Aazaadi Shayari Collection - Dil, desh, aur rooh ki freedom ko mehsoos karne wali lines

Aazaadi shayari reflects the powerful feeling of freedom—whether it’s about the nation, personal liberation, or breaking emotional chains. These lines capture the spirit of being truly azaad, where the heart speaks without fear and the soul finds its own sky.

aazaadi shayari
फिर दयार-ए-हिन्द को आबाद करने के लिए
झूम कर उट्ठो वतन आज़ाद करने के लिए
Altaf Mashhadi
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अश्कों को आरज़ू-ए-रिहाई है रोइए
आँखों की अब इसी में भलाई है रोइए
Abbas Qamar
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मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले
अब बहुत देर में आज़ाद करूँँगा तुझ को
Jaun Elia
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उस ने अपना बना के छोड़ दिया
क्या असीरी है क्या रिहाई है
Jigar Moradabadi
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मिलेगी क़ैद से कैसे रिहाई कौन सोचेगा
यहाँ तेरे सिवा तेरी भलाई कौन सोचेगा

ज़माने भर का तू सोचेगा तो फिर तेरे बारे में
मुझे तू ही बता दे मेरे भाई, कौन सोचेगा?
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Siddharth Saaz
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तुम परिंदों से ज़ियादा तो नहीं हो आज़ाद
शाम होने को है अब घर की तरफ़ लौट चलो
Irfan Siddiqi
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जाने क्या सोच के फिर इन को रिहाई दे दी
हम ने अब के भी परिंदों को तह-ए-दाम किया
Ambar Bahraichi
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर
तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे
बोल ज़बाँ अब तक तेरी है
Faiz Ahmad Faiz
हालतें ये क्या कि सब हो गए परिंदे तो रिहा पर
उस रिहाई बा'द उड़ना भूल बैठे ये परिंदे
Zain Aalamgir
बंधनों से रिहाई मत करना
यूँ कभी भी जुदाई मत करना

लाख दुनिया कहे बुरा मुझ को
आप मेरी बुराई मत करना
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Sandeep Gandhi Nehal
ख़्वाब हो या ख़्वाहिशें उन्हे इजहार कर दो
कुछ यादें हो पुरानी उन्हे आज़ाद कर दो
Swarup M
नई सड़कें बिछाना चाहते थे
बगीचा काट खाना चाहते थे

ज़बरदस्ती रिहाई मिल रही है
उन्हें जो क़ैदखाना चाहते थे

कहाँ आ कर रुके हैं देखिए ना
कहाँ तक साथ जाना चाहते थे
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Atul K Rai
कफ़स हूँ मैं वो मेरी जान है जो क़ैद है मुझ
में
रिहाई बख़्श कर उस को मुझे तो टूट जाना है
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Aditya
कभी बिस्मिल से पूछो तुम कभी अशफ़ाक़ से पूछो
वतन क्या चीज़ है यारों भगत आज़ादस पूछो
Prashant Sitapuri
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शहीदों के शहादत को हमें याद रखना है
हमें या'नी वतन को अपनें आज़ाद रखना है
Vivek Chaturvedi
दुनिया को रश्क़ है मेरे बेफ़िक्र लहज़े से
जैसे ग़ज़ल जले कोई आज़ाद नज़्म से
Kanchan
कभी शिरकत करूँँगा मैं तिरी महफ़िल
रिहाई तो मिले इस क़ैद से आख़िर
Vikas Sanwa
तुम नज़्म सी आज़ाद रहना चाहती हो मेरी जाँ
पर इश्क़ ग़ज़लों की तरह पाबंदियों में होता है
Prit
ज़मान-ओ-मकाँ से जो आज़ाद करवा दे तुम को
वही काम है असल जिस के लिए तुम बने हो
A R Sahil "Aleeg"
बदन की क़ैद में जकड़े हैं,किसी शाप से हम
रिहाई माँगते रहतें हैं अपने आप से हम
Upendra Bajpai
जो तुम ही जा चुके हो तो अब इन की क्या ज़रूरत है
सो दिल की धड़कनों को अब से हम आज़ाद करते हैं
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
निकम्में हुक्मरानों की सलामी छोड़ दी मैं ने
सो अब आज़ाद हूँ या'नी गुलामी छोड़ दी मैं ने
Ashraf Ali
तुम रिहाई का इंतिज़ार करो
सुख अभी दुख के चंगुलों में है
Saarthi Baidyanath
आसमाँ आज़ाद रखता है हवा को
वो मुझे तो क़ैद करती जा रही है
Abhay Mishra
परिंदे की रिहाई पर ख़ुशी से झूमते हैं सब
क़फ़स के दर्द का सोचो घुटन से मर रहा होगा
Sarthak Bechen
तुम्हें मेरी मुहब्बत क़ैद कर देगी
परिंदें लेकिन आज़ाद अच्छे लगते हैं
Prit
खिली मुस्कान सी आज़ाद औरत
जिसे पाबंदियों ने मार डाला
Shan Sharma
भुला देना ही बेहतर है ग़लत बातों को जीवन में
बड़े बेचैन रहते हैं जो सब कुछ याद रखते हैं

नहीं मरते जो तानों से वो हम आज़ाद पंछी हैं
गुज़ारी उमर जिस वन में उसे आबाद रखते हैं
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Kushal "PARINDA"
नहीं मरते जो तानों से वो हम आज़ाद पंछी हैं
गुज़ारी उम्र जिस वन में उसे आबाद रखते हैं
Kushal "PARINDA"
वो हमेशा की तरह कल रात हम को ख़्वाब में
फिर बदन की चाँदनी से हम को नहलाते रहे

वो समझते थे के हम आज़ाद दीवानों में हैं
शबनमी मुस्कान से जो हम को बहकाते रहे
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Azad Suhawanpuri
जो जो आरोप हैं उन सब पे सफ़ाई देंगे
हम तो जनता की अदालत से रिहाई लेंगे
Aatish Indori
कभी थे क़ैदखाने में कभी आज़ाद बैठे हैं,
कि तुम सेे इश्क़ कर के हम यहाँ बर्बाद बैठे हैं

हमारी आँख का तारा हमारे दिल कि वो धड़कन
इधर शीरी तड़पती है उधर फ़रहाद बैठे हैं
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Afzal Sultanpuri
इश्क़ की इस क़ैदस मुझ को रिहाई कब मिलेगी
देश तो आज़ाद कब का बंदिशों से हो चुका है
Vikas Shah musafir
सभी का सर यहाँ है फ़ख़्र से ऊँचा मिरे भाई
वतन जो क़ैद था पहले अभी आज़ाद है प्यारे
Faizan Faizi
इस तरह से न आज़मा मुझ को
मेहरबाँ है तो दे दुआ मुझ को

एक मुद्दत के बा'द मिल पाया
एक अच्छा सा रास्ता मुझ को

तेरी नफ़रत के साँप ने इक दिन
आँख खुलते ही डस लिया मुझ को

सब की नज़रों में थी हवस क़ायम
कौन अंदर से देखता मुझ को

आज इक दम से बन गया शैतान
कल जो लगता था देवता मुझ को

साथ उस के सफ़र मैं करती हूँ
जो भी मिलता है बा-वफ़ा मुझ को

एक आज़ाद अंदलीब हूँ मैं
ज़िंदा देखे तो कर रिहा मुझ को
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shampa andaliib
हम सेे दिल से उस ने सिर्फ़ रिहाई माँगी
दिल रोया हँस कर आज़ाद किया पर हम ने
Sagar Sahab Badayuni
यार तिरी जब बात करेंगे रोएँगे
या कोई फरियाद करेंगे रोएँगे

हम ने जिस को जान से ज़्यादा चाहा है
जब उस को आज़ाद करेंगे रोएँगे

मेरी याद उसे आती है हँसती है
हम जब उस को याद करेंगे रोएँगे
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Anshul Nadaan
छोड़ जाने का हुनर उस को नहीं आता अभी
क़ैद कर दिल में मुझे आज़ाद ख़ुद को कर लिया
Divya 'Kumar Sahab'
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और कितना मैं रहूँगा यूँँ परेशाँ इस जहाँ में
ऐ ख़ुदा आज़ाद कर दे इस जहाँ से अब मुझे तू
ABhishek Parashar
आज तुम को हर एक रिश्ते से
जाओ आज़ाद कर दिया हम ने
Shajar Abbas
आज़ाद हूँ मैं ठीक से पहचानिए मुझे
बे-चेहरगी का आप की चेहरा रहा हूँ मैं
Moin Ahmed "Aazad"
मायूसी का पिंजरा तोड़ दिया है मैं ने
अब आज़ाद परिंदा हूँ उड़ता फ़िरता हूँ
Meem Alif Shaz
दे रही है यूँंँ दुनिया दिखाई मुझे
दिख रही है सभी में बुराई मुझे

तेरी दुनिया में कोई यूँंँ कितना जिए
वक़्त से पहले दे दे रिहाई मुझे
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Abhay Aadiv
मुझे आज़ाद कर दो इस जहाँ से
जहाँ वालों मेरा दिल भर गया है
Shashank Tripathi
इस तरह से फँस गए हैं ज़िन्दगी के खेल में
लग रहा आज़ाद हैं हम हैं मगर इक जेल में
Sarvjeet Singh
हुक्मरान इस बात से नाशाद है
हर किसी की क्यूँ ज़बाँ आज़ाद है
Avinash bharti
इक ख़्वाब देखता हूँ मैं आज़ाद रोज़ो-शब
महफूज़ हैं वतन की मेरे बेटियाँ तमाम
Moin Ahmed "Aazad"
बिछड़ने का ग़म तुम को क्यूँँ है
रहो ख़ुश कि आज़ाद हो तुम
Shubham Rai 'shubh'
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ये दुनिया थी आज़ाद पंछी
बना दी किसी ने घड़ी यार
100rav
वो हैं महफ़ूज़ जो हैं क़ैद में यारों
अगर हम सेे हुए आज़ाद रोयेंगे
Harsh Kumar
मेरे मौला परिंदे को क़फ़स से अब रिहाई दे
ये दुनिया ख़ूब-सूरत है उसे भी तो दिखाई दे
Raj Tiwari
मैं ने तेरे ख़याल से कर ली है दोस्ती
दुनिया की भीड़ भाड़ से आज़ाद हो गया
Umesh Maurya
वतन की मिट्टी का मोल क्या है जो बिक चुके हैं उन्हें पता क्या
वतन परस्ती का उन सेे पूछो है जिन का अब तक ज़मीर ज़िंदा

मिली है गर सर पे सर कटे हैं न काम आई कोई सियासत
अतीत में देखो रंग जा कर है ज़ा'फ़रानी स्वतंत्रता का
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Ajeetendra Aazi Tamaam
क़ैद कर के मत करे आज़ाद मुझ को
अब हुनर बाक़ी नहीं उड़ने का मुझ में
"Dharam" Barot
परतंत्रता के घाव से आज़ाद कर दिया
लोगों को हर तनाव से आज़ाद कर दिया

इक आदमी हुआ कि जिस की इक किताब ने
भारत को भेदभाव से आज़ाद कर दिया
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Adesh Rathore
कौन आज़ाद है परिंदों सा
ख़ौफ़ उन का कहाँ दरिंदों सा
Manohar Shimpi
छंद से याद ही नहीं होती
बहर आज़ाद ही नहीं होती
Manohar Shimpi
मेरी कोई और ख़्वाहिश ही नहीं है
मैं फ़क़त ख़ुद से रिहाई चाहता हूँ
Shubham Burmen
मैं जहाँ जाता वहाँ तू याद है
हर जगह तू दिल मिरा आज़ाद है
Vinod Ganeshpure
दर्द आज़ाद हो गया मेरा
आज दिल शाद हो गया मेरा
shampa andaliib
हमें भी गर सहूलत ख़ुद-कुशी की दे अगर मौला
तो हम भी ज़िन्दगी के जाल से आज़ाद हो जाऍं
Adesh Rathore
बाँध लो मुझे या आज़ाद कर दो
एक ही दफ़ा में बर्बाद कर दो
Harsh Srivastava
तेरे बिन आबाद है
क़ैद से आज़ाद है
Rohan Hamirpuriya
इस उजड़े हुए घर को आबाद तो कर
ज़रा सा तू इस दिल को अब शाद तो कर

मुहब्बत में अव्वल तिरा नाम होगा
ज़रा इस परिंदे को आज़ाद तो कर
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Usman Saifi
रहा आज़ाद मैं सब से बशर्ते ख़ाफ़ी हूँ मैं
मुझे बर्बाद करने को अकेला काफ़ी हूँ मैं
Vishakt ki Kalam se
जो पंछी आज़ाद गगन में उड़ना चाहता है
उस पंछी के सपने में ही पिंजरे आते हैं
Sanskar Shrivastav
उम्मीद नहीं कोई हमें याद करोगे
ऐसा है मिरा ज़ख़्म के बर्बाद करोगे

है बात ख़मोशी की उदासी की हमारी
क्या आप हमें दर्द से आज़ाद करोगे
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Shivam Raahi Badayuni
किसी पर क्यूँ मैं पाबंदी लगाऊँ
जो ख़ुद आज़ाद रहना चाहता हूँ
Sohil Barelvi
तेरी उल्फ़त में वतन शाद रहेंगे
तेरी आब-ओ-हवा में याद रहेंगे

मर के भी होंगे फ़ना तेरी अना पर
तेरी चाहत में यूँँ आज़ाद रहेंगे
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Mohammad Akram
जिस्म आज़ाद फ़िक्र क़ैदी है
ख़ुद को आज़ाद लिख रहा हूँ मैं
Shajar Abbas
क़ैद ख़ाने से कम नहीं दुनिया
मर के आज़ाद होना पड़ता है
Sohil Barelvi
ये सोचता हूँ क्यूँ किया आज़ाद चूम कर
क्यूँ दिन गुज़ारे हम ने तेरी याद चूम कर

उस एक पल लगा कि ये सब सेे हसीन है
अगले ही पल वो कर गया बर्बाद चूम कर
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Mrkknathji
बदल कर मैं कहानी को तुम्हें आज़ाद कर दूँ क्या
न कोई नाम लेगा फिर तुम्हारा साथ में मेरे
Vishakt ki Kalam se
मुझे आज़ाद कर दो रोज़ के इस मा'मले से अब
मुझे अब मौत बख़्शो जी चुका मैं ज़िंदगी अपनी
Vishakt ki Kalam se
ख़्वाब में इक बार फिर देखी वो आँखें
अक्स वो रुख़्सार के प्यारी वो आँखें

हो भी जाए क़ैदस आज़ाद हम पर
क्या करें जब देख लें तेरी वो आँखें
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Aditya Maurya
तू नज़्म है आज़ाद है
मैं बहर हूँ पाबंद हूँ
ABhishek Parashar
कभी तो चाहिए इस जिस्म-ए-ज़िंदाँ से रिहाई भी
कभी तो चाहिए अपनों से दिल को आशनाई भी

मेरी मंज़िल तेरी ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म से आगे है
मेरे ज़िम्में है घर वालों की रोटी भी दवाई भी
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Purushottam Tripathi
और भी ग़म ज़ीस्त में हैं सिर्फ़ अपना ही नहीं
और सितम ये है कि हस्ती से रिहाई भी नहीं
Sanjay Bhat
अब मिल गई रिहाई जी ले जा ज़िंदगी को
गर हो कोई गिला तो तू मुझ को बख़्श देना
Bilal Official
या तो दिन भर काम कर लो शख़्सियत आबाद कर लो
या लगाकर बहर अपना शे'र ज़िंदाबाद कर लो

क्या मिलेगा जब मोहब्बत में समय बर्बाद कर लो
इस सेे अच्छा मर ही जाओ ख़ुद को तुम आज़ाद कर लो
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Vr Hardik Jaiswal
सभी का हाल वैसा ही दिखाई दे
जहाँ से ज़िंदगी को यूँँ रिहाई दे
Vinod Ganeshpure
हमें हर ग़म भुला कर ज़िंदगी में शाद होना है
जहाँ की बंदिशों से इस क़दर आज़ाद होना है

अभी तक इश्क़ में हम ने बड़ी बर्बादियाँ देखीं
मगर रोहित हमें अब इश्क़ में आबाद होना है
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Rohit Asthana Prabhav
रात भर इस क़दर सिसकते हैं
आह आज़ाद सी नहीं आती
Aman Alfaaz
उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है,
जो गाह गाह जुनूँ इख़्तियार करते रहे
Faiz Ahmad Faiz
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मैं जानता हूँ तेरी रूह की तलब जानाँ
तुझे बदन की तरफ़ से नहीं छुऊँगा मैं
Subhan Asad
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दिल को सुकून रूह को आराम आ गया
मौत आ गई कि दोस्त का पैग़ाम आ गया
Jigar Moradabadi
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किस तरह मिरी रूह हरी कर गया आख़िर
वो ज़हर जिसे जिस्म में खिलते नहीं देखा
Parveen Shakir
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उस ने जलती हुई पेशानी पे जब हाथ रखा
रूह तक आ गई तासीर मसीहाई की
Parveen Shakir
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जिस्म चादर सा बिछ गया होगा
रूह सिलवट हटा रही होगी
Kumar Vishwas
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मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वही-ए-इलाही है
मज़हब तो बस मज़हब-ए-दिल है बाक़ी सब गुमराही है
Majrooh Sultanpuri
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हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादा
चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो चार गरेबाँ तुम से ज़ियादा
Majrooh Sultanpuri
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कमी न की तिरे वहशी ने ख़ाक उड़ाने में
जुनूँ का नाम उछलता रहा ज़माने में
Firaq Gorakhpuri
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वही मंज़िलें वही दश्त ओ दर तिरे दिल-ज़दों के हैं राहबर
वही आरज़ू वही जुस्तुजू वही राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
Ameer Qazalbash
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एक से एक जुनूँ का मारा इस बस्ती में रहता है
एक हमीं हुशियार थे यारो एक हमीं बद-नाम हुए
Ibn E Insha
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मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होती
हमारे दरमियाँ ये फ़ासले, कैसे निकल आए
Khalid Moin
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निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर
हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ
Akbar Allahabadi
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फिर नए साल की सरहद पे खड़े हैं हम लोग
राख हो जाएगा ये साल भी हैरत कैसी
Aziz Nabeel
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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है
सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है
Ali Sardar Jafri
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मैं ख़ुद भी यार तुझे भूलने के हक़ में हूँ
मगर जो बीच में कम-बख़्त शा'इरी है ना
Afzal Khan
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जहाँ इंसानियत वहशत के हाथों ज़ब्ह होती हो
जहाँ तज़लील है जीना वहाँ बेहतर है मर जाना
Gulzar Dehlvi
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सख़्त सर्दी में ठिठुरती है बहुत रूह मिरी
जिस्म-ए-यार आ कि बेचारी को सहारा मिल जाए
Farhat Ehsaas
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उस से बढ़ कर किया मिलेगा और इनआम-ए-जुनूँ
अब तो वो भी कह रहे हैं अपना दीवाना मुझे
Hafeez Banarasi
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उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता
जिस मुल्क की सरहद की निगहबान हैं आँखें
Unknown
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मुसाफ़िरों से कहो अपनी प्यास बाँध रखें
सफ़र की रूह में सहरा कोई उतर चुका है
Aziz Nabeel
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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
Read Full
Tehzeeb Hafi
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बाद-ए-बहार में सब आतिश जुनून की है
हर साल आवती है गर्मी में फ़स्ल-ए-होली
Wali Uzlat
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