War Shayari - Shayari on battle, courage, sacrifice, and inner संघर्ष

War Shayari reflects the intensity of battles—both external and within. It captures courage, sacrifice, fear, and the spirit of sangharsh. From soldiers on the battlefield to personal struggles in life, these verses express strength, pain, and the will to rise again.

कभी कभी तो झगड़ने का जी भी चाहेगा
मगर ये जंग मोहब्बत से जीती जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
Sahir Ludhianvi
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ज़िन्दगी, यूँँ भी गुज़ारी जा रही है
जैसे, कोई जंग हारी जा रही है

जिस जगह पहले से ज़ख़्मों के निशां थे
फिर वहीं पे चोट मारी जा रही है
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Azm Shakri
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आख़िरी जंग मैं लड़ने के लिए निकला हूँ
फिर रहे या न रहे तेरा दिवाना आना
Mubarak Siddiqi
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वो जंग जिस में मुक़ाबिल रहे ज़मीर मिरा
मुझे वो जीत भी 'अंबर' न होगी हार से कम
Ambreen Haseeb Ambar
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सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवक़ूफ़
सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए
Rahat Indori
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जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है
जंग क्या मसअलों का हल देगी
Sahir Ludhianvi
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कभी तो ख़त्म हो ये जंग जिस
में
फ़क़त मरने को जीना पड़ रहा है
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Anand Verma
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आँधियों से लड़ रहे हैं जंग कुछ काग़ज़ के लोग
हम पे लाज़िम है कि इन लोगों को फ़ौलादी कहें
Ameer Imam
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अगर लगता है वो क़ाबिल नहीं है
तो रिश्ता तोड़ना मुश्किल नहीं है

रक़ीब आया है मेरे शे'र सुनने
तो अब ये जंग है महफ़िल नहीं है
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Tanoj Dadhich
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जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुलह की दुआ
दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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चुप हुए तो घर से निकले जा के दफ़्तर रो पड़े
इश्क़ ऐसी जंग है जिस में सिकंदर रो पड़े

बस दिलों पर कब किसी का चल सका है इश्क़ में
फिर से डायल कर के हम वो एक नंबर रो पड़े
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Prashant Sharma Daraz
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देश मेरा जंग तो जीता मगर
लौट कर आया नहीं बेटा मेरा
Divy Kamaldhwaj
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बद-हवा सेी है बे-ख़याली है
क्या ये हालत भी कोई हालत है

ज़िंदगी से है जंग शाम-ओ-सहर
मौत से शिकवा है शिकायत है
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Chandan Sharma
जब मसअले न हल हो सकें बात-चीत से
फिर जंग ही लड़ो कि ज़माना ख़राब है
shaan manral
जंग में जिन्हे अब तक तुम झुका न पाए थे
झुक रही हैं वो सारी पगड़ियाँ मोहब्बत में
Alankrat Srivastava
हो रही थी जंग उस के नाम पर और
वो ही मेरे दुश्मनों के काम आया
Shashank Shekhar Pathak
जंग अपनों के बीच जारी है
सबके हाथों में इक कटारी है

छत हो दीवार हो कि दरवाज़ा
सबकी अपनी ही ज़िम्मेदारी है
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Santosh S Singh
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मुझ सेे जो मुस्कुरा के मिला हो गया उदास
ताज़ा हवा की खिड़कियों को जंग लग गई
Siddharth Saaz
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न छेड़ नाम-ओ-नसब और नस्ल-ओ-रंग की बात
कि चल निकलती है अक्सर यहीं से जंग की बात
Zafar naseemi
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भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा
मैं हार गया जंग मगर दिल नहीं हारा
Sarvat Husain
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ज़िंदा रहना है तो हालात से डरना कैसा
जंग लाज़िम हो तो लश्कर नहीं देखे जाते
Meraj Faizabadi
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ये जंग पे जाते हुए जाँ-बाज़ सिपाही
जब हार के लौटेंगे तो कविताएँ लिखेंगे
Mohit Dixit
जंग पर जाते हुए बेटे की माँ से पूछो
कैसे जज़्बात के तूफ़ान सँभाले होंगे
Shifa Kajganvi
सिक्कें के दोनो तरफ़ हैं एक ही निशान
इस जंग में हार भी जाएँ तो ग़म नहीं हैं
Praveen Bhardwaj
जा कर निहत्ता जंग में भी ये क़लम
जीते रियासत कर सियाही को सुख़न
Zain Aalamgir
मर गए जज़्बात सबके ये बहर की जंग करते
शा'इरी की क़द्र छूटी, क्या बहर फिर, बे-बहर क्या
Zain Aalamgir
स्केच पर तेरे उकेरे जा रहे हैं जंग के नुक़सान
जंग से पहले ज़मीं का सारा आलम ख़ूब-सूरत था
Rishirajsingh Dhirawat
जिस ने अपनी जंग लड़ी हो शिद्दत से
उस ने अपना नाम अमर कर लेना है
Abhinav Baishander
सामने तू थी तो मेरी हार तय थी
किस लिए फिर जंग में लश्कर बनाते
Govind kumar
उठती मिरी तलवार दुश्मन की तरफ़ फिर रुक गई
दुश्मन कि माँ ने तब पुकारा जंग में बेटा मुझे
Zain Aalamgir
ये मुहब्ब्त की जंग है मेरी जाँ
हम अगर हारे तो ही जीतेंगे
karan singh rajput
किसी से गुफ़्तुगू करने का अब सवाल नहीं
क़लम पकड़ने का मतलब ही जंग लड़ना है
Ramnath Shodharthi
हालांकि मैं ने बा'द की हर जंग जीत ली
लेकिन ये पहली हार से आगे की बात है
Om awasthi
तीर चलाओ आँख से लेकिन थोड़ा नर्मी बरतो तुम
जंग नहीं हारा हूँ फिर भी दिल पे कब्जा कर लो तुम

हर कोई दीवाना होकर तेरे आगे पीछे है
या'नी के इस हुस्न से अपने जो चाहो वो कर दो तुम
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Kush Pandey ' Saarang '
मेरी इक शर्त है तू निभा के दिखा
ज़िंदगी है अकेले बिता के दिखा

जंग से पहले ही हार जाऊँगा मैं
यार इक बार नज़रें उठा के दिखा
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Neeraj Nainkwal
चली पंद्रह साल जंग इश्क़ और अना में
अना को मिली जीत और इश्क़ हार गया है
A R Sahil "Aleeg"
मुंतज़िर हूँ मैं सहर का
रौशनी है तंग मेरी

एक मिट्टी का दिया हूँ
रात से हैं जंग मेरी
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Nakul kumar
ये जंग खौफ़-ज़दा यूँँ लड़ी नहीं जाती
जो आप होते यहाँ फिर तो अपने घर जाते

दिए हैं ज़ख़्म हमें ज़िन्दगी ने कुछ ऐसे
जो आप एक भी इन में से खाते मर जाते
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Deep kamal panecha
वो बदलता जा रहा है सूरतें अपनी मगर
मैं चलाता जा रहा हूँ काम इक तस्वीर से

शहर को बदले उसे तो इक ज़माना हो गया
अब भला क्या काम उस को गाँव बैठे 'वीर' से
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Ravi 'VEER'
हम जीत लेते जंग पर तेरी रज़ा न थी
सब कुछ तो दस्तयाब था इस के सिवा हमें
Amaan mirza
गर जो मैं हार जाऊँ तो अफ़सोस करना नहीं
जंग मेरी ख़ुदा से है इंसाँ से थोड़ी न है
A R Sahil "Aleeg"
कहते है जंग , जुआ और इक मोहब्बत
ये तीन बस तबाही देकर जाती है
Devansh gupta
इश्क़ में हो तुम तो जंग को जारी रक्खो
सब्र के साथ ये भी जीती जा सकती है
Surya Tiwari
मज़हब-ए-इस्लाम को कर तर्क अपनाओ फ़क़त तुम दीन-हक़ को
फिर दिखाएगा ख़ुदा उस जंग-ए-ख़न्दक़ के ही जैसा मोजिज़ा भी
A R Sahil "Aleeg"
सभी कानों में झूठ डाला गया
मुझे मेरे घर से निकाला गया

मुहब्बत से माँगी या फिर जंग से
मेरा टुकड़ा हरदम ही टाला गया
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Kinshu Sinha
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हासिल नहीं है जंग किसी भी फ़साद का
हासिल भी है अगर तो बराबर की जंग हो
Prashant Sitapuri
मुहब्बत का करो ऐलान यारो जंग में
कि सबका है बड़ा नुक़सान यारो जंग में
Kaviraj " Madhukar"
एक ऐसी जंग होती है दिमाग-ओ-दिल में मेरे
कोई अच्छा भी लगे तो कहने भर से डरता हूँ मैं
Ashkrit Tiwari
है बाप का संघर्ष ही
औलाद की तो प्रेरणा
"Dharam" Barot
बढ़ने से पहले सोच लो मैदान-ए-इश्क़ में
हम ने किसी भी जंग से फेरा नहीं है मुँह
Sohil Barelvi
मुस्कुराते हुए शजर देखो
ज़िंदगानी से जंग हार गया
Shajar Abbas
ख़ुदा वो शख़्स अब जब तक हमारा हो नहीं सकता
हमें इस जंग में कोई ख़सारा हो नहीं सकता
Sagar Sahab Badayuni
बमुश्किल जीत पाऊँगा मैं ये जंग
मेरी तक़दीर मुझ सेे लड़ रही है
Manish Kumar Gupta
जुर्म किस का किस के सर इल्ज़ाम आया
आज रोया जाके तब आराम आया

हो रही थी जंग उस के नाम पर और
वो ही मेरे दुश्मनों के काम आया
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Shashank Shekhar Pathak
ज़िन्दगी इक जंग है
हर किसी के संग है
Navneet krishna
"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह"
आँखों में वो आँसू नहीं

कुछ ख़्वाब सँजोया करता था
वतन की आज़ादी के ख़ातिर

खूनी आँसू रोया करता था
आज़ादी का दीवाना था वो

रगों में उबाल ख़ानदानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
अंगारों पर चल कर जिस ने

एक नई राह बनाई थी
उस मतवाले शे'र ने क़सम

आज़ादी की खाई थी
चाहे उम्र कम रही हो लेकिन

वो एक लंबी कहानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़

इन्कलाब की आग थी
आँखों में थी जलती ज्वाला

लिबास जिस का त्याग थी
हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो

भारत माँ की निशानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जब तक धरती-अम्बर होंगे

मिट न सकेगा नाम तुम्हारा
भारत का हर बच्चा-बच्चा

याद रखेगा काम तुम्हारा
समुंदर से भी गहरा था जो

ख़ुद में ही एक रवानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
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"Nadeem khan' Kaavish"
ज़िंदगी से जंग चाहे ज़िंदगी भर ही चले
जीते जी तो मेरी जाँ अब हार मानेंगे नहीं

मुस्कुरा कर ही सहेंगे चाहे जितना दर्द हो
मुस्कुराने से कदाचित् रार ठानेंगे नहीं
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Ajeetendra Aazi Tamaam
सब्र करिए दिल को मेरे सब्र आने पर
दास्तान-ए-इश्क़ का हासिल सुनाऊँगा

जंग इक ऐसी कि जिस
में हारना तय था
मैं लड़ा ऐसे कि मानो जीत जाऊँगा
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Mohit Dixit
अभी ये जंग तो हारा नहीं है
मगर अब दूसरा चारा नहीं है

कहाँ से ला रहे हो खारा पानी
नदी में पानी तो खारा नहीं है
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Afzal Sultanpuri
मैं ने इतने पत्थर फेंके पानी में
जितने पत्थर खाए यार जवानी में

रो देता हूँ मैं अक्सर वीरानी में
मैं भी क्या कर जाता हूँ नादानी में

जब कुछ किरदारों पर मैं ने ग़ौर किया
जाना सब झूठे हैं यार कहानी में

हमनें थोड़ा ज़ोर लगाया फिर क्या था
रिश्ता टूट गया था खींचा-तानी में

तुम ने सीता का दुख देखा हैरत है
राम भी तो मौजूद थे राम-कहानी में

'वीर' ज़माना आँखों की झीलों का है
कौन यहाँ पर डूब रहा है पानी में?
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Ravi 'VEER'
हमें अब इश्क़ में पड़ना नहीं है
ख़ुदारा जंग ये लड़ना नहीं है

तुम्हारे ख़्वाब से तंग आ गए हैं
हमें अब ख़्वाब में सड़ना नहीं है
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Afzal Sultanpuri
जो अंदर में है जारी जंग हूँ मैं
बताऊँ क्या कि कितना तंग हूँ मैं

वही तू जो पहनती ही नहीं है
उसी बुरक़े का काला रंग हूँ मैं
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Aman Mishra 'Anant'
जंग आलूदा था हर इल्ज़ाम तेरा
तू मुझे कैसे हराता मेरे भाई
Meem Alif Shaz
ऐसा नहीं कि जंग का कोई भी हल नहीं
सरकार चाहती है, कुछ मसले बनें रहें
Umesh Maurya
हम तुझे भूल न पाए तो बिखर जाएँगे
साथ गर तेरा न मिल पाया तो मर जाएँगे
इश्क़ इक जंग है जो जीतने की ख़ातिर हम
इस जहाँ के किसी मैदाँ में उतर जाएँगे
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Danish Balliavi
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फ़क़त इक आँख ही रोने से मुश्किल में नहीं आती
बदन भी चीख़ता चिल्लाता है दिल की नमी से ख़ूब

मिरे कमरे में फैला ख़ून है चारों तरफ़ किस का
हुई है जंग किस की रात भर यूँँ ख़ुद-कुशी से ख़ूब
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Sayeed Khan
जंग जो हारी गई थी
जंग वो प्यारी गई थी
Manoj Devdutt
कभी बुज़दिल भी लिख देंगे हाँ तेरी शान में हैवान लिख देंगे
न कर साज़िश हमारे मुल्क पर यूँँ जंग का एलान लिख देंगे

बुरी नज़रें अगर तू डाल देगा इस तिरंगे पर तो दुश्मन सुन
उठा कर अपनी हम तलवार तेरे दिल पे हिंदुस्तान लिख देंगे
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Danish Balliavi
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ये दो दिलों के बीच मोहब्बत वो जंग है
जिस
में हुई है जीत तो हारा कोई नहीं
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Updesh 'Vidyarthi'
फ़रियाद कर रहा है कोई जंग-ए-इश्क़ में
फ़ुर्क़त का तीर शह रग-ए-दिल पर न मारिए
Shajar Abbas
जंग के मसअलों से रहे दूर क्यूँ
मुल्क होता उसी से कोई चूर क्यूँ
Manohar Shimpi
उन को मरना पड़ा ख़ुदा की क़सम
जिनपे एहसान ज़िंदगी के थे

जंग लड़ना मज़ाक़ थोड़ी था
कितने नुक़सान आदमी के थे
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ARahman Ansari
संघर्ष की आग में ही तो तपा हूँ
फिर मैं कहाँ कच्ची मिट्टी का घड़ा हूँ
Manoj Devdutt
थककर नहीं लगाया कभी ख़ुद-कुशी को मुँह
हम ने हमेशा अपनी उदासी से जंग की
Shajar Abbas
अगर मैं जंग में तीर-ओ-तबर से बच जाऊँ
तो बच के मैं तिरी नज़रों से मारा जाऊँगा
Shajar Abbas
याद रखना चाहिए ये फ़लसफ़ा भी इश्क़ का
जंग हो जब इश्क़ से तो हार जाना चाहिए
A R Sahil "Aleeg"
लिखना होगा मुझ को जब भी दंगों पर
मैं लिक्खूँगा सत्ता के भिखमंगों पर

हो सरहद पर जब भी रिपु से जंग यहाँ
मैं भेजूँ नेताओं को भी जंगों पर
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Sandeep dabral 'sendy'
मुहब्बत है क्या तुम ख़ुदा से ये पूछो
दुखी कौन था कर्बला से ये पूछो

वो तो जंग करनी नहीं थी वगरना
यक़ीं नइँ तो ज़ू-अल-जना से ये पूछो
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Vaseem 'Haidar'
प्यादे मरेंगे जंग में हर बार
राजा बनें हैं राज करने को
Manoj Devdutt
आज का दिन बीतना तो चाहिए
जंग हम को जीतना तो चाहिए
Vibhu Raj
वक़्त-ए-आख़िर जो रफ़ीक़ों ने वफ़ा की होती
है यक़ीं मुझ को कभी जंग न हारा होता
Shadab Shabbiri
मुस्तकिल ख़ुद से जंग कर रहा हूँ
जी रहा हूँ मैं रोज़ मर रहा हूँ

हिज्र के बा'द ऐसे हाल में हूँ
अब तो ख़ुद ख़ुद से ही मैं डर रहा हूँ
Read Full
Shajar Abbas
हम मुहब्बत के मरे मारे हुए हैं
जान ऐसी जंग है हारे हुए हैं

एक हम ही तो नहीं बीमार जानी
इश्क़ में बीमार तो सारे हुए हैं
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Arohi Tripathi
मंज़िलों के लिए रास्ता चाहिए
रास्ता हो तो फिर हौसला चाहिए

जंग इंसाफ़ की जीतने के लिए
सब्र का इक बड़ा क़ाफ़िला चाहिए
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Meem Alif Shaz
संघर्ष बिना जो जीता है
वो जीता कोई ख़ास नहीं

दुनिया में कोई राम नहीं
जिस का अपना वनवास नहीं
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Kumar Prem Pinaki
जंग होगी तो पड़ेंगे जानवर अब भेजने
आशिक़ी की यार तैयारी यहाँ घर घर चले
Saurabh Yadav Kaalikhh
जंग मैदान-ए-जंग में होगी
क़त्ल भी अब किसी को होना है
Zafar Siddqui
ख़ुदा से जंग रहेगी तमाम उम्र मेरी
नमाज़ पढ़नी है टोपी नहीं पहननी मुझे
A R Sahil "Aleeg"
कोई पूछे ख़ुदा के बंदों से
क्या मिला जंग लड़ के बच्चों से

हर्फ़-ए-आख़िर यही कहूॅंगा मैं
जीत सकते थे जंग लफ़्ज़ों से
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'June' Sahab Barelvi
जंग में पोरस से लड़ते ख़ास मंज़र हो गया
फ़त्ह करनी थी जिसे दुनिया सिकंदर हो गया
Manohar Shimpi
लिख ज़ुल्म को अब ज़ुल्म तू
और जंग का ऐलान कर
Rohan Hamirpuriya
अब ज़रूरत पड़ने पर कुछ यूँँ बदल जाते हैं अपने
जंग में आगे खड़ा कर के निकल जाते हैं अपने

जब तरक़्क़ी देखते हैं अपनों की तब सब सेे पहले
उन के आगे मोम के जैसे पिघल जाते हैं अपने
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Swapnil Srivastava 'Bhola Lucknowi'
बैठे हैं कफ़न ले कर इस जंग में हम यारों
दुश्मन तो अभी लेकिन तैयार नहीं दिखते
Sahil Verma
आज लगता है जंग जीती है
प्यार की बाजी हार कर मैं ने
Nirbhay Nishchhal
आहन जैसे खा जाती है लोगों को
जंग जैसी ही ये मोहब्बत होती है
Marghoob Inaam Majidi
ज़िंदगी में नित्य बढ़ता ये विजय रथ अब मिरा है
हर घड़ी चल जो रहा संघर्ष का पथ अब मिरा है
Vinod Ganeshpure
हार कर हँसना हुनर है खेल का
जंग में बाज़ी लगी थी जान की
"Dharam" Barot
ज़िंदगी भर जंग लड़कर हारता
मौत से जीता न कोई आदमी


हार का ग़म हो गया था इस लिए

रात भर पीता न कोई आदमी
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Suryapratap swtantra
हालत-ए-जंग से सिर्फ़ घाटे हुए
बद-दुआ दे रहे हाथ काटे हुए

चार ग़ज़ की ज़मीं के लिए लड़ गए
जिन कबीलों ने रक़्बा थे बाँटे हुए
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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
कोई हीरा नहीं है गट्ठर में
क्यूँ पड़े हो तुम इस के चक्कर में

किसी ने जंग को पुकारा था
किसी को छोड़ आया बिस्तर में
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Asad Khan
मोहब्बत एक-तरफ़ा जंग है सो
यहाँ बस हारने की ही ख़ुशी है
Pranav Mishra
शूर भी था वीर भी वो
था धनुष का तीर भी वो
Vinod Ganeshpure
जंग में तेरी तरफ़ से सब से आगे रहने को हम
शाह की सफ़ छोड़ कर अब ख़ुद को प्यादा कर रहे हैं
Aditya Maurya
फ़िल्म हो या अस्लियत लड़का ही क्यूँ पगलाता है
इश्क़ हो या जंग हो लड़का ही मारा जाता है
Sachit Agrawal
थोड़ा उलझे मसाइल-ए-दिल में
कुछ परेशाँ दिमाग़ ने किया था

रात से जंग जीत जाते मगर
ये अँधेरा चराग़ ने किया था
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Prit
क्यूँ हमेशा आसमाँ छूने की हो जंग
इक दफ़ा देखो ज़रा छू के ज़मीं भी
'Sabaa'
जंग तन्हाई कभी जीत न पाती मुझ सेे
जाने वाले तू अगर लौट के आया होता
Sadik Ali Shadab