Garmi Shayari - Tapti dhoop aur garmi ke ehsaas par likhi shayari

Garmi shayari captures the intense heat of summer, blending the emotions of tapti dhoop, thirst, and restless days. These verses often reflect not just the season, but also deeper feelings like longing, discomfort, and life’s harsh realities. Perfect for sharing summer vibes, status updates, or expressing the burning intensity of emotions.

garmi shayari
धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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dhoop shayari
रिश्तों को जब धूप दिखाई जाती है
सिगरेट से सिगरेट सुलगाई जाती है
Ankit Gautam
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tapish shayari
झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
Shariq Kaifi
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garm hawa shayari
तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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loo shayari
सर्दी और गर्मी के उज़्र नहीं चलते
मौसम देख के साहब इश्क़ नहीं होता
Moin Shadab
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sooraj shayari
तेज़ धूप में आई ऐसी लहर सर्दी की
मोम का हर इक पुतला बच गया पिघलने से
Qateel Shifai
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garm mausam shayari
'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का
सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं
Mohammad Alvi
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tapta din shayari
गर्मी लगी तो ख़ुद से अलग हो के सो गए
सर्दी लगी तो ख़ुद को दोबारा पहन लिया
Bedil Haidri
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पहले ये काम बड़े प्यार से माँ करती थी
अब हमें धूप जगाती है तो दुख होता है
Munawwar Rana
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उस वक़्त भी अक्सर तुझे हम ढूँढ़ने निकले
जिस धूप में मज़दूर भी छत पर नहीं जाते
Munawwar Rana
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धूप पड़े उस पर तो तुम बादल बन जाना
अब वो मिलने आए तो उस को घर ठहराना।

तुम को दूर से देखते देखते गुज़र रही है
मर जाना पर किसी गरीब के काम न आना।
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Tehzeeb Hafi
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तुम सेे इक दिन कहीं मिलेंगे हम
ख़र्च ख़ुद को तभी करेंगे हम

धूप निकली है तेरी बातों की
आज छत पर पड़े रहेंगे हम
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Swapnil Tiwari
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रिश्तों की ये नाज़ुक डोरें तोड़ी थोड़ी जाती हैं,
अपनी आँखें दुखती हों तो फोड़ी थोड़ी जाती हैं

ये काँटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है
राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं
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Subhan Asad
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रुकें तो धूप से नज़रें बचाते रहते हैं
चलें तो कितने दरख़्त आते जाते रहते हैं
Charagh Sharma
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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
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Subhan Asad
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सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
Nida Fazli
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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
Shakeel Jamali
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धूप के एक ही मौसम ने जिन्हें तोड़ दिया
इतने नाज़ुक भी ये रिश्ते न बनाए होते
Waseem Barelvi
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हम ख़ुश हैं हमें धूप विरासत में मिली है
अज्दाद कहीं पेड़ भी कुछ बो गए होते
Shahryar
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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द
Kaifi Azmi
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हाल पूछा न करे हाथ मिलाया न करे
मैं इसी धूप में ख़ुश हूँ कोई साया न करे
Kashif Husain Ghair
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तेरी यादों की धूप आने लगी है
अभी खुल जाएगा मौसम हमारा
Subhan Asad
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धूप को साया ज़मीं को आसमाँ करती है माँ
हाथ रख कर मेरे सर पर सायबाँ करती है माँ

मेरी ख़्वाहिश और मेरी ज़िद उस के क़दमों पर निसार
हाँ की गुंज़ाइश न हो तो फिर भी हाँ करती है माँ
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Nawaz Deobandi
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ऊपर उठती हुई एक गर्म हवा है मिरा दर्द
मेरा लहजा कभी फ़रियाद नहीं हो सकता
Farhat Ehsaas
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धूप ये अठखेलियाँ हर रोज़ करती है
एक छाया सीढ़ियाँ चढ़ती उतरती है

ये दिया चौरास्ते का ओट में ले लो
आज आँधी गाँव से हो कर गुज़रती है
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Dushyant Kumar
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गहरी सोचें लम्बे दिन और छोटी रातें
वक़्त से पहले धूप सरों पे आ पहुँची
Aanis Moin
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ये काँटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है
राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं
Subhan Asad
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हम अपनी धूप में बैठे हैं 'मुश्ताक़'
हमारे साथ है साया हमारा
Ahmad Mushtaq
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धूप भी आराम करती थी जहाँ
अपना ऐसी छाँव से नाता रहा
Madan Mohan Danish
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काँटों से दिल लगाओ जो ता-उम्र साथ दें
फूलों का क्या जो साँस की गर्मी न सह सकें
Akhtar Shirani
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बाद-ए-बहार में सब आतिश जुनून की है
हर साल आवती है गर्मी में फ़स्ल-ए-होली
Wali Uzlat
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किसी की तपिश में ख़ुशी है किसी की
किसी की ख़लिश में मज़ा है किसी का
Unknown
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मैं बे-ख़याल कभी धूप में निकल आऊँ
तो कुछ सहाब मिरे साथ साथ चलते हैं
Farhat Abbas Shah
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जाने कैसे ख़ुश रहने की आदत डाली जाती है
उन के यहाँ तो बारिश में भी धूप निकाली जाती है
Ritesh Rajwada
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शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई सी तुम
ज़िन्दगी है धूप तो मद-मस्त पुर्वाई सी तुम

चाहे महफ़िल में रहूँ चाहे अकेले में रहूँ
गूँजती रहती हो मुझ में शोख़ शहनाई सी तुम
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Kunwar Bechain
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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धूप निकली है बारिशों के ब'अद
वो अभी रो के मुस्कुराए हैं
Anjum Ludhianvi
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धूप में कौन किसे याद किया करता है
पर तिरे शहर में बरसात तो होती होगी
Ameer Imam
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ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं
Mahirul Qadri
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जली हैं धूप में शक्लें जो माहताब की थीं
खिंची हैं काँटों पे जो पत्तियाँ गुलाब की थीं
Dagh Dehlvi
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तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है
बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है
Adam Gondvi
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आग उगलती रातों में इक शीतलता सी छायी थी
गर्मी की छुट्टी में फिर वो मामा के घर आई थी
Shubham Seth
तेरे माथे पर जो दुख लिक्खे हैं
इनको चूम के अपना कर लूंँगा मैं
Aarush Sarkaar
चिलचिलाती धूप है और पैर में चप्पल नहीं
जिस्म घाइल है मगर ये हौसला घाइल नहीं
Tanoj Dadhich
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मुझ पे पड़ती नहीं बलाओं की धूप
सर पे साया-फ़िगन है माँ की दुआ
Amaan Haider
पास हमारे आ कर वो शर्माती है
तब जा कर के एक ग़ज़ल हो पाती है

उस को छूना छोटा मोटा खेल नहीं
गर्मी क्या सर्दी में लू लग जाती है
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Tanoj Dadhich
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वो सर्दियों की धूप की तरह ग़ुरूब हो गया
लिपट रही है याद जिस्म से लिहाफ़ की तरह
Musavvir Sabzwari
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सावन-रुत और उड़ती पुर्वा तेरे नाम
धूप-नगर से है ये तोहफ़ा तेरे नाम
Tajdar Adil
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धूप तो धूप ही है इस की शिकायत कैसी
अब की बरसात में कुछ पेड़ लगाना साहब
Nida Fazli
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लगा आग पानी को दौड़े है तू
ये गर्मी तेरी इस शरारत के बा'द
Meer Taqi Meer
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मैं बहुत ख़ुश था कड़ी धूप के सन्नाटे में
क्यूँँ तेरी याद का बादल मेरे सर पर आया
Ahmad Mushtaq
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बेचता यूँँ ही नहीं है आदमी ईमान को
भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को

शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून
पेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को
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Adam Gondvi
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वो मुसाफ़िर ही खुली धूप का था
साए फैला के शजर क्या करते
Parveen Shakir
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यहाँ दरख़्तों के साए में धूप लगती है
चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए
Dushyant Kumar
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इन्ही हैरत-ज़दा आँखों से देखे हैं वो आँसू भी
जो अक्सर धूप में मेहनत की पेशानी से ढलते हैं
Jameel Mazhari
हिज्र कटता है मेरा जून की गर्मी की तरह
एक लम्हा जहाँ सदियों की तरह होता है
Shakir Dehlvi
क्यूँ ऐसा रिश्ता क़ाएम रखना जिस
में केवल दर्द मिलें
ना धूप मिले न छाव मिले बस मौसम सारे सर्द मिलें
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Amit Joshi anhad
सनम हैं सर्दियों की धूप जैसी
ज़रा दीदार कर के देख लो जी
Saarthi Baidyanath
धूप से रूठ कर कहाँ कोई
पेड़ अपनी जड़ें बदलता है
Saarthi Baidyanath
इश्क़ ऐसा दरख़्त है जिस के
साए में तेज़ धूप होती है
Saarthi Baidyanath
उम्र भर मुझ को रखा धूप में जिस रस्ते ने
याद क्यूँ उस का सफ़र और वो छाले रक्खूँ

ख़त जो लिख कर के रखा पर न तुम्हें दे पाया
अब उसे आग लगा दूँ या सँभाले रक्खूँ
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Aditya
जब मुंडेरों से धूप ढलती है
तो कमी उस की मुझ को खलती है

जो हथेली पे अपनी लिखती थी
दोस्ती प्यार में बदलती है
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Sandeep Thakur
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नींद आई तो धूप खिले तक सोएंगे
ख़्वाबों की फ़ेहरिस्त बना कर बैठे हैं
Shakir Dehlvi
बड़ा ही नाज़ है इस चाँद को सूरत पे अपनी, पर
कभी जो धूप में निकले तो सूरज में बदल जाए
Prit
धूप की तरह एक लड़की है
जो मेरे हाथ में नहीं आती
Saarthi Baidyanath
छाँव देगा वही शजर जिस ने
धूप को सर पे ओढ़ रक्खा हो
Saarthi Baidyanath
तुम को देखा तो इक गुलाब खिला
तुम ने देखा तो धूप मुस्काई
Akash Rajpoot
अब वो छत पर मुझे ऐसे बुलाती है
जैसे वो धूप जाड़े में दिसंबर की
Meem Alif Shaz
जब परेशाँ होता हूँ इस ज़िंदगी की धूप से
करता हूँ साया किताबों का मैं बच्चों की तरह
NISHKARSH AGGARWAL
मैं तेरे ही दिल का शीशा हूँ तू ग़लती से छू मुझ को
ठंडी सी है साँसे मेरी चाहिए तेरी लू मुझ को

दिल से अपने दिल की गहरी खिड़की से देखा है मैं ने
ढूँढा कोना कोना मैं ने पर मिला तू ही तू मुझ को
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Yogamber Agri
धूप है या है छाँव रस्ते में
जल रहे आज पाँव रस्ते में

साथ शम्स-ओ-क़मर भी लाना तुम
इक़ बसाना है गाँव रस्ते में
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Abuzar kamaal
इश्क़ दरख़्त है ऐसा जिस का साया तक
भारी सर्दी में भी गर्मी देता है
Saahir
पेड़ गिरने पे ये हुआ महसूस
धूप कितनी है इस ज़माने में
Vijay Anand Mahir
रहेगा हमेशा ही ये धूप का साथ
है जब आरज़ू ही नहीं छाँव मुझ को

जहाँ बस हो रोने की आवाज़ और दुख
वहीं खींच ले जाता है पाँव मुझ को
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Sayeed Khan
वो धूप में आई है छत पे बैठने
पहली दफ़ा इक चाँद दिन में देखा है
Rachit Sonkar
जो मुझ को जून की गर्मी में तन्हा छोड़ गया
वो आज ढूँढ़ रहा है मुझे दिसम्बर में
Shajar Abbas
दिन भर गर्मी में जलते हैं
तब जा कर बच्चे पलते हैं
Dileep Kumar
सर्द मौसम यूँँ अचानक हो गया
चाँद-सूरज लग रहे रूठे हुए
"Nadeem khan' Kaavish"
हर एक बात पे करते हो क़त्ल-ए-आम की बातें
तुम्हीं बताओ अब अंज़ाम-ए-गर्मी-ए-जुनूँ क्या है
Ajeetendra Aazi Tamaam
छाँव भी बदली बदली लगती है
धूप भी धूप सी कहाँ है अब
Saarthi Baidyanath
कभी गर्म है कभी सर्द है फ़िज़ा हयात की
कभी धूप में कभी छाँव में टहल कर आ गए
Amaan mirza
दिल की गहराई से मैं सारे सुख़न लिखता हूँ
धूप और छाँव है क्या सारे चमन लिखता हूँ
Afzal Sultanpuri
हुआ धूप का जब असर ज़िन्दगी पर
किताबों से तब मैं ने साया लिया है
NISHKARSH AGGARWAL
तुम धूप हो मेरी मैं पौधा तेरे बिन या'नी
बिन धूप के फोटोसिंथेसिस का नहीं होना
Yogamber Agri
चर्ख़ मेरी प्यास से वाक़िफ़ हुआ
धूप ने सहरा पे दरिया लिख दिया
pankaj pundir
वो कली अब ख़ुद निखरती जा रही है
धूप आने तक जो कुछ सुकड़ी हुई थी
Abhay Mishra
सुनहरी धूप, ठंडी हवाएँ और ये सफ़र
न जाने कब तेरा गांँव गुज़रा, कुछ पता नहीं
"Nadeem khan' Kaavish"
धूप में रूप सँवरता है पर
इश्क़ में रंग निखर जाता है
Saarthi Baidyanath
पाँव में खनकी चाँदी हो जैसे
उस ने मुंडेर फाँदी हो जैसे

छत पे दो पल मिलन जुदाई में
धूप में बूँदा-बाँदी हो जैसे
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Sandeep Thakur
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धूप है और तन्हाई भी है
ज़िन्दगी हम गुज़ारेंगे कैसे
Meem Alif Shaz
सिर्फ़ इतनी सी गुंजाइश है वस्ल दिखने की
जैसे इत्तिफ़ाक़न बारिश में धूप दिख जाए
Nishant Singh
चल बसे सब चाँद तारे और तुम भी
धूप है जिस ने मुझे अब तक न छोड़ा
Abhay Mishra
मोहब्बत ही मोहब्बत और हम तुम
कहाँ है धूप, देखो शाम है बस
Meem Alif Shaz
धूप जब चेहरा जलाती है मेरा
याद आती है मुझे ज़ुल्फ़ें तेरी
Ravi 'VEER'
दुनिया वहशत देर से समझा करती है
प्रेमी पहले दिन से पागल होता है

तन्हाई की लू में मुझ को साया दे
केवल तेरी याद का आँचल होता है
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Sameer Goyal
बदन ज़िंदा सुलगते हैं
तपिश बन जाएँ गर साँसें
Ajeetendra Aazi Tamaam
लगाया है मुझे गले से उस ने जबसे बा-ख़ुदा
ये धूप मुझ को मौसम-ए-बहाराँ लगने लग गई
Kartik tripathi
शजर से धूप से पैरों से रहगुज़र से पूछ
सफ़र का लुत्फ़ रफ़ीक़ाने हम सेफ़र से पूछ

जिसे भी छोड़ दिया उम्र-भर को छोड़ दिया
मेरे मिज़ाज के बारे में शहर भर से पूछ
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KARAN
सबकी नज़रों से तुम को चुरा लूंँगा मैं
तेरे ख़ातिर सभी ग़म उठा लूंगा मैं

साथ रहने का मैं ने है वा'दा किया
वा'दा है मेरा वा'दा निभा लूंगा मैं
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Rajnish Vishwakarma
तेज़ गिरती धूप देखी तब खुला मुझ पे
सिर्फ़ बारिश ही नहीं हैं आसमाँ का दुख
Saahir
इसी बाइस मैं थोड़ी छाँव का हूँ मुंतज़िर सोहिल
मुसाफ़िर धूप में हों तो मैं उन के काम आता हूँ
Sohil Barelvi
हिज्र की धूप में फूलों का बदन जलते हुए
सच कहूँ देख के सीने से धुआँ उठता है
Shajar Abbas
कुछ पल हम ने साथ बिताए एक डगर पर
ये क़िस्सा दरियाओं को तुग़्यानी देगा

हम महफ़िल महफ़िल सजने वाले मौसम हैं
कौन बता ऐ तपिश हमें वीरानी देगा
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Moni Gopal Tapish
मुझ जैसे कितने हैं जिन को दिन के बदले रात मिली
गर्मी को मैं ने झेला है और उस को बरसात मिली

जिस को पाने की ख़ातिर में मैं पल-पल बेचैन रहा
यार क़यामत ला दूँगा गर उस को वो ख़ैरात मिली
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Pushpendra Mishra
रस्ते से मुड़ जाया कर
रोज़ न मिलने आया कर

पिज़्ज़ा बरगर खा ले पर
जानम भाव न खाया कर

मेरे लिए इतना ही कर
याद हमेशा आया कर

धूप में बन के बादल तू
राहत वाली छाया कर

तन्हाई में जब तुझ को
सोचूँ तू आ जाया कर
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Ambar
थोड़ा रोने से ग़म दिल का हल्का हुआ
हम को गर्मी में बारिश से राहत मिली
Rachit Sonkar
ग़मों की भीड़ दर्दों की निगहबानी में रहना है
बता ऐ ज़िन्दगी कब तक परेशानी में रहना है

वो अपने कौ़ल से वापस पलट जाए उसे हक़ है
'तपिश' हम को तो अपनी बात के पानी में रहना है
Read Full
Moni Gopal Tapish