Bebas Shayari - Majboori, laachari aur dil ki bechain khamoshi ke alfaaz

Bebas shayari reflects those moments when a person feels completely helpless, lost, and without control. It captures majboori, broken hopes, and the silence of emotions that cannot be expressed. These lines resonate with anyone who has faced situations where dil wanted something, but haalaat said otherwise.

bebas shayari
वो मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया तो था
मैं ने उस के हाथ चू
में और बेबस कर दिया
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Waseem Barelvi
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majboori shayari
इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
कोई नहीं है बे-वफ़ा अफ़्सोस मत करो
Bashir Badr
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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है
किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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कब तुम्हें इश्क़ पे मजबूर किया है हम ने
हम तो बस याद दिलाते हैं चले जाते हैं
Abbas Tabish
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चले जाओ भी अब जी लेंगे पर
सच कहो मजबूरी है क्या

मुझे ये कहानी कुछ और लिखनी थी
तुम्हारे हिसाब से पूरी है क्या
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Zubair Ali Tabish
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इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने
Jaun Elia
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ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी
Kaleem Aajiz
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मोहब्बत के इक़रार से शर्म कब तक
कभी सामना हो तो मजबूर कर दूँ
Akhtar Shirani
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ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते
Akhtar Shirani
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मरने वाले तो ख़ैर बेबस हैं
जीने वाले कमाल करते हैं
Adam Gondvi
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ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं

हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल
हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है
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Mehshar Afridi
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मजबूरी में रक़ीब ही बनना पड़ा मुझे
महबूब रहके मेरी जो इज़्ज़त नहीं हुई
Sabahat Urooj
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तो क्या ये हो नहीं सकता कि तुझ से दूर हो जाऊँँ
मैं तुझ को भूलने के वासते मजबूर हो जाऊँ

सुना है टूटने पर दिल सभी कुछ कर गुजरते हैं
मुझे भी तोड़ दो इतना कि मैं मशहूर हो जाऊँ
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SHIV SAFAR
कभी पहले नहीं था जिस क़दर मजबूर हूँ मैं आज
नज़र आऊँ न ख़ुद क्या तुम सेे इतना दूर हूँ मैं आज

तुम्हारे ज़ख़्म को ख़ाली नहीं जाने दिया मैं ने
तुम्हारी याद में ही चीख़ के मशहूर हूँ मैं आज
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SHIV SAFAR
उस को भी उस की बाँहों में सोना होगा
सोना ही है रिश्तों की भी मजबूरी है
Umesh Maurya
यार उस ने ही किया मजबूर मुझ को मरने पे
जो ज़ियादा रो रहा है मेरे मर जाने के बा'द
Shekhar kumar
ज़ब्त से चूर हो गया होगा
ग़म से मामूर हो गया होगा

बज़्म-ए-अहबाब छोड़ने वाला
कितना मजबूर हो गया होगा
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Nusrat Siddiqui
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हम तुम में कल दूरी भी हो सकती है
वज्ह कोई मजबूरी भी हो सकती है
Bedil Haidri
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ये मरना जीना भी शायद मजबूरी की दो लहरें हैं
कुछ सोच के मरना चाहा था कुछ सोच के जीना चाहा है
Sahar Ansari
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बहुत बनाएँगे लेकिन कभी नहीं बनेगी
पुरानी चीज़ दोबारा नई नहीं बनेगी

वो झुर्रियाँ तो बना लेंगे मेरे चेहरे की
मुसव्विरों से मेरी बेबसी नहीं बनेगी
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Sarwar Khan Sarwar
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झुक के मिलना मेरी आदत नहीं मजबूरी है
मैं ने अहबाब के एहसान उठाए हुए हैं
Sarwar Khan Sarwar
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मेरी इस हालत पे हँसने वाले ऐ शख़्स
एक दिन दुनिया तुझे भी आज़माए

तुझ को भी मजबूर कर दे तेरे अपने
दिल दुखाने की तू भी क़ीमत चुकाए
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Haresh Vanza
ज़िंदगी है अपने क़ब्ज़े में न अपने बस में मौत
आदमी मजबूर है और किस क़दर मजबूर है
Ahmed Amethwi
दिल ने पहले पहल तो उस की कमी तस्लीम की
फिर कहीं आँखों ने अपनी बेबसी तस्लीम की

तुझ से मिलते ही मुझे पहली मोहब्बत हो गई
और मैं ने वो मोहब्बत आख़िरी तस्लीम की
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Ruqayyah Maalik
दोनों का मिलना मुश्किल है दोनों हैं मजबूर बहुत
उस के पाँव में मेहंदी लगी है मेरे पाँव में छाले हैं
Ameeq Hanafi
कौन आता है पैरवी के लिए
एक मजबूर आदमी के लिए
Shakir Dehlvi
ऐ ज़िन्दगी अब मौत से अच्छी निभेगी
तुम सेे बहुत मैं दूर हूँ, ख़ुद से बहुत मजबूर हूँ
Anurudh kumar shastri
इतनी महोब्बत के बा'द भी फासला बढ़ाओगे तुम
मतलब मिरी मजबूरी का पूरा फ़ाएदा उठाओगे तुम
karan singh rajput
इक दूजे के आँसू पोंछ नहीं सकते
मजबूरी आख़िर मजबूरी होती है
Saarthi Baidyanath
जब बेबसी का मैं ख़ुदा से माँगता रहता सबब
तब वो ख़ुदा ख़ामोश मुझ को भी लगे बेबस बड़ा
Zain Aalamgir
तकलीफ़ में है वो भी मुझे देख के तन्हा
मजबूरी उस की ये है कुछ कर नहीं सकती
Aryan Goswami
किसी को भूल जाने में , किसी को याद रखने में
यहाँ ये ज़िन्दगी बीते है दिल को शाद रखने में

जमाने भर के शाइ'र की तरह मेरा भी क़िस्सा है
मगर बेबस रहा हूँ ख़ुद की मैं रूदाद रखने में
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Kush Pandey ' Saarang '
बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है

कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है
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Sandeep Thakur
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ये भी कैसी मजबूरी है
दोनों के बीच में दूरी है

तय है उस का नेता बनना
जिस के हाथ में छूरी है
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Kush Pandey ' Saarang '
पेशानी को चूम रही है लब को छोड़ दिया उस ने
मजबूरी का नाम बता कर दिल को तोड़ दिया उस ने
Kush Pandey ' Saarang '
गली हर इक मोहब्बत की अँधेरी हो नहीं सकती
सिवा मज़हब के मजबूरी तो तेरी हो नहीं सकती

किया था इश्क़ मैं ने जब तभी ये जानता था मैं
तू लड़की है 'अलीगढ़' की तू मेरी हो नहीं सकती
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Shashank Shekhar Pathak
मुझ सेे बिछड़ना तेरी मजबूरी सही
कुछ भी नहीं तो मीलों की दूरी सही
karan singh rajput
ज़मीं से दूर होते जा रहे हैं
मियाँ मशहूर होते जा रहे हैं

बनाते हैं बहाने पर बहाने
बड़े मजबूर होते जा रहे हैं
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Saarthi Baidyanath
कहने को जब बात ज़रूरी होती है
उस दम दिल की नामंजूरी होती है

दिल की धरती बंजर है जाने कब से
जाने क्यूँँ बरसात अधूरी होती है

इक दूजे के आँसू पोंछ नहीं सकते
मजबूरी आख़िर मजबूरी होती है
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Saarthi Baidyanath
फिर हुए आज मजबूर मस्खे गुलू के लिए हम
फिर किसी चहरे ने आज रस्सी गले से निकाली
Raza sahil
अपनी कहानी फिर कभी पूरी सही
मुझ सेे बिछड़ना तेरी मजबूरी सही
karan singh rajput
अपने पथ से क़दम हटाकर रक्खे हैं
कितने दिल में दर्द दबा कर रक्खे हैं

हम से ये मजबूरी क्या-क्या करवाए
हम ने भी कुछ ख़्वाब सजाकर रक्खे हैं
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Naimish trivedi
दूरी से मजबूरी है
मजबूरी से दूरी है

जान-ए-जाँ महसूस करो
मेरा प्यार ज़रूरी है
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Abuzar kamaal
ये मजबूरी ने देखो कैसे अपने हाथ बाँधे है
कि अपने छोड़ कर सब गैरों के ही साथ बाँधे है

अभी से डरती क्यूँ हो तुम मेरी जाँ, रात बाकी है
अभी बत्ती बुझाई है, अभी बस हाथ बाँधे है
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karan singh rajput
गर हो मजबूरी जो लड़कों की तो, ठहरी बेवफ़ाई
कर दे लड़की बे-वफ़ाई गर जो, मजबूरी है भाई
A R Sahil "Aleeg"
जुदाई इश्क़ का दस्तूर क्यूँँ है हम नहीं समझे
मोहब्बत इस क़दर मजबूर क्यूँँ है हम नहीं समझे
Rekhta Pataulvi
तुझे बदनाम करने की निय्यत रखता नहीं था मैं ,लेकिन
ये मजबूरी थी मेरी, बज्म में जो नाम बोला है तेरा
A R Sahil "Aleeg"
ख़ुद अपने हाल पे हँसवा के फिर बेबस किया मुझ को
किसी पागल ने मुझ को इस क़दर पागल बना डाला
Divyansh "Dard" Akbarabadi
तुम सेे कहते जाने क्यूँ घबराते हैं
अपने अंदर बे-मतलब चिल्लाते है

कितनी मजबूरी है कितने बेबस हैं
नंबर है पर कॉल नहीं कर पाते हैं
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Prince Jhankra
इश्क़ में मजबूरी क्या होती है कोई उन सेे पूछिए
जो सूची में पहले नंबर को भी कॉल न कर पाए
Sandeep dabral 'sendy'
निगाह ए ग़ौर से देखो‌ बड़े मजबूर हैं हम
उसी के पास में बैठे हैं जिस सेे दूर हैं हम
Muhammad Fuzail Khan
तुम मुझ को रोने पर मजबूर कभी मत करना
मैं रोया तो मेरे घर वाले भी रोएंँगे
Kabir Altamash
मजबूर इतना कर दिया हालात ने हम को कि हम
बस बारहा गिरते रहे और बारहा हँसते रहे
Anukriti 'Tabassum'
देख मजबूरी क़लम की
रो रहे अल्फ़ाज़ सारे
A R Sahil "Aleeg"
यहाँ फुटपाथ पे अब तो नज़र है ही नहीं आख़िर
पढ़ाई छोड़ मजबूरी कहे मुझ को कमाना है
Raunak Karn
दिन ईद तक का अब ग़रीबों को सताता है ख़ुदा
बेबस बना बच्चों को भी भूखा सुला देती यहाँ
RAAHI
उस ने भी सब हाल ख़ुदा पर छोड़ दिया
मैं भी क़िस्मत के हाथों मजबूर हुआ
Sunny Seher
ख़ुद को उन हालात में भी ज़िंदा रक्खा
जिस
में सबकी मर जाना मजबूरी थी
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Sunny Seher
रातों को जगना मेरी मजबूरी है
मेरे घर की छत से पानी आता है
Meem Alif Shaz
मूल्य एक से चार किया है फूलों का
यूँँ महँगा बाज़ार किया है फूलों का

तुम क्या जानो पीड़ा बेबस तितली की
तुम ने तो व्यापार किया है फूलों का
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Jatin shukla
मेरे हालात मुझ को इस तरह मजबूर कर बैठे
जिसे अपना समझ बैठे उसे ही दूर कर बैठे
anupam shah
इस सेे पहले कि ये मजबूर कर दे
या इलाही मुझे तू दूर कर दे
Ambar
रो रहा हूँ बैठ कर तन्हाई में
कितना बेबस मैं दिवाना हो गया
Kumar Aryan
चाहता नहीं पर मजबूर कर रहा है वो
जानबूझ कर खु़द से दूर कर रहा है वो
Shashank Shekhar Pathak
ख़ुदा के घर से मैं दूरी बनाऊँगा
जी फिर मैं घर में मजबूरी बनाऊँगा
Amanpreet singh
तेरा वो घर मेरे यहाँ से जाँ बहुत ही दूर है
मिल भी नहीं सकते अभी हम ही बहुत मजबूर हैं
Danish Balliavi
वो बिकाऊ नहीं उस की कोई मजबूरी है
पेट की भट्टी का ईंधन ही बहुत महँगा है
Moni Gopal Tapish
जो राहें थीं ये फूलों सी
वाँ पर सारे दलदल निकले

तू इतना भी बेबस मत कर
इस दिल से फिर हलचल निकले
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Divya 'Kumar Sahab'
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इश्क़ की आदत से मजबूर थी वो भोली लड़की
वरना दुल्हन बन के रुख़सत हो जाती अब तक
Meem Alif Shaz
ख़्वाब दिखाता है ख़ुद उन सेे दूर भी करता है
इज़्ज़त कहता है फिर चकना चूर भी करता है

रोज़ कहेगा जाँ तेरे बिन मेरा क्या होगा
रोज़ मुझे मर जाने पर मजबूर भी करता है
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Shayra kirti
खरा खोटा तुम्हें जब बोलते हैं सब
कोई मजबूर सिसकी भर के रोता है
Sohil Barelvi
तुम हम को छोड़ने पे यूँँ मजबूर हो गए
क्यूँ मेरे सामने से बहुत दूर हो गए
Danish Balliavi
हर किसी में नज़र मुझ को तू आ रही
सब को अब चाहना मेरी मजबूरी है
SHIV SAFAR
मैं बुरा हूँ और हूँ मजबूर आदत के लिए
दूर रहिए आप भी अपनी शराफ़त के लिए
Abhishek Tiwari
ये मौत मेरे साथ चलती है मगर
मैं कुछ नहीं कर सकता मैं मजबूर हूँ
Meem Alif Shaz
प्राण को देह से दूरी दे देगा कल
राज्य धर्म ऐसी मजबूरी दे देगा कल

एक धोबी ने अपराध तय कर दिया
एक राजा भी मंज़ूरी दे देगा कल
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Jatin shukla
शब-ए-ग़म ने किया मजबूर रोने पे
वगरना हम नहीं थे रोने वालो में
ABhishek Parashar
ये आम आदमी का, दस्तूर हो गया है
जो है जहाँ वहीं पर, मजबूर हो गया है
Bankelal Srivastava "Rajneesh"
बदल जा तू नहीं तो रब का ये पैग़ाम आएगा
तू ज़ालिम हर जगह से बेबस-ओ-नाकाम आएगा

हमारे मुल्क की बर्बादियों का ज़िक्र जब होगा
सर-ए-फ़ेहरिस्त ऐ ज़ालिम तेरा ही नाम आएगा
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Danish Balliavi
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अहल-ए-क़लम मशग़ूल हैं या मजबूर
अच्छा लिखा, लिखके रहे हैं मसरूर
Manohar Shimpi
इश्क़ की ये मजबूरी ठहरी
दाग़ों को भी तिल कहना है
A R Sahil "Aleeg"
हो गया फिर क़त्ल उलफ़त, सच,भरोसा, दिल क़सम, वा'दा-वफ़ा
इश्क़ में जब भी बहाना और मजबूरी के सिक्के चल गए
A R Sahil "Aleeg"
बे-वफ़ाई या वफ़ादारी या मजबूरी अहम अरकान लेकिन
बुज़दिली की और हिम्मत की कहानी भी निहाँ इस इश्क़ में है
A R Sahil "Aleeg"
बे-वफ़ाई न कोई मजबूरी
मसअला ये तो फ़ौक़ियत का है
A R Sahil "Aleeg"
बे-वफ़ाई का तुम को भी तमगा लगा
हार कर इश्क़ में यार कैसा लगा

हो के आई हो लाचार बेबस यहाँ
देख कर तुम को यूँँ दिल को अच्छा लगा
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Rovej sheikh
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मैं तेरे पास तो अब लौट के आने से रही
कर दिया माँग के सिन्दूर ने मजबूर मुझे
Sachin maithil
साथ रह कर दूर रहता है कोई
इस लिए मजबूर रहता है कोई

आइने को देख मुझ को ये लगा
क्यूँ यहाँ मग़रूर रहता है कोई
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Satyawesh Niraj
मजबूरी ही, बाज़ीगर की हिम्मत है
रस्सी पर चलते हैं, ध्यान सँभाले हम
Moin Ahmed "Aazad"
इलाज ये भी नहीं कि मजबूर कर दिए जाओ
वगरना जौन एलिया को किस ने नहीं पढ़ा होगा
Devesh
रिश्तों में खालीपन सा आ जाता है
बातें करते रहना भी मजबूरी है
Sanskar Shrivastav
सब को हासिल होने में
कुछ मजबूरी क़ाएम रख

सब सेे रिश्ते रख लेकिन
सब सेे दूरी क़ाएम रख
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Armaan khan
चाहते हैं कि लौट आओ पर
इतने मजबूर भी न होना तुम
Chetan
बनाए चुनके जितने पासबाँ सब
घरों को रोज़ लूटे जा रहे हैं

बहुत मजबूर हैं मालिक घरों के
लहू के घूँट पीते जा रहे हैं
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Ajeetendra Aazi Tamaam
चाहत थी आबाद रहे पर मर जाए भी चाहा
मेरी कैसी मजबूरी है कैसा पागलपन है
harshit karnatak
बेबसी बेचैन करती है तुम्हें
बेबसी की इंतिहा ही सब्र है

पहले ख़ुद मरने को बेबस कर दिया
पूछती हो अब ये किस की कब्र है
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Gopesh "Tanha"
कुछ तो अपनी नासमझी थी कुछ उस की
धीरे धीरे इक दूजे से दूर हुए

रस्म रिवाज़ो ने कतरे हैं पंख कई
सब तो रिश्तों के आगे मजबूर हुए
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Umesh Maurya
दर्द में जान जा रही होगी
आँसुओं में नहा रही होगी

हो के मजबूर इस ज़माने से
वो मेरे ख़त जला रही होगी
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Yogendra Singh Raghuwanshi
हम भी तन्हा हैं तुम भी तन्हा हो
एक जैसी है बेबसी अपनी
Shajar Abbas
आदमी बेबस लगे है क्यूँँ "मनोहर"
जौर बेहद जब किसी पर हो ही जाए
Manohar Shimpi
ऐ ग़म-गुसार तू ने तो मजबूर कर दिया
पहले किसी के रू-ब-रू रोया नहीं था मैं
Sohil Barelvi
न जाने क्यूँँ बहुत मजबूर होता जा रहा हूँ मैं
जो अपना है उसी से दूर होता जा रहा हूँ मैं

तुम्हारे साथ था तो बात ही कुछ और थी मुझ
में
तुम्हारे बिन बहुत बे-नूर होता जा रहा हूँ मैं
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Kaviraj " Madhukar"
तेरे इन नकाबों में दुनिया बसी है
मेरी चाहतों में तो बस बेबसी है
Kashif Hussain Kashif
भला कब तक चलेगा सिलसिला ये बेबसी का
चलो अब ख़त्म करते हैं ये क़िस्सा ज़िंदगी का

मुझे अब और तेरी दुनिया में रहना नहीं है
ख़ुदा रस्ता दिखा दे अब मुझे तू ख़ुद-कुशी का
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ABhishek Parashar
मुफ़्लिस की तो मजबूरी है सर्दी गर्मी बारिश क्या
रोटी के ख़ातिर सारे ग़म सहते हैं तो सहने दो
SALIM RAZA REWA
ख़ाक का है पुतला इंसाँ ख़ाक में मिल जाएगा

कैसी दौलत कैसी शोहरत क्यूँ भला मग़रूर है

वक़्त से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता कभी

वक़्त के हाथों यहाँ हर एक शय मजबूर है
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SALIM RAZA REWA
हौसले के सामने तक़दीर भी झुक जाएगी

तू बदल सकता है क़िस्मत किसलिए मजबूर है

आदमी की चाह हो तो खिलते हैं पत्थर में फूल

कौन सी मंज़िल भला जो आदमी से दूर है
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SALIM RAZA REWA
बेबसी का इक किनारा
और फिर मैं मन का मारा

रोज़ मुझ सेे पूछती है
हो गया नाटक तुम्हारा
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Anurag Pandey
करेगा पास तुझ सेे फिर तुझी से दूर कर देगा
मुझे ये इश्क़ साला लग रहा मजबूर कर देगा
ADARSH PANDEY SAURABH