Wada Shayari Collection - Promises of love, trust, and emotions expressed in heartfelt words

Wada Shayari beautifully captures the emotions tied to promises, trust, and heartfelt commitments. Whether it’s a romantic vaada, a broken promise, or a silent expectation, these lines reflect the depth of human connections. Explore shayari that speaks of loyalty, hope, and the delicate bond of words given from the heart.

तेरा इकरार मुझे सिर्फ़ तेरा कर देता
तेरे इनकार ने ते माँग बढ़ाई मेरी
Vishal Bagh
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हर गाम तेरे इश्क़ का इकरार है मैं हूँ
ज़ंजीर है ज़ंजीर की झनकार है मैं हूँ

ऐ ज़ीस्त जो सब सेे बड़ी फ़नकार है तू है
और तुझ सेे बड़ा वो जो अदाकार है मैं हूँ
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Obaid Azam Azmi
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जाने कौन सी बात आख़िरी
जाने कौन सी तकरार आख़िरी

थमते हुए इन साँसों की
जाने कौन सी इकरार आख़िरी
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Animesh Choubey
सारी ख़ुशियां नहीं ग़म हुए आप के
है उजाले नहीं तम हुए आप के

सात फेरों के संग ले के सातों वचन
सात जन्मों तलक हम हुए आप के
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Ananya Rai Parashar
नेह की गागरी फोड़ सकते नहीं
पथ तुम्हारा कभी मोड़ सकते नहीं

एक वा'दा किया उस ने हम सेे यही
जो दिया है वचन तोड़ सकते नहीं
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Naimish trivedi
ग़ज़ब हिम्मत सुब्ह माँ से विदा बेटी हुई होगी
बिछुड़ना माँ अभी उस सेे महज़ सपना समझती है

सितम गर ये मुझे झूठा कहा तुम ने कयामत है
क़सम खाकर कहूँ तो माँ अभी सच्चा समझती है
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Rudransh Trigunayat
इक वचन तोड़ कर इक वचन के लिए
स्वप्न ढोना कठिन था नयन के लिए

मैं प्रतीक्षित महीनों खड़ा था वहाँ
पथ चुना था जो तुम ने गमन के लिए
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Jatin shukla
तुझे तेरी मोहब्बत की क़सम है अब
मिटाना है गुमाँ सब इश्क़ को ले कर
Amanpreet singh
हम को क़सम से यार ऐसी जानकारी थी नहीं
कहते थे जिस को जान वो लड़की हमारी थी नहीं
Aqib khan
मिला ना अब नज़र को, बोल भी कुछ
क़सम है बोल उल्फ़त थी, नहीं ना
"Nadeem khan' Kaavish"
डूब चुका हूँ इश्क़ में तेरे
फिर वादे-पे-वादा है क्या
Navneet krishna
वचन आपने जो निभाया नहीं था,
इरादा हमें क्यूँ जताया नहीं था

तुम्हारे हृदय के भवन में बहुत हैं,
हमें ये कभी क्यूँ बताया नहीं था
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Kavi Naman bharat
क़सम खाने से कोई मरता होता तो
क़सम शिव की मैं कब का मर गया होता
Prit
कँवल से है रुख़ और नदी सी अधर है
ख़ुदा की क़सम तेरा मुखड़ा ग़ज़ब का
Sachin kumar
आज इकरार कर लिया उस ने
ग़ैर से प्यार कर लिया उस ने

उस की फ़ेहरिस्त में नहीं था मैं
वार पर वार कर लिया उस ने
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Afzal Sultanpuri
ये जिस्मों को तुम ने लिबासों में रख कर
हया की है देखो क़सम झूठी खाई
Kashif Hussain Kashif
क़र्ज़ दशरथ के वचन का यूँँ चुकाया राम ने
सर झुकाया और ख़ुशी से राजधानी छोड़ दी
Shakir Dehlvi
झूठे वचन कितने निभाए जाएँगे
आ कर वो ख़्वाबों में सताए जाएँगे

होगा ज़मीं से जब कभी भी सामना
दिन में भी तारे यूँँ दिखाए जाएँगे
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Naviii dar b dar
मोहब्बत का तक़ाज़ा कर दिया इकरार से पहले
हमें इस जल्दबाज़ी की सज़ा दी दोस्त कह कर के
arjun chamoli
उसे भी धोका मिलेगा यक़ीन है मुझ को
भरोसा वो भी किसी पर तो कर रहा होगा
Aqib Jawed
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नया इक रिश्ता पैदा क्यूँँ करें हम ?
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँँ करें हम?
Jaun Elia
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ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है
नींद हमेशा मुझ सेे धोखा करती है

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
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Tehzeeb Hafi
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अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
कुछ नहीं आसमान में रक्खा
Jaun Elia
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जो बच गए हैं चराग़ उन को बचाए रक्खो
मैं चाहता हूँ हवा से रिश्ता बनाए रक्खो
Azm Shakri
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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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हमारा ख़ून का रिश्ता है सरहदों का नहीं
हमारे ख़ून में गँगा भी चनाब भी है
Kanval Ziai
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तअल्लुक़ जो भी रक्खो सोच लेना
कि हम रिश्ता निभाना जानते हैं
Ambreen Haseeb Ambar
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लो आज हम ने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
Sahir Ludhianvi
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हैं बाशिंदे उसी बस्ती के हम भी
सो ख़ुद पर भी भरोसा क्यूँ करें हम
Jaun Elia
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दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था
तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था
Azhar Faragh
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या तेरे अलावा भी किसी शय की तलब है
या अपनी मोहब्बत पे भरोसा नहीं हम को
Shahryar
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है दुख तो कह दो किसी पेड़ से परिंदे से
अब आदमी का भरोसा नहीं है प्यारे कोई
Madan Mohan Danish
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सगी बहनों का जो रिश्ता रिश्ता है उर्दू और हिन्दी में
कहीं दुनिया की दो ज़िंदा ज़बानों में नहीं मिलता
Munawwar Rana
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कभी ये भी नहीं पूछा है गर्दन पे निशाँ कैसा
हमें अंधी मोहब्बत थी हमें अंधा भरोसा था
Shayra kirti
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मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
Shakeel Badayuni
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अगर लगता है वो क़ाबिल नहीं है
तो रिश्ता तोड़ना मुश्किल नहीं है

रक़ीब आया है मेरे शे'र सुनने
तो अब ये जंग है महफ़िल नहीं है
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Tanoj Dadhich
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ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी
तुझ सेे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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उस ने हँसते हुए तोड़ा था हमारा रिश्ता
हम सभी को ये बताते हुए रो देते हैं
Zubair Alam
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तुम मिरी ज़िंदगी हो ये सच है
ज़िंदगी का मगर भरोसा क्या
Bashir Badr
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अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोए
शजर गिरा तो परिंदे तमाम शब रोए
Tariq Naeem
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हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है
कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
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अब मज़ीद उस सेे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता
जिस सेे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता

पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते
घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता
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Tehzeeb Hafi
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मैं शाइ'र उस को चूड़ी ही दे सकता था बस
रिश्ता सोने के कंगन देने पर होता है
Neeraj Neer
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क्या जाने किस ख़ता की सज़ा दी गई हमें
रिश्ता हमारा दार पे लटका दिया गया

शादी में सब पसंद का लाया गया मगर
अपनी पसंद का उसे दूल्हा नहीं मिला
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Afzal Ali Afzal
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इतना धीरे-धीरे रिश्ता ख़त्म हुआ
बहुत दिनों तक लगा नहीं हम बिछड़े हैं
Ajmal Siddiqui
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जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे
कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे
Anand Narayan Mulla
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दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
Ahmad Faraz
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झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
Shariq Kaifi
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हर-चंद ए'तिबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए
Jaan Nisar Akhtar
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मिरी तरफ़ से तो टूटा नहीं कोई रिश्ता
किसी ने तोड़ दिया ए'तिबार टूट गया
Akhtar Nazmi
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वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी
ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है
Aasi Ghazipuri
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हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का
Waheed Quraishi
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जान तुझ पर कुछ ए'तिमाद नहीं
ज़िंदगानी का क्या भरोसा है
Khan Arzoo Sirajuddin Ali
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उस की ख़्वाहिश पे तुम को भरोसा भी है उस के होने न होने का झगड़ा भी है
लुत्फ़ आया तुम्हें गुमरही ने कहा गुमरही के लिए एक ताज़ा ग़ज़ल
Irfan Sattar
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जीत भी लूँ गर लड़ाई तुम से मैं तो क्या मिलेगा
हाथ में दोनों के बस इक टूटा सा रिश्ता मिलेगा

कर के लाखों कोशिशें गर जो बचा भी लूँ मैं रिश्ता
तो नहीं फिर मन हमारा पहले के जैसा मिलेगा
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Ankit Maurya
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तुम्हारी ख़ानदानी रस्म रस्म-ए-बेवफ़ाई है
हमीं पागल थे जो तुम पर भरोसा कर लिया हम ने
Shajar Abbas
तिरा दिल मुस्कुराएगा दुआ है
हमें भी तो भरोसा है ख़ुदा पर
Meem Alif Shaz
प्यार का रिश्ता ऐसा रिश्ता शबनम भी चिंगारी भी
या'नी उन सेे रोज़ ही झगड़ा और उन्हीं से यारी भी
Ateeq Allahabadi
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भरोसा मुझ पे रक्खो और कुछ पल
रुका हूँ, मैं अभी हारा नहीं हूँ
Divy Kamaldhwaj
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जहाँ तक मुझ सेे मतलब है जहाँ को
वही तक मुझ को पूछा जा रहा है

ज़माने पर भरोसा करने वालों
भरोसे का ज़माना जा रहा है
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Naeem Akhtar Khadimi
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निभाया जिस सेे भी रिश्ता तो फिर हद में रहे हैं हम
किसी के मखमली तकिए के ऊपर सर नहीं रक्खा
Nirbhay Nishchhal
मेरे दर्द की वो दवा है मगर
मेरा उस सेे कोई भी रिश्ता नहीं

मुसलसल मिलाता है मुझ सेे नज़र
मैं कैसे कहूँ वो फ़रिश्ता नहीं
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S M Afzal Imam
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भरोसा तोड़ कर अच्छा किया तुम ने
मैं दुनिया पर भरोसा करने वाला था
Aatish Alok
उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वगैरा करती है

बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है
रोने में आसानी पैदा करती है
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Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी तुझ से भी क्या ख़ूब तअल्लुक़ है मिरा
जैसे सूखे हुए पत्ते से हवा का रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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एक रिश्ता जिसे मैं दे न सका कोई नाम
एक रिश्ता जिसे ता-उम्र निभाए रक्खा
Aks samastipuri
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कितनी मुश्किल के बा'द टूटा है
एक रिश्ता कभी जो था ही नहीं
Shahbaz Rizvi
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ख़ुद से मैं ये कहता हूँ कि सब ठीक है लेकिन
मुझ को मिरी बातों पे भरोसा भी नहीं है
Amaan Pathan
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लो आज हम ने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उमीद
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
Sahir Ludhianvi
ख़ुद से मैं ये कहता हूँ कि सब ठीक है लेकिन
मुझ को मिरी बातों पे भरोसा भी नहीं है
Amaan Pathan
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अजीब दर्द का रिश्ता है सारी दुनिया में
कहीं हो जलता मकाँ अपना घर लगे है मुझे
Malikzada Manzoor Ahmad
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बहुत था ख़ौफ़ जिस का फिर वही क़िस्सा निकल आया
मिरे दुख से किसी आवाज़ का रिश्ता निकल आया
Bashar Nawaz
जीना वो क्या जो हो नफ़स-ए-ग़ैर पर मदार
शोहरत की ज़िंदगी का भरोसा भी छोड़ दे
Allama Iqbal
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जिन पे होता है बहुत दिल को भरोसा 'ताबिश'
वक़्त पड़ने पे वही लोग दग़ा देते हैं
Tabish Dehlvi
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ऐ वतन इक रोज़ तेरी ख़ाक में खो जाएँगे सो जाएँगे
मर के भी रिश्ता नहीं छूटेगा हिंदुस्तान से ईमान से
Rahat Indori
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जानता हूँ, है जहाँ ये झूठ लेकिन
मैं भरोसा तुम पे करना चाहता हूँ
Charagh
इक आख़िरी रस्म निभा लो कि अब ये रिश्ता तोड़ देते हैं
तुम तो जा ही चुकी हो हम भी अब तुम सेे मुँह मोड़ लेते हैं

थी झूठी सब क़स
में, थे झूठे सब वादे, और वो तुम्हारे फ़रेबी इरादे
उम्मीद-ए-वफ़ा तुम सेे नहीं, वफ़ा का ज़िम्मा भी ख़ुद ही पे छोड़ देते हैं
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Shashank Tripathi
तपता सूरज आजकल किसी को नहीं चाहिए
सभी को हमेशा चाँद की चांदनी चाहिए

मुफ़लिसों से रिश्ता अब रखता नहीं कोई
सब को साथ में आदमी ख़ानदानी चाहिए
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Yashvardhan Jain
क्यूँ ऐसा रिश्ता क़ाएम रखना जिस
में केवल दर्द मिलें
ना धूप मिले न छाव मिले बस मौसम सारे सर्द मिलें
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Amit Joshi anhad
बचा भी क्या है अब और इस अफसाने में
ज़िन्दगी तो बीत गई एक रिश्ता बचाने में
karan singh rajput
तेरे इंतिज़ार के लम्हें कितने लंबे हो गए
घर के बाहर रुके और लाइट के खंबे हो गए
RUSHIKESH PAWAR
कितनी जल्दी टूट गया देखो
कितना गहरा रिश्ता लगता था
Pawan
इक लड़की से रिश्ता टूटा है
साॅंसे अब भी चलती है मेरी
Abhishek Jadhav
है बड़े अदबी हुए ये लोग जब मैं लाख बोला
तोड़ रिश्ता वो गए, उन को ज़बाँ था बंद करना
Zain Aalamgir
बहुत सज धज के रहती हो कि जैसे उस ख़ुदा ने बस
तुम्हीं पे रख दिया ज़िम्मा जहाँ के ख़ुश नज़ारों का

तुम्हारी याद आते ही मेरे आँसू निकलते हैं
वही रिश्ता है इनका भी जो है शब से सितारों का
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Aditya
तेरी मासूम सूरत पर भरोसा हम करें कैसे
तेरी आँखों के काजल पर दोबारा हम मरें कैसे

मोहब्बत ने दिए जो घाव अब वो घाव जलते हैं
तुम्हीं अब ये बताओ की मोहब्बत हम करें कैसे
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Ravi 'VEER'
काश अपने दरमियाँ इक यार होता
अपना ये रिश्ता न हद से पार होता
Govind kumar
भरोसा ख़ुद पे होता है जहाँ पर
वही पहुँचा है अक्सर आसमाँ पर

बहुत जल्दी समझ लो बात सारँग
कोई अपना नहीं होता यहाँ पर
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Kush Pandey ' Saarang '
दे दी ज़बान फिर भी भरोसा नहीं हुआ
अब ऐसा क्या करें जो उन्हें ए'तिबार हो
Prashant Sitapuri
इश्क़ से जो नजात पा लेंगे
फिर तो हम काइ‌नात पा लेंगे

ख़्वाब में ही सही भरोसा है
हम तुझे एक रात पा लेंगे
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Ahad Ahmed
मिलता नहीं था जिस
में कुछ ग़म के सिवा
ऐसा भी इक रिश्ता निभाया है मैं ने
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karan singh rajput
भरोसा है बहुत मुझ को सभी पर
कोई तो फिर से आए दिल दुखाए

फ़ना होने को राहें और भी हैं
मगर ये इंतिख़ाब-ए-इश्क़ हाए
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Jaymin Joshi Mauj
बचाता कब तलक मैं एक रिश्ता
तुम्हें पाता तो घर कैसे बचाता
anupam shah
ज़बाँ की आँधी मोहब्बतों से बसाए छप्पर उजाड़ देगी
तुम्हारे लहज़े की तेज छैनी हमारा रिश्ता बिगाड़ देगी
Gaurav Singh
अब आइना मेरा सहारा ना रहा
वो मर गया मुझ पे भरोसा था जिसे
Pushkar Tripathi
माना उस के हाल पर उस को मैं यूँँही छोड़ आया
ये नहीं लेकिन कि रिश्ता ही मैं उस सेे तोड़ आया

वो कहीं पर तो मिलेगा मुझ सेे, इतना तो यक़ीं है
इस लिए कल ख़ुद को रस्ते पर कहीं मैं छोड़ आया
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karan singh rajput
ज़ख़्म दिल के भरे नहीं अब तक
और इक दर्द फिर हरा कर लूँ

अब भरोसा नहीं किसी का पर
तू कहे तो यक़ीं तिरा कर लूँ
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Harsh saxena
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जो भी रिश्ता हो हर रिश्ते का तक़ाज़ा भी होता है
सिर्फ़ यूँँ दोस्त कह देने से अदा हक़ नहीं होता
A R Sahil "Aleeg"
उदासी से मेरा रिश्ता तो कुछ ऐसा है अब ख़ालिद
जो मैं ग़मगीन होता हूँ उदासी उस पे छाती है
Khalid Azad
यहाँ तो वक़्त पे रिश्ता निभाता तो नहीं है अब
ज़िया की बात हो फिर भी बताता तो नहीं है अब
Raunak Karn
प्यार मोहब्बत दर्द उदासी सब सेे गहरा रिश्ता है
इस दुनिया में यार उदासी का भी गहरा क़िस्सा है
Ashutosh gour 'syaah'
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मिलोगी तुम मुझे ही बा'द में जाना
भरोसा था मिरे दिल को ज़माने से
Kaviraj " Madhukar"
होते होते ऐसा भी होगा इक दिन
मेरा सपना पूरा भी होगा इक दिन

कि ख़राब हुआ है तो होने दो जानी
रिश्ता अपना अच्छा भी होगा इक दिन
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Kabir Altamash
रिश्ता अदबी रखते थे यार उसी के दिल से हम
अब हर ग़लती अपने ही हाथ मिटाने आए हैं
Raunak Karn
कोई रस्ता नहीं बना पाए
दिल का रिश्ता नहीं बचा पाए
Afzal Sultanpuri
कुछ ऐसे था तुम से ये रिश्ता मेरा
जैसे होता है सागर का लहरों से
Surya Tiwari
जो मेरे सामने कहता है औरों को बुरा उस का
भरोसा क्या किसी के सामने कहदे बुरा मुझ को
Aasif Buldhanvi
किए थे पाप जितने भी बुरे सदक़ा उतारा था
हज़ारों मुश्किलों की जद में रिश्ता हमारा था

गिरे थे भाव सोंनें और चाँदी के मिनट भर में
उसनें जब भरी बाज़ार में झुमका उतारा था
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Subrat Tripathi