Jeet Shayari Collection - Victory, success, and winning moments expressed through powerful words

Jeet shayari captures the feeling of victory, success, and hard-earned triumph. Whether it's achieving a dream or overcoming struggles, these lines reflect the true essence of kamyabi and inner strength. Perfect for motivation, celebration, and sharing your winning moments.

jeet shayari
हार हो जाती है जब मान लिया जाता है
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
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अगर तू ख़ुश है मेरी हार से तो
मेरी हर जीत से नफ़रत है मुझ को
Shadab Javed
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गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है, जो चाहो लगा दो डर कैसा
गर जीत गए तो क्या कहना, हारे भी तो बाज़ी मात नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
Tehzeeb Hafi
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बहुत थी भीड़ मगर उस पे ध्यान जा रहा था
वो मेरी जीत पे ताली नहीं बजा रहा था

न चाहते हुए भी लौटना पड़ा मुझ को
वो पहली बार मुझे नाम से बुला रहा था
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Vikram Gaur Vairagi
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मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा
वो मुझ से जीत भी सकता था जाने क्यूँँ हारा
Javed Akhtar
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वो इस कमाल से खेला था इश्क़ की बाज़ी
मैं अपनी फ़तह समझता था मात होने तक
Tajdar Adil
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इस आरज़ी दुनिया में हर बात अधूरी है
हर जीत है ला-हासिल हर मात अधूरी है
Ambreen Haseeb Ambar
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वो जंग जिस में मुक़ाबिल रहे ज़मीर मिरा
मुझे वो जीत भी 'अंबर' न होगी हार से कम
Ambreen Haseeb Ambar
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अब इस को अपनी हार कहूँ या कहूँ मैं जीत
रूठा हुआ था मैं, वो मना ले गया मुझे
Krishna Bihari Noor
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मैदाँ में हार जीत का यूँँ फ़ैसला हुआ
दुनिया थी उन के साथ हमारा ख़ुदा हुआ
Jameel Malik
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'नबील' इस इश्क़ में तुम जीत भी जाओ तो क्या होगा
ये ऐसी जीत है पहलू में जिस के हार चलती है
Aziz Nabeel
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तू अपने घर में मुहब्बत की जीत पर ख़ुश है
अभी ठहर के मेरा ख़ानदान बाक़ी है
Siraj Faisal Khan
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आँख आँसू को ऐसे रस्ता देती है
जैसे रेत गुज़रने दरिया देती है

कोई भी उस को जीत नहीं पाया अब तक
वैसे वो हर एक को मौक़ा देती है
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Kafeel Rana
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कोई भी उस को जीत नहीं पाया अब तक
वैसे वो हर एक को मौक़ा देती है
Kafeel Rana
53 Likes
मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है
अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है

किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया
ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
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Tehzeeb Hafi
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जीत हूँ जश्न-ए-मुक़द्दर हूँ मैं
ठीक से देख सिकंदर हूँ मैं
Ritesh Rajwada
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खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो
हार जीत कोई भी आख़िरी नहीं होती
Hastimal Hasti
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हम हार गए तुम जीत गए हम ने खोया तुम ने पाया
इन छोटी छोटी बातों का हम कोई ख़याल नहीं करते
Wali Aasi
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ज़माना इश्क़ के मारों को मात क्या देगा
दिलों के खेल में ये जीत हार कुछ भी नहीं
Akhtar Saeed Khan
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चेहरों को पैरों से कुचल कर आगे बढ़ जाना
जीत इसी को कहते हैं तो फिर मैं हार गया
Hasan Shahnawaz Zaidi
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यूँँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उन की रस्म नई है, न अपनी रीत नई

यूँँ ही हमेशा खिलाए हैं हम ने आग में फूल
न उन की हार नई है, न अपनी जीत नई
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Faiz Ahmad Faiz
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तू मेरा इश्क़-विश्क था वरना
हम तुझे जीत लेते धोखे से
Shadab Asghar
मज़ा तो तब है कि तुम हार के भी हँसते रहो
हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है
Parveen Shakir
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जीत भी लूँ गर लड़ाई तुम से मैं तो क्या मिलेगा
हाथ में दोनों के बस इक टूटा सा रिश्ता मिलेगा

कर के लाखों कोशिशें गर जो बचा भी लूँ मैं रिश्ता
तो नहीं फिर मन हमारा पहले के जैसा मिलेगा
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Ankit Maurya
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हर दिन ही मोहब्बत को पाने की लड़ाई में
जो हार नहीं सकता वो जीत नहीं सकता
Hasan Raqim
हर तरफ़ उग आए हैं जंगल हमारी हार के
जीत का कोई भी रस्ता अब नहीं दिखता हमें
Siddharth Saaz
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जीत ले दुनिया को बिन हथियार के
कृष्ण की बंसी में ऐसे राग हैं
Alankrat Srivastava
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दरों को चुनता हूँ दीवार से निकलता हूँ
मैं ख़ुद को जीत के इस हार से निकलता हूँ
Shoaib Nizam
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मुफ़लिस हैं बेचारे हैं हम
देखो इश्क़ के मारे हैं हम

जीत ली हम ने हर इक दुनिया
जब से इश्क़ में हारे हैं हम
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Shadab Asghar
नींद से आज फिर मुहब्बत जीत जाएगी
लगता है, ये रात भी, ऐसे ही बीत जाएगी

मुफ़लिसी का आलम है क्या करे जनाब
भूख से लड़ते लड़ते तो ज़िन्दगी बीत जाएगी
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Ravi 'VEER'
इस तरह चलो की राह में
हार कर भी जीत पा सको

दर्द दिल में है तो क्या हुआ
मुस्कुरा के गीत गा सको
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Manish Pandey
जीत पाओ ज़िन्दगी से, जीत लेना
जीतने का मौका तो सब को मिलेगा
karan singh rajput
"प्रीत" ये इश्क़ की इक ही रीत
जितना हारे, तेरी उतनी जीत
Prit
डर अगर सबका एक जैसा हो
तब कहीं जाके जीत मिलती है
Saarthi Baidyanath
जिस्म मैं भी जीत सकता था तेरा पर
सोचता था तू ग़लत न समझें मुझ को
karan singh rajput
बड़े ही अजब दौर का हूँ खिलाड़ी
जहाँ जीत पाई, वहीं मात भी थी
Zain Aalamgir
हालांकि मैं ने बा'द की हर जंग जीत ली
लेकिन ये पहली हार से आगे की बात है
Om awasthi
मेरे जूते फ़टे हुए हैं लेकिन मैं
जीत चुका हूँ पहली दौड़ इरादे से
Saahir
जीत अब हार तो नहीं सकता
डर मुझे मार तो नहीं सकता
Tiwari Jitendra
चली पंद्रह साल जंग इश्क़ और अना में
अना को मिली जीत और इश्क़ हार गया है
A R Sahil "Aleeg"
गर हार जाऊँ तो हुनर कम है मुझे
और जीत को क़िस्मत बताया जाएगा
Akhil Saxena
न ही किसी उत्सव किसी त्योहार की ख़ुशी
हम को तो भाती बस हमारे यार की ख़ुशी

जो उस के हाथों से हो तो फिर क्या ही बात है
सौ जीत से बढ़कर के उस इक हार की ख़ुशी
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Sarvjeet Singh
हर इक कोशिश करने वालों की क़िस्मत में जीत होती नहीं साहब
शिकस्ता लोगों को तो दोस्त, दुनिया में याद कोई नहीं रखता
A R Sahil "Aleeg"
इल्तेजा है इक दफ़ा मौक़ा तो दे
जीत लूँगा दिल तिरा मौक़ा तो दे

मुस्कुरा कर वो गले से लग गई
मैं ने जब उस सेे कहा मौक़ा तो दे
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Shajar Abbas
भले जीत कर वो बदन ले गया है
मगर रूह पर है हुकूमत हमारी
Vijay Anand Mahir
मुझ को उस से लड़ना या जीतना नहीं है बस
है वो साथ मेरे ये जीत काफ़ी है मुझ को
Yogamber Agri
हम जीत लेते जंग पर तेरी रज़ा न थी
सब कुछ तो दस्तयाब था इस के सिवा हमें
Amaan mirza
हार की जीत हो गई होती
मैं अगर टूट के बिखर जाता
Dipanshu Shams
ज़िंदगी तुझ सेे इस लड़ाई में
मौत इक रोज़ जीत जाएगी
shahnawaaz khan
सताए थे ज़माने के मगर जीते पड़े हैं हम
कहानी जीत की मेरी सुना देगी यही दुनिया
Kushal "PARINDA"
हमारे अलावा न हो कोई हम सा
तेरी जीत हम सेे, तेरी मात हम से
"Nadeem khan' Kaavish"
सताए थे ज़माने के मगर आगे बढ़े हैं हम
कहानी जीत की मेरी हिला देगी यही दुनिया
Kushal "PARINDA"
मुझे बस हारने वाले नहीं भाते
मुझे ख़ुद को हरा कर जीत मिलती है
Tiwari Jitendra
मोहब्बत में सियासत हो नहीं सकती
कई रिश्ते मिटा कर जीत मिलती है
Tiwari Jitendra
ख़ुदा से दिल लगा कर जीत मिलती है
कभी सर को झुका कर जीत मिलती है
Tiwari Jitendra
हमेशा दर्द मत देना किसी को तुम
कभी तो 'जीत' पा कर जीत मिलती है
Tiwari Jitendra
मुझे जीत कर भी हराया गया था
मुझे फिर नसीबों ने ही मात दी है
Amanpreet singh
उस के होंटों पर चाकू था क्या करता
मैं ने उन को चूमा, बस फिर जीत गया
Meem Alif Shaz
ख़ुद उस की बेटी ख़ुश नहीं है उस की जीत पर
दुश्मन को इंतिक़ाम का मतलब नहीं पता
Rohit tewatia 'Ishq'
सिकंदर जीत कर हारा हुआ था
इधर ये प्यार का मारा हुआ था
Afzal Sultanpuri
बमुश्किल जीत पाऊँगा मैं ये जंग
मेरी तक़दीर मुझ सेे लड़ रही है
Manish Kumar Gupta
दिल-लगी को दिल-लगी से जीत जाने का हुनर
हम को आता ही नहीं है इस ज़माने का हुनर
Hameed Sarwar Bahraichi
दिल की चौसर ही जीत ली उस ने
दाँव हर कामयाब है उस का
Ankit Raj
जो दिल जीत लगाएगा उस को याँ आदत अपनी
वो सौंपेगीं उस को हुस्न की दौलत, इशरत अपनी
Sandeep dabral 'sendy'
मैं मसाइब से यहाँ अब हार कैसे मान लूँ यार
जीत की ख़ातिर रखे हैं गिरवी ज़ेवर माँ ने अपने
Sandeep dabral 'sendy'
रात ख़ुद को जगा दिया वर्ना
मौत की जीत हो गई होती
Sohil Barelvi
एक ग़ज़ल फिर कहना चाहूँ तेरे-मेरे प्यार के नाम
आधा तेरी जीत का क़िस्सा आधा मेरी हार के नाम
इश्क़ मुहब्बत के अफ़साने,रांझा ,मजनूँ या फ़रहाद
सब गुल बूटे ख़ुशबू वाले लेकिन हैं तलवार के नाम
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Moni Gopal Tapish
जीत लूँगा मैं सारा जहाँ
आप बस होसला दीजिए
Avtar Singh Jasser
मुँह को कलेजा आ गया लेकिन अभी तलक
मुझ पर इरादा जीत का तारी है दम-ब-दम
Sohil Barelvi
है इल्म दुनिया को ज़हरा के चैन जीत गए
अली के नस्ल के सब नूर-ए-ऐन जीत गए

मेरे नबी के नवासे ने ऐसा सज़दा किया
यज़ीद हार गया और हुसैन जीत गए
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Ashraf Ali
जीत भी मंज़ूर मुझ को हार भी
मैं दुखी हूँ और मेरा किरदार भी

कब लिखी उस ने ख़ुशी इस रोल में
है परेशाँ वो कहानी कार भी
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Vijay Potter Singhadiya
सब्र करिए दिल को मेरे सब्र आने पर
दास्तान-ए-इश्क़ का हासिल सुनाऊँगा

जंग इक ऐसी कि जिस
में हारना तय था
मैं लड़ा ऐसे कि मानो जीत जाऊँगा
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Mohit Dixit
जीत की एहमियत वही जाने
जो कई बार हारा होता हैं

फ़िक्र अंजाम की नहीं मुझ को
रहता होकर जो होना होता हैं
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Abhay Aadiv
जीत कर जिस को सभी कुछ पा लिया
मैं उसी की हार से मंसूब हूँ‌
Aves Sayyad
मुझ
में नफ़रत न प्यार है अब तो
जीत कोई न हार है अब तो
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Tarun Bharadwaj
धर्म के रस्ते पे चलिए धैर्य रखिए और फिर
जीत कर लंका अयोध्या लौटिए आराम से
Atul K Rai
क्यूँँ करें हम इश्क़ में चालाकी यारों
सादगी से जीत लेंगे उन का दिल हम
Daqiiq Jabaalii
इशारे देता है वो अपनी हर इक बात के ही साथ
वो मेरी जीत चाहेगा तो अपनी मात के ही साथ

उधर मंडप सजा है और इधर अर्थी रखी है यार
कोई बोलो कि हम जाएँगे उस बारात के ही साथ
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"Nadeem khan' Kaavish"
अगर तुम साथ होते तो ये दुनिया जीत लेता मैं
तुम्हारे बा'द मुझ को बस ज़रूरत पूरी करनी है
"Nadeem khan' Kaavish"
ज़िन्दगी जीत है, हार हरगिज़ नहीं
फूल का भी ये श्रृंगार हरगिज़ नहीं

दर्द हो या भले पीर पर्वत-सी हो
मौत है हम को स्वीकार हरगिज़ नहीं
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Janib Vishal
हार जाने में इक सहूलत है
जीत हारी हुई नहीं लगती
Amanpreet singh
हारना मैं कभी जानता ही नहीं
ले के घर से पता जीत का निकला हूँ
Manoj Devdutt
तुम पुजारी हो नफ़रतों के और
इश्क़ करना ही काम है मेरा

क्या कहा मुझ सेे जीत जाओगे
सुनो! 'रिज़वान' नाम है मेरा
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RIZWAN ALI RIZWAN
जीत लेता हूँ मैं ग़ज़ल कह कर
जिस को कहते हैं दिल ज़माने में
RIZWAN ALI RIZWAN
डरों को जीत लेना ज़िंदगी है
डरों से हार जाना ख़ुद-कुशी है
Aatish Indori
भरोसा कीजिए अपने चराग़ों पे
वगरना ये अँधेरा जीत जाएगा
Meem Alif Shaz
इक सदी की त्रास हो तुम इक सदी की कल्पना
एक कवि का प्रेम हो तुम एक कवि की वेदना

जीत कर प्रभु युद्ध को हर ली सिया की यातना
किन्तु लंका से है रघुवर को बहुत संवेदना
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Shubham Rai 'shubh'
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हाँ मेरा दिल ही जीत लिया उस ने कहके ये
मैं सिर्फ़ उस की ही हूँ अभी इस जनम में तो
100rav
कौन होगा जिस किसी के ख़्वाब में फिर तू न आए
नींद भी उड़ जाए उस की जो किसी को तू बुलाए

देख ले तुझ को अगर यूँँ ही कहीं जो हारता फिर
जीत भी हासिल जिसे हो बाज़ियाँ वो हार जाए
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Umashankar Lekhwar
ये दो दिलों के बीच मोहब्बत वो जंग है
जिस
में हुई है जीत तो हारा कोई नहीं
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Updesh 'Vidyarthi'
हार हो तब समझ में आता है
जीत में कब समझ में आता है
AZAD MADRE
उसी के ख़्वाब थे सारे उसी को सौंप दिए
सो वो भी जीत गया और हम भी हारे नहीं
Latif Jat
किस को तमन्ना फ़त्ह की किस को ख़याल अब जीत का
मैं हारने वाला हूँ जो उस को बचा लूँ काफ़ी है
Mohit Subran
नहीं रहती है पहली जीत दिल को याद आख़िर तक
मगर वो हार पहली दिल से आख़िर तक नहीं जाती
Mohit Subran
मैं ने सुना टूटे मकाँ आगे नहीं ढहते
मेरे दिल-ए-सहरा में क्यूँ आँसू नहीं बहते

लड़की बिना इक जीत के लड़की ही रहती है
लड़के हमारे हार कर लड़के नहीं रहते
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Aryan Mishra
वहीं से हार कर लौटा मुसाफ़िर
जहाँ से जीत कर जाना भला था
Dinesh Sen Shubh
अब तो मौक़ा मुझे भी दिया जाए जी
ये जहाँ जीत लाऊँ तो क्या हर्ज़ है
Krishnavat Ritesh
दुनिया से तो जीत गए हम लेकिन ख़ुद से हारे हैं
हम ने भी कुछ ख़्वाब सजाकर इन आँखों में मारे हैं
KUNAL
और क्या यार चाहता हूँ मैं
बस तेरा प्यार चाहता हूँ मैं

जो चले उम्र भर मेरे बाहम
दोस्त दो चार चाहता हूँ मैं

दोस्ती हो या दुश्मनी यारब
आर या पार चाहता हूँ मैं

जिस सेे शिकवा न हो किसी को भी
हाँ वो किरदार चाहता हूँ मैं

जो मिटा दे जहाँ से नफरत को
ऐसी सरकार चाहता हूँ मैं

जीत भी जाऊँ गर ज़माने को
आपसे हार चाहता हूँ मैं

वक़्त आख़िर है आ भी जा ज़ालिम
सिर्फ़ दीदार चाहता हूँ मैं
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Kumar Aryan
कुछ नहीं हो सका वैसे अब क्या करूँँ
जीत के हारा मैं कैसे अब क्या करूँँ

होना जो था वहीं हो गया मेरे साथ
गिर के यूँँ तो उठा जैसे अब क्या करूँँ
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Parvez Shaikh
ज़माना बीत जाता है जवानी बीत जाती है
मुहब्बत हार जाती है ये दुनिया जीत जाती है
jaani Aggarwal taak
हार कर बैठे हो क्यूँ तुम होगी इक दिन जीत भी
हर समय आँखों में इक उम्मीद पलनी चाहिए
Toyesh prakash
हमारी इतनी दलीलें भी कुछ न कर पाईं
उधर वो जीत गया केस मुस्कुरा के बस
Dhirendra Pratap Singh
कोई पूछे ख़ुदा के बंदों से
क्या मिला जंग लड़ के बच्चों से

हर्फ़-ए-आख़िर यही कहूॅंगा मैं
जीत सकते थे जंग लफ़्ज़ों से
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'June' Sahab Barelvi
अपने हाथों को बना पतवार जाते
राम का ले नाम दरिया पार जाते

हम ने झूठी जीत से ढाढस बढ़ाया
मान लेते हार तो फिर हार जाते
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Aman Mishra 'Anant'
मौत के डर से डरें हम फिर ग़लत ये बात है
मौत के पहले मरें हम फिर ग़लत ये बात है

जीत चाहे हार हो सब बा'द की ही बात है
अब नहीं कोशिश करें हम फिर ग़लत ये बात है
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Kamlesh Goyal
मोहब्बत में हूँ आसानी अता कर
मिरे इस दिल को तुग़यानी अता कर

अगर धोका दही से जीत जाऊँ
मुझे इस जीत के मानी अता कर
Read Full
Meem Alif Shaz