Gaon Shayari - Mittii ki khushboo aur simple life ki yaadein

Gaon shayari beautifully captures the simplicity, warmth, and mittii ki khushboo of rural life. It reflects peaceful surroundings, strong relationships, and nostalgic memories of a simpler time. These verses connect the heart to roots, nature, and the quiet charm of village living.

gaon shayari
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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dehaat shayari
ये सोचके तो दूसरी कोई मिट्टी को छु'आ नहीं
के बा'द मरने के हिन्दुस्तां में दफनाया जाऊँगा
karan singh rajput
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तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते
इस लिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते
Waseem Barelvi
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सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की
मैं मिट्टी गूँधता था अब डबलरोटी बनाता हूँ
Munawwar Rana
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हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा माँगेंगे
इक बाग़ नहीं, इक खेत नहीं, हम सारी दुनिया माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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मिट्टी और पानी भी हमें नाप कर मिलते हैं
तुम गमले में पालने को आसान समझते हो
Vishal Bagh
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दिल भी अजीब ख़ाना-ए-वहदत-पसन्द था
इस घर में या तो तू रहा या बे-दिली रही

उस ने तो यूँँ ही पेड़ बनाया था रेत पर
मिट्टी वहाँ हज़ार बरस तक हरी रही
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Vipul Kumar
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दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है
Nida Fazli
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जिस खेत से दहक़ाँ को मुयस्सर नहीं रोज़ी
उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो
Allama Iqbal
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तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के

आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने
चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के
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Rahat Indori
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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
Lal Chand Falak
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जब से तू ने ये बोला था "बदन का क्या है मिट्टी है"
तब से तेरी पीठ पे मुझ को हरसिंगार उगाने थे
Siddharth Saaz
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बेनतीजा रह गईं दिल्ली में सारी बैठकें
अन्नदाता खेत की मेड़ों पे भूखे मर गए
Siraj Faisal Khan
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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया
उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है
Tehzeeb Hafi
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बातचीत में आला हो बस ठीक न हो
फ़ाइदा क्या महबूब अगर बारीक न हो

हम तेरी क़ुर्बत में अक्सर सोचते हैं
दरिया खेत के इतना भी नज़दीक न हो
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Khurram Afaq
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मैं समझता हूँ मोल मिट्टी का
मेरे खेतों में सोना उगता है
Afzal Ali Afzal
कूज़ा-गर मिल गया तो पूछूँगा
मेरी मिट्टी कहाँ से लाया था
Vikram Gaur Vairagi
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बारिश हो जाने के बा'द भी मिट्टी गीली रहती है
मैं तेरे जाने के बा'द भी तुझ सेे बातें करता हूँ
Siddharth Saaz
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तन्हा होना, गुम-सुम दिखना, कुछ ना कहना... ठीक नहीं
अपने ग़म को इतना सहना, इतना सहना... ठीक नहीं

आओ दिल की मिट्टी में कुछ दिल की बातें बो दें हम
बारिश के मौसम में गमले ख़ाली रहना... ठीक नहीं
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Dev Niranjan
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लकीरें खींच के मिट्टी पे बैठ जाता हूँ
यहाँ मकाँ था, ये बाज़ार, ये गली उस की
Ashraf Yousafi
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मेहनत तो करता हूँ फिर भी घर ख़ाली है बाबूजी
मिट्टी के कुछ दीपक ले लो दीवाली है बाबूजी

मिट्टी बेच रहा हूँ जिस
में कोई जाल फ़रेब नहीं
सोना चाँदी दूध मिठाई सब जा'ली है बाबूजी
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Gyan Prakash Akul
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रात की भीगी-भीगी मिट्टी से कुछ उजाले उगा रही होगी
मेरी दुनिया में कर के अँधियारा वो दिवाली मना रही होगी
Tanveer Ghazi
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देख लेता है तो खिलते चले जाते हैं गुलाब
मेरी मिट्टी को ख़ुश-आसार किया है उस ने
Irfan Siddiqi
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अब तो गाँवो में भी ईंटों के महल बसने लगे
गाँव की मिट्टी से वो ख़ुशबू रूहानी ख़ो गई
Divy Kamaldhwaj
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अभी वो लौट कर आया नहीं काबे कि ज़ानिब से
मिला था गांँव के हद पर करी बातें कवाकिब से
Afzal Sultanpuri
क्या सितम करते हैं मिट्टी के खिलौने वाले
राम को रक्खे हुए बैठे हैं रावण के क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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ये टूटी चटाई ये मिट्टी का बर्तन
हिकारत से नादान क्या देखता है

ग़रीबी मोहम्मद के घर में पली है
मेरे घर का सामान क्या देखता है
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Anjuman rahi raza
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फिर एक रूह को आना है उस के झाँसे में
कि उस ने फिर से बिछाया है जाल मिट्टी का
Amit Jha Rahi
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घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में
Qaisar-ul-Jafri
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मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला
मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो

गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं
मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो
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Tajdeed Qaiser
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ये अलग बात कि मैं छोड़ चुका कूज़ा-गरी
तेरे जैसे तो मैं मिट्टी के बना सकता हूँ
Imran Aami
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उस के कूज़ागर को बस उतनी ही मिट्टी कम पड़ी
जितनी मिट्टी लग रही थी दिल बनाने के लिए
Ravindra pareek gurgul
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मैं इसी मिट्टी से उट्ठा था बगूले की तरह
और फिर इक दिन इसी मिट्टी में मिट्टी मिल गई
Munawwar Rana
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अब तो पाँच मिनट के अंदर चेहरे बदले जाते हैं
जीवन मिट्टी हो जाता था एक मुहब्बत होती थी
Ali Zaryoun
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माथे पे छाप रख दी है मिट्टी की आप ने
शमशीर भी दिखा न सकेगी ग़ुरूर अब
salman khan "samar"
मिट्टी पे नुमूदार हैं पानी के ज़ख़ीरे
इन में कोई औरत से ज़ियादा नहीं गहरा
Sarvat Husain
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अपनी मिट्टी ही पे चलने का सलीक़ा सीखो
संग-ए-मरमर पे चलोगे तो फिसल जाओगे
Iqbal Azeem
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मैं तो चाक पे कूज़ा-गर के हाथ की मिट्टी हूँ
अब ये मिट्टी देख खिलौना कैसे बनती है
Zeb Ghauri
ख़ाक हुआ तो वजूद फिर से मिट्टी के साथ बाँधा गया
मैं वो बदनसीब पत्थर था जो चिट्ठी के साथ बाँधा गया
Murli Dhakad
जिस्म की हसरत मिट्टी में मिल जाएगी
प्यार करोगे जिस दिन साहब दिल से तुम
Kush Pandey ' Saarang '
फ़क़त इक आबरू महँगी बहुत है
वगरना जिस्म तो मिट्टी है साहब
Kush Pandey ' Saarang '
आशिक़ों के नगर में रहते हो
या'नी मिट्टी के घर में रहते हो
Saarthi Baidyanath
हम उस मिट्टी के दाने हैं
जहाँ पग-पग खज़ाने हैं
Saarthi Baidyanath
तू सलामत रहे और रहे पुर-सुकूँ, तेरी मिट्टी करोड़ों की है आबरू
इस ज़मीं के हैं हम इस
में मिल जाएँगे, पर रहेगा हमेशा वतन मेरे तू
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Hasan Raqim
वतन की आबरू ख़ातिर लड़ेंगे धड़ जवानों के
हमारे देश की मिट्टी कभी बुज़दिल नहीं होगी
Prashant Sitapuri
एक दिन बनेंगे ख़ाक हम
मिट्टी की हैं खुराक हम

भीतर ख़लाए साथ है
बाहरस ठीक-ठाक हम
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Nakul kumar
वो बे-ख़बर है,बादलों ने उस का घर डुबो दिया
किसान राह तकता रह गया बिचारा खेत पर
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
'लाम' कर देता है ये वक़्त 'अलिफ़' जैसों को
आप किस खेत की मूली हैं जनाब-ए-आ़ली
Ramnath Shodharthi
मेरे ही चाहने वालों ने मुझे मिट्टी दी
फिर दुआएँ पढ़ी और हाथ भी झाड़ा सबने
Aadil Sulaiman
झूठे नक़ली मुद्दों पर आ मिट्टी डालें
घर-घर में आज आग लगी है पानी डालें
Saarthi Baidyanath
पीपल वाली छाँव रखी है ख़ुश्बू बिखरी मिट्टी में
पूरा-पूरा गाँव धरा है मेरी माँ की चिट्ठी में
Ananya Rai Parashar
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मिला कर ख़ाक में मुझ को वो इस अंदाज में बोले
खिलौना था वो मिट्टी का कहाँ रखने के क़ाबिल था
Arpit shukla
अपने सीने से लगाकर जो तेरा ग़म रक्खा
दिल की मिट्टी को हमेशा ही मुलायम रक्खा
Nirmal Nadeem
चाहे कितना भी कुछ कर लो जीते जी तुम
आख़िर में बस मिट्टी-मिट्टी रह जाती है
Naveen "Bashaarat"
जीवन भी मिट्टी का एक खिलौना है
इक दिन तो सब को ही रुख़सत होना है

आज बिता लो हँसते गाते तुम यारों
किस ने जाना कल को क्या-क्या होना है
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Ravi 'VEER'
करो तहकी़क़ इस मिट्टी की पहले
इसी में दफ़्न है शजरा हमारा
Raza sahil
मुंतज़िर हूँ मैं सहर का
रौशनी है तंग मेरी

एक मिट्टी का दिया हूँ
रात से हैं जंग मेरी
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Nakul kumar
तुम फूल सी बन जाओ और मैं मिट्टी सा बन जाता हूँ
तो फिर ये कितना प्यारा हम दोनों का गुलशन लगता है
Yogamber Agri
मिट्टी तुम्हारे हिज्र की ज़रख़ेज़ हो गई
अब शे'र उगने लग गए दिल की ज़मीन पर
shahnawaaz khan
कोई तो सदमा लगा है ज़रूर मुझ को भी
थकन शदीद है और नींद भी उड़ी हुई है

नजूमी तकते हैं बेचारगी से मेरी तरफ़
लकीर माथे पे जितनी भी थी मिटी हुई है
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Ashraf Ali
मुझे थी सौंपनी गर तो, ज़रा सी नम, नरम रखते
ख़ुदारा अधपकी मिट्टी, कहाँ साँचें में आएगी
Shiva awasthi
हमें इस मिट्टी से कुछ यूँँ मुहब्बत है
यहीं पे निकले दम दिल की ये हसरत है

हमें क्यूँ चाह उस दुनिया की हो मौला
हमारी तो इसी मिट्टी में जन्नत है
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Harsh saxena
हम को मिट्टी में मिला कर
ख़ुद को कूज़ा-गर बनाया
Sourabh Ratnawat
छोड़ आएँ हैं पुराने यार सब को गाँव में
खेत बाड़ी घर बग़ीचे प्यार सब को गाँव में
Anurag Pandey
सुनहरी धूप, ठंडी हवाएँ और ये सफ़र
न जाने कब तेरा गांँव गुज़रा, कुछ पता नहीं
"Nadeem khan' Kaavish"
मिटी जा रही है ये दुनिया मुसलसल ये ऐसी वबा है
दवा-साज़ तू क्यूँ बनाता नहीं है दवा-ए-उदासी
Kiran K
कुछ ऊंँटो की नस्लों में तब्दीली आई है
रेगिस्तान में अबकी मिट्टी गीली आई है
Aashish kargeti 'Kash'
रहने लगे उदास तो लिखने लगे थे शे'र
सूखे हुए थे पेड़ सो कश्ती बना दिया

दिन भर लगा के उस को बनाया था इक मकाँँ
साहिल की एक मौज़ ने मिट्टी बना दिया
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Dipendra Singh 'Raaz'
ग़रीबी है वहाँ पे सो वहाँ नफ़रत नहीं बिकती
हमारे गाँव में सब खेलतें हैं मिट्टी से होली
Irshad Siddique "Shibu"
अगर मेहनत समझनी हो तो सीखो तुम किसानों से
ज़रा इक बार आ कर खेत में हल ख़ेंच कर देखो
Kushal "PARINDA"
जो मेरा है वो बस मिट्टी है
सारी दौलत बहता पानी है
Meem Alif Shaz
झूट को कब रोकता है ताड़ पर चढ़ने से सच
ताड़ के जड़ से फ़क़त मिट्टी हटा देता है वो
Atul K Rai
वो पूरी उस मिट्टी की है
जिस मिट्टी से दिल बनता है
Farrukh Nadeem
चाहे जितना भी ख़फ़ा होऊँ मैं तुम सेे लेकिन
मिट्टी की प्यास पे बादल ये बरस जाता है
Pritam sihag
तोड़ दिया है अपनों ने अब और नहीं खिल पाऊँगा
मैं मिट्टी का बना हुआ अब मिट्टी में मिल जाऊँगा
Rajnish Vishwakarma
ख़बर ये शहर को भी थी कि मिट्टी का है घर मेरा
यूँँ ही बारिश नहीं माँगी ज़माने ने दु'आओं में
Shivam Mishra
हम मरने से पहले सोना ख़ूब जमा करते हैं
मौत के आते ही सब क़ब्र को मिट्टी से भरते हैं
Meem Alif Shaz
तेरे बदले मिल जाए दुनिया फिर भी मुझ को घाटा
ये सारी दुनिया मिट्टी है, तेरा साथ खज़ाना है
Divya 'Kumar Sahab'
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मुजस्सम जो पड़ा है कौन था वो
जो कोई भी था मिट्टी का बना था
Meem Alif Shaz
मेरा जिस्म भी इक मिट्टी का पुतला है यारो
इस पुतले पे क्यूँ इतना इतराना है यारो
Meem Alif Shaz
पैदा हुए हैं बस, हम जैसे ख़ाली लोग
और किया क्या है इस मिट्टी के ख़ातिर
Saahir
इश्क़ से ख़ूब,पगडंडी खेत की है
नग्न पग तुम चलो तो आनंद आता
Shubham Rai 'shubh'
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दोस्त कुछ ऐसे मिले जो साथ हर पल हैं खड़े
जो मैं मिट्टी में दबा तो खाद उन को कर लिया
Divya 'Kumar Sahab'
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धूल मिट्टी हो ज़मीं और काम कितना हो कहीं भी
साथ मिल कर के सनम हम साफ़ पूरा घर करेंगे

साथ झाड़ू साथ पोछा साथ मिल कर के धुलाई
हर दीवाली में सफ़ाई साथ हम मिल कर करेंगे
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Divya 'Kumar Sahab'
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हाथ आया यहाँ मेरे कब कुछ
और मिट्टी में मिल गया सब कुछ
Sumit Panchal
आसाँ है मिट्टी से मिट्टी पे मिट्टी लिखना
मुश्किल है इक-तरफ़ा चाहत में चिट्ठी लिखना
ZafarAli Memon
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ज़िंदगी इक ख़ूब-सूरत हादिसा है
शक्ल मिट्टी की घड़ी बहती हवा है

आँसुओं से तुम सदा दो आएगा वो
हाल-ए-दिल वो जानता है वो ख़ुदा है
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Raj Tiwari
उड़ने वाले पंछी को नीचे आना पड़ता है
इक दिन उस को भी फिर मिट्टी में जाना पड़ता है
Meem Alif Shaz
मेरी चाहत मेरी उल्फ़त का आख़िर ये सिला देंगे
मुझे ले जाके कंधों पे ये मिट्टी में मिला देंगे
Arkam zahid
छोड़ कर जाता नहीं कोई निशानी पानी
खा हमारी गया पूरी ये जवानी पानी

गन्दी लड़की को दिखाती नहीं जलवा मिट्टी
अच्छी लड़की को सुनाता है कहानी पानी
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Ali Nazim Adam
कच्ची मिट्टी जैसा मैं भी कच्चा लगता हूँ
माँ की गोद में सर रखते ही बच्चा लगता हूँ
Ansar Ethvi
शहीदों का यहाँ पर ख़ूँ बहा है
ज़मीं पर सिर्फ़ मिट्टी ही नहीं है
Sohil Barelvi
कई घर खेत हैं बर्बाद बारिश से
तुम्हारा क्या है बस ग़ुस्सा हो जाती हो
100rav
रौशदानों की जाली पर मिट्टी है
वर्ना बादल छाने से क्या होता है
Anshika Shukla
चाँद तारे फ़लक पे चमकने लगे
यादों के चेहरे फिर से झलकने लगे

जब तिरी उँगलियों ने छुआ जिस्म को
मिट्टी के अंग सारे महकने लगे

धूप ने इस तरह से जलाया बदन
सारे मज़दूर सर को पटकने लगे

जब बड़ों की न मानी कभी कोई बात
बच्चे मंज़िल से अपनी भटकने लगे

जब सड़क पे निकल के वो आई परी
बूढ़ों के दिल भी धक धक धड़कने लगे

देख कर मलबे के नीचे मासूमों को
लोगों के आँसू टप टप टपकने लगे
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Meem Alif Shaz
या जला देते या मिट्टी में दबा देते हैं
बा'द मरने के भुला देते हैं दुनिया वाले
Amit Maulik
हाट इक रोज़ मेरे गाँव का आ कर देखो
यहाँ फ्रीज़र नहीं मिट्टी के घड़े मिलते हैं
Wajid Husain Sahil
संघर्ष की आग में ही तो तपा हूँ
फिर मैं कहाँ कच्ची मिट्टी का घड़ा हूँ
Manoj Devdutt
मेरे मिट्टी के इस घर में ख़ुशबू कहाँ से आए
खाने को रोटी भी नहीं है जुगनू कहाँ से आए
Meem Alif Shaz
बारिश रुके तो घर चले जाएँगे हम
वरना यहाँ की मिट्टी में सो जाना है
Meem Alif Shaz
ईंट पत्थर की हो या लकड़ी की या मिट्टी की
रहगुज़र कैसी भी हो फूल कुचल जाता है

हर ज़बाँ रहती है माहौल-ए-मुहब्बत में ख़मोश
ग़ुस्से में होती है तो कुछ भी निकल जाता है
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Ayush Aavart
कुछ और देर हवा में कर्तब दिखलाएगी
और फिर ये मिट्टी, मिट्टी में मिल जाएगी
Mohit Subran
वतन की मिट्टी का मोल क्या है जो बिक चुके हैं उन्हें पता क्या
वतन परस्ती का उन सेे पूछो है जिन का अब तक ज़मीर ज़िंदा

मिली है गर सर पे सर कटे हैं न काम आई कोई सियासत
अतीत में देखो रंग जा कर है ज़ा'फ़रानी स्वतंत्रता का
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Ajeetendra Aazi Tamaam
हुस्न वालों में सभी को शंग होना चाहिए
और इस के साथ ही नव-रंग होना चाहिए

अंजुमन में आएँगे तो दाद भी देंगे मगर
हर सुख़न-वर शर्त है ख़ुद-रंग होना चाहिए

मैं ज़माने में अगर मंसूब था तो तुम सेे था
क़ब्र में भी तुम को मेरे संग होना चाहिए

तीस दिन में एक दिन ही दिल पे दस्तक देते हो
इश्क़ करने का कोई तो ढंग होना चाहिए

मुझ सेे ही मंसूब है इस मुल्क की मिट्टी तो फिर
इस तिरंगे में भी मेरा अंग होना चाहिए
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Prashant Kumar
गर वो साँचे में ढल गया होता
मैं तो मिट्टी था जल गया होता
Udit bairaag
अना और रिश्ता नहीं रहते दो साथ
तुम्हें सोच कर छोड़ना होगा इक हाथ

नहीं चाहिए कोई भी तर्क मुझ को
मेरी आस्था है सो है वो मेरा नाथ

छुओ जिस्म पर जब उसे याद करना
नहीं करनी है कोई भी रात की बात

है कुछ लोग ही गाँव में खेत बोने
तुम्हें भी हुआ शहर का मोह बरसात

ज़रूरत है क्या समझा था देर से मैं
मेरे उम्र के साथ बदले थे जज़्बात
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"Dharam" Barot
पत्थर से मजबूत इरादे
टूटेंगे तो मिट्टी होंगे

ख़ुद की शर्तों पे मरते हैं
सोचो कितने ज़िद्दी होंगे
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Kumar Prem Pinaki