Saadgi Shayari - Simple words that reflect purity, grace, and quiet beauty

Saadgi shayari celebrates the beauty of simplicity and purity in thoughts, emotions, and life. It reflects how soft words and honest feelings can create the deepest impact without any show-off. These lines capture the elegance of a simple heart, where sachchai and sukoon speak louder than anything else.

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं
Mirza Ghalib
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तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
Allama Iqbal
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सहज याद आ गया वो लाल होली-बाज़ जूँ दिल में
गुलाली हो गया तन पर मिरे ख़िर्क़ा जो उजला था
Wali Uzlat
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सादगी देख कि बोसे की तमअ रखता हूँ
जिन लबों से कि मुयस्सर नहीं दुश्नाम मुझे
Mushafi Ghulam Hamdani
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है सहज स्वीकार जो जीवन पे वो अपवाद तुम
ज़िंदगी अवसाद है अवसाद में उन्माद तुम
Dhiraj Singh 'Tahammul'
हुस्न उन का सादगी में कुछ अलग महका किया
मैं ने धड़कन से कहा धड़को मगर आराम से
Ishq Allahabadi
शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की
मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की

नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें
ज़रूरत बने आदमी आदमी की

कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी
बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की

किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में
कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की

ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते
घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की

ये सारी तपस्या का कारण यही है
मिसालें बनें तो बनें सादगी की
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Aman G Mishra
तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात
बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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फ़रेब दे गया इस सादगी से वो मुझ को
कि जुर्म सारा ही मजबूरियों के सर आया
Harsh saxena
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अच्छी सूरत को सँवरने की ज़रूरत क्या है
सादगी में भी क़यामत की अदा होती है
Unknown
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बनावट हो तो ऐसी हो कि जिस से सादगी टपके
ज़ियादा हो तो असली हुस्न छुप जाता है ज़ेवर से
Safi Lakhnavi
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सादगी मुझ
में नहीं, इंसान मैं भी हूँ हरामी
हाथ हो तेरा मिलाना झूठ, फ़र्ज़ी हो मिरा भी
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Zain Aalamgir
तिरी सादगी पर लुटाया जहाँ था
मिरी जाँ बता सादगी वो कहाँ है?
Ravi 'VEER'
बला की सादगी हाथों में है उस की
जहाँ कोई हिना चढ़कर भी शर्माये
Aakash Kumar yadav
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फूल छत पे खिल गए पर ताज़गी खोते गए
हम बहुत कर के तरक़्क़ी सादगी खोते गए

था पिता पर बोझ तो हम दिल-लगी में चूर थे
बोझ जब ख़ुद पर पड़ा तो दिल-लगी खोते गए
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Rituraj kumar
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मैं अब भी आदमी को आदमी समझता हूँ
ये मेरी सादगी है या कि बे-वुक़ूफ़ी है
Ramnath Shodharthi
होंठ का ज़ाइका भी गया आँख की मयकशी भी गई
इक तेरे जाने के बा'द इस रूह की सादगी भी गई
Saahir
लोग मरते हैं हुस्न पर तेरे
और मैं सादगी पर मरता हूँ
Shajar Abbas
हमें जबसे दिखी है वो मियाँ
तभी से सादगी पे लिख रहे
Kaviraj " Madhukar"
मेरे चेहरे की सादगी पर न जा
दिल मेरा इस सेे ख़ूब-सूरत है
Shajar Abbas
हार जाता है वो मेरी सादगी पे
क्या ज़रूरत है मुझे सजने की अब से
Sanskriti Shree
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तुम्हारी ज़ुल्फ़ें, तुम्हारी आँखें, तुम्हारे होंठों की मुस्कुराहट
हाँ मर मिटा है ये दिल हमारा तुम्हारी चंचल सी सादगी पे
Rohit Vishwakarma Ravi
ख़ूब-सूरत ज़िन्दगी कभी नहीं देखी
पहले ऐसी सादगी कभी नहीं देखी

चाँद ने कल देख के तुझे कहा बस ये
मैं ने इतनी रौशनी कभी नहीं देखी
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Deepak Pathak
सादगी की इक कहानी याद आती है मुझे भी
हाए वो अपनी जवानी याद आती है मुझे भी

उन पहाड़ों ने दिया था इस नदी को रास्ता तक
आजकल अपनी रवानी याद आती है मुझे भी
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Praveen Bhardwaj
सादगी नज़र आई उस के लहजे में
आज उस ने ऊर्दू में बात की
Mohd Afsar
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इस क़दर सादगी सूरत पे बसी है उस की
उस का आईना भी उस सेे ही ख़फ़ा लगता है
RAJAT AWASTHI
मेरी आँखों ने दिल से बात छेड़ी
हुई चर्चा तुम्हारी सादगी की
Kanha Mohit
सादगी से यूँँ गुज़र जाए ये जीवन
एक प्याली चाय भी हो यार भी हो
Hasan Raqim
जुल्फ़ खोलेगी हवा चलने लगेगी साथ में
सादगी से फूल को शैतान कर के मानेगी
Anurag Pandey
जज़्बातों को सहज लफ्ज़ों में पिरोता हूँ मैं
लिखता फ़क़त वही हूँ जो सच में होता हूँ मैं
Harsh saxena
सादगी देख के हुए पागल
सादगी देख के मोहब्बत की

सादगी ने ही फिर फँसाया हमें
सादगी ने ही फिर हिफ़ाज़त की
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Vineet Dehlvi
हमारी सादगी भी हम ही बताएँ
हमारे चेहरे से दिखती नहीं क्या
"Nadeem khan' Kaavish"
फूल सा नाज़ुक और हसीन बदन
और फिर उस पे सादगी तौबा
Shajar Abbas
बहुत से ख़ास रिश्तों में दरारें पड़ चुकी हैं अब
हमारी सादगी दुश्मन हमारी बन गई यारों
shampa andaliib
बड़ी ज़िंदा-दिली इन में बड़ी है सादगी इन में
हमारे घर की दीवारें कभी दुश्मन नहीं बनती
Sohil Barelvi
ब-सद-ख़ुलूस ब-सद-एहतिराम करते रहो
ख़ुलूस-ए-क़ल्ब से ज़िक्र-ए-इमाम करते रहो

गर इख़्तिलाफ़ को आलम से दूर करना हैं
तो इत्तिहाद का पैग़ाम आम करते रहो
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Shajar Abbas
हम अपने दाँव की पेचीदगी में उलझे थे
वो अपना दाँव बड़ी सादगी से खेल गया
Shakir Dehlvi
दिखावे रास आते हैं सभी को
ज़माना जा चुका है सादगी का
Ankit Raj
क्यूँँ करें हम इश्क़ में चालाकी यारों
सादगी से जीत लेंगे उन का दिल हम
Daqiiq Jabaalii
किसी दहलीज़ पर कभी कहाँ ठहरा
उसी के वास्ते यहाँ वहाँ ठहरा

मोहब्बत की ख़ुलूस यार से माँगी
दग़ा करती गई जहाँ जहाँ ठहरा
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Shubham Rai 'shubh'
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सादगी हुस्न का ज़िक्र जब भी हुआ
याद आया मुझे नाम सिर्फ़ इक तेरा
Poet Mohit Chauhan
सादगी से मिला करो मुझ सेे
तुम भी कोई गिला करो मुझ सेे
Sabir Pathan
मलेंगे हाथों को अपने गवाह और सुबूत
ख़ुलूस-ओ-इश्क़ का जब हम निसाब लिक्खेंगे
A R Sahil "Aleeg"
सादगी मेरी तुम न समझोगे
बे-वफ़ा से मुझे मुहब्बत है

जिन की नज़रें हैं क़ातिलाना बहुत
उन को काजल की क्या ज़रूरत है
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Danish Balliavi
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मुद्दतों बा'द ये समझ आया
सादगी सिर्फ़ इक दिखावा है
Vineet Dehlvi
किसी की आँख दिल में है किसी की सादगी है
मिरे इस दर्द-ए-दिल की बस वजह आवारगी है
Sayeed Khan
है सादगी की बात तभी तो रुका हूँ मैं
वरना हमारे साथ का मुड़ कर चला गया
Shubham Tiwari
तेरी सादगी ने मुझे छू लिया
कोई और छूए इजाज़त नहीं
Ambar
ये मेरा सादगी से भरा लहजा हाए
क्या ही तोहफ़ा दिया जाँ तेरे इश्क़ ने
Brajnabh Pandey
फ़क़त जलवों से कोई भी न चाहेगा
ज़रा सी सादगी भी तो ज़रूरी है
Meem Alif Shaz
देखे हैं तेरे जल्वे भी लेकिन
हम तेरी सादगी पे मरते हैं
Mohit Subran
होंठ है ख़ामोश फिर भी बोलती हैं ये निगाहें
आज के इस दौर में भी सादगी क्या ख़ूब लगती
Ganesh gorakhpuri
तुम्हारी सादगी में हम हमारी सादगी में तुम
तुम्हारी बंदगी में हम हमारी बंदगी में तुम

अभी क़िस्सा अधूरा है मगर हाँ लौट आएँगे
तुम्हारी ज़िन्दगी में हम हमारी ज़िन्दगी में तुम
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Gulshan Panwar
सादगी ने तेरी हम को भी तो धोके में रखा
धुंद को हम चाँदनी का अक्स ही कहते रहे
Meem Alif Shaz
नफ़रत वफ़ा ख़ुलूस मोहब्बत ग़ज़ल में है
गुज़री है हम पे जो भी मुसीबत ग़ज़ल में है
Shajar Abbas
देख पा रहा हूँ जो सब का सब दिखावा है
सच यहाँ है आडम्बर सादगी छलावा है
Ajay Choubey
नाज़-ओ-अदा के साथ कभी बे-रुख़ी के साथ
दिल में उतर गया वो बड़ी सादगी के साथ

आएगा मुश्क़िलों में भी जीने का फ़न तुझे
कुछ दिन गुज़ार ले तू मेरी ज़िंदगी के साथ
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SALIM RAZA REWA
अब वो मोहब्बत ही कहाँ जो थी पुराने दौर में
हम ने किया है प्यार पर तुम सेे यहाँ उस तौर में

यारा ज़माने की तरह हम रंग पे मरते नहीं
हम सादगी पे मर मिटे अब क्या रखा कुछ और में
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Bhuwan Singh
ग़ुस्सा प्यार हया नादानी यौवन सादगी और अदा
सचमुच तुम तो इंद्रधनुष से ज़्यादा सुंदर लगती हो
Shivam Rathore
तुम यक़ीं मेरा करो हर आदमी है लाजवाब
गर किसी को देखने की रौशनी है लाजवाब

वो फ़क़त अच्छी नहीं पर अच्छी लगती है हमें
क्योंकि उस की सादगी की चाँदनी है लाजवाब
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Meem Alif Shaz
हुस्न की तुर्फ़गी किसे मिलती
साथ में सादगी किसे मिलती
Manohar Shimpi
मैं ख़ुद गुनाहगार हूँ अपनी निगाह में
उस के ख़ुलूस-ओ-इश्क़ में कोई कमी नहीं
SALIM RAZA REWA
लगता है कुछ ख़ुलूस-ओ-मोहब्बत की है कमी

क्यूँँ उठ के जा रहे हैं तेरे दरमियाँ से लोग



मेरा ख़ुलूस मेरी मोहब्बत को देख कर

जुड़ते गए हैं आ के मेरे कारवाँ से लोग
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SALIM RAZA REWA
अता किया हुआ नाम ओ नुमूद बे-मानी
न हो ख़ुलूस तो सारे सुजूद बे-मानी
Almas Rizvi
मुझे ले डूबी तेरी सादगी वर्ना
मुझे तो इश्क़ था बस जिस्म वालों से
ABhishek Parashar
सादगी ऐसी कि मंदिर का हो दीया
और ये मासूमियत तो क़त्ल कर दे
arjun chamoli
इतना निगाहों से किसी को भी न देखो बरक़रार
ये सादगी भा जाती भी है देखने से बार-बार
Naresh sogarwal 'premi'
अपने तक रहना नहीं ख़ुद से निकलना भी है
फिर मुझे आइने की शक्ल में ढलना भी है

कितनी बातें जो सहज ही उसे कह देनी हैं
इक मगर वो जिसे कहने को मचलना भी है
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Shubh Mathur
सादगी ऐसी कि मंदिर के दिए की रौशनी
और ये मासूमियत तो क़त्ल कर देगी अभी
arjun chamoli
नूर में है सादगी और हुस्न का अवतार है
मन मिरा पूजा करे तो दिल मिरा बाँहों में ले
arjun chamoli
हाल-ए-दिल सुनते रहे हम तुम को अपना मान कर
प्यासे राही को ख़बर थी तिश्नगी क्या चीज़ है

ख़्वाब महलों के न देखे उन की आँखों में कभी
उन की बातों ने बताया सादगी क्या चीज़ है
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Kartik Bhalerao
पड़ी जब से मुर्शद की मुझ पर नज़र है
सहज हो गया ज़िन्दगी का सफ़र है

खंडर वो भी तीरथ-सा पूजा गया फिर
जहाँ से भी गुज़रा ये कामिल अगर है
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DILBAR
जो लेते सब्र का हैं इम्तिहाँ मेरा
वो वाक़िफ हैं मेरी इस सादगी से भी
Naviii dar b dar
ये सादगी ये हुस्न ये लहजा तेरा
कैसे मेरा दिल तेरा दीवाना न हो
ABhishek Parashar
सोचते हम रहे हुआ कैसे
सादगी का मिला सिला ऐसे
Saket Sharma
समझ अफ़ज़ल उसे ख़ुद को गिरा ये मान लेते हैं
चुने हैं ख़ुद जिसे ख़ुद से जुदा ये मान लेते हैं

ज़रा तुम सादगी इस मुल्क के लोगों की तो देखो
यहाँ कुर्सी पे कोई हो ख़ुदा ये मान लेते हैं
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Kabiir
न तुम ने प्यार को समझा न ही नाराज़गी को
बताओ कैसे समझोगी मेरी तुम सादगी को
Sachin Pratap Singh
नहीं देती हो अब भी ध्यान तुम हम पे
कमी है कुछ हमारी सादगी में क्या
Viru Panwar
इतना तो ज़िन्दगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े

जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े
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Kaifi Azmi
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दिल को सुकून रूह को आराम आ गया
मौत आ गई कि दोस्त का पैग़ाम आ गया
Jigar Moradabadi
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जो चराग़ सारे बुझा चुके उन्हें इंतिज़ार कहाँ रहा
ये सुकूँ का दौर-ए-शदीद है कोई बे-क़रार कहाँ रहा
Ada Jafarey
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नाला हूँ मैं बेदारी-ए-एहसास के हाथों
दुनिया मिरे अफ़्कार की दुनिया नहीं होती
Sahir Ludhianvi
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और क्या इस से ज़ियादा कोई नर्मी बरतूँ
दिल के ज़ख़्मों को छुआ है तिरे गालों की तरह
Jaan Nisar Akhtar
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का
Meer Taqi Meer
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इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े
Kaifi Azmi
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मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
Ameer Qazalbash
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'इंशा'-जी उठो अब कूच करो इस शहर में जी को लगाना क्या
वहशी को सुकूँ से क्या मतलब जोगी का नगर में ठिकाना क्या
Ibn E Insha
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बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र-ओ-सुकूँ
तू ही अपना शहर है जानी तू ही अपना सहरा है
Ibn E Insha
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इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद
अभी हमारी मोहब्बत नई नई है ना
Afzal Khan
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सुकून क़ल्ब को जिस से मिल जाए 'ताबाँ'
ग़ज़ल कोई ऐसी सुना दीजिएगा
Anwar Taban
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तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
Sahir Ludhianvi
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ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई न दे
Bashir Badr
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तिरे एहसास में डूबा हुआ मैं
कभी सहरा कभी दरिया हुआ मैं
Siraj Faisal Khan
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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का
Meer Taqi Meer
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इसीलिए मैं बिछड़ने पर सोगवार नहीं,
सुकून पहली ज़रूरत है, तेरा प्यार नहीं!

जवाब ढ़ूंढ़ने में उम्र मत गँवा देना,
सवाल करती है दुनिया पर एतबार नहीं
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Balmohan Pandey
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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले
ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
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बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो
उस सेे इश्क़ की आस न करना जिस का मन बंजारा हो

ख़ुद को शाइ'र कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे
लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो
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Daagh Aligarhi
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क्या वाक़ई वो तेरी पाज़ेब की खनक थी
ऐसा सुकून तो बस नुसरत के गाने में है
Neeraj Neer
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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा
थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा

इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में
अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा
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Fareeha Naqvi
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कहाँ कहाँ पे उसे ढूँढ़ते हैं हम यारों
किसी के लम्स से होता था जो सुकूँ दिल को
Afzal Ali Afzal
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सुकून ए क़ल्ब होता है मुयस्सर
तेरा जब नाम आता है लबों पर
Kiran K
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साहिल के सुकूँ से किसे इनकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
Aale Ahmad Suroor
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तेरे एहसास को ख़ुशबू बनाते
जो बस चलता तुझे उर्दू बनाते

यक़ीनन इस से तो बेहतर ही होती
वो इक दुनिया जो मैं और तू बनाते
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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हमें हर वक़्त ये एहसास दामन-गीर रहता है
पड़े हैं ढेर सारे काम और मोहलत ज़रा सी है
Khurshid Talab
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रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए
इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है
Ahmad Mushtaq
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इक तो ये नूर उस पे मेरी शर्म भी अलग
तू सामने रहा तो निगह उठ न पाएगी
shaan manral
अब आ भी जाओ के सुकूंँ मिले मुझे
अगर जो जाना था तो क्यूँँंँ मिले मुझे

ज़माना हो न हो रकी़ब बीच में
तू अब कभी मिले तो यूँंँ मिले मुझे
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Faiz Ahmad