा
Madan Mohan Danish
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इसी फ़कीर की गफ़लत से आगही ली है
मेरे चराग़ से सूरज ने रौशनी ली है

गली-गली में भटकता है शोर करता हुआ
हमारे इश्क़ ने सस्ती शराब पी ली है
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Ammar Iqbal
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मैं बे-ख़याल कभी धूप में निकल आऊँ
तो कुछ सहाब मिरे साथ साथ चलते हैं
Farhat Abbas Shah
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अब ऐसे ज़ाविए पर लौ रखी जाने लगी है
चराग़ों के तले भी रौशनी जाने लगी है

नया पहलू सलीक़े से बयाँ करना पड़ेगा
कहानी अब तवज्जोह से सुनी जाने लगी है
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Khurram Afaq
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जाने कैसे ख़ुश रहने की आदत डाली जाती है
उन के यहाँ तो बारिश में भी धूप निकाली जाती है
Ritesh Rajwada
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शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई सी तुम
ज़िन्दगी है धूप तो मद-मस्त पुर्वाई सी तुम

चाहे महफ़िल में रहूँ चाहे अकेले में रहूँ
गूँजती रहती हो मुझ में शोख़ शहनाई सी तुम
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Kunwar Bechain
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तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुख
तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बा'द
Farhat Abbas Shah
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए
इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं

तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया
इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
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Fahmi Badayuni
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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धूप निकली है बारिशों के ब'अद
वो अभी रो के मुस्कुराए हैं
Anjum Ludhianvi
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धूप में कौन किसे याद किया करता है
पर तिरे शहर में बरसात तो होती होगी
Ameer Imam
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घर के बुज़ुर्ग लोगों की आँखें क्या बुझ गईं
अब रौशनी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा

आए थे मीर ख़्वाब में कल डाँट कर गए
क्या शा'इरी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा
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Aalok Shrivastav
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उरूज पर है अज़ीज़ो फ़साद का सूरज
जभी तो सूखती जाती हैं प्यार की झीलें
Nami Nadri
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ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं
Mahirul Qadri
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जली हैं धूप में शक्लें जो माहताब की थीं
खिंची हैं काँटों पे जो पत्तियाँ गुलाब की थीं
Dagh Dehlvi
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तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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रौशनी बढ़ने लगी है शहर की
चाँद छत पर आ गया है देखिए
Divy Kamaldhwaj
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घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है
बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है
Adam Gondvi
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रात भर ता'रीफ़ मैं ने की तुम्हारे रूप की
चाँद इतना जल गया सुन कर कि सूरज हो गया
Chandan Rai
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ये लाल शा
में ये लाल अंबर ये लाल सूरज चमक रहा है
मुझे बता दो कहाँ है खोई तिरे लबों की ये सुर्ख़ लाली
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Anmol Mishra
अभी चाहिए और कितनी बुलंदी
कि सहमा है सूरज इमारत के पीछे
Kanha Mohit
चिलचिलाती धूप है और पैर में चप्पल नहीं
जिस्म घाइल है मगर ये हौसला घाइल नहीं
Tanoj Dadhich
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मुझ पे पड़ती नहीं बलाओं की धूप
सर पे साया-फ़िगन है माँ की दुआ
Amaan Haider
दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में
सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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बदला जो वक़्त गहरी रफ़ाक़त बदल गई
सूरज ढला तो साए की सूरत बदल गई

इक उम्र तक मैं उस की ज़रूरत बना रहा
फिर यूँँ हुआ कि उस की ज़रूरत बदल गई
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Shaukat Fehmi
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अँधेरे को समझना है अँधेरों की परेशानी
कोई सूरज अँधेरों की परेशानी न समझेगा
Saarthi Baidyanath
वो सर्दियों की धूप की तरह ग़ुरूब हो गया
लिपट रही है याद जिस्म से लिहाफ़ की तरह
Musavvir Sabzwari
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सावन-रुत और उड़ती पुर्वा तेरे नाम
धूप-नगर से है ये तोहफ़ा तेरे नाम
Tajdar Adil
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ये करिश्मा हुआ चूमने से उसे
तीरगी पर खुली रौशनी की समझ
Neeraj Neer
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धूप तो धूप ही है इस की शिकायत कैसी
अब की बरसात में कुछ पेड़ लगाना साहब
Nida Fazli
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ये नदी वर्ना तो कब की पार थी
मेरे रस्ते में अना दीवार थी

आप को क्या इल्म है इस बात का
ज़िंदगी मुश्किल नहीं दुश्वार थी

थीं कमानें दुश्मनों के हाथ में
और मेरे हाथ में तलवार थी

जल गए इक रोज़ सूरज से चराग़
रौशनी को रौशनी दरकार थी

आज दुनिया के लबों पर मुहर है
कल तलक हाँ साहब-ए-गुफ़्तार थी
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ARahman Ansari
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मैं बहुत ख़ुश था कड़ी धूप के सन्नाटे में
क्यूँँ तेरी याद का बादल मेरे सर पर आया
Ahmad Mushtaq
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मुझ को ऐसे देख रहा हैरानी में
जैसे सूरज देख लिया पेशानी में

मैं भी उस को देख रहा हूँ कुछ ऐसे
जैसे सूरज डूब रहा हो पानी में
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DEVANSH TIWARI
जाने किस मोड़ पे ले आई हमें तेरी तलब
सर पे सूरज भी नहीं राह में साया भी नहीं
Ummeed Fazli
वो मुसाफ़िर ही खुली धूप का था
साए फैला के शजर क्या करते
Parveen Shakir
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यहाँ दरख़्तों के साए में धूप लगती है
चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए
Dushyant Kumar
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इन्ही हैरत-ज़दा आँखों से देखे हैं वो आँसू भी
जो अक्सर धूप में मेहनत की पेशानी से ढलते हैं
Jameel Mazhari
सूरज हूँ ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊँगा
मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाऊँगा
Iqbal Sajid
अगर मैं सूरज के साथ ढलने से बच गया तो
कहाँ गुज़ारूँगा शाम सोचा हुआ है मैं ने
Saleem Kausar
अच्छों पर बुरों की हमेशा नज़र रहती है
रौशनी हमेशा अँधेरों से घिरी रहती है
Bhavesh kumar
तुम्हारी आँखों से मैं ख़ूब-सूरत हूँ वरना
चाँद की अपनी कोई रौशनी नहीं होती
Murli Dhakad
ये कैसा तजुर्बा है कि दिल जलाने पे अक्सर
अँधेरा छा जाता है रौशनी नहीं होती
Murli Dhakad
ग़मों का काफिला घर से निकल आता है
दवाई लगाता हूँ तो ज़ख़्म छील जाता है

वो सो जाती है चाँद की छाँव में अक्सर
हमें नींद आते आते सूरज निकल आता है
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Neeraj Saroha
तपता सूरज आजकल किसी को नहीं चाहिए
सभी को हमेशा चाँद की चांदनी चाहिए

मुफ़लिसों से रिश्ता अब रखता नहीं कोई
सब को साथ में आदमी ख़ानदानी चाहिए
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Yashvardhan Jain
मैं सूरज था, रौशनी का चाँद के लिए ढल गया
मैं पानी था नदी का पेड़ों के लिए रुक गया

मैं पत्ता था पेड़ों का टहनियों के लिए सुख गया
मैं टहनी था जंगल का सूरज के इंतिज़ार में जल गया
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Animesh Choubey
क्यूँ ऐसा रिश्ता क़ाएम रखना जिस
में केवल दर्द मिलें
ना धूप मिले न छाव मिले बस मौसम सारे सर्द मिलें
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Amit Joshi anhad
जल्द-बाज़ी न करना चमकने में दोस्त
रात में कोई सूरज निकलता नहीं
Dharmesh Solanki
सनम हैं सर्दियों की धूप जैसी
ज़रा दीदार कर के देख लो जी
Saarthi Baidyanath
धूप से रूठ कर कहाँ कोई
पेड़ अपनी जड़ें बदलता है
Saarthi Baidyanath
इश्क़ ऐसा दरख़्त है जिस के
साए में तेज़ धूप होती है
Saarthi Baidyanath
मलाल सूरज को, नूर दे सितारा भी
दुःखी रहूँ, तुझ को गैर दे गया मुस्काँ
Zain Aalamgir
उम्र भर मुझ को रखा धूप में जिस रस्ते ने
याद क्यूँ उस का सफ़र और वो छाले रक्खूँ

ख़त जो लिख कर के रखा पर न तुम्हें दे पाया
अब उसे आग लगा दूँ या सँभाले रक्खूँ
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Aditya
जितनी जल्दी आँखें अपनी खोलेगा
सूरज को मुट्ठी पे अपनी तोलेगा
Ali Mohammed Shaikh
जब मुंडेरों से धूप ढलती है
तो कमी उस की मुझ को खलती है

जो हथेली पे अपनी लिखती थी
दोस्ती प्यार में बदलती है
Read Full
Sandeep Thakur
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नींद आई तो धूप खिले तक सोएंगे
ख़्वाबों की फ़ेहरिस्त बना कर बैठे हैं
Shakir Dehlvi
बड़ा ही नाज़ है इस चाँद को सूरत पे अपनी, पर
कभी जो धूप में निकले तो सूरज में बदल जाए
Prit
धूप की तरह एक लड़की है
जो मेरे हाथ में नहीं आती
Saarthi Baidyanath
चाँद तारे और सूरज जा रहे हड़ताल पर
माँग है सरकार से इतवार होना चाहिए
Saarthi Baidyanath
छाँव देगा वही शजर जिस ने
धूप को सर पे ओढ़ रक्खा हो
Saarthi Baidyanath
जब तलक सूरज को ग्रहण लगे 'ज़ामी'
चाँद का क़िस्सा सुनाओ अँधेरा है
Parvez Zaami
कल राह में चमकेंगे तेरी रौशनी बनकर
ये मशवरे माँ-बाप के बेकार नहीं हैं
Shakir Dehlvi
तुम को देखा तो इक गुलाब खिला
तुम ने देखा तो धूप मुस्काई
Akash Rajpoot
अब वो छत पर मुझे ऐसे बुलाती है
जैसे वो धूप जाड़े में दिसंबर की
Meem Alif Shaz
जब परेशाँ होता हूँ इस ज़िंदगी की धूप से
करता हूँ साया किताबों का मैं बच्चों की तरह
NISHKARSH AGGARWAL
ढलते हुए सूरज में वो लाली कहाँ
जो लाली उस के रुख़्सार पर है
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
ये किस लिए चराग़ों को तुम जला रहे हो
अंधों को रौशनी की क्या सच में है ज़रूरत?
NISHKARSH AGGARWAL