Politics Shayari - Power, truth, aur system par likhi sharp aur bold shayari

Politics Shayari reflects the raw reality of power, governance, and society. From exposing corruption (bhrashtachar) to questioning authority, these verses give voice to public emotions, satire, and truth. Whether it’s about democracy, leaders, or injustice, this shayari captures the pulse of the system with bold expression.

एक सोफ़ा है जिसे तेरी ज़रूरत है बहुत
एक कुर्सी है जो मायूस रहा करती है
Abbas Qamar
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अपनी लाश उठाओ अपने काँधे पर
सरकारों के जिम्में कुर्सी छोड़ो बस
Atul K Rai
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कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यूँ नहीं जाते
Irtiza Nishat
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ज़्यादा मीठा हो तो चींटा लग जाता है
सच्चे इश्क़ को अक्सर बट्टा लग जाता है

हम ने अपनी जान गंवाई तब जाना
भाव मिले तो कुछ भी सट्टा लग जाता है
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Ritesh Rajwada
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गुल-दान में गुलाब की कलियाँ महक उठीं
कुर्सी ने उस को देख के आग़ोश वा किया
Mohammad Alvi
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पैसा कमाने आते हैं सब राजनीति में
आता नहीं है कोई भी खोने के वास्ते

छम्मो का मुजरा सुनते हैं नेता जो रात भर
संसद भवन में आते हैं सोने के वास्ते
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Paplu Lucknawi
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परिंदों सरहदों पे ध्यान देना
हमारे मुल्क में ही जान देना

हमें नेता से क्यूँँ नफरत है सुन लो
उन्हें आता है केवल ज्ञान देना
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Kush Pandey ' Saarang '
उसे मैं भूल जाऊँ ये मगर आसान थोड़ी है
मोहब्बत है किसी नेता का ये ईमान थोड़ी है
ATUL SINGH
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सफारी में नेता चलेंगे समझिए
हैं जनता-जनार्दन तो पीछे ही चलिए
Kush Pandey ' Saarang '
ये भी कैसी मजबूरी है
दोनों के बीच में दूरी है

तय है उस का नेता बनना
जिस के हाथ में छूरी है
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Kush Pandey ' Saarang '
सियासी जो परचम उठाए हुए हो
मियाँ ख़ुद को क्या तुम बनाए हुए हो

वही तो नहीं सुन रहा बात तेरी
जिसे वोट देकर जिताए हुए हो
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Kush Pandey ' Saarang '
न सरकारी हो बन्दा तो कोई लड़की नहीं देता
बचीं थी नौकरी जो भी वो सारी खा गऐ नेता

पता होता के अच्छे दिन मिलेंगे इस तरीके से
बिना नखरे दिखाए मैं तो कब का ब्याह कर लेता
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Naveen mahor
अपनी शोहरत अपनी कुर्सी अपना मतलब है अज़ीज़
क़ौम से क्या लेना, थोड़ी सी रवादारी बहुत
Rekhta Pataulvi
अब की बार नहीं आएगी झाँसे में आवाम मियाँ
तुम पहुँचा दो सत्ता के गलियारों तक संदेश मिरा
Sandeep dabral 'sendy'
नेता कब ही जान सका है लोगों की परेशानी को
भाषण देना शोर मचाना चिल्लाना सब नाटक है
Sanskar Shrivastav
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अच्छे ख़ासे सत्ता के गलियारों में दागी हो जाते हैं
कुर्सी की ख़ातिर अपनों के ही तेवर बाग़ी हो जाते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
कि सियायत की दुनिया में आते ही आ जाती है तब्दीली
कल के सारिक़ इमरोज़ यहाँ सत्ता के भागी हो जाते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
दरमियाँ नफ़रत के घुट घुट कर मुहब्बत मर रही है
ख़ून होता है हया का और शराफ़त मर रही है

ये सियासत है कि दंगों से इन्हें कुर्सी मिली है
इस सियासी खेल में यारों ख़जालत मर रही है
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Chandan Sharma
हमेशा शे'र के ही हाथ में होता है सब जंगल
ये सत्ता भी हमेशा कातिलों के हाथ होती है

छुड़ाया हाथ पत्ते ने मगर इल्जाम पेड़ों पर
ये दुनिया भी हमेशा जुल्मियों के साथ होती है
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Shoonya Shrey
टेबल पर रक्खी हैं उस की तस्वीरें
और कुर्सी पर उस की यादें बैठी हैं

कितने मौसम आए कितने बीत गए
फिर भी कुछ चीजें वैसी की वैसी हैं
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Akash Rajpoot
जन सेवा के मार्ग हज़ारों हैं लेकिन
नेता जी को मोक्ष मिलेगा संसद में
Sandeep kushwaha
तुम अपने को राजा समझे बैठे हो क्यूँ
कुर्सी वाले कब के तुम को बेच चुके हैं
Umesh Maurya
एक कुर्सी के यहाँ पर कितने दावेदार हैं
इश्क़ में भी देखिए साहब सियासत है बहुत
Vijay Anand Mahir
नेता भी डाल देते हैं ऐसे फ़साद में
हिंदू कभी तो वो कभी मुस्लिम विवाद में
Danish Balliavi
सेठ अनपढ़ नेता अनपढ़ ये कहानी है बताई
देश में ऐसी पढ़ाई की दशा किस ने बनाई
"Dharam" Barot
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ये जो कुर्सी पे बैठे हैं फ़ुर्सत से
लाखों ख़्वाबों का क़त्ल किए बैठे हैं
Meem Alif Shaz
बज़्म में नेता जी भी बतिया रहे थे चमचे से
फ़ाइदा हद से बहुत ज़्यादा है बे-ईमानी में
Sandeep dabral 'sendy'
दहशत-गर्दी फैल रही है अब मज़हब के नारों से
लोगों को मारा जाता है गोली से हथियारों से

कौन है रहबर कौन है रहज़न सब को ख़बर है 'दानिश' अब
क़ातिल को ताक़त मिलती है सत्ता के गलियारों से
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Danish Balliavi
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सत्ता मद में साँप छछुन्दर बिच्छू पाले हैं
क्यूँ कहते हो अच्छे दिन अब आने वाले हैं
Umesh Maurya
लिखना होगा मुझ को जब भी दंगों पर
मैं लिक्खूँगा सत्ता के भिखमंगों पर

हो सरहद पर जब भी रिपु से जंग यहाँ
मैं भेजूँ नेताओं को भी जंगों पर
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Sandeep dabral 'sendy'
आज के नेता अपने मुँह में पान घुलाए बैठे हैं
देश के कोने कोने में ये आग लगाए बैठे हैं
Krishnavat Ritesh
आज के इस दौर में अस्मत बचाना भी जटिल है
ये सदन वाले सभी कुर्सी बचाने में लगे हैं
Ganesh gorakhpuri
कितने नेता हैं जिन्होंने रैली कर कर नारे बेचे
कुछ नहीं सूझा उन्हें जब तो उन्होंने वादे बेचे

ये हमारा देश है जो क्या यहाँ बिकता नहीं है
एक ने तो क़स
में खा खा झूट बेचे जुमले बेचे
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Mohit Subran
सौंप के देखी हम ने अंग्रेजों को दुनिया
अब तो ये कुर्सी हिंदुस्तानी बनती है
Vibhu Raj
मशवरा तन्हाई मुझ को देती रहती है
कुर्सी पे चढ़ जाओ रस्सी ठीक से बाँधो
Aditya soni
वोट दे आते हो तुम सब जात, फ़िरक़ा देख कर
ऐ वतन के वासियों इस
में है ख़तरा, देख कर

फिर नहीं तुम बा'द में सब चीखते रह जाओगे
इस सियासी दौड़ में शामिल है बहरा, देख कर
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Updesh 'Vidyarthi'
जब वोट के दिन थे तब वे रोज़ ही दिखते थे
इक साल हुआ तो अब इक बार नहीं दिखते
Sahil Verma
ई डी का शोर है चुप-चाप रहो
सत्ता पुर-ज़ोर है चुप-चाप रहो

भागकर मुझ सेे तू जाएगा कहाँ
रेड हर ओर है चुप-चाप रहो
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Shubham Rai 'shubh'
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पुराने घर के मलबे पर नई कुर्सी बना कर जो
मकाँ हम ने बिठाया है मज़ार-ए-दौर-ए-बचपन है
Javed Aslam
सलाम अपना अमीरों पे आम करता है
मगर गरीबों से कब वो कलाम करता है

लिहाफ़ ठंड में बाँटे गिलास गर्मी में
वो वोट पाने के सब इंतिज़ाम करता है
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Meem Alif Shaz
कुर्सी पंखा है और रस्सी है
और ख़ाली है मेरा कमरा भी
Meem Maroof Ashraf
चुनाव में हारे हुए लोगों से पूछो
सत्ता किसी के बाप की जागीर नहीं है
shivendra Mishra
तुम नए नेता बने हो या गली तुम भूल आए हो
फेंकने को कौन सा जुमला नया इस बार लाए हो
Shubham Rai 'shubh'
कैसे बदलेगी दशा एवं दिशा इस देश की
चुन रहे नेता युवा जब क़ाफ़िलों को देख कर
Sani Singh
सियासत खेल जैसी है हमारा और तुम्हारा क्या
बड़ी गहरी बड़ी उलझी नहीं रखती किनारा क्या

मुझे पागल सभी लगते झगड़ते जो बिना मतलब
तुम्हें कुर्सी नहीं मिलनी तुम्हें अब भी सहारा क्या
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Atul Yadav Nirbhay
पत्रकार मैं जानदार हूँ
राजनीति में शानदार हूँ
Vinod Ganeshpure
ये बात भूलें न नेता कि आम लोगों ने
जभी है चाही जो सरकार वो गिरा डाली
Mohit Subran
एक दिन में कुछ नहीं होता कभी भी
राजनीति खेल है सातत्य का ही
Vinod Ganeshpure
रोज़ कुर्सी पर जहाँ मैं बैठता हूँ
चाहते हैं बैठना सारे उसी पे
Vinod Ganeshpure
हम निभाते चुनाव को सारे
देश में वोट इक हमारा है
Vinod Ganeshpure
समझ अफ़ज़ल उसे ख़ुद को गिरा ये मान लेते हैं
चुने हैं ख़ुद जिसे ख़ुद से जुदा ये मान लेते हैं

ज़रा तुम सादगी इस मुल्क के लोगों की तो देखो
यहाँ कुर्सी पे कोई हो ख़ुदा ये मान लेते हैं
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Kabiir
मियाँ एक भी कुर्सी ख़ाली नहीं है
मेरे साथ बैठी है तन्हाई मेरी
ABhishek Parashar
देश को अब झोंक नफ़रत में ख़ुश हैं वो
कम से कम कुर्सी रहेगी कुछ साल तो
Naviii dar b dar
अजब गंदी सियासत चल रही है
हर इक रिश्ते पे तोहमत चल रही है

बुज़ुर्ग इस कुंबे के कैसे रहें चुप
बुज़ुर्गों पर तो आफ़त चल रही है
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Nityanand Vajpayee
ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को
जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
Abhishek shukla
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हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग
रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही
Dushyant Kumar
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सँभलता हूँ तो ये लगता है जैसे
तुम्हारे साथ धोखा कर रहा हूँ
Shariq Kaifi
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धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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ये सच है नफ़रतों की आग ने सब कुछ जला डाला
मगर उम्मीद की ठण्डी हवाएँ रोज़ आती हैं
Munawwar Rana
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मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है
मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़
Faiz Ahmad Faiz
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उस की टीस नहीं जाती है सारी उम्र
पहला धोखा पहला धोखा होता है
Shariq Kaifi
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा
वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा

मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ
मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
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Tehzeeb Hafi
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मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
Sahir Ludhianvi
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है
दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है

सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ
मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
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Tehzeeb Hafi
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ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है
नींद हमेशा मुझ सेे धोखा करती है

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
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Tehzeeb Hafi
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चले जाओ भी अब जी लेंगे पर
सच कहो मजबूरी है क्या

मुझे ये कहानी कुछ और लिखनी थी
तुम्हारे हिसाब से पूरी है क्या
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Zubair Ali Tabish
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कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने
बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की
Parveen Shakir
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मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी
वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा
Parveen Shakir
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इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे
रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा
Nida Fazli
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सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे
पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे
Nawaz Deobandi
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रोक सकता हमें ज़िंदान-ए-बला क्या 'मजरूह'
हम तो आवाज़ हैं दीवार से छन जाते हैं
Majrooh Sultanpuri
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सर पर हवा-ए-ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ
अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ
Majrooh Sultanpuri
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झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए
और मैं था कि सच बोलता रह गया
Waseem Barelvi
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इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं
होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं
Javed Akhtar
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ये भी ए'जाज़ मुझे इश्क़ ने बख़्शा था कभी
उस की आवाज़ से मैं दीप जला सकता था
Ahmad Khayal
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अगर सच इतना ज़ालिम है तो हम से झूट ही बोलो
हमें आता है पतझड़ के दिनों गुल-बार हो जाना
Ada Jafarey
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ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है बढ़ता है तो मिट जाता है
ख़ून फिर ख़ून है टपकेगा तो जम जाएगा
Sahir Ludhianvi
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ये सच है कि पाँवों ने बहुत कष्ट उठाए
पर पाँव किसी तरह राहों पे तो आए
Dushyant Kumar
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मिरी ख़ामोशियों की झील में फिर
किसी आवाज़ का पत्थर गिरा है
Aadil Raza Mansoori
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मुझे रोना नहीं आवाज़ भी भारी नहीं करनी
मोहब्बत की कहानी में अदाकारी नहीं करनी
Afzal Khan
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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है
Afzal Khan
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अपना हर तिनका समेटे किस जगह पर जा छुपे
हम तिरी आवाज़ की चिड़ियों से घबराते हुए
Swapnil Tiwari
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सच घटे या बढ़े तो सच न रहे
झूट की कोई इंतिहा ही नहीं
Krishna Bihari Noor
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खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें
न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें
Qateel Shifai
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ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा
मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा
Dushyant Kumar
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा

हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में
अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
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Santosh S Singh
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आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए
वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है
Muneer Niyazi
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ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी
Kaleem Aajiz
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तेरा लिक्खा जो पढ़ूँ तो तेरी आवाज़ सुनूँ
तेरी आवाज़ सुनूँ तो तेरा चेहरा देखूँ
Bhaskar Shukla
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झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो
सरकारी एलान हुआ है सच बोलो

घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है
दरवाज़े पर लिखा हुआ है सच बोलो
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Rahat Indori
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शब भर इक आवाज़ बनाई सुब्ह हुई तो चीख़ पड़े
रोज़ का इक मामूल है अब तो ख़्वाब-ज़दा हम लोगों का
Abhishek shukla
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सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया
हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है
Asrar Ul Haq Majaz
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टक गोर-ए-ग़रीबाँ की कर सैर कि दुनिया में
उन ज़ुल्म-रसीदों पर क्या क्या न हुआ होगा
Meer Taqi Meer
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मोहब्बत कर मोहब्बत कर यही बस कह रहा है दिल
सुन अपने दिल की तू ये ग़ैर की आवाज़ थोड़ी है
Krishnakant Kabk
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होंठ जो कहते है सब कुछ झूठ है
आँख सच कहती है उस की बात सुन
Siddharth Saaz
हम ने जिस मासूम परी को अपने दिल की जाँ बोला था
उस ने हम को धोखा देकर और किसी को हाँ बोला था

सारे वादे भूल गई तुम कोई बात नहीं जानेमन
लेकिन ये कैसे भूली तुम मेरी माँ को माँ बोला था
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Tanoj Dadhich
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ये नहीं है कि वो एहसान बहुत करता है
अपने एहसान का एलान बहुत करता है

आप इस बात को सच ही न समझ लीजिएगा
वो मेरी जान मेरी जान बहुत करता है
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Jawwad Sheikh
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बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत'
तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से
Farhat Abbas Shah
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यक़ीन उस ने दोबारा बना लिया लेकिन
वो मेरे ज़ेहन से धोखा नहीं निकाल सका
Vikram Gaur Vairagi
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जब राह झूठ की चुनी तो लिफ़्ट भी मिली
और सच की राह में मिले पैरों के बस निशाँ
Tanoj Dadhich
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तेरी आवाज़ को इस शहर की लहरें तरसती हैं
ग़लत नंबर मिलाता हूँ तो पहरों बात होती है
Ghulam Mohammad Qasir
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हमारी ज़िंदगी में क्या नया है
वही होता है जो, वो हो रहा है

ज़रा दुनिया का अपनी हाल देखो
ज़रा सोचो कोई सच-मुच ख़ुदा है?
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Shaad Imran
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तुम मिरी ज़िंदगी हो ये सच है
ज़िंदगी का मगर भरोसा क्या
Bashir Badr
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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है
Afzal Khan
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लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे
जी चाहता है मैं तिरी आवाज़ चूम लूँ
Bashir Badr
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बाज़ार जा के ख़ुद का कभी दाम पूछना
तुम जैसे हर दुकान में सामान हैं बहुत

आवाज़ बर्तनों की घर में दबी रहे
बाहर जो सुनने वाले हैं, शैतान हैं बहुत
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Aalok Shrivastav
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सच बताओ कि सच यही है क्या
साँस लेना ही ज़िंदगी है क्या

कुछ नया काम कर नई लड़की
इश्क़ करना है बावली है क्या
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Vikram Gaur Vairagi
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