Hunar Shayari - Talent, skill aur creativity ko bayan karti soulful shayari

Hunar Shayari celebrates the beauty of talent, creativity, and inner skill that defines a person’s identity. These lines capture the journey of mehnat, passion, and self-expression, where every hunar shines beyond limitations. Perfect for sharing inspiration, confidence, and the art of standing out.

hunar shayari
ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को
अपने अंदाज़ से गँवाने का
Jaun Elia
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मैं इस लिए भी तेरे फ़न की क़द्र करता हूँ
तू झूठ बोल के आँसू निकाल लेता है
Ahmad Kamal Parvazi
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ये हुनर रब ने मेरी ज़ात में रक्खा हुआ है
अच्छे अच्छो को भी औक़ात में रक्खा हुआ है
Fareeha Naqvi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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उम्र भर साँप से शर्मिंदा रहे ये सुन कर
जब से इंसान को काटा है तो फन दुखता है
Munawwar Rana
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पुरानी कश्ती को पार ले कर फ़क़त हमारा हुनर गया है
नए खेवइये कहीं न समझें नदी का पानी उतर गया है
Uday Pratap Singh
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बा-हुनर हो के कुछ न कर पाना
रेज़ा-रेज़ा बिखर के ढह जाना

मुझ को बेहद उदास करता है
ख़ास लोगों का आम रह जाना
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Vishal Bagh
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उस ने पूछा था पहले हाल मेरा
फिर किया देर तक मलाल मेरा

मैं वफ़ा को हुनर समझता था
मुझ पे भारी पड़ा कमाल मेरा
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Subhan Asad
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हाथ मेरे भूल बैठे दस्तकें देने का फ़न
बंद मुझ पर जब से उस के घर का दरवाज़ा हुआ
Parveen Shakir
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ख़ुद को मनवाने का मुझ को भी हुनर आता है
मैं वो कतरा हूँ समुंदर मेरे घर आता है
Waseem Barelvi
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अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी
हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का
Javed Akhtar
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पा ए उम्मीद प रक्खे हुए सर हैं हम लोग
हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग

तू ने बरता ही नहीं ठीक से हम को ऐ दोस्त
ऐब लगते हैं ब-ज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग
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Abhishek shukla
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ये हुनर जो आ जाए, आप का ज़माना है
पाँव किस के छूने हैं, सर कहाँ झुकाना है
Astitwa Ankur
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ख़ुदा ने फ़न दिया हम को कि लड़के इश्क़ लिखेंगे
ख़ुदा कब जानता था हम, ग़ज़ल में दर्द भर देंगे
Prashant Sharma Daraz
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देखा न कोहकन कोई फ़रहाद के बग़ैर
आता नहीं है फ़न कोई उस्ताद के बग़ैर
Unknown
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मु-ए-जुज़ 'मीर' जो थे फ़न के उस्ताद
यही इक रेख़्ता-गो अब रहा है
Mushafi Ghulam Hamdani
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देख कैसे धुल गए है गिर्या-ओ-ज़ारी के बा'द
आसमाँ बारिश के बा'द और मैं अज़ादारी के बा'द

इस सेे बढ़ कर तो तुझे कोई हुनर आता नहीं
सोचता हूँ क्या करेगा दिल आज़ारी के बा'द
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Abbas Tabish
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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं
सब के दिल से उतर गया हूँ मैं
Jaun Elia
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दर्द सहने का हुनर तो पास सबके है मगर
दर्द कहने का हुनर बस शाइरों के पास है
Divy Kamaldhwaj
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अब दुआएँ पा रहा है हर दिल-ए-नाशाद की
क्या ग़ज़ब होगा वो जिस ने ख़ुद-कुशी ईजाद की

शा'इरी का ये हुनर कुछ देर से आया मगर
जी-हुज़ूरी की नहीं मैं ने किसी उस्ताद की
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Rituraj kumar
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जिन की दर्द-भरी बातों से एक ज़माना राम हुआ
'क़ासिर' ऐसे फ़न-कारों की क़िस्मत में बन-बास रहा
Ghulam Mohammad Qasir
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हुनर से काम लिया पेंट ब्रश नहीं तोड़ा
बना लिया तेरे जैसा ही कोई रंगों से

मुझे ये डर है कि मिल जाएगी तो रो दूँगा
मैं जिस ख़ुशी को तरसता रहा हूँ बरसों से
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Rahul Gurjar
लोग हम सेे सीखते हैं ग़म छुपाने का हुनर
आओ तुम को भी सिखा दें मुस्कुराने का हुनर

क्या ग़ज़ब है तजरबे की भेंट तुम ही चढ़ गए
तुम से ही सीखा था हम ने दिल दुखाने का हुनर
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Kashif Sayyed
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जब सर-ए-शाम पजीराई-ए-फ़न होती है
शाहज़ादी को कनीज़ों से जलन होती है

ले तो आया हूँ तुझे घेर के अपनी जानिब
आगे इंसान की अपनी भी लगन होती है
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Azhar Faragh
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तुम अगर सीखना चाहो मुझे बतला देना
आम सा फ़न तो कोई है नहीं तोहफ़ा देना
Jawwad Sheikh
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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में
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Anis shah anis
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जो कुछ मता-ए-हुनर हो तो सामने लाओ
कि ये ज़माना-ए-इज़हार-ए-नस्ल-ओ-रंग नहीं
Akbar Ali Khan Arshi Zadah
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क़ौम-ओ-मज़हब क्या किसी का और क्या है रंग-ओ-नस्ल
ऐसी बातें छोड़ कर बस इल्म-ओ-फ़न की बात हो
Sayan quraishi
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इश्क़ में पागल हो जाना भी फ़न है दोस्त
और ये दुख की बात है हम फ़नकार नहीं
Praveen Sharma SHAJAR
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आँसुओं से चुकायी है क़ीमत
ये हुनर बे-सबब नहीं आता
Amaan Pathan
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उसे मेरे शेर-ओ-फ़न से जाने क्यूँँ इतनी वहशत है
पहले ग़ज़लें दफ़्न करेगा फिर मुझ को दफ़नाएगा
Amaan Pathan
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जिसे गुज़ार गए हम बड़े हुनर के साथ
वो ज़िन्दगी थी हमारी हुनर न था कोई
Sahar Ansari
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न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब-ओ-हुनर
पड़ी अपनी बुराइयों पर जो नज़र तो निगाह में कोई बुरा न रहा
Bahadur Shah Zafar
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तू अपनी शीशागरी का हुनर न कर ज़ाया'
मैं आइना हूँ मुझे टूटने की आदत है
Ahmad Faraz
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जब से सीखा है हुनर शीशागरी का मैं ने
बस उसी दिन से ये दुनिया है कि पत्थर हुई है
Saleem Siddiqui
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जब तुझे रिश्ते निभाने का हुनर आ जाएगा
तेरा दुश्मन ख़ुद ही चल कर तेरे घर आ जाएगा
Meraj Faizabadi
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तुम्हारी तरह जीने का हुनर आता तो फिर शायद
मकान अपना वही रखते पता तब्दील कर लेते
Saleem Kausar
लबों पर हँसी है तो दिल में ये कैसी चुभन है
अरे ये मोहब्बत भी दोस्तों इक अजीब फ़न है

रूह से रूह का इश्क़ कहाँ मिलता है अब "निहार"
आजकल जिस्मानी इश्क़ का ही दौर ए चलन है
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Shashank Tripathi
हुनर कुछ ऐसा भी कर जाएँ क्या
कि टूट कर यहीं बिखर जाएँ क्या

तुम बिछड़ कर भी ख़ुश नहीं हो मुझ सेे
तुम्हारी ख़ातिर अब मर जाएँ क्या
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karan singh rajput
भले फ़न की कोई सरहद नहीं होती
मगर फ़नकार का इक मुल्क होता है
Saarthi Baidyanath
रेत भर कर आ गया हूँ ज़िस्म में
अब है मुझ
में दरिया पी जाने का फ़न
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Lokesh Singh
हुनर समझो या कोई ऐब समझो इस को के जाँ हम
हो चाहें ख़ाक हासिल फिर भी पुर-उम्मीद रहते हैं
Prashant Sitapuri
डूब जाने की कला को सीखने के दरमियाँ
छटपटाहट ने हुनर तैराक वाला दे दिया
Atul K Rai
चुप भी रहना है एक फ़न आख़िर
क्या ज़रूरत है बात की जाए
Shivam chaubey
अँधेरी ज़िन्दगी रौशन करेगी
यही तो काम इल्मो फ़न करेगी

हमें आहट मिलेगी तब ए जानाँ
जभी पायल तिरी छन-छन करेगी
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Kush Pandey ' Saarang '
ज़माने भर का ग़म रहता है मुझ को भी मगर ये फ़न
कोई जब पूछता है हाल तो कहते हैं अच्छा है
Prashant Sitapuri
कहाँ तक डूबते उस आँख में हम
हुनर तैराक वाला था हमारा
Kush Pandey ' Saarang '
झूठ थोड़ा, बेईमानी! फन सभी बारीक हैं
सच सभी हम जानते हैं! आप जो हैं ठीक है
Dileep kumar mishra
कि उन को क़त्ल करने का हुनर है अच्छे से पता
किया ये क़त्ल यूँँ की फिर कहीं निशाँ ही न मिले
karan singh rajput
मैं अपनी दु'आओं में असर ढूँडता रहा
उस
में छुपा जो ज़र था वो ज़र ढूँडता रहा

नाकामियों में मैं ने गुज़ारी है ज़िन्दगी
नाकामियों में अपना हुनर ढूँडता रहा
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Parwez Akhtar
जोड़ पाते दिल किसी का तो हमें आराम होता
काश कोई तो हमारे इस हुनर का काम होता
Nikunj Rana
मैं मोहब्बत में नहीं पड़ता मगर अब के बरस
आज़माना है मुझे अपना हुनर अब के बरस
Mukesh Jha
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मिरी बातों को वो आधा समझती हैं
मैं मतला कहता हूँ मक़्ता समझती हैं

हुनर हैं शा'इरी मैं शे'र कहता हूँ
मगर इस को तो वो ज़ाया' समझती हैं
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Nakul kumar
कमाल-ए-फ़न है तुम्हारा कि मो'जिज़: है कोई
हर एक लफ़्ज़ से लगता है रो रहा है कोई
Ramnath Shodharthi
देखने के हुनर से बेहतर है
देख कर भी न देखने का हुनर
Ramnath Shodharthi
सब हुनर से बड़ा हुनर है जनाब
तोड़ने और जोड़ने का हुनर
Ramnath Shodharthi
हुनर के साथ अगर हौसले निकलते हैं
तो ख़ुद-ब-ख़ुद ही नए रास्ते निकलते हैं
Om awasthi
हम तो ख़ुद-ब-ख़ुद ‘अभी’ एक तमसील-ए-हुनर थे
फिर हमारी ही ज़िंदगी क्यूँँ बे–हुनर चली गई
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
दरख़्वास्त है आपसे हमारे रास्तों में न आया करें
हम पहले ही हुनर-मंद हैं पत्थरों पे रास्ता बनाने में
Praveen Bhardwaj
मैं ने लिखा है बख़्त पसीने से ख़ून से
मुझ
में हुनर नहीं था गुज़ारिश का अर्ज़ का
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Prashant Sitapuri
गांव से शहर को जोड़ते हैं
लोग कितने तो घर तोड़ते है

आसमाँ में धनी दौड़ता है
बस्तियों में हुनर दौड़ते हैं
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Ajay Kumar
शा'इरी का फ़न तुम भी सीख लो ज़रा हम सेे
बस गिटार पर ही लड़की फ़िदा नहीं होती
Krishnakant Kabk
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रास्ते भर में जहाँ चार शजर बाक़ी है
तो परिंदों के वहाँ पर अभी घर बाक़ी है

आपने ठान लिया साथ निभाने का तो
दिल लगाने के वही आज हुनर बाक़ी है
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Mukesh Yadav
पास हो जाऐंगे हर पेपर में ग़म के
दर्द सहने का हुनर सीखा है हम ने
Aniket sagar
कभी दरिया कभी तारों का मंज़र क़ैद करता हूँ
किसी क़े हुस्न का जादू नज़र भर क़ैद करता हूँ

मैं शाइ'र हूँ मुझे अल्लाह ने ऐसा हुनर बख्शा
मैं काग़ज़ की लकीरों में समुंदर क़ैद करता हूँ
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Altaf Iqbal
ब-ज़िद हैं आस्तीं के साँप डसने को तो डसने दो
बड़े अफ़ज़ल हैं हम भी साँपों के फन तोड़ लेते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
इक शहनशाह ने बनवा के हँसी ताजमहल
हाथ कटवाए ग़रीबों के, हुनर छीन लिया
Daagh Aligarhi
मिरी नज़्मों में ख़ुद को चाँद पढ़कर मत यूँँ इतराना
कि तुम सेे इश्क़ करना और निभाना है हुनर मेरा
anupam shah
ऐ ख़ुदा अब इक हुनर ऐसा अता कर दो मुझे
इश्क़ भी चलता रहे और दर्द भी ना हो मुझे
Aditya
रूठने और मनाने का हुनर भूल गया
मैं मुहब्बत को बचाने का हुनर भूल गया
A R Sahil "Aleeg"
हम अपने फ़न को सहारा 'शजर' बनाएँगे
ग़ज़ल में लिख के ज़माने को ग़म सुनाएँगे

उसे बिठायेंगे हँसकर हम उस की डोली में
जो वा'दा हम ने किया है उसे निभाएँगे
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Shajar Abbas
तिरे बा'द इस फ़न का क्या ही करेंगे
सुख़न छोड़ देंगे यही तय किया है
Aakash Giri
हुनर ये इश्क़ करने के किताबों में नहीं मिलते
कँवल हैं दिल के कीचड़ के ये काग़ज़ पर नहीं खिलते
Aditya
मेरे मरने की दुआ माँग रहे थे जो 'दीप'
बद-दुआ में ही मुझे उन का हुनर लगता है
Deepika Jain
देहरादून जा बसी बिन बताये तो क्या हुआ
मुम्बई जा के हम हुनर आज़माते हैं! क्यूँ मियाँ?
A R Sahil "Aleeg"
गुनाह-ए-इश्क़ ने सिखला दिया है ये हुनर भी देख
जनाज़ा भी मेरा ही और कांधा भी है ख़ुद का ही
A R Sahil "Aleeg"
साथ चलना पीछे से कीचड़ उड़ाना
ये हुनर सीखा है क्या चप्पल से जानाँ
Abuzar kamaal
हुनर तो आज़मा, हिम्मत दिखा, डर मत, क़दम अपना उठा तू अब
ख़ुदा भी फ़ैसला अपना सुनाता है तुम्हारे फ़ैसले पर ही
A R Sahil "Aleeg"
बेवफ़ाई ने तिरी मुझ को दिया है ये हुनर बस
यार दुनिया में कहाँ हर भाग्य में ये फ़न लिखा है
Harsh saxena
गर हार जाऊँ तो हुनर कम है मुझे
और जीत को क़िस्मत बताया जाएगा
Akhil Saxena
मैं हुनर-मंद की फौज से आ गया बाहर
मैं अकल-मंद होता मगर आ गया बाहर
FARHAN ASHRAF
ख़ून माँगे रोज़ मुझ सेे शा'इरी अब
दूर रक्खो आप मुझ को ऐसे फ़न से
Saahir
तमन्ना ग़ैर की कैसे हो कोई फ़न नहीं मुझ
में
तुम इतनी ख़ूब-सूरत हो तमन्ना कर भी सकती हो
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Prashant Sitapuri
की ग़लतियाँ हज़ारों फिर ये हुनर है आया
मुझ को मिली सफलता ख़ैरात की नहीं है
Ravi 'VEER'
इक ओर दोस्त मुझ में कोई भी हुनर नहीं
इक ओर दोस्त इश्क़ का मारा हुआ हूँ मैं
shaan manral
सीख लो तुम भी ओ यारा दूर रहने का हुनर
अजनबी से इतना ज़्यादा मेल-जोल अच्छा नहीं
Ambar
हुनर ये माँ को बख़्शा है ख़ुदा ने
बसा देती है जो वीरान घर को
Ajeetendra Aazi Tamaam
शा'इरी के फ़न को मुश्किल कह, डराने वाले सुन ले
हाँ मगर उतना ही जितना चाय है मुश्किल बनाना
A R Sahil "Aleeg"
मोहब्बत का सलीक़ा सीखना था
अज़ीयत का हुनर सिखला गए वो
Achyut Amogh
कल जिन्हें बख़्शा था हम ने सर बुलंदी का हुनर
आज वो कहने लगे हम तो पुराने हो गए
Ajeetendra Aazi Tamaam
उदासी भी ख़ुशी का एक फ़न है
सभी को ये ख़ुशी मिलती नहीं है
Umesh Maurya
दिल तोड़ने का फ़न नहीं आता मुझे शजर
मैं इश्क़ के नगर में यूँँ बेरोज़गार हूँ
Shajar Abbas
रूठता क्यूँ मेरा हम-सफर अब नहीं
क्या मनाने का मुझ
में हुनर अब नहीं

अपनी आँखों से रुख़सत तू ने किया
इस बेघर को मिलेगा वो घर अब नहीं
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RAJAT AWASTHI
तेरा फेस ख़ुदा का शाहे-बैत-ए-सुख़न है
मैं भी इस पे शे'र कहूँ, मेरा भी मन है

मुश्किल को मुश्किल से कहना बात बड़ी नइंँ
मुश्किल को आसानी से कहना ही फ़न है
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Vijay Potter Singhadiya
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भूलना भी अगर हुनर होता
ज़िन्दगी हम तुझे भुला देते
Meem Alif Shaz
मेरे अंदर हुनर नहीं कोई
शा'इरी तो फ़क़त दिखावा है
Rachit Sonkar
कमाने का हुनर सीखा है मैं ने
मुहब्बत दोस्त यारी और रिश्ते
Aniket sagar
तुम्हारे बा'द मैं ने तो यही सीखा
तुम्हारे बा'द तो हर रंग है फीका

गुलाबों पर चमेली की महक आई
न जाने कब ही तुम ने ये हुनर सीखा
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Amanpreet singh
हुनर कि फूक से मेरे अज़ीज़ नुक्ता-चीं
बस एक मक्खी तेरी नाक की उड़ानी है
Dipanshu Shams
ये हुनर मेरे भी अंदर आ गया है दोस्तों
दिल पे लगती बात को बस मुस्कुरा कर टाल दूँ
Anmol Mishra
हमें ता-उम्र न आया या-इलाही फ़न मुहब्बत का
किसी को ख़ूब रोए और किसी को फिर रुलाया ख़ूब
Kartik tripathi
तुम्हारी ही मोहब्बत ने सिखाया ये हुनर वरना
बहुत जी जान से पढ़ कर फ़क़त इंजीनियर होते
Alankrat Srivastava
तमाम उलझनों में भी यूँँ मुस्कुराता है
न जाने इतना हुनर वो कहाँ से लाता है
Harsh saxena
इक कहानी को दफ़्न होना था
एक दीवार की मरम्मत में

घर में नान-ओ-नमक ज़रूरी था
एक फ़न दब गया मईशत में
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Rahul Gurjar
लफ्ज़ से है चोट लगती
है हुनर रिश्ता निभाना
"Dharam" Barot
आ गया हम को जौन जैसा फ़न
जिस को मिलना ज़रा ख़फ़ा करना
pankaj pundir
सितम को कर दिया रुस्वा तबस्सुम-ए-लब से
अली के शे'र तेरा फन बड़ा निराला है
Shajar Abbas
हाँ ख़त-ए-क़िस्मत ख़ुदा की दस्तख़त है तुम मिरे हो
कोई फ़न आता नहीं पर इक सिफ़त है तुम मिरे हो
100rav