Khudkushi Shayari - Dark thoughtsvand intense emotional expression in words

Khudkushi shayari reflects the deepest layers of emotional pain, where a person feels lost, broken, and disconnected from life itself. It is not about glorifying darkness, but expressing those silent struggles that often remain unspoken. Through these lines, people find a way to release their दर्द, share their inner battles, and feel a little less alone.

रास्ता जब इश्क़ का मौजूद है
फिर किसी की क्यूँँ इबादत कीजिए?

ख़ुद-कुशी करना बहुत आसान है
कुछ बड़ा करने की हिम्मत कीजिए
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Bhaskar Shukla
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे?
तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है

इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का
तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
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Kumar Vishwas
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लगा जब कि दुनिया की पहली ज़रूरत मोहब्बत है तब उस ने माना
यक़ीं हो गया जब मोहब्बत ज़रूरत है तब उस ने माना

वगरना तो ये लोग उसे ख़ुद-कुशी के लिए कह चुके थे
उसे आइने ने बताया कि वो ख़ूब-सूरत है तब उस ने माना
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Vikram Gaur Vairagi
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इश्क़ में ख़ुद-कुशी नहीं करते
इश्क़ में इंतिज़ार करते हैं
Rajesh Reddy
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हमारा इश्क़ इबादत का अगला दर्जा है
ख़ुदा ने छोड़ दिया तो तुम्हारा नाम लिया

ग़मों से बैर था सो हम ने ख़ुद-कुशी कर ली
शजर ने गिर के परिंदों से इन्तेक़ाम लिया
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Balmohan Pandey
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अब दुआएँ पा रहा है हर दिल-ए-नाशाद की
क्या ग़ज़ब होगा वो जिस ने ख़ुद-कुशी ईजाद की

शा'इरी का ये हुनर कुछ देर से आया मगर
जी-हुज़ूरी की नहीं मैं ने किसी उस्ताद की
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Rituraj kumar
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उदासी का सबब उस सेे जो हम तब पूछ लेते
वजह फिर पूछनी पड़ती न शायद ख़ुद-कुशी की
Dipendra Singh 'Raaz'
इतने अफ़सुर्दा नहीं हैं हम कि कर लें ख़ुद-कुशी
और न इतने ख़ुश कि सच में मरने की ख़्वाहिश न हो
Charagh Sharma
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ख़ुद-कुशी करने से बेहतर ज़िंदगी के खेल में
फीस पूरी दीजिए पूरा तमाशा देखिए
Vijay Anand Mahir
शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की
मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की

नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें
ज़रूरत बने आदमी आदमी की

कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी
बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की

किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में
कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की

ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते
घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की

ये सारी तपस्या का कारण यही है
मिसालें बनें तो बनें सादगी की
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Aman G Mishra
हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं
ख़ुद किसी और के भरोसे हैं

ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ
ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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उभर कर हिज्र के ग़म से चुनी है ज़िंदगी हम ने
वगरना हम जहाँ पर थे वहाँ पर ख़ुद-कुशी भी थी
Naved sahil
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने
तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने

मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ
लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
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Zia Mazkoor
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अब ज़िन्दगी से कोई मिरा वास्ता नहीं
पर ख़ुद-कुशी भी कोई सही रास्ता नहीं
Rahul
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तेरी ख़ुद-कुशी का सबब जो भी हो
मुझे किसलिए बे-सहारा किया
Gourav Kumar
ख़ुद-कुशी कर के मरने वाला था
तेरा नंबर अगर नहीं लगता
Shakir Dehlvi
क्या ज़रूरी काम था, जाना पड़ा तो
तुम को ऐसा काम रोज़ाना पड़ा तो

ख़ुद-कुशी से पहले बस इक बार सोचो
फिर दुबारा भी यहीं आना पड़ा तो
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Harshad B tiwari
सभी को लग रहा था ख़ुद-कुशी से मर गया था मैं
मगर सच्चाई ये थी, ख़ुद ख़ुशी से मर गया था मैं
Shubham Seth
उन के उन सेे भी मिलें और मुस्कुरा कर भी मिलें
ख़ुद-कुशी भी या'नी वो जो ख़ुद-कुशी भी ना लगे
Shayra kirti
अब दुआएँ पा रहा है हर दिल-ए-नाशाद की
क्या ग़ज़ब होगा वो जिस ने ख़ुद-कुशी ईजाद की
Rituraj kumar
ख़ुदा ने सब बनाया है, ये सब दुनिया ख़ुदा की है
जहाँ से ख़ुद-कुशी होती है, वो कोहसार किस का है?
Ashutosh Kumar "Baagi"
किसी दिन ख़ुद-कुशी कर लेगा ख़ुद वो
जो इक लड़की का दीवाना है यारों

कहो उस सेे कि अब वो फोन कर ले
कि उस का हर कहा माना है यारो
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gulab muntazir
इस लिए ख़ुद-कुशी नहीं करते
बा'द तेरी ख़ुशी का क्या होगा
Neeraj Nainkwal
ज़िन्दगी नाम हक़ीक़त में हैं शादानी का
इस को तुम जुज़ न बनाना कभी वीरानी का

नौजवानो मेरा पैग़ाम सदा याद रखो
ख़ुद-कुशी हल नहीं होती है परेशानी का
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Shajar Abbas
ग़म सहेंगे मगर हम मरेगें नहीं
ख़ुद-कुशी हम कभी भी करेंगे नहीं
Kaviraj " Madhukar"
तुम्हारा फ़ोन ख़ुद काटूँ तो ये महसूस होता है
कि जैसे आख़िरी साँसों को गिनते ख़ुद-कुशी कर ली
Firdous khan
हार कर ख़ुद-कुशी जो करते हैं उन सेे कहना
अच्छा होता नहीं माँ-बाप को बेवा करना
Mohammad Aquib Khan
हम किसी से आशिक़ी करने लगे
या'नी ख़ुद ही ख़ुद-कुशी करने लगे

भूल बैठी वो हमें शादी के बा'द
और हम भी शा'इरी करने लगे
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Rishikesh Roshan
फ़िक्र के भी कुछ लिफ़ाफ़ों में यहाँ
ख़त मिलेंगे ख़ुद-कुशी के आप को
Aadil Sulaiman
कोई गुरेज़ नहीं उस को मेरी ख़ुद-कुशी से
है शर्त आख़िरी में उस का फ़ोन काल न हो
Akhil Saxena
रस्सियाँ हैं और पंखें भी हैं घर में
है नहीं सामान पर ये ख़ुद-कुशी का
Saahir
छिपकली ने तुम्हारे क़िस्से सुन
मेरी बातों से दिल-लगी कर ली

देर तक पहले तो सुनी तुम को
फिर कहीं जा के ख़ुद-कुशी कर ली
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Amrendra Vishwakarma
मैं मौत से ऐसे गले लगने को हूँ 'साहिर'
तुम देख लेना रो पड़ेगी ख़ुद-कुशी मुझ को
Saahir
ख़ुद-कुशी का तो इरादा था नहीं
इश्क़ में मरने का वा'दा था नहीं

सब्र और बर्दाश्त मुझ
में थी नहीं
वरना ग़म तेरा ज़ियादा था नहीं
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Sayeed Khan
कर भी लेगें जो ख़ुद-कुशी तो क्या
मौत के बा'द ग़म नहीं होगा
gaurav saklani
दिन गुजारूंँ आप के बिन ये तो था मुश्किल बहुत
ख़ुद ख़ुशी से मर गया मैं, ख़ुद-कुशी आसान थी
Shubham Seth
लोग पंखों से झूल जाते हैं
ख़ुद-कुशी जैसे कोई नेमत हो
Tarique Jamal
बेबसी है बेकसी है बे-दिली है ज़िंदगी
बस यूँँ ही जीते रहे तो ख़ुद-कुशी है ज़िंदगी
Ajeetendra Aazi Tamaam
जान जिस
में न सस्ती हो वो इश्क़ क्या
इश्क़ में ख़ुद-कुशी करना भी इश्क़ है
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Yogamber Agri
एक टक जो देखते पंखे को हम
ख़ुद-कुशी लाज़िम है हम को रोक लें
Shiv
कई को ईद पे ईदी नहीं मिलती
कमाए बिन यहाँ रोटी नहीं मिलती

इराद-ए-ख़ुदकुशी से फ़ाइदा क्या है
हमें जीने से ही छुट्टी नहीं मिलती
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Kush Pandey ' Saarang '
वो नहीं है साथ मेरे फिर ये कैसी ज़िंदगी है
हिज्र मुझ को मार देगा सब कहेंगे ख़ुद-कुशी है
Radheshyam Tiwari
क्या पता है तुम सभी को ख़ामुशी क्या चीज़ है
जानते तो जान जाते ख़ुद-कुशी क्या चीज़ है।
Alankrat Srivastava
अरे ख़ुद-कुशी करने वाले ज़रा रुक
वतन पर मरो ऐसे क्या मर रहे हो
Pritam sihag
एक हिस्सा है किसी के जिस्म का हम में,सो हम
ख़ुद-कुशी भी कर नहीं सकते यूँँ अपनी मर्ज़ी से
Nishant Singh
बे-वज़ह कोई नहीं करता है ऐसे ख़ुद-कुशी
मारने वाले तमाशा देखते हैं मार कर
Umesh Maurya
जब ख़ुद-कुशी न कर सका वो अपने दुख से तब
उस को किसी ने यार मिरा दुख बता दिया
NISHKARSH AGGARWAL
क्या पता है तुम सभी को ख़ामुशी क्या चीज़ है
जानते तो जान जाते ख़ुद-कुशी क्या चीज़ है
Alankrat Srivastava
किसी दिन ढूँढ़ने का मन करे तो बस वहीं आना
सभी जाते कहाँ है ग़ौर करना ख़ुद-कुशी कर के
100rav
कहा कुछ नहीं हमें उस ने रवानगी के पहले
सो हमारे लब भी चुप चुप रहे ख़ुद-कुशी के पहले

उसे याद आ गया कोई रक़ीब चार दिन बा'द
हमें मौत याद आने लगी ज़िंदगी के पहले
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Kinshu Sinha
रोज़ कहता था जो ख़ुद-कुशी जुर्म है
लाश पँखे से उस की उतारी गई
Jitendra "jeet"
उस को कोई बताओ यहाँ ज़िन्दगी भी है
जो शख़्स ख़ुद-कुशी की तरफ़ जा रहा है यार
Upendra Bajpai
है इनायत ये ख़ुदा की जो मिली है ज़िन्दगी
ज़िंदगी ये दी नहीं है ख़ुद-कुशी के वास्ते
Sandeep dabral 'sendy'
ख़ुद-कुशी ही थी,पर ऐसा जाल में फांसा मुझे
मर गया वो शख़्स,मेरे हाथ ख़ंजर रह गया

मिलने की उम्मीद से,उस लाश के ताबूत में
जिस्म लेटा था,पर उस का हाथ बाहर रह गया
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Shubham Dwivedi
बहाने और भी हैं ख़ुद-कुशी के
मगर मैं ने मोहब्बत को चुना है
ABhishek Parashar
इश्क़ में नाकाम होकर ख़ुद-कुशी कर ली मैं ने,
इक अपाहिज को जहन्नम लगती है ये ज़िंदगी
100rav
इस क़दर कर गया ख़ुद-कुशी इश्क़ में
मौत आई मगर मौत हैरान है
Trinetra Dubey
जान लेने है राज़ जब उस के
और करनी है ख़ुद-कुशी मैं ने
Jitendra "jeet"
हिज्र ग़म और उदासी भी क्या चीज़ है
इंतिज़ामात हैं ख़ुद-कुशी के सभी
Rachit Sonkar
वफ़ा नाम पे सब दग़ा कर रहे हैं
मोहब्बत से हम इस लिए डर रहे हैं

ख़ुशी से कहाँ कोई है जी रहा अब
ख़ुशी से तो सब ख़ुद-कुशी कर रहे हैं

जवां हम हों माँ बाप बूढ़े हो जाएँ
जवानी से हम इस लिए डर रहे हैं

कि नादानी में इश्क़ कर बैठे थे,सो
जवानी में अब शा'इरी कर रहे हैं
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Irshad Siddique "Shibu"
दुख सभी के हैं हमारी ही तरह अब
ख़ुद-कुशी पे कोई आमादा नहीं है
Tiwari Jitendra
बचा गर सकोगे मुझे उस के ग़म से
तभी ख़ुद-कुशी से मुझे तुम बचाना
Harshwardhan Aurangabadi
ख़ुद-कुशी कैसे करूँँ पूछा जो उस ने
कह दिया जाओ, किसी से इश्क़ कर लो
A R Sahil "Aleeg"
ज़िंदगी सब को ये एहसास करा देती है
ख़ुद-कुशी करते हैं जो ख़ुद-कुशी क्यूँँ करते हैं
Rehan Mirza
तुझ सेे बिछड़ूँगा ग़म मनाऊँगा
ख़ुद-कुशी पर नहीं करूँँगा मैं
Shajar Abbas
डर मुझे मौत का भी नहीं है
यार हम ख़ुद-कुशी कर रहे क्या
Trinetra Dubey
दिल मिरा वो घर है सौरभ ख़ुद-कुशी जिस में हुई
कम किराए पर भी इस
में कौन रहने आएगा
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sourabh meena
है ज़िम्मेदारी घर की इस लिए चुप हूँ
नहीं तो ख़ुद-कुशी कर के बताता मैं
100rav
रोज़ ऐसे जीने से तो अच्छा है
ख़ुद-कुशी इक बार में ही करलूँ मैं
100rav
कोई उम्मीद जब नहीं होती
होती है एक ख़ुद-कुशी उम्मीद
Anjali Sahar
ये दुनिया में मुकम्मल इश्क़ कर के कौन ज़िंदा है
मैं ज़िंदा हूँ मगर मैं चाहता हूँ ख़ुद-कुशी करना
AYUSH SONI
नदी, वो कूद कर जिस में किसी ने ख़ुद-कुशी कर ली
परेशाँ है वो क़ातिल बन के जो पानी पिलाती है
Kiran bhargav04
इतने शिकवे हैं ज़िंदगी से मुझे
फिर भी नफ़रत है ख़ुद-कुशी से मुझे
Irshad 'Arsh'
मैं ख़ुद नहीं जानता था ऐ प्यारे दोस्त
मैं ख़ुद-कुशी की तरफ़ जाऊँगा कभी
Kabir Altamash
मुहब्बत आठवीं कर तो लें हम भी पर
ज़रा सातों का दुख भी कम हुआ होता

नहीं की ख़ुद-कुशी ये सोच कर मैं ने
फ़क़त अब मौत से भी मेरा क्या होता
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Gulfam Ajmeri
यूँँ उलझते गए इश्क़ में हम तेरे
वक़्त मिलता नहीं ख़ुद-कुशी के लिए
Jitendra "jeet"
फ़क़त इक आँख ही रोने से मुश्किल में नहीं आती
बदन भी चीख़ता चिल्लाता है दिल की नमी से ख़ूब

मिरे कमरे में फैला ख़ून है चारों तरफ़ किस का
हुई है जंग किस की रात भर यूँँ ख़ुद-कुशी से ख़ूब
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Sayeed Khan
उजाले छोड़ अँधेरों से दोस्ती करता
किसी बहाने से मैं ख़त्म ज़िंदगी करता

इसी कमाल ने मुझ को बचा लिया वर्ना
मैं शा'इरी नहीं करता तो ख़ुद-कुशी करता
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Irshad 'Arsh'
चुन लिया किश्तों में मरना तब बहुत सोचा नहीं
फ़ैसला करना था मुझ को ख़ुद-कुशी या शा'इरी
Divya 'Kumar Sahab'
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दर्द तो कुछ भी नहीं था जो ज़माने ने दिया
वक़्त पे ख़ामोश होना ख़ुद-कुशी से कम नहीं
Ganesh gorakhpuri
ख़ुद-कुशी कर के उस को दवा मिल गई
घर के लोगों को लेकिन सज़ा मिल गई
Meem Alif Shaz
थककर नहीं लगाया कभी ख़ुद-कुशी को मुँह
हम ने हमेशा अपनी उदासी से जंग की
Shajar Abbas
ख़ुद-कुशी तो हराम है लेकिन
इश्क़ कर लो किसी से तुम आसिफ़
Asif Kaifi
तेरे बग़ैर भी हम ने तुझी पे शे'र कहे
रहे अँधेरे में और रौशनी पे शे'र कहे

मुझे वो धमकियाँ देती है "मार डालूँगी"
दुबारा तुम ने अगर ख़ुद-कुशी पे शे'र कहे

क़लम हमारा कभी झूठ लिख नहीं पाया
जो तीरगी थी तो फिर तीरगी पे शे'र कहे

हमारी फ़िक्र ने पानी में ज़ह्र देखा वहाँ
जहाँ पे आके सभी ने नदी पे शे'र कहे

उठाके हाथ उदासी ये बोली मैं भी हूँ
कभी जो मैं ने ख़ुशी में ख़ुशी पे शे'र कहे
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Rehan Mirza
ख़ुद-कुशी भी सवाल करती है
आख़िरी ख़त तेरा पता क्या है
Chetan
बहुत तकलीफ़ है हम एक लौतों की
नहीं कर सकते हम तो ख़ुद-कुशी भी
100rav
ख़ुदा से माँगो दुआ ख़ुद-कुशी से दूर रहूँ
ग़मों के बीच हूँ चारो तरफ़ उदासी है
Shajar Abbas
ख़ुद-कुशी ऐ करने वाले
गर वहाँ भी दुख मिला तो
Irshad Siddique "Shibu"
सब को ख़बर है ख़ुद-कुशी करी उस ने
पर ख़ुद ख़ुशी से तो नहीं करी उस ने
Manoj Devdutt
सोचते तो हैं ख़ुद-कुशी के लिए
सोचते हैं फ़क़त करेंगे नहीं

हिज्र में जान देना ठीक है पर
हम तिरे हिज्र में मरेंगे नहीं
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Shajar Abbas
जवानी के दिन अपने बेकार मत कर
तुझे सौ दफ़ा कह चुका प्यार मत कर

मैं भी ख़ुद-कुशी करने लग जाऊँ अभिषेक
तू तो अब मुझे इतना लाचार मत कर
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ABhishek Parashar
वो इतना मुस्कुराने वाला लड़का
करेगा ख़ुद-कुशी किस को पता था
ABhishek Parashar
ज़िंदगी से हार कर तुम ख़ुद-कुशी क्यूँ कर रही हो
जो तुम्हारा है नहीं उस के लिए भी मर रही हो

मानता हूँ तोड़कर कोई तुम्हारा दिल गया है
तुम मुझे तो जानती हो क्यूँ भला फिर डर रही हो
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Jaypratap chauhan
ख़ुद-कुशी की धूप लगती जब मुझे
साया तब माँ–बाप का कर लेता हूँ
Vardaan
ख़ुद-कुशी आख़िरी रास्ता है मगर
मेरा इस रास्ते जाने का दिल नहीं
ABhishek Parashar
हक़ ज़िंदगी पे मेरी भी अब मेरा नहीं है
अब ख़ुद-कुशी अगर की तो चार जन मरेंगे
Naaz ishq
ख़ुद-कुशी माना नहीं है बुज़दिली पर
ख़ुद-कुशी तो मसअले का हल नहीं है
Deepak Vikal
छुड़ा ले हाथ तू ही ज़िन्दगी हम से
नहीं ये हो सकेगी ख़ुद-कुशी हम से

तुम्हारे बा'द हर शब जाग कर गुज़री
जुदा होकर ख़फ़ा है नींद भी हम से
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Shivam Prajapati
ये इक ग़म-ज़दा वाक़िआ' है
कि तू ज़िंदगी तयशुदा है

मुझे ख़ुद-कुशी करनी है यूँँ
कि सब को लगे हादसा है
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Jagveer Singh
अब मिरे घर में दीवार भी तो नहीं
पर ख़ुशी है मैं बीमार भी तो नहीं

ख़ुद-कुशी मैं तिरे साथ कैसे चलूँ
ज़िन्दगी इतनी दुश्वार भी तो नहीं
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Meem Alif Shaz
मैं समुंदर को बहुत हैरान कर के लौटा हूँ
ख़ुद-कुशी करनी नहीं ऐलान कर के लौटा हूँ

अपनी सारी उलझनों को फेंक आया हूँ वहीं
ज़िन्दगी अपनी बहुत आसान कर के लौटा हूँ
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Meem Alif Shaz
किसी के ख़याल ने रोका हुआ है मुझ को वरना
मुझे आवाज़ें तो इक दिन बहुत दीं ख़ुद-कुशी ने
ABhishek Parashar
उधर छपने लगे थे कार्ड शादी के
इधर लड़के ने सुन के ख़ुद-कुशी कर ली
Mohd Arham
झील में डूबा है सूरज देखते सब शौक़ से
बन गई नज़रों की ख़ातिर इक नज़ारा ख़ुद-कुशी
Dharmesh bashar
जानलेवा किस क़दर है आलम-ए-बेचारगी
जब नज़र आती है बेचारे को चारा ख़ुद-कुशी
Dharmesh bashar
ज़िक्र होगा ख़्वाब का उस
में अगर फिर
ख़ुद-कुशी का ख़त समझना उस ग़ज़ल को
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Aryansh Arora
जब से इक शख़्स हम सेे बिछड़ा है
ख़ुद से नफ़रत सी हो गई है हमें
Shajar Abbas
ख़्वाहिशों की मिरे ख़ुद-कुशी हो गई
उस की जाने कहाँ दोस्ती हो गई

गाँव में एक दिन के लिए आई थी
वो तभी से मिरी ज़िंदगी हो गई
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Vaseem 'Haidar'