Aam Shayari - Simple life, common feelings, and relatable everyday poetry

Aam shayari reflects the beauty of simple, everyday life. It speaks about the common man, small joys, and real emotions that everyone can relate to. These verses capture saadhgi, truth, and the essence of ordinary moments in a heartfelt poetic way.

तुम वो लड़की मुझे लगती तो नहीं
आम गोपी से जो राधा हो जाए
Shariq Kaifi
34 Likes
तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त
मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त

हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम
पगला गए हैं आप के चू
में हुए दरख़्त
Read Full
Varun Anand
96 Likes
बा-हुनर हो के कुछ न कर पाना
रेज़ा-रेज़ा बिखर के ढह जाना

मुझ को बेहद उदास करता है
ख़ास लोगों का आम रह जाना
Read Full
Vishal Bagh
45 Likes
ख़ुद जिसे मेहनत मशक़्क़त से बनाता हूँ 'जमाल'
छोड़ देता हूँ वो रस्ता आम हो जाने के बा'द
Jamal Ehsani
31 Likes
मैं जो भी उल्टा-सीधा सोचता हूँ
कहीं ऐसा न हो सुनता हो कोई
Madan Mohan Danish
40 Likes
सीधा-साधा डाकिया जादू करे महान
एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान
Nida Fazli
47 Likes
ये क़त्ल-ए-आम और बे-इज़्न क़त्ल-ए-आम क्या कहिए
ये बिस्मिल कैसे बिस्मिल हैं जिन्हें क़ातिल नहीं मिलता

वहाँ कितनों को तख़्त ओ ताज का अरमाँ है क्या कहिए
जहाँ साइल को अक्सर कासा-ए-साइल नहीं मिलता
Read Full
Asrar Ul Haq Majaz
19 Likes
तेग़-बाज़ी का शौक़ अपनी जगह
आप तो क़त्ल-ए-आम कर रहे हैं
Jaun Elia
82 Likes
एक दफ़ा बस वापस मंज़र ऐसा हो
हाथ मेरा सीधा और उल्टा तेरा हो
Tanoj Dadhich
11 Likes
दोस्ती आम है लेकिन ऐ दोस्त
दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से
Hafeez Hoshiarpuri
37 Likes
ये उस की मेहरबानी है वो घर में ही सँवरती है
निकल आए जो महफ़िल में तो क़त्ल-ए-आम हो जाए
Ashraf Jahangeer
41 Likes
मुहब्बत में जो माथा चूम कर वा'दा किया उस ने
उसे भी आम बातों का ही दर्जा दे दिया उस ने

सुधा के नाम पर विषपान अब हम सेे नहीं होगा
सुना ज्यूँँ ही मुहब्बत से किनारा कर लिया उस ने
Read Full
Atul K Rai
16 Likes
तुम अगर सीखना चाहो मुझे बतला देना
आम सा फ़न तो कोई है नहीं तोहफ़ा देना
Jawwad Sheikh
45 Likes
मोहब्बत आम सा इक वाक़िआ'' था
हमारे साथ पेश आने से पहले
Sarfraz Zahid
27 Likes
हमीं को क़ातिल कहेगी दुनिया हमारा ही क़त्ल-ए-आम होगा
हमीं कुएँ खोदते फिरेंगे हमीं पे पानी हराम होगा

अगर यही ज़ेहनियत रही तो मुझे ये डर है कि इस सदी में
न कोई अब्दुल हमीद होगा न कोई अब्दुल कलाम होगा
Read Full
Meraj Faizabadi
39 Likes
ज़ख़्म उन के लिए मेहमान हुआ करते हैं
मुफ़लिसी जो तेरे दरबान हुआ करते हैं

वो अमीरों के लिए आम सी बातें होंगी
हम ग़रीबों के जो अरमान हुआ करते हैं
Read Full
Mujtaba Shahroz
मैं ऐसी उम्र से दुख झेलने लगा 'जव्वाद'
जो आम तौर पे होती है खेलने वाली
Jawwad Sheikh
40 Likes
तुम ज़माने की राह से आए
वर्ना सीधा था रास्ता दिल का
Baqi Siddiqui
18 Likes
कभी अपनी आँख से ज़िंदगी पे नज़र न की
वही ज़ाविए कि जो आम थे मुझे खा गए
Khursheed Rizvi
यूँँ भरी महफ़िल में मेरा नाम न लो
हमारे रिश्ते सर-ए-आम फाश हो जाएँगे

तुम्हें अपना बनाने का चाहत रखने वाले
मेरे साथ तुम्हें देखेंगे तो उदास हो जाएँगे
Read Full
MANOBAL GIRI
मेरे सवाल का उल्टा जवाब देते हो
तेरे सवाल का सीधा जवाब कैसे दूँ
Saarthi Baidyanath
जज़्बात हो रहे गुम पर कौन दे तवज्जोह
इंसान का जहाँ मरना आम सी ख़बर हो
Zain Aalamgir
मैं ने दिल की बातें बोली, फेंका कोई जाल नहीं
उस ने मेरी आँखें देखी, पर आँखों का हाल नहीं

मेरे सपनों का पूरा होना भी हो जाइज़ कैसे?
मैं ने उस की ख़ूबी देखी पर ख़ुदके आमाल नहीं

ख़ुदको मेरा कर या ना कर, इस
में मर्ज़ी तेरी है
जो भी कहना सीधा कह दे, लेकिन हम को टाल नहीं
Read Full
Uday sharma
अपने दौर की सब सेे टेढ़ी लड़की मैं
वो इस दौर का सब सेे सीधा लड़का है

एक ही ऐब है उस
में सिगरेट पीता है
बाक़ी सरापा इकदम आला लड़का है
Read Full
Shayra kirti
13 Likes
चारा-गर भी उस का क्या ईलाज करे
जिस को ख़ाली तेरा नश्शा होता है

उस का तन ले जाए चाहे कोई भी
मेरा रूह पे सीधा क़ब्ज़ा होता है
Read Full
Kush Pandey ' Saarang '
है बड़ा ही ख़ौफ़ उन का आम सी आवाम पे
हम नहीं डरते किसी भी शाह के ऐलान से

है बड़ी बदनाम सी हम शाइरों की महफ़िलें
बात की है मैकशी की वो भी पूरे शान से
Read Full
Alankrat Srivastava
याद आई तिरे पैरों की खनकती पायल
आम सा प्रश्न था संगीत किसे कहते हैं?
neeraj
याद आई तिरे पैरों की खनकती पायल
आम सा प्रश्न था संगीत किसे कहते हैं
Neeraj Neer
तुम जो चाहो तो सर-ए-आम भी हो सकता है
मसला वरना ये गुमनाम भी हो सकता है

न मैं यूसुफ हूँ न मिस्र के बाज़ार यहाँ
क्या मेरा ख़्वाब यहाँ नीलाम भी हो सकता है
Read Full
Khalid Azad
आज दिल में तमाम बातें हैं
हाँ, मगर ये तो आम बातें हैं

आप की सुबह-ओ-शाम यादें हैं
आप की सुबह-ओ-शाम बातें हैं
Read Full
Akash Rajpoot
पेड़ हम ने थे लगाए पर मिली हैं गुठलियाँ
हिस्से में 'आक़िब' हमारे आम आए न कभी
Mohammad Aquib Khan
तुम मुझे इतना आम मत समझो
हर किसी के लिए नहीं हूँ मैं
Ananya Rai Parashar
हर एक बात पे करते हो क़त्ल-ए-आम की बातें
तुम्हीं बताओ अब अंज़ाम-ए-गर्मी-ए-जुनूँ क्या है
Ajeetendra Aazi Tamaam
हर गली, हर गाँव ये तो शहर भर का मसअला है
काम धंधा रोज़ी रोटी आम घर का मसअला है
Neeraj Nainkwal
उल्टा सीधा कम लिखते हैं
बस उस पर ही हम लिखते हैं

तुम को अपना लगता हैं पर
हम तो अपना ग़म लिखते हैं
Read Full
Kaviraj " Madhukar"
तेरी निगाह से मैं बदनाम हो रहा हूँ
बचपन कि भूल से मैं तो आम हो रहा हूँ
Bittoo Stark
बहार ए इश्क़ फिर से लौट आई
शजर पर आम के फिर बौर आया
Ajeetendra Aazi Tamaam
ऐ बे वफ़ा तेरी इज़्ज़त का पास है वरना
मैं तेरा नाम ज़माने में आम कर देता
Shajar Abbas
इक उम्र तक ही आशिक़ी अच्छी लगी मुझे
फिर अप्सरा भी आम सी लड़की लगी मुझे
Om awasthi
धोखे के सौदे में बरकत ज़्यादा है
उल्फत ऐसा धंधा सीधा सादा है

गर तुम दोगे धोखे का रूमाल मुझे
मैं चादर दूँगा बदले में वा'दा है
Read Full
Shoonya Shrey
मरहला मानो वफ़ा की आम दिक्कत
इश्क़-बाज़ों का फ़क़त अंजाम दिक्कत
Kaafir
वादा-ए-वस्ल मुझ से टूट गया
मैं ने छोड़ी न आम की दावत
Shadan Ahsan Marehrvi
मक़्सद सला-ए-आम है फिर एहतियात क्यूँँ
उन सेे हुई है बात तो फिर इनसे बात क्यूँँ
Arohi Tripathi
मक़्सद सला-ए-आम है फिर एहतियात क्यूँँ
उन सेे हुई है बात तो फिर इनसे बात क्यूँँ
Afzal Sultanpuri
इक हुस्न-ए-क़त्ल-ए-आम को कितना ग़ुरूर है
बेखौफ़ बोलता है कि वो बे-क़ुसूर है
Ajeetendra Aazi Tamaam
ये शहर आम सा ही शहर है बहिश्त नहीं
बस इक अज़ीज़ रहा करता था यहाँ मेरा
Mohit Dixit
तुम जितना चाहो उतना उल्टा सीधा कर सकती हो
हम को तो हर काम तुम्हारा बेहद अच्छा लगता है
Kaviraj " Madhukar"
सीधा-सादा सा लड़का हूँ मैं तो
मुझ को बाक़ी लड़कों सा मत कहना
Daqiiq Jabaalii
इश्क़ ने ली है न जाने कितनी जाँ याँ
इश्क़ के सर पे भी कुछ इन'आम कर दो
Sandeep dabral 'sendy'
ब-सद-ख़ुलूस ब-सद-एहतिराम करते रहो
ख़ुलूस-ए-क़ल्ब से ज़िक्र-ए-इमाम करते रहो

गर इख़्तिलाफ़ को आलम से दूर करना हैं
तो इत्तिहाद का पैग़ाम आम करते रहो
Read Full
Shajar Abbas
अभी मुमकिन है मुझ को रोक ले तू
अभी सीधा है रस्ता वापसी का
Prashant Sitapuri
सब शुरू में हम सेे अच्छा बोलते हैं
बे-सबब फिर उल्टा सीधा बोलते हैं

रात जंगल में गुज़ारी तो ये पाया,
पेड़ इक दूजे से कितना बोलते हैं
Read Full
Asad Khan
मैं भी कब कृष्ण बना, तू भी बनी कब राधा
देख ले रह ही गया इश्क़ भी आधा आधा
इश्क़ ने मुझ को बनाया है बुरा दुनिया में
मैं तो लड़का था बहुत आम-सा सीधा साधा
Read Full
A R Sahil "Aleeg"
ये तुम पर रहा कुछ भी अंजाम कर दो
मुझे शोहरतें दो या बदनाम कर दो

दिखा दो मेरे ज़ख़्म सारे जहाँ को
मेरे राज़ सारे सरे-आम कर दो

सरे बज़्म पहलू से लग कर मेरे तुम
इरादे रक़ीबों के नाकाम कर दो

मुझे ले ही आए हो बाज़ार में तो
मेरी हसरतें सारी नीलाम कर दो

मेरी उँगलियाँ अपने होंटों से छू कर
मेरे जिस्म को इश्क़ का जाम कर दो
Read Full
Rizwan malik faani
तुझे ही क्यूँ नज़र आता नहीं मुझ आम सा लड़का
तेरे जब पास होता है तो कितना ख़ास होता है
Aatish Alok
उस के जल्वे तो आम हैं लेकिन
उस के रुख़ पर नक़ाब है अब तक
RIZWAN ALI RIZWAN
वो आईना भी हम सेे अब बोला है
जो पहले उल्टा सीधा सब बोला है

मैं बरसों से क़ैदी हूँ अपने दिल में
तुझ को थोड़ा घाव मिला तब बोला है
Read Full
Manish watan
आँसू मैं जब गिराया तो ये काम हो गया
उस बे-वफ़ा का ज़िक्र सर-ए-आम हो गया
Danish Balliavi
10 Likes
ये आम आदमी का, दस्तूर हो गया है
जो है जहाँ वहीं पर, मजबूर हो गया है
Bankelal Srivastava "Rajneesh"
कोई शिकवा नहीं कोई शिकायत भी नहीं उस सेे
जफ़ा हो या सितम सब इश्क़ का इन'आम लिख देना
A R Sahil "Aleeg"
जाओ तुम भी जा कर अपना खेल सुधारो
पत्थर ले कर सीधा मेरे दिल पर मारो

या तो कर लो शहज़ादों से रिश्तेदारी
या तो फिर इस खेल में अपना सब कुछ हारो
Read Full
Vinay Khandelwal
मैं रोक तो रहा था उसे पर चली गई
ग़ुस्से में ज़िन्दगी थी सो उठ कर चली गई


करता रहा मना मैं उसे जितना हो सका

पर सीधा मेरे दिल के वो अंदर चली गई
Read Full
Aakash Giri
मिरी आबरू का तमाशा किया है किसी ने
सरे आम मुझ को शनासा किया है किसी ने
Parvez Shaikh
बिना तेरे ज़माने में गुज़ारा आम लगता है
मेरी हर कामयाबी में तेरा ही नाम लगता है
Kushal "PARINDA"
वो मेरे लिए जिस क़दर ख़ास थी,
मैं उस के लिए उतना ही आम था
Yamir Ahsan
कुछ लोग ज़माने में हम नाम निकल आए
जो ख़ास सभी से थे वो 'आम निकल आए

है सब सेे जुदा तेरा अंदाज़ तबस्सुम का
जो एक हँसी में दो गुलफ़ाम निकल आए

जो सब को सिखाते थे इकराम मुहब्बत का
उन पर ही मुहब्बत के इल्ज़ाम निकल आए

जो सब को बताते थे मैं अजनबी हूँ कोई
वो नाम से मेरे ही बदनाम निकल आए

तू अहल-ए-ज़मीं से सुन हर बात बना के रख
कुछ भी न पता किस सेे क्या काम निकल आए
Read Full
Prashant Kumar
जो ग़म लिखा है पहले सहा है उसे मैं ने
मेरी लिखी ग़ज़लें ज़रा भी आम नहीं हैं
Jagat Singh
मैं सोच के डर जाता हूँ वो तेरे मिरे ख़त
हर शख़्स इन्हें पढ़ जो सर-ए-आम रहा हो
Manish Yadav
ज़िन्दगी भर यही इक काम किया है मैं ने
अपने दुख दर्द को नीलाम किया है मैं ने

जुर्म समझा है जिसे अहले-ख़िरद ने शादाब
हाँ वही जुर्म सरे-आम किया है मैं ने
Read Full
Shadab Shabbiri
चलता रहा यूँँ ही तो कुछ उल्टा सीधा कर जाएँगे
जिस के ख़ातिर जीते हैं उस को साथ ले कर मर जाएँगे
Shiv Nayan Prakash
शब्दों को जोड़ कर के मिसरा बनाता हूँ मैं
ऊँचे पहाड़ों को भी तिनका बनाता हूँ मैं

इंजीनियर को आता है काम ये भी करना
तिरछी डगर पे सीधा रस्ता बनाता हूँ मैं
Read Full
Sachin Sharma
पहले ख़ास तो आम तो फिर बदनाम हुए
साँसें चलती हैं हम कब के तमाम हुए
Sanjay Bhat
ख़ामख़ा ही तुझे मैं छुपाता रहा
दौर ये चल रहा है सर-ए-आम का
Madan Gopal 'AloukiK'
ये वही हाथ है जो था
में गए
लब वही है ये जो थे चू
में गए

दिल की बस्ती यही थी यारों जहाँ
हम सर-ए-आम कभी लूटे गए
Read Full
Rohan Hamirpuriya
बने इस प्यार में गुलफ़ाम क्या कीजे
हुए इस इश्क़ में बदनाम क्या कीजे

समुंदर से है रिश्ता दूरी साहिल से
ये आँसू का है क़िस्सा आम क्या कीजे
Read Full
Naviii dar b dar
है क़ुबूल तुम को भरना सर-ए-आम बाहों में पर
है ये शर्त फिर कभी तुम न मिलोगी आइने से
Rehaan
सलाम अपना अमीरों पे आम करता है
मगर गरीबों से कब वो कलाम करता है

लिहाफ़ ठंड में बाँटे गिलास गर्मी में
वो वोट पाने के सब इंतिज़ाम करता है
Read Full
Meem Alif Shaz
सीधा-सीधा सवाल पूछूँगा
मुस्कुरा कर के हाल पूछूँगा
Aatish Indori
आशिक़ चोरी छुपके पहनाते है पायल अपनी महबूबा को
जान-ए-जानाँ तुझे सर-ए-आम ख़ानदानी कंगन पहनाने हैं
Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
इतना रक़्स किया है मैं ने
सीधा चलना भूल गया हूँ
Shubham Tiwari
पैरवी कर रहा हूँ ग़ालिब की
आम खाता हूँ शे'र कहता हूँ
Shadab Shabbiri
काट कर खाने का है अपना मज़ा
चूस कर खाने में बात इक और है

आम का राजा है अल्फांसो अगर
तो दशहरी की सिफ़ात इक और है
Read Full
Ajeetendra Aazi Tamaam
काम जो है तभी तो हुआ नाम है
ख़र्च तन मन किया धन दिया आम है
Vinod Ganeshpure
ख़ास हो कर भी मिरा है आम रहना
ज़िंदगी गुमनाम फिर भी नाम रहना
Vinod Ganeshpure
वो मुहब्बत के इवज़ जान भी दे देते हैं
रस्म सदियों से यही आम है परवानों में
Javed Aslam
ये बात भूलें न नेता कि आम लोगों ने
जभी है चाही जो सरकार वो गिरा डाली
Mohit Subran
आम से ख़ास यूँँ कर गए वो मुझे
होंठों की प्यास यूँँ कर गए वो मुझे

वो थे मेरा ह्रदय और ह्रदय तोड़ कर
जीते जी लाश यूँँ कर गए वो मुझे
Read Full
Jitendra "jeet"
दौड़ना हमें भी अज़ाब था
चलना एक लँगड़े का ख़्वाब था

आरज़ू घटा कर भी देखते
ख़ुशियों का तो सीधा हिसाब था
Read Full
Kartik Bhalerao
किरदार वो जो मुझ पे हावी हो गया
मैं बदला और थोड़ा नवाबी हो गया

अच्छा भला सीधा सा लड़का था कभी
उस के ही चक्कर में शराबी हो गया
Read Full
Sumit Yadav
वो आईना भी हम से अब बोला है
जो पहले उल्टा सीधा सब बोला है

मैं बरसों से क़ैदी हूँ अपने दिल में
तुझ को थोड़ा घाव मिला तब बोला है
Read Full
Manish watan
ये क्या किया कि तुम ने सर-ए-आम कह दिया
मेरे किए हुए को सही काम कह दिया

मैं ने किए हज़ारों करम इस के बावजूद
बदनाम बशर ने मुझे बदनाम कह दिया
Read Full
Nityanand Vajpayee
निगाहें क़ातिलाना हैं नज़र है ख़ूब-सूरत वो
वो लड़की आम सी लगती मगर है ख़ूब-सूरत वो

वो रस्ता लाख बदतर हो मगर हम तो कहेंगे ये
कि वो जिस राह पर चलती डगर है ख़ूब-सूरत वो
Read Full
Kaviraj " Madhukar"
मुद्दत हुई कहा न कोई शे'र ख़ास-ओ-आम
गो यूँँ किया कि आज ग़म-ए-इश्क़ कह लिया
Karal 'Maahi'
तिरे कहने पे क्या मैं आम हो जाऊँ
बिना ही बात के नीलाम हो जाऊँ
Saba Rao
गुलों की ख़ुशबू से महकी अदा हूँ मैं
यूँँ काँटों में बिखर के आम हो जाऊँ

वफ़ादारी मोहब्बत में निभा ले तू
बड़ी शिद्दत से मैं बदनाम हो जाऊँ
Read Full
Saba Rao
ख़ूब सस्ती ये अदावत हो गई है
जंग होना आम बाबत हो गई है
Saurabh
बिखरी हैं सर-ए-आम ज़ुल्फ़ें तेरी
करती हैं बुरे काम ज़ुल्फ़ें तेरी
Gora singh
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है
Jaun Elia
135 Likes
मैं तुझ सेे मिलने समय से पहले पहुँच गया था
सो तेरे घर के क़रीब आ कर भटक रहा हूँ
Pallav Mishra
22 Likes
इश्क़ में कहते हो हैरान हुए जाते हैं
ये नहीं कहते कि इंसान हुए जाते हैं
Josh Malihabadi
39 Likes
ज़िन्दगी अब के मेरा नाम ना शामिल करना
गर ये तय है कि यही खेल दोबारा होगा
Wasi Shah
36 Likes
इश्क़ कहता है भटकते रहिए
और तुम कहते हो घर जाना है
Madan Mohan Danish
48 Likes
कबूतर को पता है घर तुम्हारा
मिलेगा छत पे तुम को ख़त हमारा
Aqib Jawed
67 Likes
शरीफ़ इंसान आख़िर क्यूँ इलेक्शन हार जाता है
किताबों में तो ये लिक्खा था रावन हार जाता है
Munawwar Rana
37 Likes
उम्र भर साँप से शर्मिंदा रहे ये सुन कर
जब से इंसान को काटा है तो फन दुखता है
Munawwar Rana
29 Likes
तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ
ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने

तुझ पे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें
तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने
Read Full
Faiz Ahmad Faiz
60 Likes
जितनी चाहे पी लो लेकिन ध्यान रहे
तुम को घर पहुँचाने वाले अच्छे हों
Shariq Kaifi
35 Likes
ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे
Ahmad Faraz
41 Likes