Good Morning Shayari - Fresh subah vibes with love, positivity, and warm wishes

Good morning shayari brings fresh energy, positivity, and warmth to start the day. These lines blend emotions, hope, and subah ki taazgi to uplift your mood and spread smiles. Perfect for sharing heartfelt wishes with loved ones and beginning the day with beautiful thoughts.

अँधेरा खो गया है गाँव वालों
सवेरा हो गया है गाँव वालों

तुम्हें अब जागना ख़ुद ही पड़ेगा
ये मुर्गा सो गया है गाँव वालों
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Divy Kamaldhwaj
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ईद के रोज़ यही अपनी दुआ है रब से
मुल्क में अमन का, उलफ़त का बसेरा हो जाए

हर परेशानी से हर शख़्स को मिल जाए नजात
इस सियह रात का बस जल्द सवेरा हो जाए
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Zaki Azmi
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सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है
जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की
Hammad Niyazi
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बुलाया शाम को लेकिन वहाँ मैं सुब्ह जा बैठा
सुना था देर से आना उसे अच्छा नहीं लगता
Krishnakant Kabk
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अब ऐसे ज़ाविए पर लौ रखी जाने लगी है
चराग़ों के तले भी रौशनी जाने लगी है

नया पहलू सलीक़े से बयाँ करना पड़ेगा
कहानी अब तवज्जोह से सुनी जाने लगी है
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Khurram Afaq
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए
इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं

तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया
इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
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Fahmi Badayuni
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दो दफ़ा ग़ुस्सा हुए वो एक ग़लती पर मेरी
रात की रोटी सवेरे काम में लाई गई
Tanoj Dadhich
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घर के बुज़ुर्ग लोगों की आँखें क्या बुझ गईं
अब रौशनी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा

आए थे मीर ख़्वाब में कल डाँट कर गए
क्या शा'इरी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा
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Aalok Shrivastav
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रौशनी बढ़ने लगी है शहर की
चाँद छत पर आ गया है देखिए
Divy Kamaldhwaj
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नहीं आबो हवा में ताज़गी अब
दवा की सीसियों में ज़िन्दगी है
Umesh Maurya
सवेरे से ले बैठा हूँ गुलाल अपने मैं हाथों में
न ये बे-रंग हो जाए तुम अपना गाल इधर कर दो
SHIV SAFAR
हर सुब्ह उठ के इस को मैं हूँ चूमता
चाय है जैसे ये कोई सौतन तेरी
RAJAT AWASTHI
बाक़ी सारे काम भुलाकर इश्क़ किया
सुब्ह से ले कर शाम बराबर इश्क़ किया

ग़लती ये थोड़े थी इश्क़ किया हम ने
ग़लती ये थी ग़ैर बिरादर इश्क़ किया
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Vashu Pandey
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ये करिश्मा हुआ चूमने से उसे
तीरगी पर खुली रौशनी की समझ
Neeraj Neer
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सुब्ह की सैर की करता हूँ तमन्ना शब भर
दिन निकलता है तो बिस्तर में पड़ा रहता हूँ
Sabir Zafar
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हर सुब्ह निकलना किसी दीवार-ए-तरब से
हर शाम किसी मंज़िल-ए-ग़मनाक पे होना
Sarvat Husain
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ये दुख नहीं कि अँधेरो से सुल्ह की हम ने
मलाल ये है कि अब सुब्ह की तलब भी नहीं
Parveen Shakir
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हमारी सुब्ह किसी शाम से नहीं मिलती
ये वो थकन है जो आराम से नहीं मिलती
Kashif Husain Ghair
सितारा सुब्ह का मैं और चराग़ शाम का तू
न तेरे काम का मैं हूँ न मेरे काम का तू
Kabir Athar
अच्छों पर बुरों की हमेशा नज़र रहती है
रौशनी हमेशा अँधेरों से घिरी रहती है
Bhavesh kumar
तुम्हारी आँखों से मैं ख़ूब-सूरत हूँ वरना
चाँद की अपनी कोई रौशनी नहीं होती
Murli Dhakad
ये कैसा तजुर्बा है कि दिल जलाने पे अक्सर
अँधेरा छा जाता है रौशनी नहीं होती
Murli Dhakad
आसान है किसी के लिए आँखें भारी करना
लेकिन मुश्किल है उम्र भर वफ़ादारी करना

दुनिया हर रोज़ निकलती है सुब्ह काम के लिए
अपने नसीब में है शायद बेरोज़गारी करना
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karan singh rajput
दुश्वारियाँ ऐसी हर काम में आई
कुछ यादें हमें हर जाम में आई

हर शाम मिला कुछ बातों से तेरी
ये कैसी सुब्ह जो हर शाम में आई
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Vinay Khandelwal
बड़ा अनमोल हूँ सँभाल कर तू रख मुझे
मैं तेरी सुब्ह नहीं जो रोज़ पलट आऊँगा
Asif Mujtaba Farooqui
रोज़ सवेरे उठ ना चाहूँ
तेरी चूड़ी की खन-खन से
Pawan
साथ बिताये कितने मौसम उस को इक भी याद नहीं
रात को चाभी कहाँ रखी थी सुब्ह को ही वो भूल गया
Anmol
रात भर गिरते है आँसू आँख से
तब कहीं जा कर सवेरा होता है
karan singh rajput
फूल छत पे खिल गए पर ताज़गी खोते गए
हम बहुत कर के तरक़्क़ी सादगी खोते गए

था पिता पर बोझ तो हम दिल-लगी में चूर थे
बोझ जब ख़ुद पर पड़ा तो दिल-लगी खोते गए
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Rituraj kumar
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अजी बड़े ही हँस के निकले थे सवेरे घर से हम
तेरी गली में आते आते सोगवार हो गए
Manish Nauhwar
कल राह में चमकेंगे तेरी रौशनी बनकर
ये मशवरे माँ-बाप के बेकार नहीं हैं
Shakir Dehlvi
तुझ को नज़र न आएँगे अगली सुब्ह से हम
ख़ुद को कहीं छुपाएंगे कुछ इस तरह से हम
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
सुब्ह से शाम तक है बेक़रारी सी
तिरी यादें नहीं देती ख़ुशी के पल
Meem Alif Shaz
चार बजते ही खुल जाती है नींद सुब्ह
चार बजने तलक याद आती हो तुम
Shivraj Singh Gurjar
सुबह-सुबह ये आफ़ताब कौन लाया है
बड़ी मशक़्क़तों से चाँद को सुलाया है

धुआँ सा उठ रहा है कब से मेरी आँखों में
बुझा दे जिस किसी ने दिल मेरा जलाया है
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Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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परेशाँ से जो आँसू, शब, सिरहाने रख दिए थे
सवेरे फिर बिखर कर, आँख में चुभने लगे हैं
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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इक शख़्स मेरी ज़िंदगी से क्या चला गया
यूँँ लग रहा है जैसे ख़ुदा था, चला गया

आँखों पे कोई रौशनी पड़ती चली गई
रस्ते से अपने फिर मैं भटकता चला गया
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gulab muntazir
तीरगी में रही बे-कसी रात भर
दर्द देती रही, दिल-लगी रात भर

मैं सवेरे तेरे शहर आता मगर
ज़ख़्म आँखें दिखाती रही रात भर
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Harshwardhan Aurangabadi
ये किस लिए चराग़ों को तुम जला रहे हो
अंधों को रौशनी की क्या सच में है ज़रूरत?
NISHKARSH AGGARWAL
तुझी से तो सुब्ह है शाम है
तुझे ही चाहना मेरा काम है

अगर तुम सुन सको तो फिर सुनो
मिरे दिल में तुम्हारा नाम है
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Kaviraj " Madhukar"
सब नहीं करते हैं जो मैं बस वही करता हूँ
घर जला के मोहल्ले में रौशनी करता हूँ

तुम क्या छीनोगे यार मोहब्बत मेरी
दुश्मनों से भी मेरे मैं दिल लगी करता हूँ
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Shashank Shekhar Pathak
रात की बात तो और कुछ थी मगर
ये सवेरे सवेरे अँधेरा घना
Sumit Panchal
रातें छत पर रोते रोते कटती हैं
सब कहते है देर सवेरे उठता हूँ
Ravi 'VEER'
आज फिर झूठी तसल्ली के लिए
सुब्ह में अख़बार मैं ने पढ़ लिया
Nirmal Neer
जुगनुओं को रौशनी का यूँँ पता देता हूँ मैं
जल रहे कमरे की बत्ती को बुझा देता हूँ मैं
Vivek Vistar
तुम सेे पूछेंगे सुब्ह लोग मेरे बारे में
नींद में पगली मेरा नाम नहीं ले देना
Shajar Abbas
उन की गुज़र रही है बहुत ख़ुशनुमा हयात
और हम से एक रात भी अब तक नहीं कटी
Sayeed Khan
मैं दिवाली का दीया हूँ
रात कुछ हूँ कुछ सुब्ह हूँ
Vikas Singh
ग़ज़ब हिम्मत सुब्ह माँ से विदा बेटी हुई होगी
बिछुड़ना माँ अभी उस सेे महज़ सपना समझती है

सितम गर ये मुझे झूठा कहा तुम ने कयामत है
क़सम खाकर कहूँ तो माँ अभी सच्चा समझती है
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Rudransh Trigunayat
कुछ ऐसे, चराग़ों को मेरे, ज़रा नम कर दे
अँधेरे बढ़ा मत, हाँ बस रौशनी कम कर दे
pankaj pundir
मैं परिंदा मेरे लिए पौधा
रात के बा'द का सवेरा है
Kushal "PARINDA"
दुआ ये माँगा करो रोज़ उठके अहल-ए-सुबह
ख़ुदा बुजुर्गों का साया हमारे सर पे रखे
Shajar Abbas
सारे ख़्वाब उसी के थे
मेरी तो बस आँखें थीं

मुझ
में सुब्ह उसी से थे
पहले अँधेरी रातें थी
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Afzal Sultanpuri
तेरे होंटों से छलकती है किरन सूरज की
तेरे हँसने से मेरी सुब्ह चमक उठती है
Nirmal Nadeem
सुब्ह की पहली अज़ाँ में सुन रही हूँ नाम तेरा आजकल मैं
मंदिरों की घण्टियाँ भी कब भला इतनी मधुर लगती थीं मुझ को
Kiran K
जब मोहब्बत की बात की हम ने
तब से खुश़नुमा रात की हम ने
Afzal Sultanpuri
भले ये रौशनी भी अब न हो फिर भी
मुझे अब यार ख़ुद ही जगमगाना है

कहाँ जाए किसे बोले भला 'रौनक'
अरे! चालाकियांँ सब बस बहाना है
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Raunak Karn
शमा' जलाने को सब हैं कहते बहुत अँधेरा बिखर रहा है
हटा दो ज़ुल्फ़ें हुआ उजाला जरा सा हँस दो हुआ सवेरा
Anmol Mishra
है कठिन राह तुम इस पे चलना नहीं
चाँद होना मगर सुब्ह ढलना नहीं

हर गुलाब एक दिन यूँँ तो मुरझाएगा
तुम मगर यूँँ फजा संग बदलना नहीं
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Kavi Vikash Shukla
ख़ुशनुमा होती हमारी ज़िंदगी भी
गर हमारे तुम तुम्हारे हम हो जाते
Aniket sagar
रात से तेरी बातें मैं करता रहा
चाँद बैठा रहा सुब्ह तक रू-ब-रू
Kanha Mohit
सुब्ह की ये सिलवटें खिलने कहाँ देती मुझे
वो सिमट के बॉंह में, हिलने कहाँ देती मुझे
RAAHI
हम चराग़ों से जलने वाले लोग
रौशनी में दिखाई क्यूँँंँ देंगे
Irshad 'Arsh'
एक रूठी सी हँसी है होंठ पे ठहरी मिरे
एक आँसू ख़ुशनुमा है आँख से जाता नहीं
Shan Sharma
यार तुम सेे जब मुलाक़ात होगी
तब बहुत ही खुशनुमा रात होगी

मैं हमेशा से समझती रही ये
यार शादी में धरम जात होगी
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Arohi Tripathi
ये दिल है तेरा या मेरा ख़याल कुछ भी नहीं
ये शाम है या सवेरा ख़याल कुछ भी नहीं

याँ इक मैं हूँ जिस को तेरा ही है ख़याल फ़क़त
वाँ इक तू है जिस को मेरा ख़याल कुछ भी नहीं
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Deep kamal panecha
बस नबी के शान की ख़ातिर हमीं
चल दिए तन्हा फ़कत मैदान में

दुश्मनों की फ़ौज जब हो सामने
उस घड़ी हो ताज़गी ईमान में
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Faizan Faizi
इश्क़ में लाजवाब हैं हम लोग
माहताब आफ़ताब हैं हम लोग

शाम से आ गए जो पीने पर
सुब्ह तक आफ़ताब हैं हम लोग
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Ashish Upadhyay
रात भर ये तू जो महफ़िल है सजाता
सुब्ह फिर ग़मगीन होकर ये बताता

देख ख़ुशियाँ तू तो ज़ीरो की मनाता
ज़ीरो का है ग़म ये सारा फिर जताता
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"Dharam" Barot
घिरी रहती अभी तक तीरगी से
मुझे लाता न तू गर रौशनी में
Reshma Shaikh
हम मर गए ज़ख़्मों को ही भरते हुए
इस ज़िन्दगी को ज़िन्दगी करते हुए

हर सुब्ह रोज़ी ढूँढ़ने की कोशिशें
ये कोशिशें डरते हुए, डरते हुए
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Meem Alif Shaz
ये वाट व्हेयर आप के यूँँ तो हमें अच्छे लगे
पर ताज़गी के वास्ते हिन्दी में कुछ बातें कहें
Bhoomi Srivastava
तू सुब्ह है, तू शाम है, तू रात है
तू साथ है मेरे यही तो बात है
Meem Alif Shaz
चल पड़े थे अकेले सवेरे लिए
लड़-झगड़ के जहाँ से वो मेरे लिए

क़ीमती है नहीं कोई उन के सिवा
बाप ज़्यादा ज़रूरी है मेरे लिए
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Murari Mandal
किसी को आती नहीं आशिक़ी न आएगी
बग़ैर इश्क़ किए शा'इरी न आएगी

हमें जो देख कभी तुम न मुस्कुराओगी
हमारे ज़िन्दगी में ताज़गी न आएगी
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Manoj Sharma "Chandan"
सुब्ह अखबारों में आया देश में दौलत बहुत है
फिर भी जाने क्यूँँ यहाँ पर लोग मरते मुफ़्लिसी में
AYUSH SONI
बड़ी उलझन थी जीवन में बहुत गहरा अँधेरा था
तेरे क़दमों में जब सोया बड़ा दिलकश सवेरा था

मुझे यूँँ कामयाबी की ज़मानत मिल गई घर से
निकलते वक़्त मेरे सर पे माँ ने हाथ फेरा था
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Mohd Ashahad
ख़ुशनुमा है समॉं दौर कोई नहीं
सामने बैठे हैं ग़ौर कोई नहीं

या ख़ुदा अब कोई ऐसी महफ़िल भी हो
एक मैं एक वो और कोई नहीं
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'June' Sahab Barelvi
बड़ी सी साथ में उस रोज़ इक बारात होती है
बिदाई तो हमेशा से नई शुरुआत होती है

जुदा जिन से हुए हैं हाल उन के भी कभी पूछो
हुए जब से जुदा कैसे गुज़ारी रात होती है
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Umashankar Lekhwar
जितना वश में है यहाँ तुम्हारे उतना ही कहो
मैं ने कब कहा तुम्हें कि मुझ को ज़िंदगी कहो

बैठ कर हमेशा रहना है तुम्हारी आँखों में
चाहे रौशनी कहो मुझे या किरकिरी कहो
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Sandeep dabral 'sendy'
तीरगी से रौशनी में जाना है
आँख खुलते ही सवेरा आना है
Shivang Tiwari
ख़ुशनुमा सी हवा हो गई
वो तो दिल की दवा हो गई
Umesh Maurya
उसे फिर रौशनी भाती नहीं है
जो दुनिया देख कर अंधा हुआ है
Manas Ank
हो भूला सुब्ह का तो शाम को घर आ ही जाता है
तेरी फिर कौन सी ज़िद है तू वापस क्यूँ नहीं आता
100rav
उस के गालों पे नई सी ताज़गी के आने से
तितलियाँ बहुत ही ख़ुश हैं रौशनी के आने से

कौन कहता है कि अपने ज़िन्दगी बदलते हैं
मेरी ज़िन्दगी बदल गई है अजनबी के आने से
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Meem Alif Shaz
इक सितमगर के सितम इतने रहे
तीरगी को रौशनी कहते रहे

वो कभी भी तल्ख़ बातों से नहीं
कुछ न कह कर इक चुभन देते रहे
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Tanya gupta
एक ही बात से वो ख़फ़ा हो गई
इस लिए अपनी साँसें सज़ा हो गई

रात भर उस के हाथों पे मेहँदी रचाई
सुब्ह आई तो हम से जुदा हो गई
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Meem Alif Shaz
साथ में जब कभी ख़्वाब में आएँगे
सुब्ह होती है क्या भूल ही जाएँगे
Abdulla Asif
रौशन एक सवेरा कितनी ही रातों के बा'द हुआ
ये सब तो उन सेे दो चार मुलाक़ातों के बा'द हुआ

हल्की-फुल्की बात हुआ करती थी याँ मैसेज में बस
राँझे वाला इश्क़ तो फोन पे फिर बातों के बा'द हुआ
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Sandeep dabral 'sendy'
अपने ग़म से लिपट कर न सोया करो
सुब्ह होते ही आँसू न धोया करो

ज़िन्दगी में परेशानियाँ आती हैं
बदलियों के लिए यूँँ न रोया करो
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Meem Alif Shaz
ज़ीस्त की आभा मरम्मत में कई
ख़ुशनुमा लम्हे जिए बिन बह गए
Abha sethi
चौंकना मत न कोई सुब्ह को मातम करना
हम किसी रात अचानक से चले जाएँ अगर
Sohil Barelvi
मुझे सुब्ह ज़ख़्मों को सिलना पड़ेगा
मैं चाहूँ नहीं तो भी खिलना पड़ेगा

इसी ख़ौफ़ में रात गुज़री है मेरी
अगर सोया तो तुम सेे मिलना पड़ेगा
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Rehaan
रब ने दी ज़िन्दगी जो दिखने में ख़ुशनुमा है
जो भी दिया है रब ने हाँ उस का शुक्रिया है

आँखों को सब पता है ये ख़ूब बोलती हैं
दिल का ये मामला है दिल उनपे आ गया है
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Shivangi Shivi
मुझ
में अँधेरा इतना ज़्यादा अँधेरा है
हर दिन काला होता मेरा सवेरा है
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Manoj Devdutt
सुब्ह करता है रात करता है
वो बिछड़ने की बात करता है

दोस्त कैसे करूँँ यक़ीं उस का
इश्क़ वो सब के साथ करता है
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ABhishek Parashar
आज फ़ुर्सत है तो ऐसा कीजिए
कमरे में दिल खोल के हँस लीजिए

सुब्ह से दफ़्तर में बैठे हो जनाब
रात है या दिन पता कर लीजिए
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Meem Alif Shaz
ज़िंदगी से ज़िंदगी जब रूठ जाएगी सनम
ख़्वाब पाने के मुझे तुम देखना फिर सौ जनम

रात को हँसते मिलोगे नींद में बेफ़िक्र तुम
और उठते ही सवेरे फिर करोगे आँख नम
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Rubball
मैसेज गुड मार्निंग के आते नहीं हैं अब
क्या शहर में उस के सवेरा ही नहीं होता
Manoj Devdutt
ये ज़िंदगी तुझ सेे यही सुन ऐ मुसाफ़िर कह रही
हर दिन नई शुरुआत है हर दिन नया आग़ाज़ है
Rohit Asthana Prabhav
कभी तुम सेे थी नाराज़ी कभी तुम सेे शिकायत थी
ज़माना वो भी गुज़रा जब हमें तुम सेे मोहब्बत थी

बँधाता रह गया ढाढस दिया जो रातभर जलकर
कहा सबने हुई जब सुब्ह उसे जलने की आदत थी
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Umashankar Lekhwar
आबियारी से हमारी बाग तब उन का खिला था
पतझड़ों सी ज़िन्दगी को साथ ले जब वो मिला था

रौशनी देकर उसे हम तीरगी में जी रहे हैं
सुब्ह मेरी ले गया वो शब के जैसे जो मिला था
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Gulshan Gulzar
आप जब होते हैं पर होते नहीं हैं
यार फिर हम सुब्ह तक सोते नहीं है

दोनों में से एक को चुन लो अभी तुम
या रुलाओ या कहो रोते नहीं हैं
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Akash Gagan Anjaan
मेरी सुब्ह और रात का विवाद तो ये है
मुझ को लगती है सिगार सोने और जगने में
Naresh sogarwal 'premi'
वक़्त-ए-जुदाई सर को झुकाए उन का मुझ से ये कहना
देखो कल शादी है मेरी और तुम को भी आना है

चाँद सितारों सो जाओ तुम जल्दी सूरज को भेजो
सुब्ह सवेरे मुझ को मेरे यार से मिलने जाना है
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Saif Dehlvi
खिड़कियाँ खोल सुब्ह होने को है
चाँद भी यार अब तो सोने को है

उड़ चुके हैं परिंदे भी अब तो
साँस फसलें नई ये बोने को है
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Lalit Mohan Joshi
ख़ुशनुमा रहा समाँ जब तलक क़रीब थे
हो गए ख़िलाफ़ वो चार दिन के साथ से
Rohan Hamirpuriya
बिन चू
में तो सवेरा नईं होता था
बिन देखे अब रात गुज़र जाती है
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Shivam Prajapati