Ishaara Shayari - Unspoken hints, silent signals, and hidden emotions in poetry

Ishaara shayari captures the beauty of unspoken emotions and silent communication between hearts. Through subtle hints, nazron ki baat, and hidden feelings, this poetry expresses what words often fail to say. It’s perfect for those moments when love, pain, or desire is felt deeply but spoken softly.

ishaara shayari
आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
Waseem Barelvi
78 Likes
signal shayari
कुछ इशारा जो किया हम ने मुलाक़ात के वक़्त
टाल कर कहने लगे दिन है अभी रात के वक़्त
Insha Allah Khan
53 Likes
hint shayari
झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं
Kaifi Azmi
60 Likes
nigah shayari
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
173 Likes
nazron shayari
वफ़ा नज़र नहीं आती कहीं ज़माने में
वफ़ा का ज़िक्र किताबों में देख लेते हैं
Hafeez Banarasi
40 Likes
isharat shayari
तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर
जो तुझ को देख चुका हो वो और क्या देखे
Parveen Shakir
89 Likes
gesture shayari
है देखने वालों को सँभलने का इशारा
थोड़ी सी नक़ाब आज वो सरकाए हुए हैं
Arsh Malsiyani
25 Likes
तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते
इस लिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते
Waseem Barelvi
45 Likes
नज़र आए न तू जिन को परेशानी से मरते हैं
जो तुझ को देख लेते हैं वो हैरानी से मरते हैं
Varun Anand
81 Likes
लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे
Faiz Ahmad Faiz
61 Likes
गली में बैठे हैं उस की नज़र जमाए हुए
हमारे बस में फ़क़त इंतिज़ार करना है
Swapnil Tiwari
24 Likes
तेरी तस्वीर हट जाएगी लेकिन
नज़र दीवार पर जाती रहेगी
Tehzeeb Hafi
86 Likes
कोई पागल ही मोहब्बत से नवाज़ेगा मुझे
आप तो ख़ैर समझदार नज़र आते हैं
Zubair Ali Tabish
78 Likes
एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर ‘ताबिश’
और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं
Zubair Ali Tabish
55 Likes
मैं कहाँ जाऊँ करूँँ किस से शिकायत उस की
हर तरफ़ उस के तरफ़-दार नज़र आते हैं।
Zubair Ali Tabish
54 Likes
मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के, ज़रा नीची नज़र कर के
ये कहता हूँ अभी तुम से, मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
105 Likes
ये इम्तियाज़ ज़रूरी है अब इबादत में
वही दुआ जो नज़र कर रही है लब भी करें
Abhishek shukla
25 Likes
तुम्हें देखे ज़माना हो गया है
नज़र महके ज़माना हो गया है

बिछड़के तुम सेे आँखें बुझ गई हैं
ये दिल धड़के ज़माना हो गया है
Read Full
Subhan Asad
32 Likes
भाँप ही लेंगे इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया
ताड़ने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
20 Likes
मुंतज़िर हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे
चाँद को छत पे बुला लूँगा इशारा कर के
Rahat Indori
50 Likes
जिस की जानिब 'अदा' नज़र न उठी
हाल उस का भी मेरे हाल सा था
Ada Jafarey
22 Likes
मुमकिन है कि सदियों भी नज़र आए न सूरज
इस बार अँधेरा मिरे अंदर से उठा है
Aanis Moin
21 Likes
दूर साहिल से कोई शोख़ इशारा भी नहीं
डूबने वाले को तिनके का सहारा भी नहीं
Junaid Hazin Lari
17 Likes
जो उस तरफ़ से इशारा कभी किया उस ने
मैं डूब जाऊँगा दरिया को पार करते हुए
Ghulam Murtaza Rahi
32 Likes
वो तड़प जाए इशारा कोई ऐसा देना
उस को ख़त लिखना तो मेरा भी हवाला देना
Azhar Inayati
23 Likes
कोई इशारा दिलासा न कोई वा'दा मगर
जब आई शाम तिरा इंतिज़ार करने लगे
Waseem Barelvi
61 Likes
दिल नज़र बन जाएगा ग़म हर ख़ुशी हो जाएगी
आप के जाते ही दुनिया दूसरी हो जाएगी
Shakeel Badayuni
29 Likes
पा के तूफ़ां का इशारा दरिया
तोड़ देता है किनारा दरिया
Abdul Mannan Tarzi
31 Likes
एक दिन मेरी ख़ामुशी ने मुझे
लफ़्ज़ की ओट से इशारा किया
Anjum Saleemi
30 Likes
ऐ आ
समाँ किस लिए इस दर्जा बरहमी
हम ने तो तिरी सम्त इशारा नहीं किया
Read Full
Ambreen Haseeb Ambar
17 Likes
तुम ने किया है तुम ने इशारा बहुत ग़लत
दरिया बहुत दुरुस्त किनारा बहुत ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
24 Likes
चश्म हो तो आईना-ख़ाना है दहर
मुँह नज़र आता है दीवारों के बीच
Meer Taqi Meer
22 Likes
हुस्न सब को ख़ुदा नहीं देता
हर किसी की नज़र नहीं होती
Ibn E Insha
27 Likes
आज है उन को आना, मज़ा आएगा
फिर जलेगा ज़माना, मज़ा आएगा

तीर उन की नज़र के चलेंगे कई
दिल बनेगा निशाना मज़ा आएगा
Read Full
Bhaskar Shukla
43 Likes
निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर
हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ
Akbar Allahabadi
47 Likes
ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं
Aalok Shrivastav
50 Likes
फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमएँ जलीं फिर तसव्वुर ने लिया उस बज़्म में जाने का नाम
Faiz Ahmad Faiz
34 Likes
दिल-ओ-नज़र को अभी तक वो दे रहे हैं फ़रेब
तसव्वुरात-ए-कुहन के क़दीम बुत-ख़ाने
Ali Sardar Jafri
24 Likes
ऐ आसमाँ किस लिए इस दर्जा बरहमी
हम ने तो तिरी सम्त इशारा नहीं किया
Ambreen Haseeb Ambar
20 Likes
क्या हो गया इसे कि तुझे देखती नहीं
जी चाहता है आग लगा दूँ नज़र को मैं
Ismail Merathi
22 Likes
किसी की बर्क़-ए-नज़र से न बिजलियों से जले
कुछ इस तरह की हो ता'मीर आशियाने की
Anwar Taban
22 Likes
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे
Waseem Barelvi
96 Likes
नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है
ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे
Shakeel Badayuni
30 Likes
कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर
Ameer Minai
19 Likes
देखो तो चश्म-ए-यार की जादू-निगाहियाँ
बेहोश इक नज़र में हुई अंजुमन तमाम
Hasrat Mohani
24 Likes
दिल्ली के न थे कूचे औराक़-ए-मुसव्वर थे
जो शक्ल नज़र आई तस्वीर नज़र आई
Meer Taqi Meer
28 Likes
मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँ
नज़र मिल गई दिल धड़कने लगा
Akbar Allahabadi
33 Likes
जो बिस्मिल बना दे वो क़ातिल तबस्सुम
जो क़ातिल बना दे वो दिलकश नज़ारा

मोहब्बत का भी खेल नाज़ुक है कितना
नज़र मिल गई आप जीते मैं हारा
Read Full
Nushur Wahidi
22 Likes
पहले सौ बार इधर और उधर देखा है
तब कहीं डर के तुम्हें एक नज़र देखा है
Majrooh Sultanpuri
65 Likes
गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
Read Full
Tehzeeb Hafi
64 Likes
साक़ी कुछ आज तुझ को ख़बर है बसंत की
हर सू बहार पेश-ए-नज़र है बसंत की
Ufuq Lakhnavi
18 Likes
है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
66 Likes
हमें दीदार से मरहूम रख कर है नज़र दिल पर
पराया माल ताको और दौलत अपनी रहने दो
Dagh Dehlvi
32 Likes
मंज़िलों का कौन जाने रहगुज़र अच्छी नहीं
उस की आँखें ख़ूब-सूरत है नज़र अच्छी नहीं
Abrar Kashif
84 Likes
उसूलों पे जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है
जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
66 Likes
दिल सोज़ से ख़ाली है निगह पाक नहीं है
फिर इस में अजब क्या कि तू बेबाक नहीं है
Allama Iqbal
45 Likes
ईद के बा'द वो मिलने के लिए आए हैं
ईद का चाँद नज़र आने लगा ईद के बा'द
Unknown
21 Likes
उस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया
तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का
Unknown
44 Likes
सोचता हूँ कि दिल-ए-ज़ार का मतलब क्या है
एक हँसते हुए बीमार का मतलब क्या है

आप कहते हैं कि दीवार गिरा दी जाए
आप की नज़रों में दीवार का मतलब क्या है
Read Full
Vikram Sharma
31 Likes
मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया
बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया
Fana Bulandshahri
39 Likes
उस की बस्ती से पहले कब्रिस्तान
आशिकों के लिए इशारा था
Unknown
41 Likes
सफ़र के ब'अद भी मुझ को सफ़र में रहना है
नज़र से गिरना भी गोया ख़बर में रहना है
Aadil Raza Mansoori
21 Likes
किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा
चारा-गर अब ख़ुद ही बेचारे नज़र आने लगे
Shakeel Badayuni
37 Likes
वो दिल-नवाज़ है लेकिन नज़र-शनास नहीं
मिरा इलाज मिरे चारा-गर के पास नहीं
Nasir Kazmi
32 Likes
इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही
लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं
Nadir Ariz
60 Likes
एक नज़र देखते तो जाओ मुझे
कब कहा है गले लगाओ मुझे

तुम को नुस्ख़ा भी लिख के दे दूँगा
ज़ख़्म तो ठीक से दिखाओ मुझे
Read Full
Zia Mazkoor
94 Likes
दिलों की बातें दिलों के अंदर ज़रा सी ज़िद से दबी हुई हैं
वो सुनना चाहें, ज़बाँ से सब कुछ मैं करना चाहूँ नज़र से बतियां

ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है
सुलगती सांसें, तरसती आँखें, मचलती रूहें, धड़कती छतियां
Read Full
Aalok Shrivastav
30 Likes
हम उसे आँखों की दहलीज़ न चढ़ने देते
नींद आती न अगर ख़्वाब तुम्हारे ले कर

एक दिन उस ने मुझे पाक नज़र से चूमा
उम्र भर चलना पड़ा मुझ को सहारे ले कर
Read Full
Aalok Shrivastav
39 Likes
हुस्न को हुस्न बनाने में मिरा हाथ भी है
आप मुझ को नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
Rais Farog
34 Likes
हल्की-हल्की सी हँसी, साफ इशारा भी नहीं
जान भी ले गए और, जान से मारा भी नहीं
Sawan Shukla
60 Likes
अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे
दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है

मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है
और वो मारने मरने पे उतर आता है
Read Full
Tehzeeb Hafi
283 Likes
यूँँ तो वो शख़्स बिल्कुल बे-गुनह है
ज़माने की मगर उस पे निगह है

हमारे दरमियाँ जो दूरियाँ हैं
यक़ीनन तीसरी कोई वजह है
Read Full
Dileep Kumar
कल रात मैं बहुत ही अलग सा लगा मुझे
उस की नज़र ने यूँँ मेरी सूरत खंगाली दोस्त
Afzal Ali Afzal
49 Likes
इक तो ये नूर उस पे मेरी शर्म भी अलग
तू सामने रहा तो निगह उठ न पाएगी
shaan manral
हसरत भरी नज़र से तुझे देखता हूँ मैं
जिस को ये खल रहा है वो आँखों को फोड़ ले
Shajar Abbas
28 Likes
कभी पहले नहीं था जिस क़दर मजबूर हूँ मैं आज
नज़र आऊँ न ख़ुद क्या तुम सेे इतना दूर हूँ मैं आज

तुम्हारे ज़ख़्म को ख़ाली नहीं जाने दिया मैं ने
तुम्हारी याद में ही चीख़ के मशहूर हूँ मैं आज
Read Full
SHIV SAFAR
कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तन्हा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़्तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ
Read Full
Kazim Rizvi
नज़र से नज़र भर नज़र क्या मिली
ख़िज़ाँ में खिली इक कली फूल की
Sandeep dabral 'sendy'
हम जिसे देखते रहते थे उम्र भर
काश वो इक नज़र देखता हम को भी
Mohsin Ahmad Khan
लग गई मुझ को नज़र बेशक तुम्हारी आईनों
मैं बहुत ख़ुश था किसी इक सिलसिले से उन दिनों
Aarush Sarkaar
प्यार करने की हिम्मत नहीं उन के पास और हम सेे किनारा भी होता नहीं
बात सीधे कही भी नहीं जा रही और कोई इशारा भी होता नहीं

उस को उम्मीद है ऐश होगी बसर साथ में जब रहेगी मिरे वो मगर
मुझ पे जितनी मुहब्बत बची है सखी इतने में तो गुज़ारा भी होता नहीं
Read Full
Divyansh "Dard" Akbarabadi
14 Likes
तुम को क्या मालूम लोगों ने कहा क्या क्या हमें
तुम ने तो बस लब दबा कर के इशारा कर दिया
Ashish Awasthi
न कोई बीन बजाई न टोकरी खोली
बस एक फोन मिलाने पे साँप बैठा है

कोई भी लड़की अकेली नज़र नहीं आती
यहाँ हर एक ख़जाने पे साँप बैठा है
Read Full
Muzdum Khan
44 Likes
उस की ख़ुशबू को मेरी ओर रवाना कर के
ये हवा लौट गई कुछ तो इशारा कर के
Shaan
कभी ज़िन्दगी से यूँँ न चुराया करो नज़र
कि मौजूद भी रहो तो न आया करो नज़र
S M Afzal Imam
मेरे दर्द की वो दवा है मगर
मेरा उस सेे कोई भी रिश्ता नहीं

मुसलसल मिलाता है मुझ सेे नज़र
मैं कैसे कहूँ वो फ़रिश्ता नहीं
Read Full
S M Afzal Imam
17 Likes
सलीक़ा तो नहीं मालूम हम को दीद का लेकिन
झुकाती है नज़र को जब नज़र भर देखते हैं हम
Sandeep dabral 'sendy'
बहुत से लोग हैं तस्वीर में अच्छे बहुत अच्छे
तेरे चेहरे पे ही मेरी नज़र हरदम ठहरती है
Umesh Maurya
जब भी तिरी क़ुर्बत के कुछ इम्काँ नज़र आए
हम ख़ुश हुए इतने कि परेशाँ नज़र आए
Sadique Naseem
38 Likes
मैं नज़र से पी रहा था तो ये दिल ने बद-दुआ दी
तिरा हाथ ज़िंदगी भर कभी जाम तक न पहुँचे
Shakeel Badayuni
49 Likes
ख़ुशरंग नज़र आता है जाज़िब नहीं लगता
माहौल मेरे दिल से मुख़ातिब नहीं लगता

मैं भी नहीं हर शे'र में मौजूद ये सच है
ग़ालिब भी हर इक शे'र में ग़ालिब नहीं लगता
Read Full
Obaid Azam Azmi
22 Likes
मंज़र बना हुआ हूँ नज़ारे के साथ मैं
कितनी नज़र मिलाऊँ सितारे के साथ मैं

दरिया से एक घूँट उठाने के वास्ते
भागा हूँ कितनी दूर किनारे के साथ मैं
Read Full
Khalid Sajjad
22 Likes
नज़र में रखना कहीं कोई ग़म शनास गाहक
मुझे सुख़न बेचना है ख़र्चा निकालना है
Umair Najmi
43 Likes
ये वो क़बीला है जो हुस्न को ख़ुदा माने
यहाँ पे कौन तेरी बात का बुरा माने

इशारा कर दिया है आप की तरफ़ मैं ने
ये बच्चे पूछ रहे थे कि बे-वफ़ा माने
Read Full
Kushal Dauneria
74 Likes
इशारा कर रहे हैं बाल ये बिखरे हुए क्या
तू मेरे पास आया है कहीं होते हुए क्या

ये इतना हँसने वाले इश्क़ में टूटे हुए लोग
तू इन से पूछना अंदर से भी अच्छे हुए क्या
Read Full
Kushal Dauneria
62 Likes
माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के
रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा

जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन
चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Read Full
Azhar Iqbal
67 Likes
उसी वक़्त अपने क़दम मोड़ लेना
नदी पार से जब इशारा करूँँगा
Siddharth Saaz
42 Likes
मुझ को ये नज़र आया के वो एक बला है
कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज -ए- अदा है

वो ग़ैर की आग़ोश में रहने लगा शादाँ
उस को नहीं मालूम के दिल मेरा जला है
Read Full
Navneet krishna
तुझ तक आने का सफ़र इतना भी आसाँ तो न था
तू ने फेरी है नज़र हम सेे जिस आसानी से
Mohit Dixit
कभी फूल देखती है कभी देखती है कलियाँ
मुझे कर रही है पागल ये नज़र फिसल फिसल के
Ajeetendra Aazi Tamaam
नज़र न आए मुझे हुस्न के सिवा कुछ भी
वो बे-वफ़ा भी अगर है तो बे-वफ़ा न लगे
Hasan naim
19 Likes
हर दम नज़र के सामने रक्खे हैं मैं ने दोस्त
ख़ंजर निकाल ले ना कहीं पीठ करते ही
Parul Singh "Noor"
31 Likes
पहले डाली तेरे चेहरे पे बहुत देर नज़र
ईद का चाँद तो फिर बा'द में देखा मैं ने
Vijendra Singh Parwaaz
34 Likes
सीरत किसी की ख़ूब है सूरत किसी की ख़ूब
कोई हमारे दिल में है कोई नज़र में है
Hijr nazim ali khan
33 Likes
कुछ नज़र आता नहीं उस के तसव्वुर के सिवा
हसरत-ए-दीदार ने आँखों को अंधा कर दिया
Haidar Ali Aatish
39 Likes
सखी को हमारी नज़र लग न जाए
उसे ख़्वाब में रात भर देखते हैं
Sahil Verma
25 Likes
जीने का इरादा है मगर फिर भी कहीं से
कोई तो इशारा हो मिरा अज़्म जवाँ हो
Sohit Singla
सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं
हम देखने वालों की नज़र देख रहे हैं
Dagh Dehlvi
55 Likes