Teacher Shayari Collection - Respect, gratitude, and wisdom inspired lines for teachers

Teacher shayari beautifully expresses respect, gratitude, and admiration for those who guide us with knowledge and wisdom. A teacher, or guru, shapes not just minds but also character and life values. These shayari lines are perfect to honor teachers, celebrate their role, and share heartfelt appreciation on special occasions.

guru shayari
ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें
इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
Jaan Nisar Akhtar
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तमाम होश ज़ब्त इल्म मस्लहत के बा'द भी
फिर इक ख़ता मैं कर गया था माज़रत के बा'द भी
Pallav Mishra
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इल्म जब होगा किधर जाना है 
हाए तब तक तो गुज़र जाना है 
Madan Mohan Danish
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अश'आर मिरे यूँँ तो ज़माने के लिए हैं
कुछ शे'र फ़क़त उन को सुनाने के लिए हैं

ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें
इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
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Jaan Nisar Akhtar
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भूलभुलैया था उन ज़ुल्फ़ों में लेकिन
हम को उस
में अपनी राहें दिखती थीं

आप की आँखों को देखा तो इल्म हुआ
क्यूँँ अर्जुन को केवल आँखें दिखती थीं
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Ashraf Jahangeer
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बे-गिनती बोसे लेंगे रुख़-ए-दिल-पसंद के
आशिक़ तिरे पढ़े नहीं इल्म-ए-हिसाब को
Haidar Ali Aatish
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तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई
तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई
Mumtaz Naseem
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रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र का भी इल्म है लाज़िम
फ़क़त दिल टूट जाने से कोई शाइ'र नहीं बनता
Avtar Singh Jasser
आदमिय्यत और शय है इल्म है कुछ और शय
कितना तोते को पढ़ाया पर वो हैवाँ ही रहा
Sheikh Ibrahim Zauq
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एक आवाज़ पे आ जाती है दौड़ी दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान नहीं देखती है

दोस्ती दोस्ती होती है तुम्हें इल्म नहीं
दोस्ती फ़ाइदा नुक़सान नहीं देखती है
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Aadil Rasheed
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हद से बढ़े जो इल्म तो है जहल दोस्तो
सब कुछ जो जानते हैं वो कुछ जानते नहीं
Khumar Barabankvi
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क़ौम-ओ-मज़हब क्या किसी का और क्या है रंग-ओ-नस्ल
ऐसी बातें छोड़ कर बस इल्म-ओ-फ़न की बात हो
Sayan quraishi
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ये नदी वर्ना तो कब की पार थी
मेरे रस्ते में अना दीवार थी

आप को क्या इल्म है इस बात का
ज़िंदगी मुश्किल नहीं दुश्वार थी

थीं कमानें दुश्मनों के हाथ में
और मेरे हाथ में तलवार थी

जल गए इक रोज़ सूरज से चराग़
रौशनी को रौशनी दरकार थी

आज दुनिया के लबों पर मुहर है
कल तलक हाँ साहब-ए-गुफ़्तार थी
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ARahman Ansari
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हमारा इल्म बूढ़ा हो रहा है
किताबें धूल खाती जा रही हैं
Kaif Uddin Khan
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उस के लबों को चूम के ये इल्म हो गया
मुझ को वो ज़हर के बिना भी मार सकती है
Harsh saxena
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दुनिया पे अपने इल्म की परछाइयाँ न डाल
ऐ रौशनी-फ़रोश अँधेरा न कर अभी
Saqi Faruqi
तुझ को क्या इल्म तुझे हारने वाले कुछ लोग
किस क़दर सख़्त नदामत से तुझे देखते हैं
Parveen Shakir
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अभी तो सिर्फ़ मुहब्बत हुई है यार मुझे
अभी से ज़िक्र न कर कौन बे-वफ़ा होगा

मेरे बग़ैर तू ख़ुश रह लेगी ये इल्म न था
सो देखना है के बिन मेरे तेरा क्या होगा
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Md Akhter Ansari
मेरी सारी ग़ज़लें तुम बिन खारिज़ हैं
क्या तुम को इस का थोड़ा भी इल्म न था
Ved prakash Pandey
तुम को ये इल्म नहीं जूतों के बदले मेरे
ये बहुत कम सी रक़म माँगी है साली तुम ने
Aarush Sarkaar
हो गए होते बहुत पहले ही हम दौलत-मंद
दौलत-ए-इल्म से बस इल्म हटाना था हमें
Ramnath Shodharthi
चाहे वो हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई हों
उलमा का अस्ल तआ़रुफ़ इल्म हुआ करता है
Ramnath Shodharthi
यही तो ज़िंदगी की ख़ूबसूरती है मियाँ
किसी को इल्म नहीं कल यहाँ पे क्या होगा
Ramnath Shodharthi
में थकने वाला नहीं, तू ये बात जान ले
मेरी टीचर ज़िन्दगी, तू ये बात मान ले
Meem Alif Shaz
इल्म इतना तो मुझे हासिल है
बे-सबब कोई बहस अच्छी नहीं
Ananya Rai Parashar
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आड़ ले कर नए दौर के इल्म की
फ़ोन ने चिट्ठियों का गला घोंटा है
Intzar Akhtar
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आओगी नहीं तुम मुझे ये इल्म था लेकिन
रो-रो के पुकारा तुम्हें तन्हाई में मैं ने
Dipendra Singh 'Raaz'
तेरी फ़ितरत का मुझ को इल्म है सो
तेरे तोहफ़े अभी खोले नहीं है
Dipendra Singh 'Raaz'
सभी को इल्म है बर्बाद किस तरह से हुए
जो कह रहे थे मुहब्बत में तीर मारेंगे
Akash Rajpoot
इल्म था हम को हमारा बॉन्ड टूटेगा ही इक दिन
उस को अक्सर कार्बन का बॉन्ड आता था बनाना
Yogamber Agri
यार तुम ने अचानक नहीं छोड़ा था
इल्म था तुम को सब अब समझ आता है

तय अकेला भी हो सकता था ये सफ़र
तुम नहीं जब यहाँ तब समझ आता है
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Ashish Kumar Tiwari
लगता है इल्म नहीं हैं उन को मेरी चाहत का अब
ख़त लिखना ही होगा मुझ को इश्क़ जताने के ख़ातिर
Devansh gupta
इल्म नहीं है मुझ को मेरी चाहत का
तब ही लोग मुझे दीवाना नईं कहते
Devansh gupta
अच्छी तरह से है मुझे दुनिया का इल्म, सो
क्या काम है जो आप यूँँ अपना बना रहे
Prashant Sitapuri
इल्म है मगर उसे इस बात का भी
हम तबाह हो गए उन की नज़र से
Anoop Kumar Mayank
इल्म है नहीं जिस को बह्र काफ़िये का भी
ऐसा शख़्स ही साहब अव्वलीन शाइ'र है
A R Sahil "Aleeg"
हमें मालूम नहीं था ये मुसीबत है
हमें ये इल्म नहीं था की रिवायत है
Afzal Sultanpuri
आप को इल्म भी है इस का ज़रा
आप क्या क्या जुनूँ में बकते हैं

आप को हक़ है रूठ जाने का
आप चाहें तो रूठ सकते हैं
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Shajar Abbas
इस्लाह न कर पाए जो इंसान की मुर्शिद
वो इल्म हक़ीक़त में कोई इल्म नहीं है
Shajar Abbas
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उसे शायद नहीं ये इल्म जो आतिश लगाते हैं
हवाओं ने अगर बदला जो रुख़ जल वो भी जाएँगे
A R Sahil "Aleeg"
मक़सद-ए-इल्म है इस्लाह ज़माने की शजर
मक़सद-ए-इल्म फ़क़त पैसा कमाना नहीं है
Shajar Abbas
दिल उस को दे के ये इल्म हुआ हम को
मिलती है कैसे मरने की वजह हम को
Shadab khan
गुनाहों का नहीं है इल्म उस को क़ैदख़ाने में
यक़ीनन छूट जाएगा तो फिर ये दिल लगाएगा
anupam shah
या रब मुझ को अब हक़ रस्ता दिखला भी दे
बे मक़्सद इंसाँ को इल्म-ए-रूहानी दे
ALI ZUHRI
तेरी यादों के आने से मुझे ये इल्म होता है
कि तू वो भूल है जिस की मुआफ़ी ही नहीं होती
Bhoomi Srivastava
ये जवानी है दिलनशीं साहब
मसअला इल्म-ए-हुस्न का है बस
Suraj "pathik"
ज़िंदगी इल्म का पन्ना नहीं है
ज़िंदगी बस सुकूँ का मसअला है
Shiva awasthi
शाइ'र नए नए हो तुम को इस का बिल्कुल इल्म नहीं
दुनियादारी और शा'इरी साथ नहीं चल सकती है
Shiva awasthi
जी लगा कर के पढ़ना पड़ेगा
इल्म हासिल तो करना पड़ेगा
Danish Balliavi
है इल्म दुनिया को ज़हरा के चैन जीत गए
अली के नस्ल के सब नूर-ए-ऐन जीत गए

मेरे नबी के नवासे ने ऐसा सज़दा किया
यज़ीद हार गया और हुसैन जीत गए
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Ashraf Ali
रास्ता कहकशाँ का इतना भी मुश्किल तो नहीं
इल्म क्या क्या नहीं कर सकता जहाँ में यारों
Aadi Ratnam
नवाज़ा है इल्म-ओ-हुनर से बनाया है क़ाबिल भी मुझ को
ये सब ठीक है पर ख़ुदा तू ज़रा सा मुक़द्दर भी देता
A R Sahil "Aleeg"
ज़िंदगी को अपनी यूँँ अज़ाब कर के देखा है
मैं ने इश्क़ उस से बे-हिसाब कर के देखा है

इल्म था मुझे फ़रेब-कार है वो शख़्स पर
मैं ने फिर भी उस का इंतिख़ाब कर के देखा है
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Kabiir
आज ख़ुद से मिला तो इल्म हुआ
सच में बर्बाद हो चुका हूँ शजर
Shajar Abbas
हम को ये इल्म है कि हमारा नहीं ख़ुदा
अब हम कोई दुआ कोई तौबा भी क्या करें
A R Sahil "Aleeg"
इश्क़ के ऐन का है इल्म नहीं
दे रहे दर्स इश्क़ का जग को
A R Sahil "Aleeg"
गुज़िश्ता दौर के सारे यहाँ फ़रहाद बैठे हैं
मुहब्बत देख ली कर के सभी बर्बाद बैठे हैं

अभी नादान हो प्यारे यहाँ पर इल्म मत बाँटो
यहाँ जितने भी बैठे है सभी उस्ताद बैठे हैं
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Amit Maulik
किसी कॉलेज में पढ़ाता, कहीं टीचर होता
तू जो लाइफ़ में न आती तो मैं अफ़सर होता

अब तो ये हाल है नदियों सा सिमट बैठा हूँ
तिरे चक्कर में न पड़ता तो समुंदर होता
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Wajid Husain Sahil
बह्र का इल्म मात्रा का ज्ञान
शे'र कहना भी है गणित जैसा
Mohit Subran
इल्म है तुम को कितने प्यारे हो
आसमाँ के तुम्हीं तो तारे हो
Vaseem 'Haidar'
इल्म ये हासिल नहीं होगा किताबों से तुम्हें
दोस्तो सीखोगे चलना ठोकरें खाने के बा'द
YAWAR ALI
तुझ को मैं नोच दूँगा नाख़ुन से
क्या पता मुझ को है कहाँ से तू

तुझ को है इल्म पे ग़ुरूर बहुत
चल निकल यार हट यहाँ से तू
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Danish Balliavi
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ख़ुदा करे कि तुझे भी कोई मिले तुझ सा
तुझे भी इल्म हो फिर अपनी बे-वफ़ाई पर
ABhishek Parashar
तीरगी थी रास्तों में और भटका मैं बहुत
रौशनी पाई गुरू से जब कभी गिरता रहा
Saurabh Yadav Kaalikhh
उस को दिल में बिठा कर इल्म हुआ है यारों
नूर आँखों का नहीं बढ़ता फ़क़त काजल से
Dhirendra Pratap Singh
कान के कच्चे लोगों को ये इल्म नहीं है
आधा सच इंसान को पूरा खा जाता है
Sohil Barelvi
साहिब-ए-इल्म बने फिरते हो
अच्छा बतलाओ मोहब्बत क्या है
Harun Umar
हम को तन्हाई मुयस्सर हुई तो इल्म हुआ
ये सुकूँ वो है जो बाहों में नहीं मिलता है
Dipendra Singh 'Raaz'
याद ग़ालिब ने किया है हम को अपने शहर में तो
लाज़मी है हम सभी पर इल्म कुछ हासिल करेंगे
salman khan "samar"
जब तक इल्म मुझे हो पाया उस से मोहब्बत का
तब तक तो मुझ सेे काफ़ी दूर जा चुका था वो
Naaz ishq
इल्म-ए-अरूज़ न था तेरे लहजे में सलमान
जो कुछ सीखा है उस का हक़दार है तोयेश
salman khan "samar"
मकर-ओ-फ़रेब ज़ुल्म जहालत फ़ुजूर से
गुस्ताख़ियों के दहर से ख़ुद को निकाल लो

तहज़ीब-ओ-इल्म-ओ-फ़न ये तमद्दुन अदब शजर
लो अपने ख़ानवादे का विरसा सँभाल लो
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Shajar Abbas
फ़र्द-ए-बशर हो तुम फ़क़त
क्यूँँ बोलते हो तुम सक़त

मग़रूर हो ख़ुद इल्म में
ये ऐब क्यूँँ लाए फ़क़त
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Lalit Mohan Joshi
क्यूँँ दिया है दर्द तुम ने
इल्म इस का क्या तुम्हें है
Lalit Mohan Joshi
इल्म से दामन गुरेज़ी का नतीजा ये हुआ
बादशाहों की नई नस्लें गदागर हो गईं
Shajar Abbas
थी दिल-लगी की ख़बर हमें भी था इल्म उन को भी आशिक़ी का
ये हादसा है कि अपनी-अपनी जगह पे दोनों मुकर गए हैं
Rehaan
कुछ हसीन ख़्वाब तो यूँँ पलकों पर सजाए भी थे
इल्म टूट जाने का था हम तो मुस्कुराए भी थे

वक़्त भी न होता ख़फ़ा मेरे हाल पर यूँँ नवी
हम तो वरना आसमाॅं को इस ज़मीं पे लाए भी थे
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Naviii dar b dar
जो भी है सब उसी का रहा है करा धरा
वर्ना मुझे तो शा'इरी का इल्म भी नहीं
Umesh Maurya
ज़िंदगी का राज़-ओ-इल्म मिलता एक तहरीर में
वो मिलेगा ज़िंदगी में जो लिखा तक़दीर में
arjun chamoli
ये इल्म के साथ भी कि शायद यही मुलाक़ात आख़िरी हो
मैं जा रहा हूँ उसे कोई अलविदा वगैरह कहे बिना ही
Rehaan
मुझे ये इल्म नहीं था बग़ैर मेरे वो
उदास रहने लगेगी जो ख़ुश थी मेरे साथ
ABhishek Parashar
मुझे इल्म है इश्क़ तुम ने किया है
फ़लाँ से फ़लाँ से फ़लाँ से फ़लाँ से
A R Sahil "Aleeg"
बच्चों की ख़ामियों को छुपाया न कर कभी
झूठा सा कोई इल्म सिखाया न कर कभी
salman khan "samar"
था इल्म तुम करोगे इक रोज़ बे-वफ़ाई
तक़दीर-ए-इश्क़ था ये तुम से गिला नहीं है
A R Sahil "Aleeg"
जब हम को हवस का इल्म न था
तब इश्क़ हुआ था तुम से हमें
A R Sahil "Aleeg"
ज़िंदगी का राज़-ओ-इल्म बस है इक तहरीर में
वो मिलेगा ज़िंदगी में जो लिखा तक़दीर में
arjun chamoli
उन की ये तमन्ना है कि मेले में मिलेंगे
और अपनी ये हसरत है अकेले में मिलेंगे

उस्ताद न मिल पाऍं तो शागिर्द से मिलिए
कुछ फ़न गुरु के आप को चेले में मिलेंगे
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Saif Dehlvi
लोग जल्दी परोस देते हैं
इल्म घोंटो तो चखने जितना है
Chetan
हैफ़ था ये कि याद है हर ग़म
इल्म होता है अब मगर कल का
Chetan
ख़ला में जो दिखाया है बयाँ वो कर नहीं सकता
गुरु के बिन जगह ख़ाली कोई भी भर नहीं सकता
DILBAR
सोचते हुए मिरी हयात कट गई
इल्म जब हुआ तो देखा रात कट गई
Arbab Shaz
नीला पड़ा बदन तो मुझे इल्म अब हुआ
कुछ साँप पल रहे थे मिरी आस्तीन में
Sohil Barelvi
सब्र का फल अब न मीठा इल्म मुझ को दे गए
मैं जड़ों को सींचता था वो गुलों को ले गए
arjun chamoli
निशात-ओ-ऐश-ए-अलम की न ही दवा लीजे
अगर कमाना है इल्म इस की फिर सज़ा लीजे
Naresh sogarwal 'premi'
इल्म के सागर थे गहरे डॉक्टर अंबेडकर
वेदना पी कर के निखरे डॉक्टर अंबेडकर

दीन दुबलों वंचितों को हक़ दिलाने के लिए
आसमानों से थे उतरे डॉक्टर अंबेडकर
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Nityanand Vajpayee
आदमी तो नहीं ख़ुदा हूँ मैं
इल्म है मुझ को इस भरम का भी
Jay kishan
जिन का भी पहनावा सादा होगा
उन्हें बदन का इल्म ज़ियादा होगा
Saurabh
मैं भी था कभी तुम्हारी ही तरह 'गुरू'
मैं भी पहला इश्क़ आख़िरी समझता था
Amit Rajvanshi 'Guru'
इसलिए भी हूँ मैं उसका आइना 'गुरू'
क्या बला है वो अभी ये जानती नहीं
Amit Rajvanshi 'Guru'
मुहब्बत दुसरी कोशिश में पहली मर्तबा होगी
वही स्कूल की लड़की मेरे कॉलेज में आई है
Nasir khan 'Nasir'
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सफ़र से लौट जाना चाहता है
परिंदा आशियाना चाहता है

कोई स्कूल की घंटी बजा दे
ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है
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Shakeel Jamali
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तुम्हारा नाम लिखना आ गया है
मैं अब स्कूल जा कर क्या करूँँगा
Saarthi Baidyanath
किसी कॉलेज में टकराए तो कहना उसे यारो
तेरे स्कूल का आशिक़ बहुत मिस करता है तुझ को
Rohit Gustakh
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वफा के हुस्न के काँटों के फूल के क़िस्से
मुझे तो लग रहे हैं सब फ़ुज़ूल के क़िस्से

फिर उस का नाम है आया ज़बान पर मेरी
सुना रहा था किसी को स्कूल के क़िस्से
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Akash Rajpoot
सही में अब हमें शायद किसी शमशान जाना था
सही में अब हमारा दर्द से रिश्ता पुराना था

हमें तो आपसे बस बात करने की रही कोशिश
अरे ये स्कूल की कॉपी किताबें सब बहाना था
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Raunak Karn
मेरे दिल की यही बस, अब कहानी है
सुना है स्कूल की लड़की दिवानी है
Raunak Karn
सुंदर चेहरे पर जो मैं मरता होता
तो दिल में स्कूल की वो लड़की होती

काश कोई हम पर भी जान लुटा देता
काश हमारी क़िस्मत भी अच्छी होती
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Sanskar Shrivastav
अगर स्कूल चेहरों को पढ़ाना मुब्तदा कर दे
तो मैं भी दाख़िला ले लूँ बिना सोचे विचारे याँ
Sandeep dabral 'sendy'