Nazakat Shayari - Grace, softness, and ada woven into poetic expressions

Nazakat Shayari beautifully captures the elegance and softness of emotions, where every word feels light yet impactful. It reflects grace, charm, and subtle beauty often seen in love, expressions, and human gestures. If you admire delicate feelings and refined poetry, this collection of nazakat-filled shayari will touch your heart.

nazakat shayari
अदा हुआ न क़र्ज़ और वजूद ख़त्म हो गया
मैं ज़िंदगी का देते देते सूद ख़त्म हो गया
Faryad Aazar
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इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता
Akbar Allahabadi
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इस ज़माने को ज़माने की अदा आती है
और इक हम है हमें सिर्फ़ वफ़ा आती है
Zubair Ali Tabish
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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त
मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त

हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम
पगला गए हैं आप के चू
में हुए दरख़्त
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Varun Anand
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तू इस तरह से मिला फिर मलाल भी न रहा
तेरे ख़याल में अपना ख़याल भी न रहा

कुछ इस अदास झुकी थी हया से आँख तेरी
हमारी आँख में कोई सवाल भी न रहा
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Subhan Asad
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शहर-ए-जाँ में वबाओं का इक दौर था
मैं अदा-ए-तनफ़्फ़ुस में कमज़ोर था
Pallav Mishra
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मैं देर तक तुझे ख़ुद ही न रोकता लेकिन
तू जिस अदास उठा है उसी का रोना है
Firaq Gorakhpuri
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जिस की जानिब 'अदा' नज़र न उठी
हाल उस का भी मेरे हाल सा था
Ada Jafarey
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हया से सर झुका लेना अदास मुस्कुरा देना
हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना
Akbar Allahabadi
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और क्या इस से ज़ियादा कोई नर्मी बरतूँ
दिल के ज़ख़्मों को छुआ है तिरे गालों की तरह
Jaan Nisar Akhtar
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अपने दिल के ख़ून से वो गुल खिला देता हूँ मैं
रेगज़ारों को गुलिस्ताँ की अदा देता हूँ मैं
Qaisar Sidddiqui
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क्यूँँ पशेमाँ हो अगर वअ'दा वफ़ा हो न सका
कहीं वादे भी निभाने के लिए होते हैं
Ibrat Machlishahri
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परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है
वो नौ-बहार-ए-नाज़ अभी रहगुज़र में है
Ali Sardar Jafri
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हम तो तमाम उम्र तिरी ही अदा रहे
ये क्या हुआ कि फिर भी हमीं बे-वफ़ा रहे
Jameel Malik
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हरीम-ए-नाज़ के पर्दे में जो निहाँ था कभी
उसी ने शोख़ अदाएँ दिखा के लूट लिया
Anwar Taban
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वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगे
जिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है
Arzoo Lakhnavi
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फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले
झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले
Arzoo Lakhnavi
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आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन
मरता हूँ मैं जिस पर वो अदा और ही कुछ है
Ameer Minai
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किस मुँह से कह रहे हो हमें कुछ ग़रज़ नहीं
किस मुँह से तुम ने वा'दा किया था निबाह का
Hafeez Jalandhari
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ज़रा नज़रों से कह दो जी निशाना चूक न जाए
मज़ा जब है तुम्हारी हर अदा क़ातिल ही कहलाए
Shakeel Badayuni
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ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी
वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी
Hasrat Jaipuri
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दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
जब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकते

बात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहीं
अब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते
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Ismail Raaz
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कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में
अदास प्रेम करो दिल से प्यार होली में
Nazeer Banarasi
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कुछ इस अदास मोहब्बत-शनास होना है
ख़ुशी के बाब में मुझ को उदास होना है
Rahul Jha
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है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
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अपने जादू पे बहुत नाज़ न कर जादूगर
कोई जादू हो वो बंगाल में कट जाता है
Usman Minai
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बादबाँ नाज़ से लहरा के चली बाद-ए-मुराद
कारवाँ ईद मना क़ाफ़िला-सालार आया
Josh Malihabadi
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दर्द सहने का अलग अंदाज़ है
जी रहे हैं हम अदा की ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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मेहंदी लगाए बैठे हैं कुछ इस अदास वो
मुट्ठी में उन की दे दे कोई दिल निकाल के
Riyaz Khairabadi
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वफ़ा का ज़ोर अगर बाज़ुओं में आ जाए
चराग़ उड़ता हुआ जुगनुओं में आ जाए

खिराजे इश्क़, कहीं जा के तब अदा होगा
हमारा ख़ून अगर आँसुओं में आ जाए
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Hashim Raza Jalalpuri
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जिस का तारा था वो आँखें सो गई हैं
अब कहाँ करता है मुझ पर नाज़ कोई
Aalok Shrivastav
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे
अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे

मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी
उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
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Tehzeeb Hafi
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नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं
Akbar Allahabadi
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उम्र भर मिलने नहीं देती हैं अब तो रंजिशें
वक़्त हम से रूठ जाने की अदा तक ले गया
Fasih Akmal
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फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले
झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले
Arzoo Lakhnavi
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नाज़-ओ-नख़रे क्या उठाए, क्या सुने उस के गिले
देखते ही देखते लड़की घमंडी हो गई

देखते रहने में उस को और क्या होता, मगर
जो थी जान-ए-आरज़ू, वो चाय ठंडी हो गई
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Kazim Rizvi
अपने दीवाने को देकर दर्द ओ ग़म
नाज़ ख़ुद पे किस क़दर करता है वो
Ajeetendra Aazi Tamaam
मुझ पर निगाह-ए-नाज़ का जब जादू चल गया
मैं रफ़्ता रफ़्ता क़ैस की सोहबत में ढल गया

ज़ुल्फें उन्होंने खोल के बिखराई थी शजर
फिर देखते ही देखते मौसम बदल गया
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Shajar Abbas
जलता नहीं हूँ आतिश-ए-रुख़सार देख कर
करता हूँ नाज़ ताक़त-ए-दीदार देख कर
Shaikh Sohail
कटी उम्र सारी वफ़ा करते करते
किसी की मुहब्बत अदा करते करते

वो थकता नहीं है ज़फा करते करते
मैं थकती नहीं हूँ दुआ करते करते
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Shadab Asghar
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ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सज्दे में रहती है
Munawwar Rana
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दोस्त अपना हक़ अदा करने लगे
बेवफ़ाई हमनवा करने लगे

मेरे घर से एक चिंगारी उठी
पेड़ पत्ते सब हवा करने लगे
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Santosh S Singh
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वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे
एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे

उस की आँखें उस की बातें उस के लब वो चेहरा उस का
हम उस की हर एक अदास अपना हिस्सा माँग रहे थे
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Shikha Pachouly
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मुझे भी अपनी क़िस्मत पर हमेशा नाज़ रहता है
सुना है ख़्वाहिशें उन की भी शर्मिंदा नहीं रहती

सुना है वो भी अब तक खाए बैठी हैं कई शौहर
बहुत दिन तक मेरी भी बीवियाँ ज़िंदा नहीं रहती
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Paplu Lucknawi
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आज भी वो वो ही है और अदा भी वो ही है
बे-वफ़ा भी वो ही है और ख़फ़ा भी वो ही है
Aatish Indori
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मुझ को ये नज़र आया के वो एक बला है
कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज -ए- अदा है

वो ग़ैर की आग़ोश में रहने लगा शादाँ
उस को नहीं मालूम के दिल मेरा जला है
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Navneet krishna
कभी चल कर रुके होंगे, कभी रुक कर चले होंगे
अदा-ए-ख़ुश-ख़िरामी में वो जाने कब ढले होंगे

सियाही बे-सबब आँखों के साहिल पर नहीं आती
यक़ीनन चश्मे-आतिश में कई आशिक़ जले होंगे
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Wajid Husain Sahil
पाने को तुझ को मैं ने तहज्जुद भी की अदा
तू मिल गई तो फ़र्ज़ भी बैठा हूँ छोड़ कर
Wajid Husain Sahil
सुन ओ कहानीकार कोई ऐसा रोल दे
ऐसे अदा करूँं मेरी इज़्ज़त बनी रहे
Afzal Ali Afzal
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ख़ुदा का शुक्र अदा कर वो बे-वफ़ा निकला
ख़ुशी मना कि तिरी जान की बहाली हुई
Shakeel Jamali
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तुम्हारी बात करने की अदा ने ही किया पागल
न जाने हाल क्या होता, अगर तुम शा'इरी करती
Tanoj Dadhich
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है नाज़ मुझ को अपनी हिंदी ज़बाँ पे यारो
हिंदी हैं हम वतन हैं ये देश सब सेे आला
Dr Mohsin Khan
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धौल-धप्पा उस सरापा नाज़ का शेवा नहीं
हम ही कर बैठे थे ‘ग़ालिब’ पेश-दस्ती एक दिन
Mirza Ghalib
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बिछड़ा कुछ इस अदास कि रुत ही बदल गई
इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया
Khalid Sharif
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अच्छी सूरत को सँवरने की ज़रूरत क्या है
सादगी में भी क़यामत की अदा होती है
Unknown
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ओहदे से निकलें किस तरह आशिक़
एक अदा उस की है हज़ार-फ़रेब
Meer Taqi Meer
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और बढ़ जाती है कुछ लफ़्ज़-ओ-बयाँ की तासीर
लफ़्ज़ जब अश्क की सूरत में अदा होता है
Rais Amrohvi
हमें अपने घर से चले हुए सर-ए-राह उम्र गुज़र गई
कोई जुस्तुजू का सिला मिला न सफ़र का हक़ ही अदा हुआ
Iqbal Azeem
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उस की निगाह-ए-नाज़ से आगे निकल गए
या'नी फ़रेब-साज़ से आगे निकल गए

हम से भी रोक लेने की ज़हमत नहीं हुई
तुम भी हर इक लिहाज़ से आगे निकल गए
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Vikas Sahaj
हम ने हँस हँस के तेरी बज़्म में ऐ पैकर-ए-नाज़
कितनी आहों को छुपाया है तुझे क्या मालूम
Makhdoom Mohiuddin
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बेदाद-ए-इश्क़ से नहीं डरता मगर 'असद'
जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा
Mirza Ghalib
आजकल हम जफ़ा पे लिखते हैं
या'नी तेरी अदा पे‌ लिखते हैं
Shaad Imran
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छोड़ चला जाता है नाज़ उठाने वाला
सो ज़्यादा नखरे भी ठीक नहीं होते हैं
Prashant Sitapuri
तेरी अता का करूँं किस तरह से शुक्र अदा
बस एक जान है वो भी तेरी अता ही है
Ranj
बड़ा ही नाज़ है इस चाँद को सूरत पे अपनी, पर
कभी जो धूप में निकले तो सूरज में बदल जाए
Prit
तू अपनी बुराई पे यूँँ नाज़ मत कर
बुरा से बुरा वक़्त काटा है मैं ने
Prashant Sitapuri
बोल उठेगा एक दिन ये देखना आप
देखिए ना इस अदास आईना आप
Aarush Sarkaar
कितनी दिलकश है चूमने की अदा
तेरे होंठों पे फ़ख़्र है मुझ को
Ramnath Shodharthi
मर चुके होते हैं कुछ लोग बहुत पहले ही
बा'द में सिर्फ़ बची रस्में अदा होती हैं
Ramnath Shodharthi
तुझे माशूक़ बनाया है मेरा शुक्र करो
तेरा हर नाज़ उठाया है मेरा शुक्र करो
Saarthi Baidyanath
तुम्हारा साथ पाने वाले जानाँ
करेंगे नाज़ तुम हो साथ उन के
Chandan Sharma
तीर चलाओ आँख से लेकिन थोड़ा नर्मी बरतो तुम
जंग नहीं हारा हूँ फिर भी दिल पे कब्जा कर लो तुम

हर कोई दीवाना होकर तेरे आगे पीछे है
या'नी के इस हुस्न से अपने जो चाहो वो कर दो तुम
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Kush Pandey ' Saarang '
शरीर का वास्ता है साँस से या रूह से
या शुक्रिया अदा करें उस की तस्वीर का
Shobhit Dixit
अदा-ए-शुक्र करो तुम नसीब वाले हो
'शजर' ख़ुदा ने तुम्हें सल्तनत अता की है
Shajar Abbas
इक बार बस तू ज़ोर से आवाज़ देता
जो मैं अड़ा था ज़िद पे तू ही हार लेता
Sarvjeet Singh
चुराया है उसी ने दिल हमारा
कभी शोख़ी कभी दिलकश अदास
Prasoon
हैरत करूँँ मैं क्यूँ तेरी रविश पे
हर शय में है झलक नाज़-ओ-अदा की

उजड़े जो मय-कदा, मयकश मरेंगे
मयकश को फ़िक्र 'हैदर' मय-कदा की
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Umrez Ali Haider
आप का नाम ट्रैंड करने लगे
आप इतने नफ़ीस हो जाएँ
Tarique Jamal
बहुत नादान लड़की है मेरे घर रोज़ आ कर के
अदा देखो मेरी माँ को वो माँ कह कर बुलाती है
Ravi 'VEER'
मसलहत है फरेब-ए-हसीं
एक झूठी किरन की तरह

हो गई महफ़िल-ए-नाज़ भी
एक उजड़े चमन की तरह
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Rekhta Pataulvi
कोई अच्छा तो कोई बुरा है सखी
ये सभी जातों का मसअला है सखी

देख कर हँसना पलकें झुका लेना फिर
क्या ये इज़हार की इक अदा है सखी
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Saahir
जो भी रिश्ता हो हर रिश्ते का तक़ाज़ा भी होता है
सिर्फ़ यूँँ दोस्त कह देने से अदा हक़ नहीं होता
A R Sahil "Aleeg"
किसी से कर मुहब्बत तो अता कुछ इस अदास कर
हो अगले को ये हैरानी भला मुझ
में है ऐसा क्या ?
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Shayra kirti
पुराने गीत चलाओ तो कुछ बात बने
हमारे साथ में गाओ तो कुछ बात बने

हमेशा नाज़ उठाते हैं हम आप के ही
कभी हम को भी मनाओ तो कुछ बात बने
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Deepak Pathak
यही सोच कर ख़ुद पे हम नाज़ करते
कि हम उन की पहली मुहब्बत रहे हैं
Harsh saxena
किस को फ़ुर्सत है किसी की नाज़ बरदारी करे
आदमी हर एक अपने आप में मसरूफ़ है
Salman ashhadi sahil
नाज़ फूलों का तो कलियों की अदा है बेटी
घर के गुलशन की महकती सी सबा है बेटी
Rinki Singh Sahiba
रूठ जाना अदा सही उन की
प्यार मुझ को इसी अदास है
Ambar
उठाए नाज़ तेरे ऐसा दिवाना
मिले हम से कोई बेहतर तो बताना
Deepak Pathak
हमारी भी मोहब्बत बे-वफ़ा निकली
हमें भी नाज़ था अपनी मोहब्बत पर
MOHSIN JAHANGIR
ख़ुद पे जो कर रहा चाँद गर नाज तो
वो सुंदर तो है पर सब सेे प्यारा नहीं
Jitendra "jeet"
है नाज़ मुझ को आप मेरे राब्ते में हैं
मेरे भी हिस्से आ गए कुछ शानदार लोग

ज़िंदादिली का ज़िक्र कहीं हो रहा हो तो
सुनते ही याद आते हैं बचपन के यार लोग
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Ashraf Ali
निगाहें ख़ूब-सूरत और लब भी
अदा है, फूल है या बस सहर है
Meem Alif Shaz
इबलीस जैसे सज्दे अदा कर के रात दिन
चाहत शजर के दिल में हैं देखो बहिश्त की
Shajar Abbas
दिल अब बस के बाहर है जबसे देखी है अदा नज़ाकत उस की
लेना है क़ब्ज़ा उस के दिल पर लेकिन है बहुत हिफ़ाज़त उस की
Pankaj murenvi
बात की फिर चले गए बाहर
वो अदा थी ग़ुरूर था सोचो
Meem Alif Shaz
मुस्कराने की अदा हम भूल बैठे
ठहाके मार के हँसने लगे हैं
Umesh Maurya
यार इतना नाज़ भी मत कर नए अहबाब पर
आज जिस का ख़ास है माज़ी मैं उस का ख़ास था
Sandeep dabral 'sendy'
अदा उस की बताती है कहानी ये
हमारी यार लगती है दिवानी ये

दिया फिर फूल हाथों मैं कहा उस ने
मुबारक हो मुहब्बत की निशानी ये
Read Full
MOHSIN JAHANGIR
ये सुनो! रकी़ब मेरा ले रहा मज़ा सनम का
ये अदा वो हम सेे ही सीख के तो गई थी यारों
RAAHI
रुठते किस से और मनाता कौन
माँ न होती तो नाज़ उठाता कौन
Shakir Dehlvi
उल्फ़त से दुनिया का बैर पुराना है
फिर भी दीवाने को शे'र सुनाना है

सबका कर्ज अदा कर के लौटा हूँ मैं
बस इक लड़की का बोसा लौटाना है
Read Full
Rohit Gustakh
60 Likes
उँगली हमारी तुम से न पकड़ी गई कभी
फिर भी तुम्हारे नाज़ उठाए फिरे हैं हम
shaan manral
अदा है ख़ूब पैकर में तिरी जाँ जानती हो क्या
न जाने हुस्न ये कितने कलमकारों को ले डूबा
Suraj "pathik"
रंग लाल और इक अदा-ए-ख़ास चेहरा
जी रहा है देख कर जिसे उदास चेहरा

क्यूँ करें ग़मो का ज़िक्र अब किसी के पास हम
साथ है मिरे जो एक ग़म शनास चेहरा
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Kumar gyaneshwar
तुम्हें नाज़ है हुस्न पर तो सुनो तुम
मुझे भी जुदाई का अब डर न होता
Shashank Shekhar Pathak
वो आईना भी ख़ुद पर करता होगा बेहद नाज़
जिस पर देखा करती होगी यार वो सूरत अपनी
Sandeep dabral 'sendy'
बहुत ग़ुरूर था तुम को हसीन होने पर
हमें भी नाज़ कि तुम को भुला दिया हम ने
Meem Maroof Ashraf